Important Questions Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 14 वाच्यम्

वाच्यम् is a Class 9 Sanskrit Sharada grammar chapter that explains कर्तरि प्रयोगः, कर्मणि प्रयोगः and भावे प्रयोगः in Sanskrit sentence formation.
For CBSE 2026-27 Class 9 Sanskrit exams, this chapter supports practice in अपठित-अवबोधनम्, रचनात्मक-कार्यम्, अनुप्रयुक्त-व्याकरणम् and पठित-अवबोधनम्.

वाच्यम् संस्कृत व्याकरण का महत्त्वपूर्ण अध्याय है, जिसमें वाक्य में कर्ता, कर्म और क्रिया के सम्बन्ध को समझाया जाता है। इस पाठ में कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य और भाववाच्य के नियम दिए गए हैं। कर्तृवाच्य में कर्ता प्रधान होता है, कर्मवाच्य में कर्म प्रधान होता है, और भाववाच्य में केवल क्रिया का भाव प्रधान होता है। Important Questions Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 14 विद्यार्थियों को विभक्ति-परिवर्तन, क्रियापद-परिवर्तन, यक्-प्रत्यय, क्त-क्तवतु, तव्यत्-अनीयऱ् प्रत्यय और वाच्यपरिवर्तन के अभ्यास के लिए तैयार करते हैं।

Key Takeaways

  • Chapter focus: वाच्यम् Class 9 वाक्य में कर्ता, कर्म और भाव की प्रधानता के अनुसार प्रयोग बदलना सिखाता है।
  • Main types: कर्तृवाच्यम्, कर्मवाच्यम् और भाववाच्यम् वाच्य के तीन मुख्य रूप हैं।
  • Core rule: कर्तृवाच्य में क्रिया कर्ता का अनुसरण करती है, कर्मवाच्य में क्रिया कर्म का अनुसरण करती है।
  • Grammar value: Class 9 Sanskrit grammar practice में इस पाठ से वाच्यपरिवर्तन, विभक्ति-नियम, यक्-प्रत्यय, क्त-क्तवतु और तव्यत्-अनीयऱ् प्रयोग पूछे जा सकते हैं।

Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 14 Exam Pattern 2026-27

Section Question Area Marks
A अपठित-अवबोधनम् 10
B रचनात्मक-कार्यम् 15
C अनुप्रयुक्त-व्याकरणम् 25
D पठित-अवबोधनम् 30

Section A: अपठित-अवबोधनम् – 10 Marks

अपठित-अवबोधनम् में कर्ता, कर्म, क्रिया, विभक्ति और वाच्य-परिवर्तन से जुड़ा गद्यांश आ सकता है। वाच्यम् word meanings ऐसे प्रश्नों में सहायक हैं।

Q1. अधोलिखितम् अपठितगद्यांशं पठित्वा प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत।

संस्कृतभाषायां वाक्यरचना कर्ता, कर्म और क्रियापदस्य सम्बन्धेन स्पष्टा भवति। कर्तरि प्रयोगे कर्ता प्रथमा-विभक्तौ भवति और क्रियापदं कर्तृपदम् अनुसरति। कर्मणि प्रयोगे कर्ता तृतीया-विभक्तौ और कर्म प्रथमा-विभक्तौ भवति। भावे प्रयोगः अकर्मकधातुषु भवति, यत्र क्रियाया भावः प्रधानः भवति। अतः वाच्यज्ञानं संस्कृतवाक्यलेखनाय अतीव आवश्यकम्।

प्रश्नः: संस्कृतभाषायां वाक्यरचना केन स्पष्टा भवति?
उत्तरम्: संस्कृतभाषायां वाक्यरचना कर्ता, कर्म और क्रियापदस्य सम्बन्धेन स्पष्टा भवति।

यह उत्तर गद्यांश की पहली पंक्ति से मिलता है। वाच्यम् अध्याय इसी सम्बन्ध को नियमबद्ध ढंग से समझाता है।

Q2. कर्तरि प्रयोगे कर्ता कस्यां विभक्तौ भवति?

कर्तरि प्रयोगे कर्ता प्रथमा-विभक्तौ भवति।

कर्तृवाच्य में कर्ता प्रधान होता है। इसलिए क्रियापद कर्ता के पुरुष और वचन के अनुसार बदलता है।

Q3. कर्मणि प्रयोगे कर्ता कर्म च कस्यां विभक्तौ भवतः?

कर्मणि प्रयोगे कर्ता तृतीया-विभक्तौ और कर्म प्रथमा-विभक्तौ भवतः।

जैसे “बालः श्लोकं पठति” का कर्मवाच्य रूप है “बालकेन श्लोकः पठ्यते।” यहाँ “बालकेन” तृतीया और “श्लोकः” प्रथमा विभक्ति में है।

Q4. भावे प्रयोगः केषु धातुषु भवति?

भावे प्रयोगः अकर्मकधातुषु भवति।

अकर्मकधातुओं में कर्मपद नहीं होता, इसलिए कर्मवाच्य नहीं बनता। ऐसे धातुओं में क्रिया का भाव प्रधान होकर भाववाच्य बनता है।

Q5. वाच्यज्ञानं किमर्थम् आवश्यकम्?

वाच्यज्ञानं संस्कृतवाक्यलेखनाय अतीव आवश्यकम्।

वाच्य के बिना विद्यार्थी यह नहीं समझ पाते कि कर्ता, कर्म और क्रिया किस विभक्ति और किस रूप में आएँगे। इसलिए यह अध्याय अनुप्रयुक्त-व्याकरणम् में बहुत उपयोगी है।

Section B: रचनात्मक-कार्यम् – 15 Marks

रचनात्मक-कार्यम् में परिभाषा, उदाहरण-वाक्य, वाच्यपरिवर्तन और लघु अनुच्छेद पूछे जा सकते हैं। Important Questions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 14 में कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य और भाववाच्य के उदाहरण विशेष महत्त्व रखते हैं।

Q6. मञ्जूषायाः साहाय्येन पत्रस्य रिक्तस्थानानि पूरयत।

मञ्जूषा: वाच्यम्, कर्ता, विद्यालये, कर्मवाच्ये, नमः

प्रिय मित्र,
सप्रेम ______। अद्य अस्माकं ______ संस्कृतशिक्षकः ______ विषयं पाठितवान्। सः अवदत् यत् कर्तृवाच्ये ______ प्रधानः भवति। ______ कर्म प्रथमा-विभक्तौ भवति और क्रिया कर्मपदम् अनुसरति।
तव मित्रम्
दक्षः

उत्तरम्: नमः, विद्यालये, वाच्यम्, कर्ता, कर्मवाच्ये।

यह पत्र Chapter 14 के मुख्य व्याकरण-विषय पर आधारित है। इसमें कर्तृवाच्य और कर्मवाच्य दोनों के नियम आते हैं।

Q7. “वाच्यम्” इति विषयम् आधृत्य पञ्च संस्कृतवाक्यानि लिखत।

वाच्यं संस्कृतव्याकरणस्य महत्त्वपूर्णः विषयः अस्ति।
वाच्ये कर्ता, कर्म और क्रिया सम्बन्धः ज्ञायते।
कर्तृवाच्ये कर्ता प्रधानः भवति।
कर्मवाच्ये कर्म प्रधानं भवति।
भाववाच्ये क्रियाया भावः प्रधानः भवति।

ये वाक्य Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 14 important questions में लघु लेखन और परिभाषा-अभ्यास के लिए उपयोगी हैं।

Q8. “कर्तृवाच्यम्” शब्देन द्वे संस्कृतवाक्ये लिखत।

कर्तृवाच्ये कर्ता प्रथमा-विभक्तौ भवति।
कर्तृवाच्ये क्रियापदं कर्तृपदम् अनुसरति।

कर्तृवाच्य में वाक्य का केन्द्र कर्ता होता है। जैसे “बालः चित्रं पश्यति” में “बालः” कर्ता है और क्रिया “पश्यति” उसी के अनुसार है।

Q9. हिन्दी वाक्यस्य संस्कृते अनुवादं कुरुत: बालक श्लोक पढ़ता है।

बालकः श्लोकं पठति।

यह कर्तृवाच्य का सरल उदाहरण है। यहाँ “बालकः” प्रथमा विभक्ति में कर्ता है और “श्लोकम्” द्वितीया विभक्ति में कर्म है।

Q10. हिन्दी वाक्यस्य संस्कृते अनुवादं कुरुत: बालक द्वारा श्लोक पढ़ा जाता है।

बालकेन श्लोकः पठ्यते।

यह कर्मवाच्य का उदाहरण है। यहाँ कर्ता “बालकेन” तृतीया विभक्ति में है और कर्म “श्लोकः” प्रथमा विभक्ति में है।

Q11. “भाववाच्यम्” शब्देन एकं संस्कृतवाक्यं रचयत।

भाववाच्ये क्रियापदं प्रथमपुरुषस्य एकवचने भवति।

भाववाच्य अकर्मकधातुओं में होता है। इसमें कर्म नहीं होता, इसलिए क्रिया का भाव ही प्रधान माना जाता है।

Q12. “कर्मवाच्यम्” शब्देन एकं संस्कृतवाक्यं लिखत।

कर्मवाच्ये क्रियापदं कर्मपदम् अनुसरति।

इसका अर्थ है कि कर्म जिस वचन में होगा, क्रिया भी उसी वचन के अनुसार आएगी। जैसे “फलानि खाद्यन्ते” में क्रिया बहुवचन में है।

Section C: अनुप्रयुक्त-व्याकरणम् – 25 Marks

अनुप्रयुक्त-व्याकरणम् में Class 9 Sanskrit vachya parivartan questions, कर्तृवाच्य-कर्मवाच्य, भाववाच्य, विभक्ति-नियम और प्रत्यय-प्रयोग पूछे जा सकते हैं। इस पाठ में वर्तमान, भूतकाल और विधिलिङ्-आधारित रूपों का अभ्यास आवश्यक है।

Q13. वाच्यम् कतिविधम्?

वाच्यम् त्रिविधम् — कर्तृवाच्यम्, कर्मवाच्यम् और भाववाच्यम्।

इन्हें क्रमशः कर्तरि प्रयोगः, कर्मणि प्रयोगः और भावे प्रयोगः भी कहा जाता है। तीनों में प्रधानता अलग-अलग होती है।

Q14. कर्तृवाच्यम् किम्?

यत्र कर्ता प्रधानः भवति और क्रियापदं कर्तृपदम् अनुसरति, तत् कर्तृवाच्यम् इति कथ्यते।

कर्तृवाच्य में कर्ता प्रथमा विभक्ति में और कर्म द्वितीया विभक्ति में होता है। उदाहरण — “बालः चित्रं पश्यति।”

Q15. कर्तृवाच्ये विभक्तिनियमः कः?

कर्तृवाच्ये कर्ता प्रथमा-विभक्तौ और कर्म द्वितीया-विभक्तौ भवति।

जैसे “बालः फलं खादति।” यहाँ “बालः” प्रथमा विभक्ति में है और “फलम्” द्वितीया विभक्ति में है। क्रिया “खादति” कर्ता “बालः” के अनुसार है।

Q16. कर्तृवाच्ये क्रियापदं किम् अनुसरति?

कर्तृवाच्ये क्रियापदं कर्तृपदम् अनुसरति।

यदि कर्ता एकवचन में है तो क्रिया एकवचन में होगी, यदि कर्ता द्विवचन में है तो क्रिया द्विवचन में होगी, और यदि कर्ता बहुवचन में है तो क्रिया बहुवचन में होगी।

Q17. कर्मवाच्यम् किम्?

यत्र कर्म प्रधानं भवति और क्रियापदं कर्मपदम् अनुसरति, तत् कर्मवाच्यम् इति कथ्यते।

कर्मवाच्य में कर्ता तृतीया विभक्ति में और कर्म प्रथमा विभक्ति में होता है। जैसे “बालकेन श्लोकः पठ्यते।”

Q18. कर्मवाच्ये विभक्तिनियमः कः?

कर्मवाच्ये कर्तृपदं तृतीया-विभक्तौ और कर्मपदं प्रथमा-विभक्तौ भवति।

उदाहरण — “राधया पूजा क्रियते।” यहाँ “राधया” कर्ता है, इसलिए तृतीया विभक्ति में है; “पूजा” कर्म है, इसलिए प्रथमा विभक्ति में है।

Q19. कर्मणि प्रयोगे धातुभ्यः कः प्रत्ययः विधीयते?

कर्मणि प्रयोगे धातुभ्यः “यक्” प्रत्ययः विधीयते।

इसके बाद आत्मनेपद-प्रत्यय आते हैं। जैसे पठ् + य + ते = पठ्यते, लिख् + य + ते = लिख्यते, गम् + य + ते = गम्यते।

Q20. कर्मवाच्ये “पठति” इति रूपं किम् भवति?

कर्मवाच्ये “पठति” इति रूपं “पठ्यते” भवति।

उदाहरण — “बालः श्लोकं पठति” का कर्मवाच्य है “बालकेन श्लोकः पठ्यते।” यहाँ क्रिया कर्म “श्लोकः” के अनुसार आती है।

Q21. भाववाच्यम् किम्?

भावप्रधानः प्रयोगः भाववाच्यम् इति कथ्यते।

भाववाच्य अकर्मकधातुओं में होता है, क्योंकि उनमें कर्मपद नहीं होता। इसमें क्रिया का भाव ही मुख्य होता है, जैसे “तैः हस्यते।”

Q22. भाववाच्ये क्रियापदस्य नियमः कः?

भाववाच्ये क्रियापदं सर्वदा प्रथमपुरुषस्य एकवचने भवति।

चाहे कर्ता एक हो या अनेक, भाववाच्य में क्रिया एकवचन में ही रहती है। उदाहरण — “ते हसन्ति” का भाववाच्य है “तैः हस्यते।”

Section D: पठित-अवबोधनम् – 30 Marks

पठित-अवबोधनम् में कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य, भाववाच्य, वर्तमानकाल, भूतकाल, विधिलिङ् और कृदन्त-प्रयोग पर प्रश्न आ सकते हैं। Class 9 Sanskrit Chapter 14 questions answers के लिए वाच्यपरिवर्तन का अभ्यास बहुत आवश्यक है।

Q23. “बालः चित्रं पश्यति” इति वाक्ये कर्ता, कर्म और क्रिया लिखत।

कर्ता — बालः।
कर्म — चित्रम्।
क्रिया — पश्यति।

यह कर्तृवाच्य का वाक्य है। यहाँ कर्ता प्रथमा विभक्ति में है, कर्म द्वितीया विभक्ति में है और क्रिया कर्ता के अनुसार एकवचन में है।

Q24. “बालः श्लोकं पठति” इत्यस्य कर्मवाच्यं लिखत।

बालकेन श्लोकः पठ्यते।

कर्तृवाच्य में “बालः” प्रथमा विभक्ति में था। कर्मवाच्य में वही “बालकेन” तृतीया विभक्ति में आता है और “श्लोकम्” प्रथमा विभक्ति में “श्लोकः” बनता है।

Q25. “सा कवितां लिखति” इत्यस्य कर्मवाच्यं लिखत।

तया कविता लिख्यते।

यहाँ “सा” का तृतीया-विभक्ति रूप “तया” है। “कविताम्” द्वितीया विभक्ति से प्रथमा विभक्ति में “कविता” बनता है, और “लिखति” का कर्मवाच्य रूप “लिख्यते” है।

Q26. “सुनिता फलानि खादति” इत्यस्य कर्मवाच्यं लिखत।

सुनितया फलानि खाद्यन्ते।

यहाँ कर्म “फलानि” नपुंसकलिङ्ग बहुवचन में है, इसलिए कर्मवाच्य क्रिया “खाद्यन्ते” बहुवचन में आएगी। यह नियम दिखाता है कि कर्मवाच्य में क्रिया कर्मपद का अनुसरण करती है।

Q27. “अहं इक्षुरसं पिबामि” इत्यस्य कर्मवाच्यं लिखत।

मया इक्षुरसः पीयते।

कर्तृवाच्य में “अहम्” कर्ता था। कर्मवाच्य में उसका तृतीया-विभक्ति रूप “मया” आता है, और “इक्षुरसम्” प्रथमा विभक्ति में “इक्षुरसः” बनता है।

Q28. “बालकः श्लोकं पठितवान्” इत्यस्य कर्मवाच्यं लिखत।

बालकेन श्लोकः पठितः।

भूतकाल में कर्तृवाच्य में क्तवतु-प्रत्यय का प्रयोग होता है, जैसे “पठितवान्।” कर्मवाच्य में कर्म के लिङ्ग-वचन के अनुसार क्त-प्रत्ययान्त रूप आता है, जैसे “श्लोकः पठितः।”

Q29. “छात्राः स्वाध्यायं कुर्युः” इत्यस्य कर्मवाच्यं लिखत।

छात्रैः स्वाध्यायः कर्तव्यः / करणीयः।

विधिलिङ् अर्थ में कर्मवाच्य में तव्यत् या अनीयर् प्रत्यय का प्रयोग हो सकता है। यहाँ “स्वाध्यायः” पुल्लिङ्ग एकवचन है, इसलिए “कर्तव्यः” और “करणीयः” रूप उपयुक्त हैं।

Q30. “ते हसन्ति” इत्यस्य भाववाच्यं लिखत।

तैः हस्यते।

“हस्” अकर्मकधातु है, इसलिए इसका कर्मवाच्य नहीं बनता। भाववाच्य में कर्ता तृतीया विभक्ति में “तैः” बनता है और क्रिया प्रथमपुरुष एकवचन में “हस्यते” रहती है।

NCERT Class 9 Sanskrit Sharada Chapter-Wise Questions

Chapter No. Chapter Name
Chapter 1 सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम्
Chapter 2 सुखस्य मूलं धर्मः धर्मस्य मूलम् अर्थः
Chapter 3 आत्मवत्सर्वभूतेषु यः पश्यति सः पण्डितः
Chapter 4 न खलु वयस्तेजसो हेतुः
Chapter 5 एषा सा कृतकबुद्धिः मानवबुद्धेः सहकरी
Chapter 6 मनःपूतं समाचरेत्
Chapter 7 उपायं चिन्तयेत् प्राज्ञस्तथापायं च चिन्तयेत्
Chapter 8 अन्नाद् आनन्दं प्रति
Chapter 9 कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः
Chapter 10 णमो अरिहंताणम्
Chapter 11 वर्णोच्चारण-शिक्षा २
Chapter 12 अन्वयः
Chapter 13 समासः
Chapter 15 शब्दरूपाणि
Chapter 16 धातुरूपाणि

FAQs (Frequently Asked Questions)

कर्तृवाच्य is identified when the कर्ता is in प्रथमा विभक्ति and the verb follows the कर्ता. For example, in “बालः श्लोकं पठति,” बालः is the doer, so the sentence is in कर्तृवाच्य.

To change कर्तृवाच्य to कर्मवाच्य, put the कर्ता in तृतीया विभक्ति, bring the कर्म to प्रथमा विभक्ति, and change the verb into a passive form. For example, “बालः श्लोकं पठति” becomes “बालकेन श्लोकः पठ्यते.”

कर्मवाच्य is used when the कर्म is present and becomes प्रधान, while भाववाच्य is used mainly with अकर्मकधातु where no कर्म is present. In कर्मवाच्य, the verb follows the कर्म; in भाववाच्य, the verb stays in प्रथमपुरुष एकवचन.

भाववाच्य is used with अकर्मकधातु such as हस्, क्रीड्, धाव्, पत्, उपविश्, वर्ध् and कास्. For example, “ते हसन्ति” becomes “तैः हस्यते.”

The verb changes because the प्रधान पद changes. In कर्तृवाच्य, the verb follows the कर्ता, but in कर्मवाच्य, it follows the कर्म, so the verb form changes according to the new subject-like word.