Important Questions Class 9 Hindi Ganga Chapter 5 आखिरी चट्टान तक
Important Questions Class 9 Hindi Ganga Chapter 5 में मोहन राकेश के यात्रा-वृत्तांत आखिरी चट्टान तक से कन्याकुमारी, समुद्र, चट्टान, सूर्यास्त, भय और आत्मानुभूति को समझा जाता है। CBSE Class 9 Hindi Ganga 2026-27 में यह पाठ अपठित बोध, व्यावहारिक व्याकरण, पाठ्यपुस्तक और रचनात्मक लेखन के अभ्यास से जुड़ता है।
कन्याकुमारी में मोहन राकेश की यात्रा एक चट्टान, समुद्र और क्षितिज के बीच खड़े यात्री से शुरू होती है। तीन ओर फैला जल उन्हें इतना घेर लेता है कि वे कुछ देर अपने अलग अस्तित्व को भूल जाते हैं। फिर सूर्यास्त देखने की जिद उन्हें रेत के टीलों तक ले जाती है, जहाँ रंग, हवा और अँधेरा मिलकर यात्रा को रोमांचक बना देते हैं। आखिरी चट्टान तक केवल स्थान-वर्णन नहीं है; इसमें प्रकृति की विराटता, मनुष्य का डर, स्थानीय जीवन और भीतर उठती आत्मानुभूति साथ-साथ चलती है।
Important Questions Class 9 Hindi Ganga Chapter 5 में इसी अनुभव-यात्रा से जुड़े गद्यांश, व्याकरण, साहित्य और रचनात्मक लेखन प्रश्न दिए गए हैं.
Key Takeaways
- कन्याकुमारी का दृश्य: तीन समुद्रों का संगम, चट्टानें, लहरें और क्षितिज पाठ का मुख्य दृश्य-आधार बनाते हैं।
- लेखक का अनुभव: यात्रा में विस्मय, रोमांच, डर, थकान और आत्म-बोध एक साथ आते हैं।
- विवेकानंद चट्टान: यह स्थान प्राकृतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्त्व से जुड़ा है।
- यात्रा-वृत्तांत शैली: पाठ में दृश्य-वर्णन, आत्मानुभूति, स्थानीय जीवन और प्रकृति का सजीव चित्रण मिलता है।
Important Questions Class 9 Hindi Chapter 5 Exam Pattern Overview
CBSE Class 9 Hindi परीक्षा 100 अंकों की होती है। इसमें 80 अंकों की वार्षिक लिखित परीक्षा और 20 अंकों का आंतरिक मूल्यांकन शामिल होता है। पास होने के लिए कुल मिलाकर 33% अंक जरूरी होते हैं।
| Section | Marks | Chapter 5 Practice Use |
| Reading Comprehension / अपठित बोध | 14 | दृश्य, भाव, संकेत, यात्रा-अनुभव और लेखक की मनःस्थिति समझना |
| Grammar / व्यावहारिक व्याकरण | 16 | क्रिया-विशेषण, शब्दार्थ, दृश्यात्मक भाषा, वाक्य-प्रयोग और वर्णन शैली |
| Literature / पाठ्यपुस्तक | 30 | कन्याकुमारी, समुद्र, सूर्यास्त, विवेकानंद चट्टान, स्थानीय जीवन और आत्मानुभूति |
| Creative Writing / रचनात्मक लेखन | 20 | यात्रा-संस्मरण, सूर्यास्त वर्णन, पर्यटन विवरणिका और अनुभव लेखन |
Reading Comprehension / अपठित बोध Practice for Important Questions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 5
आखिरी चट्टान तक में पठन अभ्यास रंग, ध्वनि, गति और मनोभाव को साथ पढ़ने से बनता है। समुद्र का विस्तार, रेत का बदलता रंग और लेखक का अचानक डरना हर दृश्य को अर्थ देता है।
गद्यांश अभ्यास: Aakhiri Chattan Tak Class 9
Q1. दिए गए गद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर लिखिए।
“तीनों तरफ से क्षितिज तक पानी-ही-पानी था, फिर भी सामने का क्षितिज, हिंद महासागर का, अपेक्षया अधिक दूर और अधिक गहरा जान पड़ता था।”
(क) लेखक कहाँ खड़ा था?
लेखक कन्याकुमारी में समुद्र के भीतर उभरी चट्टानों में से एक चट्टान पर खड़ा था।
वह भारत के स्थल-भाग की आखिरी चट्टान को देख रहा था।
(ख) लेखक को चारों ओर क्या दिखाई दे रहा था?
लेखक को तीनों तरफ क्षितिज तक पानी-ही-पानी दिखाई दे रहा था।
समुद्र का विस्तार उसे बहुत व्यापक और गहरा लग रहा था।
(ग) हिंद महासागर का क्षितिज अधिक दूर क्यों जान पड़ा?
लेखक को लगा कि उस दिशा में समुद्र का कोई दूसरा छोर नहीं है।
इससे उसके मन में प्रकृति की विशालता का बोध हुआ।
(घ) इस दृश्य से लेखक की कौन-सी मनःस्थिति बनती है?
लेखक विस्मय और आत्म-विस्मृति की स्थिति में पहुँच जाता है।
वह कुछ देर भूल जाता है कि वह एक यात्री और दर्शक है।
Q2. लेखक “शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति” क्यों महसूस करता है?
लेखक समुद्र की अनंत फैलावट और लहरों की प्रचंड गति देखकर यह अनुभव करता है।
तीनों ओर पानी, ऊँची लहरें और चट्टानों पर लगातार पड़ती चोट उसे प्रकृति की शक्ति का एहसास कराती है। यह दृश्य केवल सुंदर नहीं, विराट और प्रभावशाली भी है।
Q3. लेखक अपनी चट्टान से तुरंत सुरक्षित चट्टान पर क्यों कूदता है?
लेखक देखता है कि उसकी चट्टान बढ़ते पानी से घिर गई है।
समुद्र का पानी और ऊँची लहरें खतरा पैदा कर रही थीं। उसका शरीर सिहर गया और वह तुरंत सुरक्षित चट्टान की ओर कूद गया।
Q4. लेखक सैंड हिल से आगे दूसरे टीलों की ओर क्यों बढ़ता है?
लेखक सूर्यास्त को पूरे पश्चिमी विस्तार की पृष्ठभूमि में देखना चाहता था।
सैंड हिल से दृश्य पूरा नहीं दिख रहा था, क्योंकि एक ऊँचा टीला अरब सागर की तरफ का विस्तार रोक रहा था। इसलिए वह थकान के बावजूद आगे बढ़ता गया।
Q5. सूर्यास्त के समय रेत और समुद्र का दृश्य कैसा था?
सूर्य की सुनहरी किरणों से पीली रेत चमक उठी थी।
पानी पर सोने जैसा रंग फैल गया था। सूर्य डूबने के बाद वही रंग लाल, फिर बैजनी और अंत में काला पड़ गया। यह परिवर्तन दृश्य को बहुत मार्मिक बनाता है।
Q6. तट पर लौटते समय लेखक को खतरे का एहसास कैसे हुआ?
एक लहर लेखक के पैरों को भिगो गई और उसने देखा कि तट की चौड़ाई कम हो रही है।
पानी धीरे-धीरे तट को ढक रहा था। अँधेरा भी बढ़ रहा था। इसलिए लेखक को लगा कि देर हुई तो वह समुद्र और रेत के बीच फँस सकता है।
Grammar / व्यावहारिक व्याकरण Practice from Class 9 Hindi Ganga Chapter 5 important questions
आखिरी चट्टान तक व्याकरण में क्रिया-विशेषण, शब्दार्थ, दृश्यात्मक भाषा और वर्णनात्मक वाक्य बहुत उपयोगी हैं। पाठ की भाषा समुद्र की गति और लेखक की बेचैनी को छोटे-छोटे दृश्य संकेतों से पकड़ती है।
शब्द, क्रिया-विशेषण और वाक्य: आखिरी चट्टान तक व्याकरण
Q7. “धीरे-धीरे” किस प्रकार का पद है?
“धीरे-धीरे” क्रिया-विशेषण है।
यह किसी क्रिया के धीरे होने की विशेषता बताता है। जैसे, “तट की चौड़ाई धीरे-धीरे कम होती जा रही थी।”
Q8. “जल्दी-जल्दी” क्रिया-विशेषण का प्रयोग करते हुए वाक्य बनाइए।
वाक्य: समुद्र का पानी बढ़ता देखकर लेखक जल्दी-जल्दी चलने लगा।
यहाँ “जल्दी-जल्दी” चलने की गति बताता है।
Q9. “क्षितिज” शब्द का अर्थ लिखिए।
“क्षितिज” वह स्थान है जहाँ धरती और आकाश मिलते हुए दिखाई देते हैं।
पाठ में समुद्र का क्षितिज लेखक को दूर और गहरा लगता है।
Q10. “सिहरन” शब्द का अर्थ लिखिए।
“सिहरन” का अर्थ है डर, ठंड या तीव्र भाव से शरीर में कंपन होना।
लेखक को बढ़ते पानी और अकेलेपन में कई बार सिहरन महसूस होती है।
Q11. “झुरमुट” शब्द का अर्थ लिखिए और वाक्य बनाइए।
“झुरमुट” का अर्थ है पास-पास उगे पेड़ों या झाड़ियों का समूह।
वाक्य: तट के पास नारियल के झुरमुट हवा में झूम रहे थे।
Q12. “बे-लाग” शब्द का अर्थ लिखिए।
“बे-लाग” का अर्थ है खरा या दो टूक।
पाठ में कडल-काक पक्षी मनुष्यों की समस्याओं और सूर्य-दर्शन से बे-लाग दिखाई देते हैं।
Q13. “आखिरी चट्टान” में कौन-सा भाव निहित है?
“आखिरी चट्टान” में सीमा, अंत और खोज का भाव निहित है।
यह केवल भौगोलिक स्थान नहीं है। यह लेखक के भीतर की यात्रा और आत्म-बोध का भी प्रतीक बन जाती है।
Literature / पाठ्यपुस्तक Questions from Important Questions Class 9 Hindi Ganga Chapter 5
आखिरी चट्टान तक के साहित्य प्रश्नों में दृश्य-वर्णन, यात्रा का रोमांच और लेखक की आंतरिक प्रतिक्रिया साथ आती है। उत्तरों में केवल स्थान नहीं, अनुभव की तीव्रता भी लिखनी होगी।
आखिरी चट्टान तक extract practice
Q14. दिए गए गद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर लिखिए।
“मैं कुछ देर भूल रहा कि मैं मैं हूँ, एक जीवित व्यक्ति, दूर से आया यात्री, एक दर्शक।”
(क) लेखक किस दृश्य को देख रहा था?
लेखक कन्याकुमारी में समुद्र, चट्टानों और क्षितिज के विस्तार को देख रहा था।
वह प्रकृति की विराटता में खो गया था।
(ख) लेखक अपने को क्यों भूल गया?
दृश्य इतना प्रभावशाली था कि लेखक अपनी अलग पहचान भूल गया।
उसे लगा कि वह दृश्य का ही हिस्सा बन गया है।
(ग) यह पंक्ति किस भाव को दिखाती है?
यह पंक्ति आत्म-विस्मृति और विस्मय का भाव दिखाती है।
प्रकृति के सामने मनुष्य का छोटापन भी यहाँ महसूस होता है।
(घ) “दर्शक” शब्द का क्या अर्थ है?
“दर्शक” का अर्थ है देखने वाला व्यक्ति।
यहाँ लेखक पहले दर्शक है, फिर दृश्य का हिस्सा बनता हुआ महसूस करता है।
Q15. दिए गए गद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर लिखिए।
“सूर्य का गोला पानी की सतह से छू गया। पानी पर दूर तक सोना-ही-सोना ढुल आया।”
(क) यह दृश्य कब का है?
यह दृश्य सूर्यास्त के समय का है।
लेखक पश्चिमी दिशा के ऊँचे टीले से सूर्यास्त देख रहा था।
(ख) पानी पर सोना-ही-सोना ढुल आने का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है कि सूर्य की सुनहरी रोशनी पानी पर फैल गई थी।
समुद्र सोने जैसा चमकता दिखाई दे रहा था।
(ग) सूर्यास्त के बाद रंग कैसे बदलते हैं?
पहले सुनहरा रंग दिखता है, फिर लालिमा आती है।
इसके बाद रंग बैजनी और अंत में कालेपन में बदल जाता है।
(घ) यह वर्णन पाठ को कैसे सुंदर बनाता है?
यह वर्णन दृश्य को आँखों के सामने जीवंत कर देता है।
रंगों का बदलना प्रकृति की क्षणभंगुर सुंदरता दिखाता है।
आखिरी चट्टान तक सारांश और प्रश्नोत्तर अभ्यास
Q16. आखिरी चट्टान तक का मुख्य विषय क्या है?
आखिरी चट्टान तक का मुख्य विषय कन्याकुमारी की यात्रा और उससे जुड़ी आत्मानुभूति है।
लेखक समुद्र, चट्टान, सूर्यास्त, रंगीन रेत और विवेकानंद चट्टान के दृश्य देखता है। इन दृश्यों से उसके भीतर विस्मय, भय, रोमांच, शांति और जीवन-बोध जागते हैं। पाठ यात्रा को बाहरी दृश्य से भीतर के अनुभव तक ले जाता है।
Q17. लेखक ने कन्याकुमारी को कैसे देखा है?
लेखक ने कन्याकुमारी को समुद्र, चट्टानों, सूर्यास्त और सूर्यादय की भूमि के रूप में देखा है।
वहाँ अरब सागर, हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी का संगम है। लेखक को यह स्थान प्राकृतिक शक्ति और आध्यात्मिक गहराई से भरा लगता है। कन्याकुमारी यात्रा वर्णन में प्रकृति और मन दोनों का मेल दिखाई देता है।
Q18. लेखक के लिए सूर्यास्त का दृश्य विशेष क्यों था?
सूर्यास्त का दृश्य लेखक के लिए इसलिए विशेष था क्योंकि उसने उसे देखने के लिए कई टीले पार किए।
अंत में जब खुला पश्चिमी विस्तार सामने आया, तो उसे अपने प्रयास की सार्थकता महसूस हुई। डूबते सूर्य ने समुद्र और रेत के रंग बदल दिए। यह दृश्य सुंदरता, उदासी और क्षणभंगुरता का अनुभव देता है।
Q19. रेत के रंगों को देखकर लेखक के मन में क्या भाव आया?
रेत के रंग लेखक को अद्भुत और अनोखे लगे।
उसने कई रंगों की रेत हाथ में लेकर देखी और मसलकर गिरा दी। उसे लगा कि वह हर रंग की थोड़ी-थोड़ी रेत अपने पास रख ले। ऐसा न कर पाने से उसके मन में हल्की उदासी आ गई।
Q20. समुद्र-तट पर लौटते समय लेखक को किस प्रकार का संघर्ष करना पड़ा?
समुद्र-तट पर लौटते समय लेखक को बढ़ते पानी, अँधेरे और संकरे तट से संघर्ष करना पड़ा।
लहरें उसके पैरों तक आने लगीं और तट का हिस्सा कम होता जा रहा था। वह जल्दी-जल्दी चलने लगा और फिर दौड़ने लगा। चट्टान से टकराने पर उसे हल्की खरोंच भी आई।
Q21. विवेकानंद चट्टान का वर्णन पाठ में कैसे आया है?
विवेकानंद चट्टान समुद्र के बीच स्थित है और तट से कुछ दूरी पर है।
लेखक सुबह एक छोटी मछुआ नाव से वहाँ पहुँचता है। नीचे नुकीली चट्टानें और ऊपर ऊँची लहरें उसे भयभीत करती हैं। चट्टान पर पहुँचकर वह समुद्र, सूर्योदय और स्थानीय जीवन को एक साथ देखता है।
Q22. स्थानीय युवक लेखक को क्या बताता है?
स्थानीय युवक लेखक को कन्याकुमारी की बेरोजगारी के बारे में बताता है।
वह कहता है कि वहाँ कई शिक्षित युवक बेरोजगार हैं। कुछ स्नातक युवक नौकरी की अर्जियाँ देते हैं और छोटे-मोटे काम करते हैं। वह स्वयं फोटो-एल्बम बेचता है।
Q23. “हम लोग सीपियों का गूदा खाते हैं और दार्शनिक सिद्धांतों पर बहस करते हैं” कथन का आशय क्या है?
इस कथन में स्थानीय युवक की जीवन-स्थिति और विचारशीलता दोनों झलकती हैं।
आर्थिक कठिनाई के बावजूद वे लोग विचारों पर बहस करते हैं। यह वाक्य व्यंग्य और यथार्थ दोनों लिए हुए है। इससे स्थानीय युवाओं की बेरोजगारी और बौद्धिक बेचैनी सामने आती है।
Q24. लेखक की मानसिक दृढ़ता किन प्रसंगों से दिखाई देती है?
लेखक की मानसिक दृढ़ता कई प्रसंगों से दिखाई देती है।
वह पूरा सूर्यास्त देखने के लिए एक के बाद एक कई टीले पार करता है। लौटते समय बढ़ते पानी और अँधेरे से डरने पर भी वह रास्ता खोजता है। विवेकानंद चट्टान जाते समय डर को छिपाकर नाव में बैठा रहता है।
Q25. यात्रा-वृत्तांत के रूप में यह पाठ क्यों महत्त्वपूर्ण है?
यह पाठ यात्रा-वृत्तांत के रूप में महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इसमें स्थान-वर्णन और आत्म-अनुभव दोनों हैं।
लेखक केवल कन्याकुमारी की जानकारी नहीं देता। वह रंग, ध्वनि, भय, थकान, विस्मय और स्थानीय जीवन को साथ जोड़ता है। इससे पाठक को लगता है कि वह भी लेखक के साथ यात्रा कर रहा है।
आखिरी चट्टान तक लेखक परिचय
Q26. मोहन राकेश का संक्षिप्त परिचय लिखिए।
मोहन राकेश हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध बहुमुखी रचनाकार थे।
उनका जन्म 1925 में अमृतसर, पंजाब में हुआ। उन्होंने कहानी, उपन्यास, नाटक, डायरी, यात्रा-वृत्तांत आदि विधाओं में लेखन किया। आषाढ़ का एक दिन, आधे-अधूरे, अंधेरे बंद कमरे और आखिरी चट्टान तक उनकी महत्त्वपूर्ण रचनाएँ हैं।
Q27. आखिरी चट्टान तक की भाषा-शैली कैसी है?
आखिरी चट्टान तक की भाषा सहज, प्रवाहपूर्ण और चित्रात्मक है।
लेखक रंग, ध्वनि, गति और स्पर्श के माध्यम से दृश्य बनाता है। “पानी पर दूर तक सोना-ही-सोना ढुल आया” जैसे वाक्य पाठ को दृश्यात्मक बनाते हैं। भाषा में आत्मानुभूति और प्रकृति-वर्णन का संतुलन है।
विवेकानंद चट्टान और Class 9 Hindi Ganga Chapter 5 long answer practice
Q28. आखिरी चट्टान तक में प्रकृति और आत्मानुभूति का संबंध स्पष्ट कीजिए।
आखिरी चट्टान तक में प्रकृति केवल पृष्ठभूमि नहीं है, वह लेखक के भीतर भाव जगाती है।
कन्याकुमारी की चट्टान पर खड़े होकर लेखक समुद्र की शक्ति और विस्तार महसूस करता है। वह कुछ देर अपनी अलग पहचान भूल जाता है। इससे प्रकृति के सामने मनुष्य की लघुता और विस्मय स्पष्ट होता है।
सूर्यास्त का दृश्य लेखक को संतोष, उदासी और सौंदर्य का अनुभव कराता है। रंग बदलते हैं और लेखक क्षणभंगुरता को महसूस करता है। तट पर लौटते समय वही प्रकृति भय का रूप ले लेती है।
विवेकानंद चट्टान पर सुबह का दृश्य फिर नई अनुभूति देता है। वहाँ सूर्योदय, स्थानीय युवक, नाव, कडल-काक और समुद्र एक साथ दिखाई देते हैं। इस तरह यात्रा बाहरी स्थान से लेखक के मन की यात्रा बन जाती है।
Creative Writing / रचनात्मक लेखन Practice from Class 9 Hindi Ganga Chapter 5 important questions
आखिरी चट्टान तक रचनात्मक लेखन में यात्रा-संस्मरण, दृश्य-वर्णन और अनुभव लेखन के लिए मजबूत आधार देता है। विद्यार्थी इससे सीख सकते हैं कि यात्रा में स्थान के साथ मनोभाव भी लिखे जाते हैं।
रचनात्मक लेखन अभ्यास: Aakhiri Chattan Tak Class 9
Q29. “समुद्र तट पर सूर्यास्त” विषय पर छोटा वर्णन लिखिए।
समुद्र तट पर सूर्यास्त का दृश्य मन को शांत और गंभीर बना देता है।
सूर्य धीरे-धीरे पानी की सतह की ओर झुकता है। पहले समुद्र पर सुनहरी रोशनी फैलती है, फिर वही रंग लाल और बैजनी होने लगता है। लहरें किनारे से टकराकर लौटती हैं और हवा में नमक की गंध भर जाती है।
कुछ देर बाद सूर्य पूरी तरह डूब जाता है। आकाश पर हल्का अँधेरा उतरने लगता है। उस समय लगता है कि प्रकृति एक दिन का आखिरी गीत गा रही है।
Q30. अपने किसी प्रिय यात्रा-स्थल पर छोटा यात्रा-संस्मरण लिखिए।
पिछली छुट्टियों में मैं अपने परिवार के साथ एक पहाड़ी स्थान पर गया।
सुबह वहाँ की हवा बहुत ठंडी और साफ थी। दूर-दूर तक देवदार के पेड़ दिखाई देते थे और उनके बीच से आती धूप जमीन पर सुंदर आकृतियाँ बना रही थी। रास्ते में कई जगह छोटे झरने मिले, जिनका पानी बहुत ठंडा था।
उस यात्रा में मैंने महसूस किया कि किताबों में पढ़ी हुई प्रकृति और सामने देखी हुई प्रकृति में बहुत अंतर होता है। वहाँ की शांति ने मन को हल्का कर दिया। लौटते समय लगा कि यात्रा हमें केवल नए स्थान नहीं दिखाती, बल्कि अपने भीतर झाँकना भी सिखाती है।
Useful Links for Class 9 Hindi Ganga
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FAQs (Frequently Asked Questions)
आखिरी चट्टान तक सारांश यह है कि लेखक कन्याकुमारी की यात्रा में समुद्र, चट्टानों, सूर्यास्त, रंगीन रेत और विवेकानंद चट्टान का अनुभव करता है। यात्रा में प्रकृति-वर्णन, भय, रोमांच, आत्म-बोध और स्थानीय जीवन की झलक मिलती है।
Important Questions Class 9 Hindi Ganga Chapter 5 में कन्याकुमारी यात्रा वर्णन, आखिरी चट्टान तक extract practice, विवेकानंद चट्टान, सूर्यास्त, रंगीन रेत, स्थानीय युवक, यात्रा-वृत्तांत और आखिरी चट्टान तक व्याकरण पढ़ना चाहिए।
आखिरी चट्टान तक यात्रा-वृत्तांत है। इसमें लेखक अपनी कन्याकुमारी यात्रा के दृश्य, अनुभव, डर, रोमांच और आत्मानुभूति को साहित्यिक रूप में प्रस्तुत करता है।
विवेकानंद चट्टान पाठ में प्राकृतिक और सांस्कृतिक दोनों महत्त्व रखती है। लेखक वहाँ समुद्र के बीच जाकर सूर्योदय देखता है और स्थानीय युवकों से बातचीत करता है। यह स्थान यात्रा को बाहरी दृश्य से गहरे अनुभव तक ले जाता है।
आखिरी चट्टान तक का मुख्य संदेश है कि यात्रा केवल स्थान देखने का नाम नहीं है। सच्ची यात्रा प्रकृति, समाज और अपने भीतर उठते भावों को समझने का अवसर देती है।
