Important Questions Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 9 कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः
कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः is a Class 9 Sanskrit Sharada chapter based on the Baka-vadha episode from Mahabharata.
For CBSE 2026-27 Class 9 Sanskrit exams, this chapter supports practice in अपठित-अवबोधनम्, रचनात्मक-कार्यम्, अनुप्रयुक्त-व्याकरणम् and पठित-अवबोधनम्.
एकचक्रनगर में पाण्डव एक ब्राह्मण के घर रहते हैं। नगरवासी बक नामक दैत्य को प्रतिदिन भोजन और एक मनुष्य भेजते हैं। जब ब्राह्मण परिवार की बारी आती है, तब कुन्ती उपकार का प्रत्युपकार करने के लिए अपने पुत्रों में से एक को भेजने की प्रतिज्ञा करती है। भीम इस धर्म को स्वीकार करता है और बकासुर-वध के लिए जाता है। Important Questions Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 9 विद्यार्थियों को पात्र-सम्बन्ध, संवाद, श्लोकभाव, बकासुर-वध, सन्धि, समास, विशेषण-विशेष्य और वाच्यपरिवर्तन के अभ्यास के लिए तैयार करते हैं।
Key Takeaways
- Chapter focus: कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः Class 9 उपकार के प्रत्युपकार और क्षत्रिय-धर्म का पाठ सिखाता है।
- Story source: यह पाठ श्रीरङ्गनाथशर्मा के लघुरूपक एकचक्रम् से लिया गया है, जिसका कथावस्तु महाभारत का बकासुर-वध प्रसंग है।
- Main characters: कुन्ती, भीम, युधिष्ठिर, अर्जुन, नकुल, सहदेव और बकासुर इस नाट्य-भाग के प्रमुख पात्र हैं।
- Grammar value: Class 9 Sanskrit grammar practice में इस पाठ से सन्धि-विच्छेद, समास, पर्याय, विपरीतार्थक शब्द और वाच्यपरिवर्तन पूछा जा सकता है।
Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 9 Exam Pattern 2026-27
| Section | Question Area | Marks |
| A | अपठित-अवबोधनम् | 10 |
| B | रचनात्मक-कार्यम् | 15 |
| C | अनुप्रयुक्त-व्याकरणम् | 25 |
| D | पठित-अवबोधनम् | 30 |
Section A: अपठित-अवबोधनम् – 10 Marks
अपठित-अवबोधनम् में उपकार, प्रत्युपकार, साहस, क्षत्रिय-धर्म और लोक-रक्षा से जुड़ा गद्यांश आ सकता है। कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः word meanings ऐसे प्रश्नों में उपयोगी हैं।
Q1. अधोलिखितम् अपठितगद्यांशं पठित्वा प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत।
एकस्मिन् नगरे एकः ब्राह्मणः पाण्डवान् स्वगृहे अतिथिरूपेण स्थापयति स्म। ते तस्य गृहे निवसन्तः भैक्षप्रदानेन पोषिताः आसन्। एकदा ब्राह्मणस्य परिवारः महतीं विपत्तिं प्राप्तवान्। तदा कुन्ती अवदत् — “उपकारस्य प्रत्युपकारः कर्तव्यः।” भीमः अपि ब्राह्मणस्य रक्षणाय सज्जः अभवत्।
प्रश्नः: ब्राह्मणः कान् स्वगृहे स्थापयति स्म?
उत्तरम्: ब्राह्मणः पाण्डवान् स्वगृहे स्थापयति स्म।
यह उत्तर गद्यांश की पहली पंक्ति से मिलता है। पाठ में पाण्डव एकचक्रनगर में ब्राह्मण के घर रहते हैं।
Q2. पाण्डवाः केन पोषिताः आसन्?
पाण्डवाः भैक्षप्रदानेन पोषिताः आसन्।
भीम भी यही कहता है कि वे दीर्घकाल तक भिक्षा-प्रदान से उपकृत हुए। इसलिए प्रत्युपकार करना सनातन धर्म है।
Q3. ब्राह्मणस्य परिवारः किं प्राप्तवान्?
ब्राह्मणस्य परिवारः महतीं विपत्तिं प्राप्तवान्।
वह विपत्ति बकासुर को भोजन और मनुष्य भेजने की बारी से जुड़ी है। कुन्ती परिवार की पीड़ा देखकर प्रतिज्ञा करती है।
Q4. कुन्ती किम् अवदत्?
कुन्ती अवदत् — “उपकारस्य प्रत्युपकारः कर्तव्यः।”
यह भाव पाठ के शीर्षक से जुड़ा है। जिसने उपकार किया है, उसके प्रति उत्तर-उपकार करना धर्म माना गया है।
Q5. गद्यांशात् एकं भूतकालसूचकं पदं लिखत।
भूतकालसूचकं पदम् — अभवत्।
“अभवत्” लङ्लकार का रूप है। इसका अर्थ है “हुआ”।
Section B: रचनात्मक-कार्यम् – 15 Marks
रचनात्मक-कार्यम् में पत्र, संवाद, वाक्य-रचना और अनुवाद के प्रश्न आ सकते हैं। Important Questions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 9 में उपकार, प्रत्युपकार, वीरता और धर्म अच्छे लेखन-विषय हैं।
Q6. मञ्जूषायाः साहाय्येन पत्रस्य रिक्तस्थानानि पूरयत।
मञ्जूषा: भीमः, एकचक्रनगरे, प्रत्युपकारः, बकासुरम्, नमः
प्रिय मित्र,
सप्रेम ______। अद्य अस्माकं कक्षायां पाण्डवानां कथा पठिता। पाण्डवाः ______ ब्राह्मणस्य गृहे निवसन्ति स्म। कुन्ती अवदत् यत् उपकारस्य ______ करणीयः। अतः ______ ______ हन्तुं गतवान्।
तव मित्रम्
आदित्यः
उत्तरम्: नमः, एकचक्रनगरे, प्रत्युपकारः, भीमः, बकासुरम्।
यह पत्र Chapter 9 की मुख्य घटना पर आधारित है। इसमें भीम, बकासुर और प्रत्युपकार जैसे मुख्य शब्द आते हैं।
Q7. “उपकारः” इति विषयम् आधृत्य पञ्च संस्कृतवाक्यानि लिखत।
उपकारः श्रेष्ठः धर्मः अस्ति।
उपकारस्य प्रत्युपकारः करणीयः।
ब्राह्मणः पाण्डवानाम् उपकर्ता आसीत्।
भीमः ब्राह्मणस्य रक्षणाय बकासुरम् अभिगतवान्।
सज्जनाः उपकारं न विस्मरन्ति।
ये वाक्य Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 9 important questions में लेखन अभ्यास के लिए उपयोगी हैं।
Q8. “भीमः” शब्देन द्वे संस्कृतवाक्ये लिखत।
भीमः बकासुरम् अभिगमिष्यति।
भीमः राक्षसध्वंसी वीरः अस्ति।
भीम इस पाठ का मुख्य वीर पात्र है। वह ब्राह्मण परिवार की रक्षा के लिए स्वयं जाता है।
Q9. हिन्दी वाक्यस्य संस्कृते अनुवादं कुरुत: भीम बकासुर को मारेगा।
भीमः बकासुरं हनिष्यति।
यह वाक्य पाठ के युद्ध-प्रसंग से जुड़ा है। “हनिष्यति” भविष्यत्काल का रूप है।
Q10. हिन्दी वाक्यस्य संस्कृते अनुवादं कुरुत: क्षत्रियों का धर्म रक्षा करना है।
क्षत्रियाणां धर्मः रक्षणम् अस्ति।
पाठ में भीम कहता है कि नररक्षणं भूमिपालानां क्षत्रियाणां धर्मः। यही बकासुर से युद्ध का आधार है।
Q11. “आयोधनम्” शब्देन एकं संस्कृतवाक्यं रचयत।
भीमस्य बकासरेण सह आयोधनम् अभवत्।
“आयोधनम्” का अर्थ है युद्ध। भीम के लिए भोजन के साथ युद्ध भी उपस्थित था।
Q12. “कुन्ती” शब्देन एकं संस्कृतवाक्यं लिखत।
कुन्ती ब्राह्मणाय किञ्चित् प्रतिश्रुतवती।
यह वाक्य पाठ के आरम्भिक संवाद से जुड़ा है। कुन्ती ब्राह्मण परिवार के दुःख को देखकर वचन देती है।
Section C: अनुप्रयुक्त-व्याकरणम् – 25 Marks
अनुप्रयुक्त-व्याकरणम् में Class 9 Sanskrit sandhi practice, समास, पर्यायवाची, विपरीतार्थक शब्द, विशेषण-विशेष्य और वाच्यपरिवर्तन पूछे जा सकते हैं। इस पाठ में “मानुषोऽपि”, “नास्त्यत्र”, “धर्मसङ्ग्रहोऽत्र” जैसे सन्धि-पद महत्वपूर्ण हैं।
Q13. “न चैतावत्” इति पदस्य सन्धिविच्छेदं कुरुत।
न + च + एतावत् = न चैतावत्।
यहाँ “च + एतावत्” में वृद्धि-सन्धि है। पाठ्य-अभ्यास में यही उदाहरण दिया गया है।
Q14. “मानुषोऽपि” इति पदस्य सन्धिविच्छेदं कुरुत।
मानुषः + अपि = मानुषोऽपि।
यहाँ विसर्ग-सन्धि और अवग्रह का प्रयोग हुआ है। अर्थ है — मनुष्य भी।
Q15. “नास्त्यत्र” इति पदस्य सन्धिविच्छेदं कुरुत।
न + अस्ति + अत्र = नास्त्यत्र।
इसका अर्थ है — यहाँ नहीं है। भीम कहता है कि यहाँ कोई शोक करने योग्य बात नहीं है।
Q16. “धर्मसङ्ग्रहोऽत्र” इति पदस्य सन्धिविच्छेदं कुरुत।
धर्मसङ्ग्रहः + अत्र = धर्मसङ्ग्रहोऽत्र।
यह वाक्य भीम युधिष्ठिर से कहता है। वह बताता है कि यहाँ धर्म का संरक्षण देखना चाहिए।
Q17. “आयोधनम्” इति पदस्य पर्यायं लिखत।
आयोधनम् — युद्धम्।
यह पर्याय पाठ के शब्दार्थ और अमरकोषीय अभ्यास से जुड़ा है। भीम के लिए बकासुर से युद्ध भी उपस्थित होता है।
Q18. “विप्रः” इति पदस्य पर्यायं लिखत।
विप्रः — ब्राह्मणः।
एकचक्रनगर में पाण्डव जिस गृह में रहते हैं, वह ब्राह्मण का घर है। पाठ में उसे प्रतिवेशी विप्र कहा गया है।
Q19. “हुताशनः” इति पदस्य पर्यायं लिखत।
हुताशनः — अग्निः।
भीम भोजन को अपने जठरस्थ हुताशन को अर्पित बताता है। यहाँ हुताशन पेट की अग्नि के लिए आया है।
Q20. “उपकृतः” इति पदस्य विपरीतार्थक शब्दं लिखत।
उपकृतः — अपकृतः।
उपकृत का अर्थ है जिस पर उपकार किया गया हो। अपकृत का अर्थ है जिसके साथ बुरा किया गया हो।
Q21. “मृष्टान्नम्” इति समस्तपदस्य विग्रहं कुरुत।
मृष्टम् अन्नम्।
इसका अर्थ है स्वादिष्ट भोजन। बकासुर को शकटपूरं मृष्टान्नम् भेजा जाता था।
Q22. वाच्यपरिवर्तनं कुरुत: भवत्या प्रतिश्रुतम्।
भवती प्रतिश्रुतवती।
यह कर्मवाच्य से कर्तृवाच्य रूप है। “भवत्या” के स्थान पर “भवती” और “प्रतिश्रुतम्” के स्थान पर “प्रतिश्रुतवती” आता है।
Section D: पठित-अवबोधनम् – 30 Marks
पठित-अवबोधनम् में एकचक्रनगर, ब्राह्मण-परिवार की विपत्ति, कुन्ती का वचन, भीम का धर्म-संकल्प और बकासुर-वध पर प्रश्न आ सकते हैं। Sanskrit Sharada Chapter 9 extract practice के लिए संवाद और श्लोकभाव महत्त्वपूर्ण हैं।
Q23. पाण्डवाः कुत्र निवसन्ति स्म?
पाण्डवाः एकचक्रनगरे कस्यचित् ब्राह्मणस्य गृहे निवसन्ति स्म।
यह प्रसंग एकचक्रम् रूपक से लिया गया है। ब्राह्मण पाण्डवों का आतिथेय और उपकर्ता है।
Q24. कुन्ती किमर्थं ब्राह्मणगृहं गता?
कुन्ती ब्राह्मणगृहे रोदनध्वनिं श्रुत्वा तत्र गता।
वह परिवार के शोक का कारण पूछती है। तब उसे बकासुर से जुड़े बलिदान-नियम का ज्ञान होता है।
Q25. बकनामा दैत्यः कुत्र वसति?
बकनामा दैत्यः एकचक्रपुरस्य अदूरवर्तिनि पर्वते वसति।
नगरवासी बकासुर से भयभीत थे। वे सन्धि-नियम के अनुसार प्रतिदिन उसे भोजन और मनुष्य भेजते थे।
Q26. कुन्ती किं प्रतिश्रुतवती?
कुन्ती प्रतिश्रुतवती यत् स्वपुत्रेषु एकं बकासुरस्य समीपं प्रेषयिष्यति।
वह ब्राह्मण के उपकार का प्रत्युपकार करना चाहती थी। भीम इस वचन को क्षत्रियाणी के योग्य मानता है।
Q27. “कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः” इति श्लोकस्य भावः कः?
इस श्लोक का भाव है कि किए गए उपकार का प्रत्युपकार होना चाहिए, यही सनातन धर्म है।
भीम कहता है कि वे दीर्घकाल से भिक्षा-प्रदान से उपकृत हुए हैं। इसलिए ब्राह्मण परिवार की रक्षा करना उचित है।
Q28. युधिष्ठिरः कुन्तीस्य निर्णयं किमर्थं न समर्थयति?
युधिष्ठिरः कुन्तीस्य निर्णयं न समर्थयति, क्योंकि वह भीम को पाण्डवों का बल-आधार मानता है।
वह कहता है कि भीम के भुजबल पर वे सुख से रहते हैं। दुर्योधन भी भीम को सोचकर निद्रा नहीं पाता।
Q29. भीमः अर्जुनं सह गन्तुं किमर्थं न अनुमन्यते?
भीमः अर्जुनं सह गन्तुं न अनुमन्यते, क्योंकि वह स्वयं बकासुर का वध करने में समर्थ है।
वह कहता है कि खरदंष्ट्र मृगाधिपः सहायता की अपेक्षा नहीं करता। उसके दोनों बलवान भुज ही उसके सहज सहायक हैं।
Q30. भीमः बकासुरं कथं उत्तरं ददाति?
भीमः बकासुरं उत्तरं ददाति यत् नरभक्षणम् अधर्मः और नररक्षणम् क्षत्रियाणां धर्मः।
बकासुर कहता है कि नरभक्षण राक्षसों का धर्म है। भीम क्षत्रिय-धर्म के आधार पर उससे युद्ध करता है और उसे मार देता है।
NCERT Class 9 Sanskrit Sharada Chapter-Wise Questions
| Chapter No. | Chapter Name |
| Chapter 1 | सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम् |
| Chapter 2 | सुखस्य मूलं धर्मः धर्मस्य मूलम् अर्थः |
| Chapter 3 | आत्मवत्सर्वभूतेषु यः पश्यति सः पण्डितः |
| Chapter 4 | न खलु वयस्तेजसो हेतुः |
| Chapter 5 | एषा सा कृतकबुद्धिः मानवबुद्धेः सहकरी |
| Chapter 6 | मनःपूतं समाचरेत् |
| Chapter 7 | उपायं चिन्तयेत् प्राज्ञस्तथापायं च चिन्तयेत् |
| Chapter 8 | अन्नाद् आनन्दं प्रति |
| Chapter 10 | णमो अरिहंताणम् |
| Chapter 11 | वर्णोच्चारण-शिक्षा २ |
| Chapter 12 | अन्वयः |
| Chapter 13 | समासः |
| Chapter 14 | वाच्यम् |
| Chapter 15 | शब्दरूपाणि |
| Chapter 16 | धातुरूपाणि |
FAQs (Frequently Asked Questions)
कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः means a favour received should be returned with a favour. In Chapter 9, भीम uses this idea to justify helping the ब्राह्मण family.
बकासुर is the demon who lives near एकचक्रनगर. He forces the citizens to send food and one human being every day.
भीम goes to बकासुर to save the ब्राह्मण family and repay their hospitality. He also sees it as क्षत्रिय-धर्म to protect people from a man-eating demon.
एकचक्रम् is a short Sanskrit drama written by श्रीरङ्गनाथशर्मा. The Chapter 9 extract is taken from its third and fourth acts.
आयोधनम् means battle or युद्धम्. In the chapter, भीम says that along with food, a battle with बकासुर is also waiting for him.