Important Questions Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 4 न खलु वयस्तेजसो हेतुः

न खलु वयस्तेजसो हेतुः is a Class 9 Sanskrit Sharada chapter about Khudiram Bose, a young revolutionary who gave his life for India’s freedom. For CBSE 2026-27 Class 9 Sanskrit exams, this chapter supports practice in अपठित-अवबोधनम्, रचनात्मक-कार्यम्, अनुप्रयुक्त-व्याकरणम् and पठित-अवबोधनम्.

खुदीराम बोस बाल्यावस्था से ही असाधारण थे। देशवासियों पर हो रहे अत्याचार देखकर उनका मन व्यथित होता था, और पन्द्रह वर्ष की आयु में वे बङ्गभङ्ग आन्दोलन से जुड़ गए। न खलु वयस्तेजसो हेतुः पाठ बताता है कि तेज, साहस और देशभक्ति आयु पर निर्भर नहीं करते। Important Questions Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 4 विद्यार्थियों को खुदीराम के जीवनवृत्त, बङ्गभङ्ग आन्दोलन, सत्येन्द्रनाथ के उपदेश, प्रफुल्ल-खुदीराम की योजना, हौतात्म्य और व्याकरण अभ्यास के लिए तैयार करते हैं।

Key Takeaways

  • Chapter focus: न खलु वयस्तेजसो हेतुः Class 9 में खुदीराम बोस के साहस, त्याग और देशभक्ति का वर्णन है।
  • Historical context: पाठ में 1905 के बङ्गभङ्ग आन्दोलन और 1908 की किङ्ग्ज़फोर्ड-वध योजना का उल्लेख आता है।
  • Character value: खुदीराम बालक्रान्तिवीर हैं, जिन्होंने अल्पायु में भारतमाता के लिए जीवन समर्पित किया।
  • Grammar value: Class 9 Sanskrit grammar practice में इस पाठ से सन्धिच्छेद, समास, भूतकाल-रूप और अव्यय प्रयोग पूछे जा सकते हैं।

Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 4 Exam Pattern 2026-27

Section Question Area Marks
A अपठित-अवबोधनम् 10
B रचनात्मक-कार्यम् 15
C अनुप्रयुक्त-व्याकरणम् 25
D पठित-अवबोधनम् 30

Section A: अपठित-अवबोधनम् – 10 Marks

अपठित-अवबोधनम् में देशभक्ति, क्रान्तिवीर, स्वतन्त्रता-संग्राम और त्याग से जुड़ा गद्यांश आ सकता है। न खलु वयस्तेजसो हेतुः word meanings ऐसे प्रश्नों में मदद करते हैं।

Q1. अधोलिखितम् अपठितगद्यांशं पठित्वा प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत।

भारतस्य स्वतन्त्रतासंग्रामे बहवः क्रान्तिवीराः अभवन्। ते स्वदेशस्य स्वतन्त्रतायै स्वजीवनम् अपि समर्पितवन्तः। तेषां जीवनं त्यागस्य, साहसस्य, देशभक्तेः च आदर्शम् अस्ति। बालाः अपि तेषां चरित्रात् प्रेरणां प्राप्नुवन्ति। देशभक्ताः सदैव राष्ट्रस्य गौरवं वर्धयन्ति।

प्रश्नः: भारतस्य स्वतन्त्रतासंग्रामे के अभवन्?
उत्तरम्: भारतस्य स्वतन्त्रतासंग्रामे बहवः क्रान्तिवीराः अभवन्।

उत्तर गद्यांश की पहली पंक्ति से मिलता है। यह विचार खुदीराम बोस जैसे बालक्रान्तिवीर से जुड़ा है।

Q2. गद्यांशानुसार क्रान्तिवीराः किमर्थं स्वजीवनम् अपि समर्पितवन्तः?

क्रान्तिवीराः स्वदेशस्य स्वतन्त्रतायै स्वजीवनम् अपि समर्पितवन्तः।

यह उत्तर देशभक्ति और त्याग को दिखाता है। पाठ में खुदीराम का जीवन राष्ट्र को समर्पित बताया गया है।

Q3. गद्यांशे क्रान्तिवीराणां जीवनं केषाम् आदर्शम् अस्ति?

क्रान्तिवीराणां जीवनं त्यागस्य, साहसस्य, देशभक्तेः च आदर्शम् अस्ति।

यह भाव Chapter 4 के शीर्षक से जुड़ा है। तेज और साहस आयु से नहीं, संकल्प से आते हैं।

Q4. “देशभक्ताः” इति पदस्य अर्थं लिखत।

“देशभक्ताः” इति पदस्य अर्थः स्वदेशं प्रति भक्तिभावयुक्ताः जनाः।

ऐसे लोग राष्ट्र के लिए त्याग करने को तैयार रहते हैं। पाठ में खुदीराम को तेजस्वी बालदेशभक्त कहा गया है।

Q5. गद्यांशात् एकं भूतकालसूचकं पदं लिखत।

भूतकालसूचकं पदम् — अभवन्।

“अभवन्” लङ्लकार का रूप है। इसका अर्थ है “थे” या “हुए”।

Section B: रचनात्मक-कार्यम् – 15 Marks

रचनात्मक-कार्यम् में पत्र, चित्रवर्णन, वाक्य-रचना और अनुवाद के प्रश्न पूछे जा सकते हैं। Important Questions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 4 में देशभक्ति, क्रान्तिवीर, स्वतन्त्रता और साहस अच्छे लेखन-विषय हैं।

Q6. मञ्जूषायाः साहाय्येन पत्रस्य रिक्तस्थानानि पूरयत।

मञ्जूषा: खुदीरामः, देशभक्तिः, विद्यालये, क्रान्तिवीरः, नमः

प्रिय मित्र,
सप्रेम ______। अद्य अस्माकं ______ शिक्षकः बालक्रान्तिवीरस्य कथां पाठितवान्। ______ अल्पवयसि अपि महान् ______ आसीत्। तस्य जीवनात् अस्माभिः ______ शिक्षणीया।
तव मित्रम्
विवेकः

उत्तरम्: नमः, विद्यालये, खुदीरामः, क्रान्तिवीरः, देशभक्तिः।

यह पत्र Chapter 4 के मुख्य पात्र और भाव पर आधारित है। इसमें खुदीराम और देशभक्ति का सरल प्रयोग आता है।

Q7. “देशभक्तिः” इति विषयम् आधृत्य पञ्च संस्कृतवाक्यानि लिखत।

देशभक्तिः श्रेष्ठः गुणः अस्ति।
देशभक्ताः राष्ट्राय जीवनं समर्पयन्ति।
खुदीरामः महान् बालक्रान्तिवीरः आसीत्।
सः वन्दे मातरम् इति घोषं कृतवान्।
अस्माभिः क्रान्तिवीराः कृतज्ञतया स्मरणीयाः।

ये वाक्य Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 4 important questions में लेखन अभ्यास के लिए उपयोगी हैं।

Q8. “क्रान्तिवीरः” शब्देन द्वे संस्कृतवाक्ये लिखत।

खुदीरामः क्रान्तिवीरः आसीत्।
क्रान्तिवीरः देशस्य स्वतन्त्रतायै कार्यं करोति।

“क्रान्तिवीरः” पाठ का प्रमुख शब्द है। खुदीराम को तेजस्वी बालक्रान्तिवीर कहा गया है।

Q9. हिन्दी वाक्यस्य संस्कृते अनुवादं कुरुत: खुदीराम महान देशभक्त था।

खुदीरामः महान् देशभक्तः आसीत्।

यह वाक्य Chapter 4 के मुख्य चरित्र को बताता है। इसमें भूतकाल का “आसीत्” रूप आता है।

Q10. हिन्दी वाक्यस्य संस्कृते अनुवादं कुरुत: देशभक्तों का जीवन राष्ट्र को समर्पित होता है।

देशभक्तानां जीवनं राष्ट्राय समर्पितं भवति।

यह वाक्य पाठ की मुख्य पंक्ति से जुड़ा है। खुदीराम ने इसी भाव को अपने जीवन से सिद्ध किया।

Q11. “वन्दे मातरम्” पदेन एकं संस्कृतवाक्यं रचयत।

खुदीरामः वन्दे मातरम् इति जपन् दिवं गतः।

यह वाक्य पाठ की अन्तिम घटना से जुड़ा है। खुदीराम हँसते हुए वन्दे मातरम् जपते हुए हुतात्मा बने।

Q12. चित्रवर्णनस्य कृते “उद्यानम्” शब्देन एकं वाक्यं लिखत।

उद्यानं सुन्दरं स्वच्छं च अस्ति।

पाठ्य-अभ्यास में चित्र देखकर उद्यान, गृहे, पक्षिणः, पुष्पाणि, स्वच्छता आदि शब्दों से वाक्य लिखने को कहा गया है।

Section C: अनुप्रयुक्त-व्याकरणम् – 25 Marks

अनुप्रयुक्त-व्याकरणम् में Class 9 Sanskrit sandhi practice, समास-विग्रह, भूतकाल-परिवर्तन और चित्-प्रत्ययान्त अव्यय पूछे जा सकते हैं। Class 9 Sanskrit avyaya practice के लिए कदाचित्, कश्चित्, किञ्चित् जैसे रूप महत्वपूर्ण हैं।

Q13. “इत्यादयः” इति पदस्य सन्धिच्छेदं कुरुत।

इति + आदयः = इत्यादयः।

यहाँ इति के अन्त में इ और आदयः के आरम्भ में आ मिलकर “त्य” रूप बनाते हैं। यह पाठ के सन्धि अभ्यास से जुड़ा है।

Q14. “सर्वेऽपि” इति पदस्य सन्धिच्छेदं कुरुत।

सर्वे + अपि = सर्वेऽपि।

यहाँ अवग्रह का प्रयोग हुआ है। इसका अर्थ है “सभी भी”।

Q15. “कश्चित्” इति पदस्य सन्धिच्छेदं कुरुत।

कः + चित् = कश्चित्।

यह चित्-प्रत्ययान्त अव्यय है। इसका अर्थ है “कोई एक”।

Q16. “वयस्तेजसः” इति पदस्य सन्धिच्छेदं कुरुत।

वयः + तेजसः = वयस्तेजसः।

यह रूप पाठ के शीर्षक “न खलु वयस्तेजसो हेतुः” से जुड़ा है।

Q17. “देशभक्ताः” इति समस्तपदस्य विग्रहं कुरुत।

देशस्य भक्ताः।

इसका अर्थ है देश के भक्त। पाठ में खुदीराम को देशभक्तों में तेजस्वी बालक्रान्तिवीर बताया गया है।

Q18. “बालक्रान्तिवीरः” इति समस्तपदस्य विग्रहं कुरुत।

बालः च क्रान्तिवीरः च।

यह पद खुदीराम के लिए उपयुक्त है। वे बाल्यवय में ही क्रान्तिकारी कार्यों में जुड़ गए थे।

Q19. “वज्रसदृशम्” इति पदस्य विग्रहं कुरुत।

वज्रेण सदृशम्।

सत्येन्द्रनाथ ने कहा कि क्रान्तिकार्य के लिए शरीर वज्रसदृश दृढ़ होना चाहिए।

Q20. “मृत्युदण्डः” इति पदस्य विग्रहं कुरुत।

मृत्युः एव दण्डः।

खुदीराम को न्यायालय में मृत्युदण्ड सुनाया गया। पाठ में इसे उद्बन्धनम् कहा गया है।

Q21. “कदाचित्” इति अव्ययेन एकं वाक्यं लिखत।

कदाचित् खुदीरामः पत्रकाणि वितरति स्म।

“कदाचित्” का अर्थ है एक बार या कभी। यह चित्-प्रत्ययान्त अव्यय है।

Q22. वाक्यं परिवर्तयत: वन्दे मातरम् इत्यादयः घोषणाः भवन्ति स्म।

लङ्लकारे लिखत।

वन्दे मातरम् इत्यादयः घोषणाः अभवन्।

“भवन्ति स्म” भूतकाल का रूप है। इसे लङ्लकार में “अभवन्” से व्यक्त किया गया है।

Section D: पठित-अवबोधनम् – 30 Marks

पठित-अवबोधनम् में खुदीराम के जन्म, बङ्गभङ्ग आन्दोलन, क्रान्ति-प्रशिक्षण, किङ्ग्ज़फोर्ड योजना और हौतात्म्य पर प्रश्न आ सकते हैं। Sanskrit Sharada Chapter 4 extract practice के लिए तिथियाँ और घटनाएँ ध्यान में रखें।

Q23. खुदीरामस्य जन्म कुत्र कदा च अभवत्?

खुदीरामस्य जन्म बङ्गप्रान्ते मेदिनीपुरजनपदे मोहोबनी-ग्रामे 1889 ईस्वी में दिसम्बरमासस्य तृतीये दिनाङ्के अभवत्।

उसके पिता का नाम त्रैलोक्यनाथ और माता का नाम लक्ष्मीप्रिया देवी था। बाल्यकाल में ही उसके माता-पिता दिवंगत हो गए।

Q24. खुदीरामस्य पालनं पोषणं च कया कृतम्?

खुदीरामस्य पालनं पोषणं च तस्य अग्रजया अपरूपादेव्या कृतम्।

माता-पिता के निधन के बाद उसकी बड़ी बहन ने उसका पालन-पोषण किया। बाल्यकाल से ही खुदीराम असाधारण स्वभाव का था।

Q25. खुदीरामः किमर्थं व्यथितः भवति स्म?

खुदीरामः देशवासिषु जायमानान् अत्याचारान् दृष्ट्वा व्यथितः भवति स्म।

उसे भारत की पराधीनता और देशवासियों पर होने वाले अत्याचार दुख देते थे। इसी कारण वह क्रान्तिकार्य की ओर प्रेरित हुआ।

Q26. बङ्गभङ्गआन्दोलनम् कदा आरब्धम्?

बङ्गभङ्गआन्दोलनम् 1905 ईस्वी में आरब्धम्।

वायसराय कर्जन ने बङ्गप्रान्त को दो भागों में विभाजित किया। इस विभाजन से बङ्गप्रान्त और पूरे देश में जनान्दोलन हुआ।

Q27. सत्येन्द्रनाथः खुदीरामं किम् उपदिष्टवान्?

सत्येन्द्रनाथः उपदिष्टवान् यत् क्रान्तिकार्यं कर्तुं शरीरं वज्रसदृश दृढं, बुद्धिः असिधारा इव तीक्ष्णा, मनः गङ्गाजलमिव निर्मलं च भवेत्।

यह उपदेश क्रान्तिकारी जीवन की तैयारी बताता है। इसमें शरीर, बुद्धि और मन तीनों की साधना आवश्यक मानी गई है।

Q28. खुदीरामः कदा पर्यन्तं पादत्राणं न धरिष्यामि इति प्रतिज्ञातवान्?

खुदीरामः प्रतिज्ञातवान् यत् यावत् भारतम् आङ्ग्लशासनात् मुक्तं न भविष्यति, तावत् पादत्राणं न धरिष्यामि।

यह प्रतिज्ञा उसके देशप्रेम और त्याग को दिखाती है। वह राणाप्रताप के चरित्र से प्रेरित था।

Q29. प्रफुल्ल-खुदीरामाभ्यां कस्य रथे विस्फोटकं प्रक्षिप्तम्?

प्रफुल्ल-खुदीरामाभ्यां किङ्ग्ज़फोर्ड् इत्यस्य रथविशेषे विस्फोटकं प्रक्षिप्तम्।

यह घटना 28 अप्रैल 1908 को हुई। परन्तु उस रथ में किङ्ग्ज़फोर्ड नहीं था, इसलिए वह बच गया।

Q30. किमर्थं न्यायाधीशः आङ्ग्लाः अधिकारिणः च चकिताः अभवन्?

न्यायाधीशः आङ्ग्लाः अधिकारिणः च चकिताः अभवन्, क्योंकि मृत्युदण्ड सुनने पर भी खुदीरामस्य मुखे भयं वा दुःखं वा नासीत्।

उसके मुख पर प्रसन्नता, शान्ति, तृप्ति और तेज था। वह वन्दे मातरम् जपते हुए हुतात्मा बना।

NCERT Class 9 Sanskrit Sharada Chapter-Wise Questions

Chapter No. Chapter Name
Chapter 1 सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम्
Chapter 2 सुखस्य मूलं धर्मः धर्मस्य मूलम् अर्थः
Chapter 3 आत्मवत्सर्वभूतेषु यः पश्यति सः पण्डितः
Chapter 5 एषा सा कृतकबुद्धिः मानवबुद्धेः सहकरी
Chapter 6 मनःपूतं समाचरेत्
Chapter 7 उपायं चिन्तयेत् प्राज्ञस्तथापायं च चिन्तयेत्
Chapter 8 अन्नाद् आनन्दं प्रति
Chapter 9 कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः
Chapter 10 णमो अरिहंताणम्
Chapter 11 वर्णोच्चारण-शिक्षा २
Chapter 12 अन्वयः
Chapter 13 समासः
Chapter 14 वाच्यम्
Chapter 15 शब्दरूपाणि
Chapter 16 धातुरूपाणि

FAQs (Frequently Asked Questions)

न खलु वयस्तेजसो हेतुः means age is not the cause of courage or brilliance. In this chapter, खुदीराम बोस proves that even a young person can show extraordinary patriotism and sacrifice.

खुदीराम बोस was a young revolutionary from Bengal. The chapter presents him as a तेजस्वी बालक्रान्तिवीर who gave his life for India’s freedom at a very young age.

बङ्गभङ्गआन्दोलनम् was the public movement against the 1905 partition of Bengal by Viceroy Curzon. In the chapter, this movement becomes an important turning point in खुदीराम’s patriotic life.

किङ्ग्ज़फोर्ड् was a British judicial officer who punished Indian patriots harshly. Because of his cruelty, the revolutionary group decided to target him.

उद्बन्धनम् means execution by hanging. In the chapter, the judge declares उद्बन्धनम् as the punishment for खुदीराम.