Important Questions Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 16 धातुरूपाणि
धातुरूपाणि is a Class 9 Sanskrit Sharada grammar chapter that explains verb forms across लकार, पुरुष, वचन and पद.
For CBSE 2026-27 Class 9 Sanskrit exams, this chapter supports practice in अपठित-अवबोधनम्, रचनात्मक-कार्यम्, अनुप्रयुक्त-व्याकरणम् and पठित-अवबोधनम्.
धातुरूपाणि संस्कृत क्रिया-रचना का आधार हैं। इस अध्याय में परस्मैपदी धातुओं के लट्, लृट्, लङ्, लोट् और विधिलिङ् रूप दिए गए हैं। साथ ही णिच्-प्रत्ययान्त प्रेरणार्थक प्रयोग, आत्मनेपदी धातुओं के रूप, और वृध्, लभ्, शीङ्, भुज् जैसी धातुओं के विशेष रूप समझाए गए हैं। Important Questions Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 16 विद्यार्थियों को पुरुष-वचन पहचान, लकार-परिवर्तन, धातुरूप-पूर्ति, प्रेरणार्थक रूप और परस्मैपद-आत्मनेपद भेद के अभ्यास के लिए तैयार करते हैं।
Key Takeaways
- Chapter focus: धातुरूपाणि Class 9 धातुओं के पुरुष, वचन, लकार और पदानुसार रूप सिखाता है।
- Main coverage: पाठ में परस्मैपदी, आत्मनेपदी और विशिष्ट आत्मनेपदी धातुओं के रूप दिए गए हैं।
- Important forms: पठ्, वृध्, लभ्, शीङ् और भुज् धातुओं के रूप परीक्षा में उपयोगी हैं।
- Grammar value: Class 9 Sanskrit grammar practice में इस पाठ से लट्, लृट्, लङ्, लोट्, विधिलिङ्, णिच्-प्रत्यय और धातुरूप-पहचान पूछी जा सकती है।
Class 9 Sanskrit Exam Pattern 2026-27
| Section | Question Area | Marks |
| A | अपठित-अवबोधनम् | 10 |
| B | रचनात्मक-कार्यम् | 15 |
| C | अनुप्रयुक्त-व्याकरणम् | 25 |
| D | पठित-अवबोधनम् | 30 |
Section A: अपठित-अवबोधनम् – 10 Marks
अपठित-अवबोधनम् में धातु, लकार, पुरुष, वचन, परस्मैपद, आत्मनेपद और प्रेरणार्थक प्रयोग से जुड़ा गद्यांश आ सकता है। धातुरूपाणि word meanings ऐसे प्रश्नों में उपयोगी हैं।
Q1. अधोलिखितम् अपठितगद्यांशं पठित्वा प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत।
संस्कृतभाषायां धातुः क्रियायाः मूलरूपम् अस्ति। धातोः लकारानुसारं वर्तमानकालः, भविष्यत्कालः, भूतकालः, आज्ञा और सम्भावना व्यक्ता भवति। परस्मैपदी धातुषु पठति, पठिष्यति, अपठत्, पठतु, पठेत् इत्यादीनि रूपाणि भवन्ति। आत्मनेपदी धातुषु वर्धते, लभते, शयते, भुङ्क्ते इत्यादीनि रूपाणि भवन्ति। णिच्-प्रत्ययेन प्रेरणार्थक रूपाणि निर्मीयन्ते, जैसे पठ् धातोः पाठयति रूपम्।
प्रश्नः: संस्कृतभाषायां धातुः किम् अस्ति?
उत्तरम्: संस्कृतभाषायां धातुः क्रियायाः मूलरूपम् अस्ति।
धातु से ही क्रियापदों के अलग-अलग रूप बनते हैं। जैसे पठ् धातु से पठति, पठिष्यति, अपठत्, पठतु और पठेत् रूप बनते हैं।
Q2. धातोः लकारानुसारं किम् व्यक्तं भवति?
धातोः लकारानुसारं वर्तमानकालः, भविष्यत्कालः, भूतकालः, आज्ञा और सम्भावना व्यक्ता भवति।
लट् वर्तमानकाल, लृट् भविष्यत्काल, लङ् भूतकाल, लोट् आज्ञा और विधिलिङ् सम्भावना या विधि के अर्थ में प्रयुक्त होता है।
Q3. परस्मैपदी धातुषु कानि रूपाणि भवन्ति?
परस्मैपदी धातुषु पठति, पठिष्यति, अपठत्, पठतु, पठेत् इत्यादीनि रूपाणि भवन्ति।
ये रूप पठ् धातु के अलग-अलग लकारों में हैं। इनसे विद्यार्थी समझते हैं कि एक ही धातु काल और भाव के अनुसार बदलती है।
Q4. आत्मनेपदी धातुषु कानि रूपाणि भवन्ति?
आत्मनेपदी धातुषु वर्धते, लभते, शयते, भुङ्क्ते इत्यादीनि रूपाणि भवन्ति।
आत्मनेपदी धातुओं में प्रत्यय परस्मैपदी रूपों से अलग होते हैं। इसलिए इनके रूप अलग से याद करने पड़ते हैं।
Q5. णिच्-प्रत्ययेन किं निर्मीयते?
णिच्-प्रत्ययेन प्रेरणार्थक रूपाणि निर्मीयन्ते।
उदाहरण के लिए पठ् + णिच् से पाठयति बनता है, जिसका अर्थ है “पढ़ाता है”। इसी प्रकार लिख् से लेखयति और खाद् से खादयति बनता है।
Section B: रचनात्मक-कार्यम् – 15 Marks
रचनात्मक-कार्यम् में धातुरूप-तालिका, लघु-अनुच्छेद, धातु-प्रयोग और वाक्य-रचना पूछी जा सकती है। Important Questions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 16 में लकार और पुरुष-वचन अभ्यास विशेष महत्त्व रखता है।
Q6. मञ्जूषायाः साहाय्येन पत्रस्य रिक्तस्थानानि पूरयत।
मञ्जूषा: धातुरूपाणि, लकारः, विद्यालये, पाठयति, नमः
प्रिय मित्र,
सप्रेम ______। अद्य अस्माकं ______ संस्कृतशिक्षकः ______ विषयं पाठितवान्। सः अवदत् यत् धातोः रूपाणि पुरुष-वचनानुसारं भवन्ति। लट् ______ वर्तमानकालं बोधयति। पठ् धातोः णिच्-प्रत्ययान्तं रूपं ______ भवति।
तव मित्रम्
ईशानः
उत्तरम्: नमः, विद्यालये, धातुरूपाणि, लकारः, पाठयति।
यह पत्र Chapter 16 के मुख्य व्याकरण-विषय पर आधारित है। इसमें धातुरूप, लकार और णिच्-प्रत्यय तीनों आते हैं।
Q7. “धातुरूपाणि” इति विषयम् आधृत्य पञ्च संस्कृतवाक्यानि लिखत।
धातुरूपाणि संस्कृतव्याकरणस्य महत्त्वपूर्णः विषयः अस्ति।
धातोः रूपाणि लकारानुसारं भवन्ति।
लट्-लकारः वर्तमानकालं बोधयति।
लृट्-लकारः भविष्यत्कालं बोधयति।
लङ्-लकारः भूतकालं बोधयति।
ये वाक्य Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 16 important questions में लघु लेखन और परिभाषा-अभ्यास के लिए उपयोगी हैं।
Q8. “लकारः” शब्देन द्वे संस्कृतवाक्ये लिखत।
लकारः क्रियापदस्य कालं भावं च बोधयति।
संस्कृते लट्, लृट्, लङ्, लोट् और विधिलिङ् इत्यादयः लकाराः सन्ति।
लकार बदलने से धातु का अर्थ वर्तमान, भविष्य, भूत, आज्ञा या सम्भावना में बदलता है। इसलिए धातुरूपों में लकार-पहचान बहुत आवश्यक है।
Q9. हिन्दी वाक्यस्य संस्कृते अनुवादं कुरुत: बालक पढ़ता है।
बालकः पठति।
यह लट्-लकार का परस्मैपदी रूप है। “पठति” प्रथमपुरुष एकवचन रूप है।
Q10. हिन्दी वाक्यस्य संस्कृते अनुवादं कुरुत: शिक्षक पढ़ाता है।
शिक्षकः पाठयति।
यह णिच्-प्रत्ययान्त प्रेरणार्थक रूप है। “पठति” का अर्थ “पढ़ता है” और “पाठयति” का अर्थ “पढ़ाता है” होता है।
Q11. “वर्धते” शब्देन एकं संस्कृतवाक्यं रचयत।
वृक्षः वर्धते।
“वर्धते” आत्मनेपदी धातु वृध् का लट्-लकार प्रथमपुरुष एकवचन रूप है। इसका अर्थ है “बढ़ता है”।
Q12. “लभते” शब्देन एकं संस्कृतवाक्यं लिखत।
छात्रः ज्ञानं लभते।
“लभते” आत्मनेपदी धातु लभ् का लट्-लकार प्रथमपुरुष एकवचन रूप है। इसका अर्थ है “प्राप्त करता है”।
Section C: अनुप्रयुक्त-व्याकरणम् – 25 Marks
अनुप्रयुक्त-व्याकरणम् में Class 9 Sanskrit dhatu roop questions, पुरुष-वचन, लकार-पहचान, परस्मैपदी और आत्मनेपदी रूपों की पूर्ति पूछी जा सकती है। णिच्-प्रत्ययान्त प्रेरणार्थक रूप भी परीक्षा में उपयोगी हैं।
Q13. धातुरूपाणि किम्?
धातोः पुरुष, वचन, लकार और पदानुसार बने हुए क्रियारूप धातुरूपाणि कहलाते हैं।
संस्कृत में धातु मूल क्रिया है। उसी से “पठति”, “पठतः”, “पठन्ति”, “पठिष्यति”, “अपठत्” आदि रूप बनते हैं।
Q14. परस्मैपदी “पठ्” धातोः लट्-लकारस्य प्रथमपुरुषरूपाणि लिखत।
पठ् धातोः लट्-लकारस्य प्रथमपुरुषरूपाणि — पठति, पठतः, पठन्ति।
ये क्रमशः एकवचन, द्विवचन और बहुवचन रूप हैं। “सः पठति”, “तौ पठतः”, “ते पठन्ति” जैसे वाक्यों में इनका प्रयोग होता है।
Q15. “पठ्” धातोः लट्-लकारस्य मध्यमपुरुषरूपाणि लिखत।
पठ् धातोः लट्-लकारस्य मध्यमपुरुषरूपाणि — पठसि, पठथः, पठथ।
ये रूप “त्वं”, “युवाम्” और “यूयम्” के साथ आते हैं। जैसे त्वं पठसि, युवां पठथः, यूयं पठथ।
Q16. “पठ्” धातोः लट्-लकारस्य उत्तमपुरुषरूपाणि लिखत।
पठ् धातोः लट्-लकारस्य उत्तमपुरुषरूपाणि — पठामि, पठावः, पठामः।
ये “अहम्”, “आवाम्” और “वयम्” के साथ प्रयुक्त होते हैं। जैसे अहं पठामि, आवां पठावः, वयं पठामः।
Q17. “पठ्” धातोः लृट्-लकारस्य प्रथमपुरुषरूपाणि लिखत।
पठ् धातोः लृट्-लकारस्य प्रथमपुरुषरूपाणि — पठिष्यति, पठिष्यतः, पठिष्यन्ति।
लृट्-लकार भविष्यत्काल को सूचित करता है। इन रूपों का अर्थ है — वह पढ़ेगा, वे दोनों पढ़ेंगे, वे सब पढ़ेंगे।
Q18. “पठ्” धातोः लङ्-लकारस्य प्रथमपुरुषरूपाणि लिखत।
पठ् धातोः लङ्-लकारस्य प्रथमपुरुषरूपाणि — अपठत्, अपठताम्, अपठन्।
लङ्-लकार भूतकाल को सूचित करता है। इन रूपों में सामान्यतः “अ” आगम आरम्भ में आता है।
Q19. “पठ्” धातोः लोट्-लकारस्य प्रथमपुरुषरूपाणि लिखत।
पठ् धातोः लोट्-लकारस्य प्रथमपुरुषरूपाणि — पठतु/पठतात्, पठताम्, पठन्तु।
लोट्-लकार आज्ञा, आदेश या प्रेरणा के अर्थ में प्रयुक्त होता है। जैसे “सः पठतु” का अर्थ है “वह पढ़े।”
Q20. “पठ्” धातोः विधिलिङ्-लकारस्य प्रथमपुरुषरूपाणि लिखत।
पठ् धातोः विधिलिङ्-लकारस्य प्रथमपुरुषरूपाणि — पठेत्, पठेताम्, पठेयुः।
विधिलिङ् सम्भावना, इच्छा, विधि या चाहिए के भाव को सूचित करता है। जैसे “सः पठेत्” का अर्थ है “वह पढ़े/उसे पढ़ना चाहिए।”
Q21. “पठ्” धातोः णिच्-प्रत्ययान्तरूपं किम्?
पठ् धातोः णिच्-प्रत्ययान्तरूपं “पाठयति” भवति।
“पठति” का अर्थ है “पढ़ता है”, जबकि “पाठयति” का अर्थ है “पढ़ाता है”। इसलिए णिच्-प्रत्यय प्रेरणार्थक अर्थ देता है।
Q22. णिच्-प्रत्ययान्त धातूनां उदाहरणानि लिखत।
णिच्-प्रत्ययान्त धातूनां उदाहरणानि — पाठयति, लेखयति, खादयति, हासयति, चालयति, स्मारयति, पाययति, क्रीडयति, दर्शयति, गमयति।
इन रूपों में कोई व्यक्ति दूसरे से कार्य कराता है। जैसे “हासयति” का अर्थ है हँसाता है और “गमयति” का अर्थ है भेजता या ले जाता है।
Section D: पठित-अवबोधनम् – 30 Marks
पठित-अवबोधनम् में परस्मैपदी, आत्मनेपदी, लकार-रूप, णिच्-प्रत्यय, वृध्, लभ्, शीङ् और भुज् धातु पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं। Class 9 Sanskrit Chapter 16 questions answers के लिए तालिका-आधारित अभ्यास आवश्यक है।
Q23. आत्मनेपदी “वृध्” धातोः लट्-लकारस्य प्रथमपुरुषरूपाणि लिखत।
वृध् धातोः लट्-लकारस्य प्रथमपुरुषरूपाणि — वर्धते, वर्धेते, वर्धन्ते।
ये क्रमशः एकवचन, द्विवचन और बहुवचन रूप हैं। जैसे वृक्षः वर्धते, वृक्षौ वर्धेते, वृक्षाः वर्धन्ते।
Q24. “वृध्” धातोः लट्-लकारस्य मध्यमपुरुषरूपाणि लिखत।
वृध् धातोः लट्-लकारस्य मध्यमपुरुषरूपाणि — वर्धसे, वर्धेथे, वर्धध्वे।
ये आत्मनेपदी प्रत्यय हैं। इनका प्रयोग त्वं, युवाम् और यूयम् के साथ होता है।
Q25. “लभ्” धातोः लट्-लकारस्य प्रथमपुरुषरूपाणि लिखत।
लभ् धातोः लट्-लकारस्य प्रथमपुरुषरूपाणि — लभते, लभेते, लभन्ते।
“लभते” का अर्थ है प्राप्त करता है। यह आत्मनेपदी धातु है और इसके रूप परस्मैपदी पठ् धातु से अलग हैं।
Q26. “वृध्” धातोः लृट्-लकारस्य प्रथमपुरुषरूपाणि लिखत।
वृध् धातोः लृट्-लकारस्य प्रथमपुरुषरूपाणि — वर्धिष्यते, वर्धिष्येते, वर्धिष्यन्ते।
लृट्-लकार भविष्यत्काल का बोध कराता है। इन रूपों का अर्थ है — बढ़ेगा, दोनों बढ़ेंगे, अनेक बढ़ेंगे।
Q27. “लभ्” धातोः लृट्-लकारस्य प्रथमपुरुषरूपाणि लिखत।
लभ् धातोः लृट्-लकारस्य प्रथमपुरुषरूपाणि — लप्स्यते, लप्स्येते, लप्स्यन्ते।
“लभ्” धातु का भविष्यत्काल रूप विशेष है, क्योंकि यह “लभिष्यते” नहीं, बल्कि “लप्स्यते” रूप में आता है। इसलिए इसे अलग से याद करना चाहिए।
Q28. “शीङ्” धातोः लट्-लकारस्य प्रथमपुरुषरूपाणि लिखत।
शीङ् धातोः लट्-लकारस्य प्रथमपुरुषरूपाणि — शेते, शयाते, शेरते।
“शीङ्” धातु का अर्थ है सोना। यह विशिष्ट आत्मनेपदी धातु है और इसके रूप सामान्य धातुओं से अलग हैं।
Q29. “भुज्” धातोः लट्-लकारस्य प्रथमपुरुषरूपाणि लिखत।
भुज् धातोः लट्-लकारस्य प्रथमपुरुषरूपाणि — भुङ्क्ते, भुञ्जाते, भुञ्जते।
“भुज्” धातु का अर्थ है भोजन करना या भोग करना। इसके रूप विशेष हैं, इसलिए परीक्षा में रूप-पहचान के लिए उपयोगी हैं।
Q30. “भुज्” धातोः लृट्-लकारस्य प्रथमपुरुषरूपाणि लिखत।
भुज् धातोः लृट्-लकारस्य प्रथमपुरुषरूपाणि — भोक्ष्यते, भोक्ष्येते, भोक्ष्यन्ते।
ये भविष्यत्काल के आत्मनेपदी रूप हैं। “सः भोक्ष्यते” का अर्थ है “वह खाएगा/भोग करेगा।”
NCERT Class 9 Sanskrit Sharada Chapter-Wise Questions
| Chapter No. | Chapter Name |
| Chapter 1 | सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम् |
| Chapter 2 | सुखस्य मूलं धर्मः धर्मस्य मूलम् अर्थः |
| Chapter 3 | आत्मवत्सर्वभूतेषु यः पश्यति सः पण्डितः |
| Chapter 4 | न खलु वयस्तेजसो हेतुः |
| Chapter 5 | एषा सा कृतकबुद्धिः मानवबुद्धेः सहकरी |
| Chapter 6 | मनःपूतं समाचरेत् |
| Chapter 7 | उपायं चिन्तयेत् प्राज्ञस्तथापायं च चिन्तयेत् |
| Chapter 8 | अन्नाद् आनन्दं प्रति |
| Chapter 9 | कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः |
| Chapter 10 | णमो अरिहंताणम् |
| Chapter 11 | वर्णोच्चारण-शिक्षा २ |
| Chapter 12 | अन्वयः |
| Chapter 13 | समासः |
| Chapter 14 | वाच्यम् |
| Chapter 15 | शब्दरूपाणि |
FAQs (Frequently Asked Questions)
धातुरूपाणि सीखने के लिए पहले धातु, पद, लकार, पुरुष और वचन पहचानें। फिर एक धातु को पाँचों लकारों में बोलकर और लिखकर अभ्यास करें, जैसे पठ् धातु से पठति, पठिष्यति, अपठत्, पठतु और पठेत्।
पठति means “reads,” while पाठयति means “teaches” or “causes someone to read.” पाठयति is formed with णिच्-प्रत्यय, which gives प्रेरणार्थक meaning.
The five लकार forms commonly practised here are लट्, लृट्, लङ्, लोट् and विधिलिङ्. They express present, future, past, command and possibility or advice.
परस्मैपदी धातु uses forms like पठति, पठतः, पठन्ति, while आत्मनेपदी धातु uses forms like वर्धते, लभते, शेते and भुङ्क्ते. Their endings are different, so they must be practised separately.
पठ्, वृध्, लभ्, शीङ् and भुज् are important because this chapter gives their detailed forms. णिच्-प्रत्ययान्त forms like पाठयति, लेखयति, दर्शयति and गमयति are also useful for exam practice.