Important Questions Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 12 अन्वयः

अन्वयः is a Class 9 Sanskrit Sharada grammar chapter that explains how to arrange words of a श्लोक in prose order to understand its meaning.
For CBSE 2026-27 Class 9 Sanskrit exams, this chapter supports practice in अपठित-अवबोधनम्, रचनात्मक-कार्यम्, अनुप्रयुक्त-व्याकरणम् and पठित-अवबोधनम्.

अन्वयः संस्कृत श्लोकों को समझने की एक महत्त्वपूर्ण विधि है। श्लोक में छन्द के कारण कर्तृपद, कर्मपद, क्रियापद, विशेषण और विभक्ति-पद सामान्य वाक्य-क्रम में नहीं रहते। इसलिए विद्यार्थियों को पदच्छेद करके पदों के परस्पर सम्बन्ध को समझना पड़ता है। Important Questions Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 12 विद्यार्थियों को दण्डान्वय, खण्डान्वय, आकाङ्क्षा, योग्यता, आसत्ति, तात्पर्य, अध्याहार और श्लोक-अर्थ समझने की विधि के लिए तैयार करते हैं। यह अध्याय पठित-अवबोधनम् और अनुप्रयुक्त-व्याकरणम् दोनों में उपयोगी है।

Key Takeaways

  • Chapter focus: अन्वयः Class 9 श्लोक के पदों को सरल गद्य-क्रम में रखकर अर्थ समझने की विधि सिखाता है।
  • Main methods: दण्डान्वयः और खण्डान्वयः श्लोक-अर्थ समझने की दो प्रमुख विधियाँ हैं।
  • Core concepts: आकाङ्क्षा, योग्यता, आसत्ति और तात्पर्य अन्वय और अर्थबोध के चार सहायक कारण हैं।
  • Grammar value: Class 9 Sanskrit grammar practice में इस पाठ से पदच्छेद, अन्वय, अध्याहार, प्रश्नोत्तर-आधारित खण्डान्वय और श्लोक-भाव पूछा जा सकता है।

Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 12 Exam Pattern 2026-27

Section Question Area Marks
A अपठित-अवबोधनम् 10
B रचनात्मक-कार्यम् 15
C अनुप्रयुक्त-व्याकरणम् 25
D पठित-अवबोधनम् 30

Section A: अपठित-अवबोधनम् – 10 Marks

अपठित-अवबोधनम् में संस्कृत श्लोक, पदच्छेद, वाक्यक्रम, अर्थबोध और व्याकरण-सम्बन्धी गद्यांश आ सकता है। अन्वयः word meanings ऐसे प्रश्नों में उपयोगी हैं।

Q1. अधोलिखितम् अपठितगद्यांशं पठित्वा प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत।

संस्कृतश्लोकेषु पदानि छन्दानुसारं व्यवस्थितानि भवन्ति। अतः कर्तृपदं, कर्मपदं, विशेषणं, विभक्त्यन्तपदं, क्रियापदं च सामान्यगद्यक्रमे न भवन्ति। श्लोकस्य अर्थं ज्ञातुं पदच्छेदः, पदानां सम्बन्धः और अन्वयः आवश्यकः भवति। अन्वयेन छात्राः श्लोकस्य अर्थं भावं च सरलतया अवगच्छन्ति।

प्रश्नः: संस्कृतश्लोकेषु पदानि कथं व्यवस्थितानि भवन्ति?
उत्तरम्: संस्कृतश्लोकेषु पदानि छन्दानुसारं व्यवस्थितानि भवन्ति।

श्लोक में शब्दों का क्रम सामान्य गद्य-वाक्य जैसा नहीं होता, क्योंकि छन्द, लय और पद-रचना के अनुसार पद आगे-पीछे हो सकते हैं।

Q2. श्लोके सामान्यगद्यक्रमे कानि पदानि न भवन्ति?

श्लोके कर्तृपदं, कर्मपदं, विशेषणं, विभक्त्यन्तपदं, क्रियापदं च सामान्यगद्यक्रमे न भवन्ति।

इसी कारण विद्यार्थी को सीधे श्लोक पढ़कर अर्थ समझने में कठिनाई हो सकती है। अन्वय इस कठिनाई को दूर करता है।

Q3. श्लोकस्य अर्थं ज्ञातुं किम् आवश्यकम्?

श्लोकस्य अर्थं ज्ञातुं पदच्छेदः, पदानां सम्बन्धः और अन्वयः आवश्यकः भवति।

पहले पदों को अलग किया जाता है, फिर उनके व्याकरणिक सम्बन्ध देखे जाते हैं। उसके बाद वे गद्य-क्रम में रखे जाते हैं।

Q4. अन्वयेन छात्राः किं अवगच्छन्ति?

अन्वयेन छात्राः श्लोकस्य अर्थं भावं च सरलतया अवगच्छन्ति।

अन्वय केवल शब्द-क्रम बदलना नहीं है। यह श्लोक के आशय, कर्ता, कर्म, क्रिया और विशेषण-विशेष्य सम्बन्ध को स्पष्ट करता है।

Q5. गद्यांशात् एकं व्याकरणसम्बद्धं पदं लिखत।

व्याकरणसम्बद्धं पदम् — पदच्छेदः।

पदच्छेद अन्वय से पहले की प्रक्रिया है। इसमें संयुक्त या क्रमबद्ध श्लोक-पंक्ति के पद अलग-अलग पहचाने जाते हैं।

Section B: रचनात्मक-कार्यम् – 15 Marks

रचनात्मक-कार्यम् में लघु-अनुच्छेद, परिभाषा, तालिका, उदाहरण-वाक्य और श्लोक-व्याख्या से जुड़े प्रश्न पूछे जा सकते हैं। Important Questions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 12 में अन्वय-विधि पर संक्षिप्त लेखन महत्त्वपूर्ण है।

Q6. मञ्जूषायाः साहाय्येन पत्रस्य रिक्तस्थानानि पूरयत।

मञ्जूषा: अन्वयः, श्लोकस्य, विद्यालये, पदच्छेदः, नमः

प्रिय मित्र,
सप्रेम ______। अद्य अस्माकं ______ संस्कृतशिक्षकः ______ विषये पाठं पाठितवान्। सः अवदत् यत् ______ अर्थं ज्ञातुं प्रथमं ______ करणीयः। ततः पदानां सम्बन्धः ज्ञातव्यः।
तव मित्रम्
विवेकः

उत्तरम्: नमः, विद्यालये, अन्वयः, श्लोकस्य, पदच्छेदः।

यह पत्र Chapter 12 के मुख्य व्याकरण-विषय पर आधारित है। इसमें अन्वय और पदच्छेद दोनों को श्लोक-अर्थ की प्रक्रिया से जोड़ा गया है।

Q7. “अन्वयः” इति विषयम् आधृत्य पञ्च संस्कृतवाक्यानि लिखत।

अन्वयः श्लोकस्य अर्थबोधाय आवश्यकः अस्ति।
श्लोके पदानि छन्दानुसारं भवन्ति।
अन्वये पदानि गद्यक्रमे योज्यन्ते।
दण्डान्वयः खण्डान्वयः च अन्वयस्य विधी स्तः।
अन्वयेन श्लोकस्य भावः स्पष्टः भवति।

ये वाक्य Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 12 important questions में लघु लेखन और परिभाषा-अभ्यास के लिए उपयोगी हैं।

Q8. “दण्डान्वयः” शब्देन द्वे संस्कृतवाक्ये लिखत।

दण्डान्वयः दण्डवत् सरलः अन्वयः अस्ति।
दण्डान्वये विशेषणं विशेष्यस्य पूर्वं योज्यते।

दण्डान्वय में पूरे श्लोक को एक क्रम से गद्य-रूप में रखा जाता है। इसमें कर्तृपद, कर्मपद और क्रियापद का सम्बन्ध स्पष्ट किया जाता है।

Q9. हिन्दी वाक्यस्य संस्कृते अनुवादं कुरुत: अन्वय से श्लोक का अर्थ स्पष्ट होता है।

अन्वयेन श्लोकस्य अर्थः स्पष्टः भवति।

यह वाक्य पूरे अध्याय का मूल उद्देश्य बताता है। अन्वय श्लोक के छन्दात्मक क्रम को सरल गद्य-क्रम में बदलता है।

Q10. हिन्दी वाक्यस्य संस्कृते अनुवादं कुरुत: खण्डान्वय प्रश्नों के द्वारा किया जाता है।

खण्डान्वयः प्रश्नैः क्रियते।

खण्डान्वय में शिक्षक छोटे-छोटे प्रश्न करता है और छात्र उत्तर देकर पदों का सम्बन्ध समझते हैं। अन्त में पूरा अन्वय बन जाता है।

Q11. “आकाङ्क्षा” शब्देन एकं संस्कृतवाक्यं रचयत।

आकाङ्क्षा अपेक्षितविषयस्य ज्ञाने इच्छा अस्ति।

जब कोई क्रियापद सुनकर “कः?”, “किम्?”, “कुत्र?”, “कदा?” जैसे प्रश्न उठते हैं, तब आकाङ्क्षा होती है।

Q12. “तात्पर्यम्” शब्देन एकं संस्कृतवाक्यं लिखत।

तात्पर्येण शब्दस्य विशेषार्थः ज्ञायते।

यदि शब्द का ठीक अर्थ न समझा जाए, तो श्लोक का अन्वय और भाव दोनों बिगड़ सकते हैं। इसलिए तात्पर्य अर्थबोध के लिए आवश्यक है।

Section C: अनुप्रयुक्त-व्याकरणम् – 25 Marks

अनुप्रयुक्त-व्याकरणम् में Class 9 Sanskrit dandaanvaya questions, Class 9 Sanskrit khandaanvaya questions, पदच्छेद, अध्याहार, आकाङ्क्षा और अन्वय-क्रम पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं। इस अध्याय में उदाहरण-श्लोकों का अभ्यास बहुत उपयोगी है।

Q13. अन्वयः किम्?

श्लोके विद्यमानानां पदानां परस्परं सम्बन्धं ज्ञात्वा तेषां सरल-वाक्यक्रमे योजना अन्वयः इति कथ्यते।

अन्वय से यह स्पष्ट होता है कि कौन-सा पद कर्ता है, कौन-सा कर्म है, किसका विशेषण कौन है और क्रिया किससे जुड़ी है। इससे श्लोक का अर्थ समझना आसान हो जाता है।

Q14. श्लोकान्वयस्य द्वौ विधी कौ स्तः?

श्लोकान्वयस्य द्वौ विधी स्तः — दण्डान्वयविधिः और खण्डान्वयविधिः।

दण्डान्वय में श्लोक का सम्पूर्ण गद्यक्रम बनाया जाता है। खण्डान्वय में प्रश्नोत्तर के माध्यम से चरण-दर-चरण पदों का सम्बन्ध बताया जाता है।

Q15. दण्डान्वयः कः?

दण्डवत् अन्वयः दण्डान्वयः इति कथ्यते।

दण्डान्वय में श्लोक के पदों को एक सीधी रचना में रखा जाता है। सामान्यतः विशेषण पहले, विशेष्य बाद में, फिर कर्तृपद, कर्मपद, अन्य विभक्ति-पद और अन्त में क्रियापद रखा जाता है।

Q16. दण्डान्वये विशेषणस्य स्थानं कुत्र भवति?

दण्डान्वये विशेषणं तत्तत् विशेष्यपदस्य पूर्वं योज्यते।

यदि कर्तृपद का विशेषण हो तो वह कर्तृपद से पहले रखा जाता है। यदि कर्मपद का विशेषण हो तो वह कर्मपद से पहले आता है। इससे वाक्य का सम्बन्ध स्पष्ट हो जाता है।

Q17. दण्डान्वये क्रियापदं कुत्र लिख्यते?

दण्डान्वये सामान्यतः क्रियापदं सर्वान्ते लिख्यते।

क्रियापद वाक्य को पूरा करता है। कभी-कभी श्लोक में क्रियापद स्पष्ट नहीं होता, तब अर्थ के अनुसार अध्याहार करके उचित क्रियापद जोड़ा जाता है।

Q18. अध्याहारः कः?

श्लोके अप्रयुक्तं परन्तु अर्थपूर्त्यर्थम् आवश्यकं पदं योज्यते, सः अध्याहारः इति कथ्यते।

उदाहरण के लिए, यदि श्लोक में कर्ता या क्रिया स्पष्ट न हो पर अर्थ के लिए आवश्यक हो, तो उपयुक्त पद जोड़ा जाता है। यह पद मन से कल्पित नहीं होता, बल्कि श्लोक के अर्थ और व्याकरण से निश्चित किया जाता है।

Q19. “शास्त्राण्यधीत्यापि भवन्ति मूर्खाः” इत्यत्र किम् अध्याहार्यम्?

अत्र “केचन” इति पदम् अध्याहार्यम्।

क्योंकि वाक्य में प्रश्न उठता है — “शास्त्राणि अधीत्यापि के मूर्खाः भवन्ति?” श्लोक में उसका उत्तर नहीं दिया गया, इसलिए अर्थपूर्ति के लिए “केचन” जोड़ा जाता है।

Q20. “यस्तु क्रियावान् पुरुषः स विद्वान्” इत्यत्र किम् अध्याहार्यम्?

अत्र “भवति” इति क्रियापदम् अध्याहार्यम्।

श्लोक में “यः क्रियावान् सः पुरुषः तु विद्वान्” कहा गया है, पर वाक्य पूर्ण करने के लिए क्रिया चाहिए। इसलिए “भवति” जोड़कर अर्थ स्पष्ट किया जाता है।

Q21. खण्डान्वयः कः?

खण्डशः अन्वयः खण्डान्वयः इति कथ्यते।

इस विधि में पूरे श्लोक का अन्वय एक साथ नहीं किया जाता। पहले क्रियापद पहचाना जाता है, फिर “कः?”, “किम्?”, “कीदृशः?”, “कथम्?” आदि प्रश्नों से पदों का सम्बन्ध बनाया जाता है।

Q22. खण्डान्वयविधिः आकाङ्क्षाविधिः इति किमर्थम् उच्यते?

खण्डान्वयविधिः आकाङ्क्षाविधिः इति उच्यते, क्योंकि इसमें आकाङ्क्षा के अनुसार प्रश्न पूछे जाते हैं।

जब कोई क्रिया या पद सुनकर मन में अपेक्षित पद जानने की इच्छा होती है, तब प्रश्न बनते हैं। इन्हीं प्रश्नों के उत्तरों से श्लोक का खण्डान्वय तैयार होता है।

Section D: पठित-अवबोधनम् – 30 Marks

पठित-अवबोधनम् में अन्वय की आवश्यकता, दण्डान्वय-खण्डान्वय, आकाङ्क्षा, योग्यता, आसत्ति, तात्पर्य और उदाहरण-श्लोकों के अन्वय पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं। Class 9 Sanskrit Chapter 12 questions answers के लिए परिभाषाएँ और उदाहरण दोनों समझना जरूरी है।

Q23. श्लोकेषु अन्वयस्य आवश्यकता किमर्थम् अस्ति?

श्लोकेषु अन्वयस्य आवश्यकता इसलिए है क्योंकि श्लोक के पद छन्द के अनुसार पूर्वापर क्रम में व्यवस्थित होते हैं।

इससे कर्ता, कर्म, क्रिया और विशेषण-विशेष्य सम्बन्ध तुरंत स्पष्ट नहीं होता। अन्वय पदों को सरल गद्य-क्रम में रखकर श्लोक का अर्थ और भाव समझाता है।

Q24. अन्वयार्थं चत्वारि सहकारि-कारणानि कानि?

अन्वयार्थं चत्वारि सहकारि-कारणानि सन्ति — आकाङ्क्षा, योग्यता, आसत्तिः और तात्पर्यम्।

ये चारों अर्थबोध में सहायक हैं। आकाङ्क्षा से प्रश्न उठता है, योग्यता से अर्थ की सम्भावना देखी जाती है, आसत्ति से पदों का समीप सम्बन्ध बनता है और तात्पर्य से सही आशय समझ आता है।

Q25. आकाङ्क्षा का?

अपेक्षित-विषयस्य ज्ञाने इच्छा आकाङ्क्षा इति कथ्यते।

जब “पठति” जैसा क्रियापद सुनकर “कः पठति?”, “किं पठति?”, “कुत्र पठति?” जैसे प्रश्न उठते हैं, तब आकाङ्क्षा होती है। खण्डान्वय इसी आकाङ्क्षा पर आधारित है।

Q26. योग्यता का?

पदानां मध्ये परस्पर-सम्बन्धस्य पात्रता योग्यता इति कथ्यते।

यदि वाक्य में अर्थ सम्भव नहीं है, तो योग्यता का अभाव होता है। जैसे “गगने पुष्पं विकसति” वाक्य में अर्थ सम्भव नहीं, क्योंकि आकाश में फूल नहीं खिलता।

Q27. आसत्तिः का?

पदानां परस्परं सामीप्यम् आसत्तिः इति कथ्यते।

एक वाक्य के पदों को उचित निकटता से बोला या पढ़ा जाना चाहिए। यदि “सः” कहकर बहुत देर बाद “पुस्तकं पठति” कहा जाए, तो पदों का सम्बन्ध स्पष्ट नहीं रहता।

Q28. तात्पर्यम् किम्?

शब्दविशेषात् अर्थविशेषस्य ज्ञाने इच्छा तात्पर्यम् इति कथ्यते।

तात्पर्य से शब्द का सही आशय समझ आता है। जैसे “शतायुर्भव” का तात्पर्य केवल सौ वर्ष जीना नहीं, बल्कि “चिरञ्जीवी भव” जैसा आशीर्वाद है।

Q29. “सम्पूर्णकुम्भः शब्दं न करोति” इति वाक्यस्य भावं लिखत।

इस वाक्य का भाव है कि पूर्ण ज्ञान या गुण वाला व्यक्ति व्यर्थ शोर नहीं करता।

जैसे पूरा भरा हुआ घड़ा ध्वनि नहीं करता, वैसे ही सच्चा विद्वान् गर्व नहीं करता। यह श्लोक विनम्रता और मौन-गाम्भीर्य का संदेश देता है।

Q30. “अल्पः जनः साट्टहासं जल्पति” इति वाक्यस्य भावं लिखत।

इस वाक्य का भाव है कि अल्पज्ञान वाला व्यक्ति अधिक बोलता और दिखावा करता है।

श्लोक में आधे भरे घड़े के घोष की तरह अल्पजन की वाणी को दिखाया गया है। इसके विपरीत कुलीन विद्वान् गर्व नहीं करता।

NCERT Class 9 Sanskrit Sharada Chapter-Wise Questions

Chapter No. Chapter Name
Chapter 1 सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम्
Chapter 2 सुखस्य मूलं धर्मः धर्मस्य मूलम् अर्थः
Chapter 3 आत्मवत्सर्वभूतेषु यः पश्यति सः पण्डितः
Chapter 4 न खलु वयस्तेजसो हेतुः
Chapter 5 एषा सा कृतकबुद्धिः मानवबुद्धेः सहकरी
Chapter 6 मनःपूतं समाचरेत्
Chapter 7 उपायं चिन्तयेत् प्राज्ञस्तथापायं च चिन्तयेत्
Chapter 8 अन्नाद् आनन्दं प्रति
Chapter 9 कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः
Chapter 10 णमो अरिहंताणम्
Chapter 11 वर्णोच्चारण-शिक्षा २
Chapter 13 समासः
Chapter 14 वाच्यम्
Chapter 15 शब्दरूपाणि
Chapter 16 धातुरूपाणि

FAQs (Frequently Asked Questions)

अन्वयः is the process of arranging the words of a Sanskrit verse in simple prose order. It helps students understand the relation between कर्ता, कर्म, क्रिया, विशेषण and other words.

दण्डान्वयः is a straight, full prose arrangement of a श्लोक. In this method, the words are placed in a continuous order so that the complete meaning becomes clear.

खण्डान्वयः is a question-based method of understanding a verse in small parts. The teacher asks short questions such as “कः?”, “किम्?”, “कथम्?” and the answers gradually form the complete अन्वय.

आकाङ्क्षा is expectation, योग्यता is semantic fitness, आसत्ति is closeness of words, and तात्पर्य is intended meaning. These four help students understand the correct meaning of a Sanskrit sentence or verse.

अध्याहारः is used when a necessary word is not directly present in the श्लोक but is required for complete meaning. The added word must fit the grammar and sense of the verse.