Class 11 Hindi Aroh Chapter 4 Important Questions विदाई-संभाषण
Class 11 Hindi Aroh Chapter 4 introduces students to Bal Mukund Gupta’s sharp satirical prose through विदाई-संभाषण. The chapter helps CBSE students understand colonial rule, Lord Curzon’s arrogance, public suffering, satire and fearless journalism.
बालमुकुंद गुप्त आधुनिक हिंदी गद्य और पत्रकारिता के महत्वपूर्ण लेखक थे। वे राष्ट्रीय नवजागरण के सक्रिय पत्रकार थे और उनके लिए पत्रकारिता स्वतंत्रता-संघर्ष का हथियार थी। Class 11 Hindi Aroh Chapter 4 में उनका पाठ विदाई-संभाषण पढ़ाया जाता है।
यह पाठ उनकी प्रसिद्ध व्यंग्य-कृति शिवशंभु के चिट्ठे का अंश है। इसमें लॉर्ड कर्ज़न के शासन, उसके अहंकार, भारतीयों की पीड़ा और उसके इस्तीफ़े को व्यंग्यात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। Class 11 Hindi Aroh Chapter 4 Important Questions से छात्र पाठ के मुख्य प्रसंग, व्यंग्य, ऐतिहासिक संदर्भ और भाषा-शैली का अभ्यास कर सकते हैं।
Key Takeaways
- बालमुकुंद गुप्त: वे राष्ट्रीय चेतना से जुड़े निर्भीक पत्रकार और गद्यकार थे।
- विदाई-संभाषण: यह लॉर्ड कर्ज़न को संबोधित व्यंग्यात्मक विदाई भाषण है।
- मुख्य भाव: सत्ता का अहंकार अंत में स्वयं उसके लिए भी दुखद होता है।
- ऐतिहासिक संकेत: पाठ में बंग-भंग, प्रेस-स्वतंत्रता पर रोक और कर्ज़न के इस्तीफ़े का संदर्भ मिलता है।
Access Class 11 Hindi Aroh Chapter 4 विदाई-संभाषण Important Questions in 30 Minutes
Revise the chapter in three parts:
- First 10 minutes: बालमुकुंद गुप्त का जीवन, पत्रकारिता and शिवशंभु के चिट्ठे
- Next 10 minutes: लॉर्ड कर्ज़न का शासन, बंग-भंग, प्रेस-स्वतंत्रता and भारतीय प्रजा की स्थिति
- Final 10 minutes: दो गायों की कथा, नादिरशाह तुलना, तीसरी शक्ति and व्यंग्य-शैली
Need help revising विदाई-संभाषण के व्यंग्य और कथन-व्याख्या?
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अति लघु उत्तरीय प्रश्न Class 11 Hindi Aroh Chapter 4 Important Questions
इन प्रश्नों में एक-दो वाक्य में उत्तर लिखें। उत्तर सीधे और तथ्यात्मक रखें।
Q1. विदाई-संभाषण पाठ के लेखक कौन हैं?
विदाई-संभाषण पाठ के लेखक बालमुकुंद गुप्त हैं।
Q2. विदाई-संभाषण किस कृति का अंश है?
यह पाठ बालमुकुंद गुप्त की प्रसिद्ध व्यंग्य-कृति शिवशंभु के चिट्ठे का अंश है।
Q3. बालमुकुंद गुप्त का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
बालमुकुंद गुप्त का जन्म सन् 1865 में हरियाणा के रोहतक जिले के गुड़ियानी गाँव में हुआ था।
Q4. बालमुकुंद गुप्त की प्रमुख रचनाएँ कौन-सी हैं?
उनकी प्रमुख रचनाएँ शिवशंभु के चिट्ठे, चिट्ठे और खत तथा खेल तमाशा हैं।
Q5. बालमुकुंद गुप्त किन युगों के बीच की कड़ी माने जाते हैं?
उन्हें भारतेंदु-युग और द्विवेदी-युग के बीच की कड़ी माना जाता है।
Q6. विदाई-संभाषण में किस वायसराय को संबोधित किया गया है?
इस पाठ में लॉर्ड कर्ज़न को संबोधित किया गया है।
Q7. लॉर्ड कर्ज़न कब भारत के वायसराय रहे?
लॉर्ड कर्ज़न 1899 से 1904 और फिर 1904 से 1905 तक भारत के वायसराय रहे।
Q8. कर्ज़न को इस्तीफ़ा क्यों देना पड़ा?
कर्ज़न को कौंसिल में अपने पसंद के अंग्रेज सदस्य को नियुक्त कराने के मुद्दे पर असफलता मिली। अपमानित होकर उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया।
Q9. पाठ में “तीसरी शक्ति” से क्या आशय है?
“तीसरी शक्ति” से आशय उस अदृश्य नियति या समय-शक्ति से है, जिस पर कर्ज़न और भारतीयों दोनों का नियंत्रण नहीं था।
Q10. इस पाठ की शैली कैसी है?
इस पाठ की शैली व्यंग्यात्मक, विनोदपूर्ण, निर्भीक और गंभीर है।
लघु उत्तरीय प्रश्न 2 अंक Class 11 Hindi Aroh Chapter 4 Important Questions
इन प्रश्नों में दो से तीन पंक्तियों में उत्तर लिखें। उत्तर पाठ की घटना और सही संदर्भ से जुड़ा होना चाहिए।
Q1. बालमुकुंद गुप्त की पत्रकारिता की विशेषता क्या थी?
बालमुकुंद गुप्त की पत्रकारिता निर्भीक और राष्ट्रीय चेतना से भरी थी। वे पत्रकारिता को स्वतंत्रता-संघर्ष का हथियार मानते थे। उनके लेखन में व्यंग्य और विनोद के साथ साहस भी दिखाई देता है।
Q2. विदाई-संभाषण में लेखक कर्ज़न को किस रूप में संबोधित करता है?
लेखक कर्ज़न को “माइ लॉर्ड” कहकर संबोधित करता है। यह संबोधन बाहर से सम्मानजनक है, पर भीतर से व्यंग्यपूर्ण है। लेखक इसी विनम्रता के अंदर कर्ज़न की आलोचना करता है।
Q3. लेखक ने कहा कि बिछुड़ने का समय करुणोत्पादक होता है। क्यों?
लेखक कहता है कि बिछुड़ने के समय वैर-भाव छूट जाता है और मन में शांति तथा करुणा का भाव आता है। इसी कारण जिन लोगों को कर्ज़न का आना दुखद लगा था, वे उसके जाने पर भी एक प्रकार का विषाद अनुभव करते हैं।
Q4. शिवशंभु की दो गायों की कथा से लेखक क्या कहना चाहता है?
दो गायों की कथा से लेखक बताता है कि बिछुड़ने का दुख मनुष्य ही नहीं, पशु तक अनुभव करते हैं। जिस गाय से दूसरी गाय को चोट मिलती थी, उसके जाने पर भी दूसरी गाय उदास हो गई। यह कर्ज़न की विदाई पर उत्पन्न करुणा का व्यंग्यात्मक उदाहरण है।
Q5. कर्ज़न के शासनकाल को “दुखांत नाटक” क्यों कहा गया है?
कर्ज़न ने अपने शासन को सफल और सुखांत समझकर शुरू किया था, पर अंत में उसे अपमान और इस्तीफ़े का सामना करना पड़ा। इसलिए लेखक उसके शासनकाल को घोर दुखांत नाटक कहता है।
Q6. कर्ज़न ने भारत आते समय क्या दावा किया था?
कर्ज़न ने कहा था कि जाते समय वह भारत को ऐसा बना जाएगा कि उसके बाद आने वाले बड़े लाटों को वर्षों तक कुछ करना न पड़े। पर वास्तविकता इसके उलट हुई और उसने अशांति फैला दी।
Q7. “गरम राख पर बिस्तर” और “गरम तवे पर पानी की बूँद” से क्या संकेत मिलता है?
इन प्रतीकों से कर्ज़न के बेचैन शासन और भारतीयों की पीड़ा का संकेत मिलता है। कर्ज़न स्वयं सुखी नहीं रह सका और भारतीय प्रजा को भी अशांत तथा पीड़ित कर गया।
Q8. कर्ज़न की जिद का परिणाम क्या हुआ?
कर्ज़न की जिद ने भारतीय प्रजा को पीड़ा दी और अंत में वही जिद उसके लिए भी कष्टदायक सिद्ध हुई। उसे अपनी इच्छा पूरी न होने पर इस्तीफ़ा देना पड़ा।
लघु उत्तरीय प्रश्न 3 अंक विदाई-संभाषण Question Answer
इन प्रश्नों में घटना, व्यंग्य और संदर्भ को थोड़ा विस्तार दें।
Q1. विदाई-संभाषण पाठ का मुख्य उद्देश्य क्या है?
विदाई-संभाषण का मुख्य उद्देश्य लॉर्ड कर्ज़न के शासन की आलोचना करना है। लेखक दिखाता है कि कर्ज़न ने भारत में विकास के नाम पर ऐसे कार्य किए जिनसे अंग्रेजों का वर्चस्व बढ़े और भारतीयों की स्थिति कमजोर हो।
पाठ में सीधी आलोचना के बजाय व्यंग्य का प्रयोग है। लेखक विदाई भाषण के रूप में कर्ज़न की असफलता, अहंकार और भारतीय प्रजा की पीड़ा को सामने लाता है।
Q2. लॉर्ड कर्ज़न के शासन में भारतीयों की स्थिति कैसी थी?
कर्ज़न के शासन में भारतीयों को बेबसी, दुख और लाचारी का सामना करना पड़ा। उसने शासन में अंग्रेजों का वर्चस्व स्थापित करने की कोशिश की। प्रेस की स्वतंत्रता पर भी रोक लगाई गई।
बंग-भंग जैसी घटना ने भारतीयों को बहुत आहत किया। लेखक व्यंग्य के माध्यम से बताता है कि कर्ज़न ने प्रजा की बात सुनने के बजाय अपनी जिद और सत्ता को अधिक महत्व दिया।
Q3. “आपके और यहाँ के निवासियों के बीच कोई तीसरी शक्ति और भी है” का आशय स्पष्ट कीजिए।
इस कथन में लेखक कर्ज़न को याद दिलाता है कि मनुष्य कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, समय और नियति से ऊपर नहीं होता। कर्ज़न स्वयं को बहुत प्रभावशाली वायसराय समझता था।
फिर भी उसका शासन जल्दी समाप्त हुआ और उसे अपमानित होकर जाना पड़ा। इसलिए “तीसरी शक्ति” समय, नियति या इतिहास की शक्ति है, जो शासक और प्रजा दोनों से बड़ी होती है।
Q4. “कितने ऊँचे होकर आप कितने नीचे गिरे” पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
इस पंक्ति में लेखक कर्ज़न की पहले की शान और बाद की गिरावट का विरोध दिखाता है। दिल्ली दरबार में उसकी प्रतिष्ठा बहुत ऊँची थी। राजे-महाराजे उसे सलाम करते थे और उसका हाथी सबसे आगे तथा ऊँचा था।
लेकिन अंत में वह एक सैन्य अधिकारी के मुकाबले भी अपनी इच्छा पूरी नहीं करा सका। इस्तीफ़े की धमकी भी काम न आई। इसलिए लेखक कहता है कि वह बहुत ऊँचे चढ़कर बहुत नीचे गिरा।
Q5. कर्ज़न की धीरता-गंभीरता पर लेखक ने कैसे व्यंग्य किया है?
कर्ज़न धीर और गंभीर प्रसिद्ध था। पर लेखक कहता है कि कौंसिल में गैर-कानूनी कानून पास करते समय और कंवोकेशन में भाषण देते समय उसकी धीरता-गंभीरता का दिवाला निकल गया।
विदेश में बार-बार इस्तीफ़े की धमकी ने भी दिखा दिया कि उसकी दृढ़ता हिल गई थी। लेखक इस तरह उसके प्रसिद्ध व्यक्तित्व और वास्तविक व्यवहार के बीच अंतर दिखाता है।
Q6. लेखक ने कर्ज़न की तुलना नादिरशाह से क्यों की?
लेखक ने कर्ज़न की जिद को नादिरशाह से भी बढ़कर कहा है। नादिरशाह ने दिल्ली में कत्लेआम किया था, लेकिन आसिफजाह की प्रार्थना पर वह रुक गया।
इसके विपरीत, कर्ज़न ने आठ करोड़ बंगाली प्रजा की बंग-भंग न करने की प्रार्थना पर भी ध्यान नहीं दिया। इसलिए लेखक ने कर्ज़न की जिद को अत्यंत कठोर बताया है।
Q7. बंग-भंग का संकेत पाठ में कैसे आता है?
पाठ में “आठ करोड़ प्रजा” के गिड़गिड़ाकर “विच्छेद न करने” की प्रार्थना का उल्लेख है। यह बंग-भंग की घटना की ओर संकेत करता है।
बंगाल-विभाजन से भारतीय जनता बहुत दुखी थी। लेखक कहता है कि प्रजा की प्रार्थना पर कर्ज़न ने ज़रा भी ध्यान नहीं दिया। इससे उसकी निरंकुशता और जिद स्पष्ट होती है।
Q8. नर सुलतान के प्रसंग का पाठ में क्या महत्व है?
नर सुलतान का प्रसंग पाठ के अंत में एक नैतिक तुलना के रूप में आता है। उसने नवरगढ़ छोड़ते समय उस नगर को प्रणाम किया और कहा कि उसने वहाँ सेवा में कोई कमी न की हो, तो नगर उसका प्रणाम स्वीकार करे।
लेखक इसी आधार पर कर्ज़न से पूछता है कि क्या वह भारत से जाते समय ऐसा कुछ कह सकता है। यह प्रसंग कर्ज़न के शासन की नैतिक असफलता को और स्पष्ट करता है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 5 अंक Class 11 Hindi Aroh Chapter 4
इन प्रश्नों में लेखक, प्रसंग, ऐतिहासिक संकेत और व्यंग्य-शैली को साथ लेकर उत्तर लिखें।
Q1. बालमुकुंद गुप्त के जीवन और साहित्यिक योगदान पर प्रकाश डालिए।
बालमुकुंद गुप्त हिंदी गद्य और पत्रकारिता के महत्वपूर्ण लेखक थे। उनका जन्म सन् 1865 में हरियाणा के रोहतक जिले के गुड़ियानी गाँव में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा उर्दू में हुई, बाद में उन्होंने हिंदी सीखी। विधिवत शिक्षा मिडिल तक हुई, पर स्वाध्याय से उन्होंने काफी ज्ञान अर्जित किया।
वे खड़ी बोली और आधुनिक हिंदी साहित्य को स्थापित करने वाले लेखकों में गिने जाते हैं। उन्हें भारतेंदु-युग और द्विवेदी-युग के बीच की कड़ी माना जाता है। वे राष्ट्रीय नवजागरण के सक्रिय पत्रकार थे।
उन्होंने अखबार-ए-चुनार, हिंदुस्तान, हिंदी बंगवासी और भारतमित्र जैसे पत्रों से संपादकीय रूप में संबंध रखा। उनकी प्रमुख रचनाएँ शिवशंभु के चिट्ठे, चिट्ठे और खत तथा खेल तमाशा हैं।
उनकी लेखनी में निर्भीकता, व्यंग्य-विनोद और राष्ट्रीय चेतना मिलती है। विदाई-संभाषण उनकी साहसिक व्यंग्यात्मक गद्य-शैली का अच्छा उदाहरण है।
Q2. विदाई-संभाषण पाठ का सार लिखिए।
विदाई-संभाषण बालमुकुंद गुप्त की प्रसिद्ध व्यंग्य-कृति शिवशंभु के चिट्ठे का अंश है। इसमें लॉर्ड कर्ज़न को उसके भारत-त्याग के समय संबोधित किया गया है। लेखक बाहर से विदाई भाषण देता है, लेकिन भीतर से कर्ज़न के शासन की तीखी आलोचना करता है।
लेखक कहता है कि संसार में सब बातों का अंत है। कर्ज़न का शासन भी समाप्त हो गया। यह भी स्पष्ट होता है कि कर्ज़न और भारतीयों के बीच कोई तीसरी शक्ति है, जिस पर किसी का बस नहीं।
पाठ में कर्ज़न की शान, दिल्ली दरबार की भव्यता, भारतीय शासकों पर उसका प्रभाव और फिर अंत में उसकी पराजय का वर्णन है। कर्ज़न बहुत ऊँचा चढ़ा, पर अंत में नीचे गिरा। उसे इस्तीफ़ा देकर जाना पड़ा।
लेखक बंग-भंग, प्रेस-स्वतंत्रता पर रोक और भारतीयों की प्रार्थना की अवहेलना जैसे प्रसंगों से कर्ज़न की निरंकुशता दिखाता है। पाठ का सार यही है कि शासन का अहंकार अंत में शासक को भी दुख देता है।
Q3. विदाई-संभाषण में व्यंग्य का प्रयोग कैसे हुआ है?
विदाई-संभाषण में व्यंग्य बहुत प्रभावशाली रूप से प्रयुक्त हुआ है। लेखक कर्ज़न को “माइ लॉर्ड” कहकर संबोधित करता है। भाषा बाहर से आदरपूर्ण लगती है, लेकिन उसके अंदर तीखी आलोचना छिपी है।
लेखक कहता है कि कर्ज़न के आने से भारतीय दुखी थे और उसके जाने की प्रार्थना करते थे, पर अब उसके जाने पर विषाद हो रहा है। यह कथन सीधे भावुकता नहीं, बल्कि व्यंग्यपूर्ण करुणा है।
कर्ज़न की दिल्ली दरबार वाली शान और बाद की पराजय को साथ रखकर लेखक ने सत्ता के अहंकार पर व्यंग्य किया है। “कितने ऊँचे होकर आप कितने नीचे गिरे” जैसा कथन इसी का उदाहरण है।
दो गायों की कथा, नादिरशाह से तुलना और नर सुलतान का प्रसंग, सब व्यंग्य को और धारदार बनाते हैं। इस व्यंग्य के माध्यम से लेखक औपनिवेशिक शासन की सच्चाई प्रकट करता है।
Q4. लॉर्ड कर्ज़न के शासन की आलोचना पाठ में किन आधारों पर की गई है?
पाठ में लॉर्ड कर्ज़न के शासन की आलोचना कई आधारों पर की गई है। पहला आधार उसका अहंकार और जिद है। वह प्रजा की बात सुनने को तैयार नहीं था और अपनी इच्छा को शासन मानता था।
दूसरा आधार अंग्रेजों का वर्चस्व स्थापित करने की नीति है। उसके शासन में विकास के नाम पर ऐसे काम हुए जिनसे अंग्रेजों का हित और नियंत्रण बढ़े।
तीसरा आधार प्रेस-स्वतंत्रता पर रोक है। लेखक बताता है कि वह सरकारी निरंकुशता का पक्षधर था। ऐसे समय में प्रेस पर पाबंदी लगाई गई।
चौथा और सबसे महत्वपूर्ण आधार बंग-भंग है। आठ करोड़ प्रजा ने विभाजन न करने की प्रार्थना की, पर कर्ज़न ने ध्यान नहीं दिया। इससे उसकी कठोरता और भारतीयों की पीड़ा सामने आती है।
Q5. शिवशंभु की दो गायों की कथा का भाव स्पष्ट कीजिए।
लेखक दो गायों की कथा सुनाता है। शिवशंभु के पास दो गायें थीं। उनमें एक अधिक बलवान थी और कभी-कभी अपने सींगों की टक्कर से दूसरी कमजोर गाय को गिरा देती थी। एक दिन वह बलवान गाय पुरोहित को दे दी गई।
लेखक ने देखा कि कमजोर गाय उसके जाने से प्रसन्न नहीं हुई। उलटे उस दिन वह भूखी खड़ी रही और चारा तक नहीं छुआ। इस घटना से लेखक बिछुड़ने की करुणा का भाव दिखाता है।
इस कथा का उपयोग कर्ज़न की विदाई के प्रसंग में किया गया है। लेखक कहना चाहता है कि बिछुड़ना इतना करुण होता है कि अत्याचारी के चले जाने पर भी एक प्रकार का विषाद हो सकता है।
लेकिन यह पूरी कथा व्यंग्यात्मक भी है। कर्ज़न की तुलना उस बलवान गाय से है जो कमजोर को टक्कर मारती थी। इससे भारतीय जनता की स्थिति भी स्पष्ट होती है।
Q6. कर्ज़न के इस्तीफ़े और पतन को लेखक ने किस तरह प्रस्तुत किया है?
लेखक ने कर्ज़न के इस्तीफ़े और पतन को व्यंग्य तथा करुणा के मिश्रण से प्रस्तुत किया है। वह याद दिलाता है कि कर्ज़न की शान कभी बहुत ऊँची थी। दिल्ली दरबार में उसकी कुर्सी सोने की थी और राजे-महाराजे उसे पहले सलाम करते थे।
लेकिन बाद में वह एक सैनिक अधिकारी के मुकाबले अपनी इच्छा पूरी नहीं करा सका। इस्तीफ़े की धमकी भी उसे ऊँचा न कर सकी। उलटा उसका इस्तीफ़ा मंजूर हो गया।
लेखक कहता है कि कर्ज़न ने इतने राजों को मिट्टी के खिलौनों की तरह तोड़ा-फोड़ा, शिक्षा को पायमाल किया, स्वतंत्रता उड़ाई और बंगाल के सिर पर आरा रख दिया। फिर भी अंत में वही जिद उसके लिए दुख का कारण बनी।
इस तरह कर्ज़न का पतन केवल राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि सत्ता के अहंकार का परिणाम बनकर सामने आता है।
Q7. “क्या आँख बंद करके मनमाने हुक्म चलाना ही शासन है?” इस प्रश्न के आधार पर शासन की सही अवधारणा स्पष्ट कीजिए।
लेखक इस प्रश्न के माध्यम से कर्ज़न के शासन-तरीके की आलोचना करता है। वह पूछता है कि क्या प्रजा की बात न सुनना, मनमाने आदेश चलाना और जिद से काम करना ही शासन है।
सही शासन वह है जिसमें शासक प्रजा की भलाई को समझे। उसे जनता की बात सुननी चाहिए, उनकी पीड़ा पहचाननी चाहिए और केवल आदेश देने की जगह उत्तरदायित्व निभाना चाहिए।
शासन केवल शक्ति का प्रदर्शन नहीं है। यह सेवा, न्याय, संवाद और कर्तव्य का काम है। यदि शासक प्रजा को दबाकर उसकी इच्छा के विरुद्ध काम करे, तो वह शासन नहीं, निरंकुशता है।
इस पाठ में लेखक इसी निरंकुशता पर प्रहार करता है। वह कर्ज़न से पूछता है कि उसने भारतीय प्रजा के साथ कौन-सा कर्तव्य निभाया।
Q8. विदाई-संभाषण की भाषा और शैली की विशेषताएँ लिखिए।
विदाई-संभाषण की भाषा व्यंग्यात्मक, निर्भीक और प्रभावपूर्ण है। इसमें भारतेंदु-युगीन हिंदी का स्वर है। वाक्य विन्यास आज की सामान्य हिंदी से अलग है, पर उसमें प्रवाह और धार है।
लेखक ने विनम्र संबोधन के भीतर तीखी आलोचना छिपाई है। “माइ लॉर्ड” जैसे शब्द पाठ को बाहर से सभ्य और भीतर से व्यंग्यपूर्ण बनाते हैं। इसी विरोध से पाठ का व्यंग्य प्रभावशाली होता है।
शैली में विनोद, करुणा, गंभीरता और चुलबुलापन साथ-साथ हैं। दो गायों की कथा, दिल्ली दरबार की शान, नादिरशाह की तुलना और नर सुलतान का प्रसंग, सब मिलकर पाठ को रोचक बनाते हैं।
लेखक की भाषा साहसी है। प्रेस पर पाबंदी के दौर में भी उन्होंने औपनिवेशिक सत्ता की तीखी आलोचना की। यही इस पाठ की सबसे बड़ी शैलीगत विशेषता है।
कथन-व्याख्या Class 11 Hindi Aroh Chapter 4
Q1. “आपके और यहाँ के निवासियों के बीच कोई तीसरी शक्ति और भी है।” इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।
इस कथन में लेखक सत्ता के अहंकार को सीमित करता है। कर्ज़न स्वयं को बहुत शक्तिशाली मानता था, पर उसका शासन भी अंततः समाप्त हो गया। भारतीय जनता भी उसके अत्याचार सह रही थी, पर समय उसके विरुद्ध चला गया।
“तीसरी शक्ति” समय, नियति या इतिहास की शक्ति है। यह शक्ति बताती है कि कोई भी शासक स्थायी नहीं है।
Q2. “कितने ऊँचे होकर आप कितने नीचे गिरे!” का आशय स्पष्ट कीजिए।
इस पंक्ति में कर्ज़न की पहले की प्रतिष्ठा और बाद की गिरावट का विरोध है। दिल्ली दरबार में वह अत्यंत ऊँचे पद और शान पर था। राजे-महाराजे उसके सामने झुकते थे।
लेकिन अंत में उसे अपनी इच्छा पूरी न होने पर इस्तीफ़ा देना पड़ा और उसका इस्तीफ़ा स्वीकार भी हो गया। इसलिए लेखक कहता है कि वह बहुत ऊँचा चढ़कर बहुत नीचे गिरा।
Q3. “नादिर से भी बढ़कर आपकी जिद है।” इस कथन का भाव स्पष्ट कीजिए।
लेखक नादिरशाह का उदाहरण देता है कि उसने दिल्ली में कत्लेआम किया, पर प्रार्थना करने पर रुक गया। इसके उलट कर्ज़न ने आठ करोड़ प्रजा की बंग-भंग न करने की प्रार्थना पर भी ध्यान नहीं दिया।
इसलिए लेखक कहता है कि उसकी जिद नादिरशाह से भी अधिक कठोर है। यह कर्ज़न की निरंकुशता पर तीखा व्यंग्य है।
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FAQs (Frequently Asked Questions)
इस पाठ में लॉर्ड कर्ज़न के शासन, अहंकार, जिद और भारतीय प्रजा की उपेक्षा की आलोचना है। लेखक यह आलोचना व्यंग्यात्मक विदाई-भाषण के रूप में करता है।
शिवशंभु नाम लेखक को व्यंग्यात्मक और निर्भीक ढंग से बात कहने की स्वतंत्रता देता है। यह एक तरह का साहित्यिक व्यक्तित्व है जिसके माध्यम से सत्ता की आलोचना की गई है।
दो गायों की कथा बिछुड़ने की करुणा दिखाती है। साथ ही यह कर्ज़न और भारतीय जनता के संबंध पर व्यंग्य भी करती है, क्योंकि बलवान गाय कमजोर गाय को टक्कर मारती थी।
“आठ करोड़ प्रजा” द्वारा “विच्छेद न करने” की प्रार्थना का उल्लेख बंग-भंग की घटना की ओर संकेत करता है। कर्ज़न ने प्रजा की बात नहीं सुनी।
इस अध्याय से बालमुकुंद गुप्त का जीवन, कर्ज़न का शासन, दो गायों की कथा, बंग-भंग, कर्ज़न का इस्तीफ़ा, नादिरशाह तुलना, तीसरी शक्ति and व्यंग्य-शैली पर प्रश्न आ सकते हैं।