Important Questions Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 15 शब्दरूपाणि

शब्दरूपाणि is a Class 9 Sanskrit Sharada grammar chapter that gives declension forms of पुंलिङ्ग, स्त्रीलिङ्ग and नपुंसकलिङ्ग words. For CBSE 2026-27 Class 9 Sanskrit exams, this chapter supports practice in अपठित-अवबोधनम्, रचनात्मक-कार्यम्, अनुप्रयुक्त-व्याकरणम् and पठित-अवबोधनम्.

शब्दरूपाणि संस्कृत व्याकरण का वह अभ्यास है जिससे विद्यार्थी किसी शब्द को विभक्ति, वचन और लिङ्ग के अनुसार सही रूप में लिखना सीखते हैं। इस अध्याय में ब्रह्मन्, गुणिन्, पथिन्, विद्वस्, चन्द्रमस्, पुंस्, सहृद्, वणिज् जैसे पुंलिङ्ग शब्द; वाच्, त्वच्, स्रज्, रुज्, सरित्, विद्युत्, दिव्, दिश् जैसे स्त्रीलिङ्ग शब्द; और जगत्, नामन्, कर्मन्, चर्मन्, मनस्, तपस्, पयस्, शिरस्, छन्दस्, चक्षुष् जैसे नपुंसकलिङ्ग शब्द दिए गए हैं। Important Questions Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 15 विद्यार्थियों को रूप-पहचान, रिक्तस्थान, विभक्ति-वचन, सम्बोधन और सुप्-प्रत्यय अभ्यास के लिए तैयार करते हैं।

Key Takeaways

  • Chapter focus: शब्दरूपाणि Class 9 संस्कृत शब्दों के विभक्ति, वचन और लिङ्गानुसार रूप सिखाता है।
  • Main coverage: पाठ में पुंलिङ्ग, स्त्रीलिङ्ग और नपुंसकलिङ्ग के विशेष शब्दरूप दिए गए हैं।
  • Important forms: ब्रह्मन्, विद्वस्, वाच्, सरित्, जगत्, कर्मन्, मनस् और चक्षुष् जैसे रूप परीक्षा में उपयोगी हैं।
  • Grammar value: Class 9 Sanskrit grammar practice में इस पाठ से रूप-पहचान, रूप-पूर्ति, विभक्ति-वचन और सुप्-प्रत्यय पूछे जा सकते हैं।

Class 9 Sanskrit Exam Pattern 2026-27

Section Question Area Marks
A अपठित-अवबोधनम् 10
B रचनात्मक-कार्यम् 15
C अनुप्रयुक्त-व्याकरणम् 25
D पठित-अवबोधनम् 30

Section A: अपठित-अवबोधनम् – 10 Marks

अपठित-अवबोधनम् में शब्दरूप, विभक्ति, वचन, लिङ्ग और सुप्-प्रत्यय से जुड़ा गद्यांश आ सकता है। शब्दरूपाणि word meanings ऐसे प्रश्नों में उपयोगी हैं।

Q1. अधोलिखितम् अपठितगद्यांशं पठित्वा प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत।

संस्कृतभाषायां शब्दरूपाणां ज्ञानम् अत्यन्तम् आवश्यकम् अस्ति। शब्दः विभक्ति-वचन-लिङ्गानुसारं रूपं परिवर्तयति। पुंलिङ्गे, स्त्रीलिङ्गे और नपुंसकलिङ्गे शब्दानां रूपाणि भिन्नानि भवन्ति। ब्रह्मन्, विद्वस्, वाच्, सरित्, जगत्, कर्मन्, मनस् इत्यादयः शब्दाः विशेषरूपेण अभ्यासयोग्याः सन्ति। सुप्-प्रत्ययाः अपि शब्दरूपनिर्माणे महत्त्वपूर्णाः भवन्ति।

प्रश्नः: संस्कृतभाषायां किं अत्यन्तम् आवश्यकम् अस्ति?
उत्तरम्: संस्कृतभाषायां शब्दरूपाणां ज्ञानम् अत्यन्तम् आवश्यकम् अस्ति।

यह उत्तर गद्यांश की पहली पंक्ति से मिलता है। शब्दरूपों के बिना संस्कृत वाक्य में सही विभक्ति और वचन का प्रयोग कठिन हो जाता है।

Q2. शब्दः केन अनुसारं रूपं परिवर्तयति?

शब्दः विभक्ति-वचन-लिङ्गानुसारं रूपं परिवर्तयति।

अर्थात् एक ही शब्द प्रथमा, द्वितीया, तृतीया आदि विभक्तियों में अलग रूप लेता है। एकवचन, द्विवचन और बहुवचन के अनुसार भी रूप बदलता है।

Q3. केषु लिङ्गेषु शब्दानां रूपाणि भिन्नानि भवन्ति?

पुंलिङ्गे, स्त्रीलिङ्गे और नपुंसकलिङ्गे शब्दानां रूपाणि भिन्नानि भवन्ति।

उदाहरण के लिए “विद्वस्” पुंलिङ्ग है, “वाच्” स्त्रीलिङ्ग है और “मनस्” नपुंसकलिङ्ग है। इनके रूप एक-दूसरे से अलग बनते हैं।

Q4. गद्यांशे के शब्दाः अभ्यासयोग्याः उक्ताः?

गद्यांशे ब्रह्मन्, विद्वस्, वाच्, सरित्, जगत्, कर्मन्, मनस् इत्यादयः शब्दाः अभ्यासयोग्याः उक्ताः।

ये शब्द सामान्य अकारान्त शब्दों की तरह सरल नहीं हैं। इसलिए इनके रूपों को तालिका के अनुसार ध्यान से याद करना पड़ता है।

Q5. सुप्-प्रत्ययाः कुत्र महत्त्वपूर्णाः भवन्ति?

सुप्-प्रत्ययाः शब्दरूपनिर्माणे महत्त्वपूर्णाः भवन्ति।

सुप्-प्रत्यय विभक्ति और वचन को दिखाते हैं। प्रथमा से सप्तमी तक और सम्बोधन में रूप इन्हीं प्रत्ययों के आधार पर बनते हैं।

Section B: रचनात्मक-कार्यम् – 15 Marks

रचनात्मक-कार्यम् में शब्दरूप तालिका, लघु-अनुच्छेद, रूप-पहचान और रूप-प्रयोग से जुड़े प्रश्न आ सकते हैं। Important Questions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 15 में विभक्ति-वचन अभ्यास विशेष उपयोगी है।

Q6. मञ्जूषायाः साहाय्येन पत्रस्य रिक्तस्थानानि पूरयत।

मञ्जूषा: शब्दरूपाणि, विभक्तिः, विद्यालये, सुप्-प्रत्ययाः, नमः

प्रिय मित्र,
सप्रेम ______। अद्य अस्माकं ______ संस्कृतशिक्षकः ______ विषयं पाठितवान्। सः अवदत् यत् संस्कृते प्रत्येकं शब्दः ______ और वचनानुसारं रूपं परिवर्तयति। ______ शब्दरूपनिर्माणे महत्त्वपूर्णाः भवन्ति।
तव मित्रम्
निखिलः

उत्तरम्: नमः, विद्यालये, शब्दरूपाणि, विभक्तिः, सुप्-प्रत्ययाः।

यह पत्र Chapter 15 के मूल व्याकरण-विषय पर आधारित है। इसमें शब्दरूप, विभक्ति और सुप्-प्रत्यय तीनों प्रमुख शब्द आते हैं।

Q7. “शब्दरूपाणि” इति विषयम् आधृत्य पञ्च संस्कृतवाक्यानि लिखत।

शब्दरूपाणि संस्कृतव्याकरणस्य महत्त्वपूर्णः विषयः अस्ति।
शब्दः विभक्त्यनुसारं रूपं परिवर्तयति।
एकवचन-द्विवचन-बहुवचने रूपाणि भिन्नानि भवन्ति।
पुंलिङ्ग-स्त्रीलिङ्ग-नपुंसकलिङ्गेषु शब्दरूपाणि पृथक् भवन्ति।
सुप्-प्रत्ययाः शब्दरूपनिर्माणे साहाय्यं कुर्वन्ति।

ये वाक्य Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 15 important questions में लघु लेखन और परिभाषा-अभ्यास के लिए उपयोगी हैं।

Q8. “विभक्तिः” शब्देन द्वे संस्कृतवाक्ये लिखत।

संस्कृते सप्त विभक्तयः सन्ति।
विभक्तिः शब्दस्य वाक्ये सम्बन्धं सूचयति।

विभक्ति से पता चलता है कि शब्द कर्ता है, कर्म है, साधन है, सम्बन्ध है या अधिकरण है। इसलिए शब्दरूप अभ्यास में विभक्ति का ज्ञान अनिवार्य है।

Q9. हिन्दी वाक्यस्य संस्कृते अनुवादं कुरुत: शब्द विभक्ति के अनुसार बदलता है।

शब्दः विभक्त्यनुसारं परिवर्तते।

यह वाक्य Chapter 15 के मुख्य व्याकरण-भाव को सरल रूप में बताता है। शब्द का रूप वाक्य में उसके कार्य के अनुसार बदलता है।

Q10. हिन्दी वाक्यस्य संस्कृते अनुवादं कुरुत: मन शब्द नपुंसकलिंग है।

मनस् शब्दः नपुंसकलिङ्गः अस्ति।

“मनस्” नपुंसकलिङ्ग स-कारान्त शब्द है। इसके रूप हैं — मनः, मनसी, मनांसि आदि।

Q11. “ब्रह्मन्” शब्देन एकं संस्कृतवाक्यं रचयत।

ब्रह्मा जगतः स्रष्टा इति कथ्यते।

यहाँ “ब्रह्मन्” शब्द का प्रथमा-एकवचन रूप “ब्रह्मा” है। इसी शब्द के अन्य रूप ब्रह्माणम्, ब्रह्मणा, ब्रह्मणे आदि हैं।

Q12. “वाच्” शब्देन एकं संस्कृतवाक्यं लिखत।

वाक् मानवस्य विशेषः गुणः अस्ति।

“वाच्” स्त्रीलिङ्ग चकारान्त शब्द है। इसका प्रथमा-एकवचन रूप “वाग्” या “वाक्” रूप में मिलता है।

Section C: अनुप्रयुक्त-व्याकरणम् – 25 Marks

अनुप्रयुक्त-व्याकरणम् में Class 9 Sanskrit shabd roop questions, विभक्ति-वचन, लिङ्ग-पहचान, रिक्तस्थान और सुप्-प्रत्यय अभ्यास पूछे जा सकते हैं। इस पाठ में तालिका-आधारित प्रश्न बहुत महत्त्वपूर्ण हैं।

Q13. शब्दरूपाणि किम्?

विभक्ति, वचन और लिङ्ग के अनुसार शब्द के जो रूप बनते हैं, वे शब्दरूपाणि कहलाते हैं।

संस्कृत में एक शब्द वाक्य में अपने कार्य के अनुसार रूप बदलता है। इसलिए “कर्मन्” का रूप कभी “कर्म”, कभी “कर्मणा”, कभी “कर्मणि” और कभी “कर्मसु” होता है।

Q14. “ब्रह्मन्” शब्दस्य प्रथमा-विभक्तेः रूपाणि लिखत।

ब्रह्मन् शब्दस्य प्रथमा-विभक्तेः रूपाणि — ब्रह्मा, ब्रह्माणौ, ब्रह्माणः।

ये क्रमशः एकवचन, द्विवचन और बहुवचन रूप हैं। “ब्रह्मन्” पुंलिङ्ग न-कारान्त शब्द है।

Q15. “गुणिन्” शब्दस्य द्वितीया-विभक्तेः रूपाणि लिखत।

गुणिन् शब्दस्य द्वितीया-विभक्तेः रूपाणि — गुणिनम्, गुणिनौ, गुणिनः।

द्वितीया विभक्ति सामान्यतः कर्म के लिए प्रयुक्त होती है। “गुणिनम्” एक व्यक्ति के लिए, “गुणिनौ” दो के लिए और “गुणिनः” अनेक के लिए प्रयुक्त होता है।

Q16. “पथिन्” शब्दस्य तृतीया-विभक्तेः रूपाणि लिखत।

पथिन् शब्दस्य तृतीया-विभक्तेः रूपाणि — पथा, पथिभ्याम्, पथिभिः।

“पथा” का अर्थ है पथ से या मार्ग से। यह रूप विशेष है क्योंकि “पथिन्” शब्द के रूप सामान्य न-कारान्त शब्दों से भिन्न दिखते हैं।

Q17. “विद्वस्” शब्दस्य प्रथमा-विभक्तेः रूपाणि लिखत।

विद्वस् शब्दस्य प्रथमा-विभक्तेः रूपाणि — विद्वान्, विद्वांसौ, विद्वांसः।

“विद्वान्” का अर्थ है ज्ञानी व्यक्ति। यह स-कारान्त पुंलिङ्ग शब्द है और संस्कृत वाक्यों में बहुत उपयोगी है।

Q18. “चन्द्रमस्” शब्दस्य षष्ठी-विभक्तेः रूपाणि लिखत।

चन्द्रमस् शब्दस्य षष्ठी-विभक्तेः रूपाणि — चन्द्रमसः, चन्द्रमसोः, चन्द्रमसाम्।

षष्ठी विभक्ति सम्बन्ध बताती है। “चन्द्रमसः” का अर्थ हो सकता है “चन्द्रमा का”।

Q19. “वाच्” शब्दस्य तृतीया-विभक्तेः रूपाणि लिखत।

वाच् शब्दस्य तृतीया-विभक्तेः रूपाणि — वाचा, वाग्भ्याम्, वाग्भिः।

“वाचा” का अर्थ है वाणी से। यह रूप संस्कृत वाक्यों और श्लोकों में बहुत आता है।

Q20. “सरित्” शब्दस्य प्रथमा-विभक्तेः रूपाणि लिखत।

सरित् शब्दस्य प्रथमा-विभक्तेः रूपाणि — सरित्/सरिद्, सरितौ, सरितः।

“सरित्” स्त्रीलिङ्ग तकारान्त शब्द है। इसका अर्थ नदी है।

Q21. “जगत्” शब्दस्य द्वितीया-विभक्तेः रूपाणि लिखत।

जगत् शब्दस्य द्वितीया-विभक्तेः रूपाणि — जगत्/जगद्, जगती, जगन्ति।

नपुंसकलिङ्ग शब्दों में प्रथमा और द्वितीया विभक्ति के रूप समान होते हैं। इसलिए “जगत्” में प्रथमा और द्वितीया दोनों में यही रूप मिलते हैं।

Q22. “कर्मन्” शब्दस्य सप्तमी-विभक्तेः रूपाणि लिखत।

कर्मन् शब्दस्य सप्तमी-विभक्तेः रूपाणि — कर्मणि, कर्मणोः, कर्मसु।

सप्तमी विभक्ति अधिकरण या “में” का भाव बताती है। “कर्मणि” का अर्थ “कर्म में” हो सकता है।

Section D: पठित-अवबोधनम् – 30 Marks

पठित-अवबोधनम् में पुंलिङ्ग, स्त्रीलिङ्ग, नपुंसकलिङ्ग शब्दरूप, सुप्-प्रत्यय और विभक्ति-वचन पहचान से प्रश्न आ सकते हैं। Class 9 Sanskrit Chapter 15 questions answers के लिए तालिकाओं का नियमित अभ्यास आवश्यक है।

Q23. पाठे दत्ताः पुंलिङ्गशब्दाः के के सन्ति?

पाठे ब्रह्मन्, गुणिन्, पथिन्, विद्वस्, चन्द्रमस्, पुंस्, वेधस्, सहृद्, वणिज् और भिषज् जैसे पुंलिङ्ग शब्द दिए गए हैं।

इनमें कई शब्द अन्त्य व्यञ्जन से समाप्त होते हैं, इसलिए इनके रूप साधारण “राम” शब्द जैसे नहीं बनते। परीक्षा में इनसे रूप-पहचान और रिक्तस्थान पूछे जा सकते हैं।

Q24. पाठे दत्ताः स्त्रीलिङ्गशब्दाः के के सन्ति?

पाठे वाच्, त्वच्, स्रज्, रुज्, सरित्, विद्युत्, दिव् और दिश् जैसे स्त्रीलिङ्ग शब्द दिए गए हैं।

इनमें “वाच्” का रूप वाक्/वाग्, “दिश्” का रूप दिक्/दिग् और “दिव्” का रूप द्यौः जैसे विशेष रूपों में आता है। इसलिए इन्हें तालिका सहित पढ़ना चाहिए।

Q25. पाठे दत्ताः नपुंसकलिङ्गशब्दाः के के सन्ति?

पाठे जगत्, नामन्, कर्मन्, चर्मन्, मनस्, तपस्, पयस्, शिरस्, छन्दस् और चक्षुष् जैसे नपुंसकलिङ्ग शब्द दिए गए हैं।

नपुंसकलिङ्ग में प्रथमा और द्वितीया विभक्ति के रूप समान होते हैं। यह नियम इन शब्दों के अभ्यास में बहुत उपयोगी है।

Q26. “मनस्” शब्दस्य प्रथमा-विभक्तेः रूपाणि लिखत।

मनस् शब्दस्य प्रथमा-विभक्तेः रूपाणि — मनः, मनसी, मनांसि।

ये रूप नपुंसकलिङ्ग स-कारान्त शब्द के हैं। द्वितीया विभक्ति में भी यही रूप आते हैं।

Q27. “तपस्” शब्दस्य तृतीया-विभक्तेः रूपाणि लिखत।

तपस् शब्दस्य तृतीया-विभक्तेः रूपाणि — तपसा, तपोभ्याम्, तपोभिः।

“तपसा” का अर्थ है तप से। यह रूप Chapter 8 जैसे आध्यात्मिक प्रसंगों में भी उपयोगी हो सकता है।

Q28. “चक्षुष्” शब्दस्य प्रथमा-विभक्तेः रूपाणि लिखत।

चक्षुष् शब्दस्य प्रथमा-विभक्तेः रूपाणि — चक्षुः, चक्षुषी, चक्षूंषि।

“चक्षुः” का अर्थ नेत्र या आँख है। यह नपुंसकलिङ्ग ष-कारान्त शब्द है।

Q29. सुप्-प्रत्ययाः कति विभक्तिषु प्रयुज्यन्ते?

सुप्-प्रत्ययाः प्रथमा से सप्तमी तक सात विभक्तियों में तथा सम्बोधन में रूपनिर्माण के लिए प्रयुक्त होते हैं।

तालिका में प्रथमा के सु, औ, जस्; द्वितीया के अम्, औट्, शस्; तृतीया के टा, भ्याम्, भिस् आदि प्रत्यय दिए गए हैं। ये सभी लिङ्गों में विभक्ति-वचन की आधाररचना समझाते हैं।

Q30. प्रथमा-विभक्तेः सुप्-प्रत्ययाः के?

प्रथमा-विभक्तेः सुप्-प्रत्ययाः — सु, औ, जस्।

ये क्रमशः एकवचन, द्विवचन और बहुवचन के लिए हैं। इन प्रत्ययों से यह समझ आता है कि शब्दरूप केवल याद करने की चीज नहीं, बल्कि प्रत्यय-आधारित रूपनिर्माण है।

NCERT Class 9 Sanskrit Sharada Chapter-Wise Questions

Chapter No. Chapter Name
Chapter 1 सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम्
Chapter 2 सुखस्य मूलं धर्मः धर्मस्य मूलम् अर्थः
Chapter 3 आत्मवत्सर्वभूतेषु यः पश्यति सः पण्डितः
Chapter 4 न खलु वयस्तेजसो हेतुः
Chapter 5 एषा सा कृतकबुद्धिः मानवबुद्धेः सहकरी
Chapter 6 मनःपूतं समाचरेत्
Chapter 7 उपायं चिन्तयेत् प्राज्ञस्तथापायं च चिन्तयेत्
Chapter 8 अन्नाद् आनन्दं प्रति
Chapter 9 कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः
Chapter 10 णमो अरिहंताणम्
Chapter 11 वर्णोच्चारण-शिक्षा २
Chapter 12 अन्वयः
Chapter 13 समासः
Chapter 14 वाच्यम्
Chapter 16 धातुरूपाणि

FAQs (Frequently Asked Questions)

शब्दरूपाणि याद करने का सबसे आसान तरीका है कि पहले लिङ्ग, अन्त्य अक्षर और विभक्ति-वचन पहचानें। फिर रोज 3–4 कठिन शब्दों जैसे ब्रह्मन्, विद्वस्, वाच्, मनस् और कर्मन् के रूप लिखकर अभ्यास करें।

नपुंसकलिङ्ग शब्दों में प्रथमा और द्वितीया विभक्ति के रूप समान होते हैं। इसलिए “जगत्, जगती, जगन्ति” और “मनः, मनसी, मनांसि” दोनों विभक्तियों में आते हैं।

ब्रह्मन् पुंलिङ्ग शब्द है, इसलिए प्रथमा में ब्रह्मा, ब्रह्माणौ, ब्रह्माणः रूप आते हैं। कर्मन् नपुंसकलिङ्ग शब्द है, इसलिए प्रथमा और द्वितीया दोनों में कर्म, कर्मणी, कर्माणि रूप आते हैं।

Class 9 Sanskrit exams में ब्रह्मन्, गुणिन्, विद्वस्, वाच्, सरित्, दिश्, जगत्, कर्मन्, मनस्, तपस् और चक्षुष् जैसे शब्दरूप महत्त्वपूर्ण हो सकते हैं। ये शब्द सामान्य रूपों से अलग बनते हैं, इसलिए इनका अभ्यास जरूरी है।

सुप्-प्रत्ययाः वे प्रत्यय हैं जिनसे संज्ञा और सर्वनाम शब्दों के विभक्ति-वचन रूप बनते हैं। जैसे प्रथमा-विभक्ति में सु, औ, जस् और द्वितीया-विभक्ति में अम्, औट्, शस् प्रत्यय दिए जाते हैं।