Important Questions Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 13 समासः

समासः is a Class 9 Sanskrit Sharada grammar chapter that explains how two or more meaningful words combine into one compact word. For CBSE 2026-27 Class 9 Sanskrit exams, this chapter supports practice in अपठित-अवबोधनम्, रचनात्मक-कार्यम्, अनुप्रयुक्त-व्याकरणम् and पठित-अवबोधनम्.

समासः संस्कृत व्याकरण का वह भाग है जिसमें अर्थयुक्त दो या अधिक पद मिलकर एक समस्तपद बनाते हैं। जैसे “सीतायाः पतिः” से “सीतापतिः” और “रामस्य दूतः” से “रामदूतः” बनता है। इस पाठ में समास की परिभाषा, पूर्वपद-उत्तरपद, विग्रहवाक्य, स्वपदविग्रह, अस्वपदविग्रह, केवलसमास और विशेषसमास समझाए गए हैं। Important Questions Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 13 विद्यार्थियों को तत्पुरुष, द्वन्द्व, बहुव्रीहि, अव्ययीभाव, कर्मधारय, द्विगु, नञ्-तत्पुरुष और समास-निर्णय के अभ्यास के लिए तैयार करते हैं।

Key Takeaways

  • Chapter focus: समासः Class 9 अर्थयुक्त पदों के संक्षेपण और समस्तपद-निर्माण की विधि समझाता है।
  • Main concept: समास सामान्यतः परस्पर सम्बद्ध सुबन्त पदों के बीच होता है।
  • Main types: विशेषसमास के चार मुख्य भेद हैं — तत्पुरुष, द्वन्द्व, बहुव्रीहि और अव्ययीभाव।
  • Grammar value: Class 9 Sanskrit grammar practice में इस पाठ से विग्रहवाक्य, समस्तपद, समास-भेद और प्रधानपद-निर्णय पूछा जा सकता है।

Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 13 Exam Pattern 2026-27

Section Question Area Marks
A अपठित-अवबोधनम् 10
B रचनात्मक-कार्यम् 15
C अनुप्रयुक्त-व्याकरणम् 25
D पठित-अवबोधनम् 30

Section A: अपठित-अवबोधनम् – 10 Marks

अपठित-अवबोधनम् में समास, विग्रह, पूर्वपद, उत्तरपद, संक्षेपण और समस्तपद से जुड़ा गद्यांश आ सकता है। समासः word meanings ऐसे प्रश्नों में उपयोगी हैं।

Q1. अधोलिखितम् अपठितगद्यांशं पठित्वा प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत।

संस्कृतभाषायां समासः पदसंक्षेपस्य महत्त्वपूर्णः उपायः अस्ति। अर्थयुक्ते पदद्वये वा बहुषु पदेषु एकपदता भवति, सा समासः इति कथ्यते। समासे पूर्वं प्रयुक्तं पदं पूर्वपदम्, अनन्तरं प्रयुक्तं पदम् उत्तरपदम् इति उच्यते। समस्तपदस्य अर्थं बोधयितुं यत् वाक्यं लिख्यते, तत् विग्रहवाक्यम् इति कथ्यते। समासज्ञानात् संस्कृतवाक्यानां अर्थः सरलतया अवगम्यते।

प्रश्नः: संस्कृतभाषायां समासः कस्य उपायः अस्ति?
उत्तरम्: संस्कृतभाषायां समासः पदसंक्षेपस्य महत्त्वपूर्णः उपायः अस्ति।

यह उत्तर गद्यांश की पहली पंक्ति से मिलता है। समास का मूल अर्थ ही संक्षेपण है, जिसमें कई पद एक अर्थयुक्त छोटे पद में बदल जाते हैं।

Q2. समासः कः इति गद्यांशानुसार लिखत।

अर्थयुक्ते पदद्वये वा बहुषु पदेषु एकपदता भवति, सा समासः इति कथ्यते।

सरल शब्दों में, दो या अधिक अर्थपूर्ण पद मिलकर एक समस्तपद बनाते हैं। जैसे “राष्ट्रस्य नायकः” से “राष्ट्रनायकः” बनता है।

Q3. पूर्वपदम् उत्तरपदम् च किम्?

समासे पूर्वं प्रयुक्तं पदं पूर्वपदम्, अनन्तरं प्रयुक्तं पदम् उत्तरपदम् इति उच्यते।

उदाहरण के लिए “सीतापतिः” में “सीता” पूर्वपद है और “पति” उत्तरपद है। समास-निर्णय में इन दोनों को पहचानना बहुत आवश्यक है।

Q4. विग्रहवाक्यम् किम्?

समस्तपदस्य अर्थं बोधयितुं यत् वाक्यं लिख्यते, तत् विग्रहवाक्यम् इति कथ्यते।

जैसे “राष्ट्रनायकः” का विग्रह है “राष्ट्रस्य नायकः”। विग्रहवाक्य समास के भीतर छिपे हुए सम्बन्ध को स्पष्ट करता है।

Q5. समासज्ञानात् किम् अवगम्यते?

समासज्ञानात् संस्कृतवाक्यानां अर्थः सरलतया अवगम्यते।

संस्कृत में समास-पद बहुत अधिक आते हैं। यदि विद्यार्थी समास और विग्रह समझते हैं, तो लम्बे समस्तपदों का अर्थ भी सरल हो जाता है।

Section B: रचनात्मक-कार्यम् – 15 Marks

रचनात्मक-कार्यम् में लघु-अनुच्छेद, तालिका, परिभाषा, उदाहरण-वाक्य और समास-विग्रह से जुड़े प्रश्न आ सकते हैं। Important Questions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 13 में समास के प्रकार और उदाहरण विशेष महत्त्व रखते हैं।

Q6. मञ्जूषायाः साहाय्येन पत्रस्य रिक्तस्थानानि पूरयत।

मञ्जूषा: समासः, विग्रहवाक्यम्, विद्यालये, समस्तपदम्, नमः

प्रिय मित्र,
सप्रेम ______। अद्य अस्माकं ______ संस्कृतशिक्षकः ______ विषयं पाठितवान्। सः अवदत् यत् पदानां संक्षेपणं समासः भवति। समासेन निर्मितं पदं ______ इति उच्यते। तस्य अर्थं बोधयितुं ______ लिख्यते।
तव मित्रम्
अभिनवः

उत्तरम्: नमः, विद्यालये, समासः, समस्तपदम्, विग्रहवाक्यम्।

यह पत्र Chapter 13 के मूल विषय पर आधारित है। इसमें समास, समस्तपद और विग्रहवाक्य तीनों मुख्य शब्द आते हैं।

Q7. “समासः” इति विषयम् आधृत्य पञ्च संस्कृतवाक्यानि लिखत।

समसनं समासः भवति।
समसनं नाम संक्षेपणम्।
अर्थयुक्तं पदद्वयं मिलित्वा एकं पदं भवति।
समासे पूर्वपदम् उत्तरपदं च भवतः।
समस्तपदस्य अर्थः विग्रहवाक्येन ज्ञायते।

ये वाक्य Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 13 important questions में परिभाषा और लघु-लेखन के लिए उपयोगी हैं।

Q8. “विग्रहवाक्यम्” शब्देन द्वे संस्कृतवाक्ये लिखत।

विग्रहवाक्यं समस्तपदस्य अर्थं बोधयति।
“राष्ट्रस्य नायकः” इति “राष्ट्रनायकः” इत्यस्य विग्रहवाक्यम् अस्ति।

विग्रहवाक्य समास को खोलकर दिखाता है। इससे यह पता चलता है कि समस्तपद के भीतर कौन-सा विभक्ति-सम्बन्ध या अर्थ-सम्बन्ध है।

Q9. हिन्दी वाक्यस्य संस्कृते अनुवादं कुरुत: समास का अर्थ संक्षेपण है।

समासस्य अर्थः संक्षेपणम् अस्ति।

यह वाक्य पाठ की शुरुआत से जुड़ा है। समसनम् का अर्थ भी संक्षेपण ही बताया गया है।

Q10. हिन्दी वाक्यस्य संस्कृते अनुवादं कुरुत: सीता का पति सीतापति कहलाता है।

सीतायाः पतिः सीतापतिः इति कथ्यते।

यह षष्ठी-तत्पुरुष समास का सरल उदाहरण है। इसमें “सीतायाः” पूर्वपद और “पतिः” उत्तरपद है।

Q11. “तत्पुरुषसमासः” शब्देन एकं संस्कृतवाक्यं रचयत।

तत्पुरुषसमासः प्रायः उत्तरपदार्थप्रधानः भवति।

इसका अर्थ है कि तत्पुरुष समास में सामान्यतः उत्तरपद मुख्य होता है। जैसे “रामदूतः” में दूतः जाता है, रामः नहीं।

Q12. “बहुव्रीहिसमासः” शब्देन एकं संस्कृतवाक्यं लिखत।

बहुव्रीहिसमासः प्रायः अन्यपदार्थप्रधानः भवति।

इसमें पूर्वपद या उत्तरपद नहीं, बल्कि उनसे अलग किसी तीसरे अर्थ का प्राधान्य होता है। जैसे “पीताम्बरः” का अर्थ वह है जिसका अम्बर पीत है, अर्थात् विष्णुः।

Section C: अनुप्रयुक्त-व्याकरणम् – 25 Marks

अनुप्रयुक्त-व्याकरणम् में Class 9 Sanskrit tatpurusha samasa questions, समास-विग्रह, समस्तपद, स्वपदविग्रह, अस्वपदविग्रह और प्रधानपद-निर्णय पूछे जा सकते हैं। इस पाठ में समास के चार मुख्य भेद याद रखना आवश्यक है।

Q13. समासः किम्?

समसनं समासः भवति, और समसनं नाम संक्षेपणम्।

जब अर्थयुक्त दो या अधिक पद मिलकर एक पद बनते हैं, तो उसे समास कहते हैं। जैसे “महा” और “पुरुष” मिलकर “महापुरुषः” बनते हैं।

Q14. समासः सामान्यतः केषां मध्ये भवति?

समासः सामान्यतः परस्परं सम्बद्धानां सुबन्तानां मध्ये भवति।

यदि दो पदों में परस्पर अन्वय या सम्बन्ध नहीं है, तो उनके बीच समास नहीं होगा। इसलिए समास से पहले यह देखना पड़ता है कि पदों का अर्थ-सम्बन्ध है या नहीं।

Q15. पूर्वपदम् उत्तरपदम् च उदाहरणेन लिखत।

समासे पूर्वं प्रयुक्तं पदं पूर्वपदम्, अनन्तरं प्रयुक्तं पदम् उत्तरपदम्।

उदाहरण — “सीतापतिः” में “सीता” पूर्वपद है और “पतिः” उत्तरपद है। समास-विग्रह और समास-निर्णय में यह पहचान पहला कदम है।

Q16. समस्तपदम् किम्?

समासेन निर्मितं पदं समस्तपदम् इति कथ्यते।

जैसे “राष्ट्रनायकः”, “सीतापतिः”, “रामदूतः”, “पीताम्बरः” आदि समस्तपद हैं। ये पद अपने भीतर दो या अधिक शब्दों का सम्बन्ध रखते हैं।

Q17. विग्रहवाक्यम् किम्?

वृत्त्यर्थस्य अवबोधकं वाक्यं विग्रहः इति कथ्यते।

समास का अर्थ बताने वाला वाक्य विग्रहवाक्य कहलाता है। जैसे “राष्ट्रनायकः” का विग्रह है — “राष्ट्रस्य नायकः”।

Q18. स्वपदविग्रहः कः?

यदा समस्तपदस्य अर्थः समस्तपदे विद्यमानैः पदैः एव वर्णितः भवति, तदा सः स्वपदविग्रहः भवति।

उदाहरण — “कृष्णसखा” का विग्रह “कृष्णस्य सखा” है। यहाँ विग्रह में वही पद आते हैं जो समस्तपद में हैं।

Q19. अस्वपदविग्रहः कः?

यदा समस्तपदस्य अर्थः समस्तपदे अविद्यमानैः अन्यैः पदैः वर्णितः भवति, तदा सः अस्वपदविग्रहः भवति।

उदाहरण — “यथामति” का विग्रह “मतिम् अनतिक्रम्य” है। यहाँ “अनतिक्रम्य” समस्तपद में नहीं है, इसलिए यह अस्वपदविग्रह है।

Q20. मुख्यतया समासः कतिविधः?

मुख्यतया समासः द्विविधः — केवलसमासः और विशेषसमासः।

केवलसमास केवल समास-संज्ञामात्र से युक्त होता है। विशेषसमास में तत्पुरुष, द्वन्द्व, बहुव्रीहि और अव्ययीभाव जैसे स्पष्ट भेद आते हैं।

Q21. विशेषसमासस्य चत्वारः भेदाः के?

विशेषसमासस्य चत्वारः भेदाः सन्ति — तत्पुरुषसमासः, द्वन्द्वसमासः, बहुव्रीहिसमासः और अव्ययीभावसमासः।

इन चारों में प्रधानता अलग-अलग होती है। तत्पुरुष में उत्तरपद, द्वन्द्व में उभयपद, बहुव्रीहि में अन्यपद और अव्ययीभाव में पूर्वपद प्रमुख माना जाता है।

Q22. समासस्य निर्णयः कथं क्रियते?

समास-निर्णय के लिए पहले पूर्वपद और उत्तरपद का ज्ञान किया जाता है, फिर यह देखा जाता है कि क्रियापद से किस पद का सम्बन्ध है।

जिस पद का सम्बन्ध क्रियापद से होता है, वही प्रधान माना जाता है। यदि उत्तरपद प्रधान हो तो प्रायः तत्पुरुष, दोनों पद प्रधान हों तो द्वन्द्व, कोई अन्य अर्थ प्रधान हो तो बहुव्रीहि, और पूर्वपद प्रधान हो तो अव्ययीभाव समझा जाता है।

Section D: पठित-अवबोधनम् – 30 Marks

पठित-अवबोधनम् में समास की परिभाषा, विग्रह, समास-निर्णय, तत्पुरुष, द्वन्द्व, बहुव्रीहि, अव्ययीभाव और उनके उपभेदों पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं। Class 9 Sanskrit Chapter 13 questions answers के लिए उदाहरणों का अभ्यास आवश्यक है।

Q23. तत्पुरुषसमासः कः?

प्रायः उत्तरपदार्थप्रधानः समासः तत्पुरुषसमासः इति कथ्यते।

उदाहरण — “रामदूतः”। इसका विग्रह है “रामस्य दूतः”। यहाँ “दूतः गच्छति” अर्थ बनता है, “रामः गच्छति” नहीं। इसलिए उत्तरपद “दूत” प्रधान है।

Q24. विभक्तितत्पुरुषः कतिविधः?

विभक्तितत्पुरुषः षड्विधः भवति।

उसके भेद हैं — द्वितीयातत्पुरुषः, तृतीयातत्पुरुषः, चतुर्थीतत्पुरुषः, पञ्चमीतत्पुरुषः, षष्ठीतत्पुरुषः और सप्तमीतत्पुरुषः। उदाहरण — गृहगतः, नखभिन्नः, गोहितम्, चोरभयम्, वृक्षमूलम्, कार्यकुशलः।

Q25. कर्मधारयसमासः कस्य अन्तर्गतः भवति?

कर्मधारयसमासः तत्पुरुषसमासान्तर्गतः भवति।

इसमें विशेषण-विशेष्य या उपमान-उपमेय आदि सम्बन्ध आते हैं। उदाहरण — “नीलमेघः” का विग्रह है “नीलः मेघः”।

Q26. द्विगुसमासः कः?

द्विगुसमासः तत्पुरुषस्यैव भेदः अस्ति, जिसमें सामान्यतः संख्या से सम्बन्धित पद आते हैं।

उदाहरण — “त्रिलोकी” का विग्रह है “त्रयाणां लोकानां समाहारः”। इसमें संख्या “त्रि” से समूह का अर्थ बनता है।

Q27. द्वन्द्वसमासः कः?

प्रायः उभयपदार्थप्रधानः समासः द्वन्द्वसमासः इति कथ्यते।

उदाहरण — “रामकृष्णौ”। इसका विग्रह है “रामः च कृष्णः च”। यहाँ राम भी प्रधान है और कृष्ण भी प्रधान है।

Q28. बहुव्रीहिसमासः कः?

प्रायः अन्यपदार्थप्रधानः समासः बहुव्रीहिसमासः इति कथ्यते।

उदाहरण — “पीताम्बरः”। इसका विग्रह है “पीतम् अम्बरं यस्य सः”। यहाँ न “पीतम्” प्रधान है, न “अम्बरम्”; बल्कि “विष्णुः” जैसा अन्य पद प्रधान है।

Q29. अव्ययीभावसमासः कः?

प्रायः पूर्वपदार्थप्रधानः समासः अव्ययीभावसमासः इति कथ्यते।

उदाहरण — “उपनगरम्”। इसका विग्रह है “नगरस्य समीपम्”। यहाँ “उप” अर्थात् समीप का अर्थ प्रधान है, इसलिए यह अव्ययीभाव है।

Q30. नञ्-तत्पुरुषसमासः उदाहरणेन स्पष्टयत।

नञ्-तत्पुरुषसमासे “न” अर्थ वाला पूर्वपद किसी पद से जुड़कर अभाव या निषेध का अर्थ देता है।

उदाहरण — “अधर्मः”। इसका विग्रह है “न धर्मः”। यहाँ “न” का अर्थ “अ” के रूप में समस्तपद में आता है और पूरा शब्द “धर्म का अभाव” या “धर्म के विरुद्ध” अर्थ देता है।

NCERT Class 9 Sanskrit Sharada Chapter-Wise Questions

Chapter No. Chapter Name
Chapter 1 सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम्
Chapter 2 सुखस्य मूलं धर्मः धर्मस्य मूलम् अर्थः
Chapter 3 आत्मवत्सर्वभूतेषु यः पश्यति सः पण्डितः
Chapter 4 न खलु वयस्तेजसो हेतुः
Chapter 5 एषा सा कृतकबुद्धिः मानवबुद्धेः सहकरी
Chapter 6 मनःपूतं समाचरेत्
Chapter 7 उपायं चिन्तयेत् प्राज्ञस्तथापायं च चिन्तयेत्
Chapter 8 अन्नाद् आनन्दं प्रति
Chapter 9 कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः
Chapter 10 णमो अरिहंताणम्
Chapter 11 वर्णोच्चारण-शिक्षा २
Chapter 12 अन्वयः
Chapter 14 वाच्यम्
Chapter 15 शब्दरूपाणि
Chapter 16 धातुरूपाणि

FAQs (Frequently Asked Questions)

समासः means the joining of two or more meaningful words into one compact word. It helps Sanskrit express a longer idea in a shorter form.

विग्रहवाक्यम् is the sentence that explains the meaning of a compound word. For example, “राष्ट्रस्य नायकः” is the विग्रहवाक्यम् of “राष्ट्रनायकः.”

The four main types are तत्पुरुषसमासः, द्वन्द्वसमासः, बहुव्रीहिसमासः and अव्ययीभावसमासः. Each type is identified by which meaning is प्रधान.

तत्पुरुष is usually उत्तरपदार्थप्रधान, so the second word is central. बहुव्रीहि is अन्यपदार्थप्रधान, where the compound points to someone or something outside the two compound words.

Students first identify the पूर्वपद and उत्तरपद, then check which word connects with the verb or carries the main meaning. This helps decide whether the compound is तत्पुरुष, द्वन्द्व, बहुव्रीहि or अव्ययीभाव.