Important Questions Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 2 सुखस्य मूलं धर्मः धर्मस्य मूलम् अर्थः

सुखस्य मूलं धर्मः धर्मस्य मूलम् अर्थः is a Class 9 Sanskrit Sharada chapter on the link between wealth, duty, ethical earning and balanced living. For CBSE 2026-27 Class 9 Sanskrit exams, this chapter supports practice in अपठित-अवबोधनम्, रचनात्मक-कार्यम्, अनुप्रयुक्त-व्याकरणम् and पठित-अवबोधनम्.

धन को इस पाठ में केवल खर्च की वस्तु नहीं, बल्कि धर्मपालन, शिक्षा, स्वास्थ्य, सेवा, दान और स्वावलम्बन का आधार बताया गया है। कौटिल्य के अर्थशास्त्र का वाक्य “सुखस्य मूलं धर्मः, धर्मस्य मूलम् अर्थः” पूरे पाठ का मुख्य विचार देता है। Important Questions Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 2 विद्यार्थियों को आर्थिकसाक्षरता, न्यायपूर्ण अर्थोपार्जन, औचित्यपूर्ण व्यय, सञ्चय और चक्रवृद्ध्यंश जैसे विषयों पर अभ्यास कराते हैं। CBSE 2026-27 परीक्षा में इस अध्याय से पठित-अवबोधनम्, शब्दार्थ, समास-विग्रह, प्रश्ननिर्माण और विकल्प-आधारित प्रश्न पूछे जा सकते हैं।

Key Takeaways

  • Central idea: सुखस्य मूलं धर्मः धर्मस्य मूलम् अर्थः Class 9 में धन, धर्म और सुख का परस्पर सम्बन्ध समझाया गया है।
  • Economic conduct: पाठ न्यायपूर्ण अर्थोपार्जन, औचित्यपूर्ण व्यय, भविष्यदृष्ट्या सञ्चय और उचित निवेश पर बल देता है।
  • Student relevance: आर्थिकसाक्षरता के माध्यम से छात्र अपव्यय, त्वरिताहार, शीतपेय और प्रदर्शनकारी खर्च से बचना सीखते हैं।
  • Grammar value: Class 9 Sanskrit grammar practice के लिए पाठ में समास-विग्रह, शब्दार्थ, प्रश्ननिर्माण और क्रियापद रूपों का अच्छा अभ्यास है।

Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 2 Exam Pattern 2026-27

Section Question Area Marks
A अपठित-अवबोधनम् 10
B रचनात्मक-कार्यम् 15
C अनुप्रयुक्त-व्याकरणम् 25
D पठित-अवबोधनम् 30

Section A: अपठित-अवबोधनम् – 10 Marks

अपठित-अवबोधनम् में धन, धर्म, सञ्चय और आर्थिकसाक्षरता जैसे विषयों पर छोटा गद्यांश आ सकता है। Sanskrit Chapter 2 आर्थिकसाक्षरता से जुड़े शब्द ऐसे प्रश्नों में उपयोगी रहते हैं।

Q1. अधोलिखितम् अपठितगद्यांशं पठित्वा प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत।

धनं जीवनस्य आवश्यकं साधनम् अस्ति। धनेन मनुष्यः अन्नं, वस्त्रं, आवासं, शिक्षां, स्वास्थ्यसेवां च प्राप्नोति। किन्तु धनस्य अर्जनं न्यायेन करणीयम्। अनैतिकः आर्थिकव्यवहारः समाजस्य कृते हानिकरः भवति। अतः छात्रैः अपव्ययः त्यक्तव्यः, सञ्चयः च कर्तव्यः।

प्रश्नः: धनं जीवनस्य कीदृशं साधनम् अस्ति?
उत्तरम्: धनं जीवनस्य आवश्यकं साधनम् अस्ति।

उत्तर गद्यांश की पहली पंक्ति से मिलता है। यहाँ धन को जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं से जोड़ा गया है।

Q2. उपर्युक्तगद्यांशे मनुष्यः धनेन कानि प्राप्नोति?

मनुष्यः धनेन अन्नं, वस्त्रं, आवासं, शिक्षां, स्वास्थ्यसेवां च प्राप्नोति।

यह उत्तर धन की सामाजिक उपयोगिता बताता है। पाठ में भी सामान्यजीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए धन को आवश्यक कहा गया है।

Q3. गद्यांशानुसार धनस्य अर्जनं कथं करणीयम्?

धनस्य अर्जनं न्यायेन करणीयम्।

यह विचार Chapter 2 के “न्यायपूर्णम् अर्थोपार्जनम्” भाग से जुड़ा है। धन कमाने का मार्ग नैतिक होना चाहिए।

Q4. “अनैतिकः आर्थिकव्यवहारः” इति पदस्य अर्थं लिखत।

“अनैतिकः आर्थिकव्यवहारः” इति पदस्य अर्थः अन्याययुक्तः धनविषयकः व्यवहारः।

ऐसा आर्थिक व्यवहार समाज और व्यक्ति दोनों के लिए हानिकर होता है। पाठ में इसे कदापि न करणीयः कहा गया है।

Q5. गद्यांशात् एकं कर्तव्यवाचकं पदं लिखत।

कर्तव्यवाचकं पदम् — करणीयम्।

“करणीयम्” का अर्थ है किया जाना चाहिए। संस्कृत में यह कर्तव्य या आवश्यकता को व्यक्त करता है।

Section B: रचनात्मक-कार्यम् – 15 Marks

रचनात्मक-कार्यम् में पत्र, वाक्य-रचना, चित्रवर्णन और अनुवाद के प्रश्न पूछे जा सकते हैं। Important Questions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 2 में धनसञ्चय, अपव्यय और आर्थिकसाक्षरता अच्छे लेखन-विषय बनते हैं।

Q6. मञ्जूषायाः साहाय्येन पत्रस्य रिक्तस्थानानि पूरयत।

मञ्जूषा: सञ्चयः, अपव्ययः, धनम्, विद्यालये, नमः

प्रिय मित्र,
सप्रेम ______। अस्माकं ______ आर्थिकसाक्षरता-विषये कार्यक्रमः अभवत्। शिक्षकः अवदत् यत् ______ आवश्यकं साधनम् अस्ति। छात्रैः ______ न करणीयः। अल्पधनस्य अपि ______ करणीयः।
तव मित्रम्
मोहनः

उत्तरम्: नमः, विद्यालये, धनम्, अपव्ययः, सञ्चयः।

यह पत्र Chapter 2 के प्रमुख विषयों पर आधारित है। इसमें धन, अपव्यय और सञ्चय जैसे शब्द स्वाभाविक रूप से आते हैं।

Q7. “आर्थिकसाक्षरता” इति विषयम् आधृत्य पञ्च संस्कृतवाक्यानि लिखत।

आर्थिकसाक्षरता जीवनस्य आवश्यकः गुणः अस्ति।
धनस्य न्यायपूर्णम् अर्जनं करणीयम्।
आवश्यकतानुसारं व्ययः करणीयः।
अपव्ययः सर्वदा वर्जनीयः।
भविष्याय धनस्य सञ्चयः करणीयः।

ये वाक्य Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 2 important questions में रचनात्मक अभ्यास के लिए उपयोगी हैं।

Q8. “अपव्ययः” शब्देन द्वे संस्कृतवाक्ये लिखत।

अपव्ययः धनहानिं करोति।
छात्रैः अपव्ययः न करणीयः।

पाठ में त्वरिताहार, शीतपेय, पुटीकृतभोजन और प्रदर्शनकारी परिधान को अपव्यय से जोड़ा गया है।

Q9. हिन्दी वाक्यस्य संस्कृते अनुवादं कुरुत: धन का संचय करना चाहिए।

धनस्य सञ्चयः करणीयः।

यह वाक्य “भविष्यदृष्ट्या सञ्चयः” विचार से जुड़ा है। पाठ में सञ्चय को स्वावलम्बन का साधन बताया गया है।

Q10. हिन्दी वाक्यस्य संस्कृते अनुवादं कुरुत: धन धर्म का आधार है।

अर्थः धर्मस्य मूलम् अस्ति।

यह अनुवाद अध्याय के शीर्ष वाक्य से जुड़ा है। “धर्मस्य मूलम् अर्थः” पाठ का मुख्य सूत्र है।

Q11. “स्वावलम्बनम्” शब्देन एकं संस्कृतवाक्यं रचयत।

स्वावलम्बनं स्वाभिमानस्य मूलं वर्तते।

यह वाक्य पाठ से ही लिया गया भाव है। सञ्चय के अभ्यास से मनुष्य स्वावलम्बी बनता है।

Q12. “निवेशः” शब्देन एकं सरलवाक्यं लिखत।

उचितः निवेशः धनवृद्धेः साधनम् अस्ति।

पाठ में जनधनयोजना, पीपीएफ, एनएससी, एफडी और आरडी जैसे सुरक्षित निवेश-मार्गों का उल्लेख है।

Section C: अनुप्रयुक्त-व्याकरणम् – 25 Marks

अनुप्रयुक्त-व्याकरणम् में Class 9 Sanskrit samasa practice, शब्दार्थ, रिक्तस्थान, प्रश्ननिर्माण और क्रियापद रूप पूछे जा सकते हैं। सुखस्य मूलं धर्मः धर्मस्य मूलम् अर्थः word meanings इस भाग में बहुत उपयोगी हैं।

Q13. “अर्थोपार्जनम्” इति समस्तपदस्य विग्रहं कुरुत।

अर्थस्य उपार्जनम्।

इसका अर्थ है धन कमाना। पाठ में न्यायपूर्ण अर्थोपार्जन को आर्थिक व्यवहार का पहला आधार कहा गया है।

Q14. “आर्थिकव्यवहारः” इति पदस्य विग्रहं कुरुत।

धनविषयकः व्यवहारः।

यह पद धन से जुड़े आचरण और लेन-देन को बताता है। पाठ में स्वस्थ आर्थिकव्यवहार को तीन प्रकार का कहा गया है।

Q15. “आर्थिकसाक्षरता” इति समस्तपदस्य विग्रहं कुरुत।

आर्थिकी साक्षरता।

इसका अर्थ है धन के सही उपयोग, सञ्चय और निवेश की समझ। यह Chapter 2 का छात्रजीवन से जुड़ा मुख्य विषय है।

Q16. “कष्टार्जितधनस्य” इति पदस्य विग्रहं कुरुत।

कष्टेन अर्जितं धनम्, तस्य।

इसका अर्थ है परिश्रम से कमाए हुए धन का। पाठ में छात्रों को माता-पिता के कष्टार्जित धन का अपव्यय न करने की सीख दी गई है।

Q17. रिक्तस्थानं पूरयत: सुखस्य मूलं ______।

सुखस्य मूलं धर्मः।

यह वाक्य कौटिल्य के अर्थशास्त्र से जुड़ा है। इसके अनुसार वास्तविक सुख का आधार धर्म है।

Q18. रिक्तस्थानं पूरयत: धर्मस्य मूलम् ______।

धर्मस्य मूलम् अर्थः।

धर्मपालन के लिए धन की आवश्यकता होती है। इसलिए पाठ अर्थ को धर्म का आधार मानता है।

Q19. “अपव्ययः” इति शब्दस्य अर्थं लिखत।

अपव्ययः इति शब्दस्य अर्थः व्यर्थव्ययः।

अनुचित और दिखावे वाला खर्च अपव्यय कहलाता है। पाठ में इसे वर्जनीय कहा गया है।

Q20. “आजीविका” इति शब्दस्य अर्थं लिखत।

आजीविका इति शब्दस्य अर्थः वृत्तिः अथवा व्यवसायः।

धन आजीविकाव्यवहार का प्रमुख साधन है। इसीलिए अर्थ जीवन की आवश्यकताओं से जुड़ा है।

Q21. रेखाङ्कितपदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत: सुखस्य मूलं धर्मः।

कस्य मूलं धर्मः?

यह प्रश्न “सुखस्य” पद पर आधारित है। उत्तर होगा — सुखस्य मूलं धर्मः।

Q22. रेखाङ्कितपदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत: सन्मार्गेण एव धनार्जनं करणीयम्।

केन एव धनार्जनं करणीयम्?

यहाँ “सन्मार्गेण” पद पर प्रश्न बनाया गया है। उत्तर में साधन या मार्ग पूछा जाता है।

Section D: पठित-अवबोधनम् – 30 Marks

पठित-अवबोधनम् में पाठ्य गद्यांश, सूक्तियाँ, श्लोक, कवि/ग्रन्थ-सन्दर्भ और भावार्थ पूछे जा सकते हैं। Class 9 Sanskrit Chapter 2 questions answers के लिए धन, धर्म, सञ्चय और चक्रवृद्ध्यंश के विचार स्पष्ट होने चाहिए।

Q23. “सुखस्य मूलं धर्मः, धर्मस्य मूलम् अर्थः” इति वाक्यं कस्मिन् ग्रन्थे प्राप्यते?

इदं प्रसिद्धं वाक्यं कौटिल्यस्य अर्थशास्त्रे प्राप्यते।

इसका आशय है कि वास्तविक सुख का आधार धर्म है। धर्मपालन के लिए अर्थ आवश्यक साधन है।

Q24. सामान्यजीवने धनं कासां आवश्यकतानां पूर्तये आवश्यकम्?

सामान्यजीवने धनम् अन्न, वस्त्र, आवास, शिक्षा और स्वास्थ्यसेवा की पूर्ति के लिए आवश्यकम्।

धन के अभाव में कर्तव्यपालन कठिन हो जाता है। सेवा, दान, शिक्षा और स्वास्थ्य भी बाधित होते हैं।

Q25. स्वस्थः आर्थिकव्यवहारः कतिविधः भवति?

स्वस्थः आर्थिकव्यवहारः त्रिविधः भवति।

ये तीन हैं — न्यायपूर्ण अर्थोपार्जनम्, औचित्यपूर्ण व्ययः और भविष्यदृष्ट्या सञ्चयः। पाठ का आर्थिक विचार इन्हीं पर आधारित है।

Q26. “सर्वेषामेव शौचानामर्थशौचं परं स्मृतम्” इति श्लोकस्य आशयः कः?

इस श्लोक का आशय है कि धन के विषय में शुद्धता सबसे श्रेष्ठ मानी गई है।

मिट्टी या जल से बाहरी शुद्धि होती है। परन्तु धन कमाने में नैतिक शुद्धि अधिक महत्वपूर्ण है।

Q27. औचित्यपूर्णः व्ययः कः भवति?

आवश्यकतानुसार किया गया व्यय औचित्यपूर्णः व्ययः भवति।

स्वास्थ्य, शिक्षा और आत्मसुरक्षा पर किया गया खर्च उचित है। आडम्बर और व्यसन के लिए खर्च अपव्यय माना गया है।

Q28. सञ्चयस्य अभ्यासेन जनः कीदृशः भवति?

सञ्चयस्य अभ्यासेन जनः स्वावलम्बी भवति।

स्वावलम्बन स्वाभिमान का मूल है। संकट के समय स्वाभिमानी व्यक्ति दूसरों की आर्थिक सहायता पर निर्भर नहीं रहता।

Q29. “जलबिन्दुनिपातेन क्रमशः पूर्यते घटः” इति वाक्यस्य भावं लिखत।

इस वाक्य का भाव है कि छोटे-छोटे प्रयासों से बड़ा परिणाम प्राप्त होता है।

जिस प्रकार जल की बूँदों से घड़ा भरता है, उसी प्रकार थोड़ा-थोड़ा सञ्चय समय के साथ बड़ी सम्पत्ति बन सकता है।

Q30. चक्रवृद्ध्यंशः किम्?

चक्रवृद्ध्यंशः सः वृद्ध्यंशः अस्ति यस्मिन् मूलधनेन सह वृद्ध्यंशस्य उपरि अपि वृद्ध्यंशः अर्ज्यते।

इससे कालान्तर में धन की वृद्धि तेज होती है। पाठ में इसे दीर्घकालीन सञ्चय और निवेश का उपयोगी साधन बताया गया है।

NCERT Class 9 Sanskrit Sharada Chapter-Wise Questions

Chapter No. Chapter Name
Chapter 1 सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम्
Chapter 3 आत्मवत्सर्वभूतेषु यः पश्यति सः पण्डितः
Chapter 4 न खलु वयस्तेजसो हेतुः
Chapter 5 एषा सा कृतकबुद्धिः मानवबुद्धेः सहकरी
Chapter 6 मनःपूतं समाचरेत्
Chapter 7 उपायं चिन्तयेत् प्राज्ञस्तथापायं च चिन्तयेत्
Chapter 8 अन्नाद् आनन्दं प्रति
Chapter 9 कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः
Chapter 10 णमो अरिहंताणम्
Chapter 11 वर्णोच्चारण-शिक्षा २
Chapter 12 अन्वयः
Chapter 13 समासः
Chapter 14 वाच्यम्
Chapter 15 शब्दरूपाणि
Chapter 16 धातुरूपाणि

FAQs (Frequently Asked Questions)

सुखस्य मूलं धर्मः धर्मस्य मूलम् अर्थः means that dharma is the root of happiness, and wealth is the root of dharma. The line shows that ethical wealth supports duty and balanced living.

The statement सुखस्य मूलं धर्मः धर्मस्य मूलम् अर्थः is found in कौटिल्यस्य अर्थशास्त्रम्. In Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 2, it becomes the main idea of the lesson.

अर्थोपार्जनम् means earning wealth. In this chapter, न्यायपूर्णम् अर्थोपार्जनम् means wealth should be earned through fair and ethical means.

अपव्ययः means unnecessary or wasteful expense. The chapter connects अपव्ययः with fast food, soft drinks, packaged food, fashionable clothing and luxury habits.

चक्रवृद्ध्यंशः means compound interest. It is interest earned on the original amount and also on the interest already added to that amount.