Important Questions Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 3 आत्मवत्सर्वभूतेषु यः पश्यति सः पण्डितः
आत्मवत्सर्वभूतेषु यः पश्यति सः पण्डितः is a Class 9 Sanskrit Sharada lesson about compassion, non-violence and seeing God in all beings. For CBSE 2026-27 Class 9 Sanskrit exams, this chapter supports practice in अपठित-अवबोधनम्, रचनात्मक-कार्यम्, अनुप्रयुक्त-व्याकरणम् and पठित-अवबोधनम्.
कपिल और माधवी खेलते समय एक छोटे श्वान को पत्थर से मारने दौड़ते हैं। मातामही उन्हें रोककर नामदेवमहाराज की कथा सुनाती हैं, जिसमें भूखा श्वान नैवेद्य की रोटी लेकर भागता है और नामदेव उसे दण्ड देने के स्थान पर घृत देने दौड़ते हैं। Important Questions Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 3 इसी घटना से करुणा, भूतदया, अहिंसा और सर्वभूतेषु ईश्वर-दर्शन का अभ्यास कराते हैं। CBSE 2026-27 परीक्षा में इस पाठ से संवाद-आधारित प्रश्न, घटनाक्रम, उपपदविभक्ति, क्तवतु-प्रत्यय, समास-विग्रह और पठित-अवबोधनम् पूछे जा सकते हैं।
Key Takeaways
- Chapter focus: आत्मवत्सर्वभूतेषु यः पश्यति सः पण्डितः Class 9 सभी जीवों में ईश्वर-दर्शन और करुणा का भाव सिखाता है।
- Main characters: कपिल, माधवी, मातामही, नामदेवमहाराज, पाण्डुरङ्ग और श्वान कथा को संवाद और घटना के रूप में आगे बढ़ाते हैं।
- Grammar value: Class 9 Sanskrit grammar practice में इस पाठ से क्तवतु-प्रत्यय, उपपदविभक्ति, समास और प्रश्ननिर्माण पूछा जा सकता है।
- Exam relevance: Class 9 Sanskrit Chapter 3 questions answers में संवाद, घटनाक्रम, भावार्थ और चरित्र-आधारित उत्तर महत्वपूर्ण हैं।
Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 3 Exam Pattern 2026-27
| Section | Question Area | Marks |
| A | अपठित-अवबोधनम् | 10 |
| B | रचनात्मक-कार्यम् | 15 |
| C | अनुप्रयुक्त-व्याकरणम् | 25 |
| D | पठित-अवबोधनम् | 30 |
Section A: अपठित-अवबोधनम् – 10 Marks
अपठित-अवबोधनम् में करुणा, जीवदया, अहिंसा और सदाचार से जुड़ा छोटा गद्यांश आ सकता है। आत्मवत्सर्वभूतेषु यः पश्यति सः पण्डितः word meanings ऐसे प्रश्नों में उपयोगी रहते हैं।
Q1. अधोलिखितम् अपठितगद्यांशं पठित्वा प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत।
भारतदेशे बहवः महात्मानः अभवन्। ते सर्वेषु जीवेषु दयां कुर्वन्ति स्म। करुणा, अहिंसा, क्षमा, समता च तेषां जीवनस्य मुख्यगुणाः आसन्। सत्पुरुषाः कस्यापि प्राणिनः पीडां न इच्छन्ति। ते जनान् शिक्षयन्ति यत् सर्वेषु भूतेषु ईश्वरः निवसति।
प्रश्नः: भारतदेशे के अभवन्?
उत्तरम्: भारतदेशे बहवः महात्मानः अभवन्।
उत्तर गद्यांश की पहली पंक्ति से मिलता है। यहाँ भारत को महात्माओं की भूमि बताया गया है।
Q2. गद्यांशानुसार महात्मानः केषु दयां कुर्वन्ति स्म?
महात्मानः सर्वेषु जीवेषु दयां कुर्वन्ति स्म।
यह उत्तर पाठ के भूतदया और करुणा वाले भाव से जुड़ा है। नामदेवमहाराज भी श्वान के प्रति दया दिखाते हैं।
Q3. गद्यांशे महात्मनां मुख्यगुणाः के सन्ति?
महात्मनां मुख्यगुणाः करुणा, अहिंसा, क्षमा, समता च सन्ति।
ये सभी गुण Chapter 3 के आरम्भिक वर्णन में आते हैं। पाठ इन मूल्यों को नामदेव की कथा से स्पष्ट करता है।
Q4. “सर्वेषु भूतेषु ईश्वरः निवसति” इति वाक्यस्य अर्थं लिखत।
इस वाक्य का अर्थ है कि ईश्वर सभी जीवों में रहता है।
यही पाठ का मुख्य संदेश है। नामदेवमहाराज ने इस विचार को केवल सुना नहीं, अपने आचरण में भी उतारा।
Q5. गद्यांशात् एकं क्रियापदं चित्वा लिखत।
क्रियापदम् — निवसति।
“निवसति” का अर्थ है रहता है। यह वर्तमानकाल का क्रियापद है।
Section B: रचनात्मक-कार्यम् – 15 Marks
रचनात्मक-कार्यम् में पत्र, संवाद, चित्रवर्णन और सरल वाक्य-रचना पूछी जा सकती है। Important Questions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 3 में करुणा, अहिंसा और जीवदया अच्छे लेखन-विषय बनते हैं।
Q6. मञ्जूषायाः साहाय्येन पत्रस्य रिक्तस्थानानि पूरयत।
मञ्जूषा: करुणा, श्वानम्, विद्यालये, अहिंसा, नमः
प्रिय मित्र,
सप्रेम ______। अद्य अस्माकं ______ शिक्षकः जीवदया-विषये पाठं पाठितवान्। अस्माभिः कदापि ______ न पीडनीयम्। सर्वेषु जीवेषु ______ आवश्यकी अस्ति। ______ श्रेष्ठः गुणः अस्ति।
तव मित्रम्
आदित्यः
उत्तरम्: नमः, विद्यालये, श्वानम्, करुणा, अहिंसा।
यह पत्र पाठ के मूल भाव से जुड़ा है। इसमें श्वान, करुणा और अहिंसा जैसे शब्द स्वाभाविक रूप से आते हैं।
Q7. “भूतदया” इति विषयम् आधृत्य पञ्च संस्कृतवाक्यानि लिखत।
भूतदया श्रेष्ठः गुणः अस्ति।
सर्वेषु जीवेषु ईश्वरः निवसति।
कस्यापि प्राणिनः पीडा न करणीयम्।
महात्मा नामदेवः श्वानस्य कृते करुणया धावितवान्।
अस्माभिः सर्वैः जीवैः सह दयया व्यवहर्तव्यम्।
ये वाक्य Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 3 important questions में लेखन अभ्यास के लिए उपयोगी हैं।
Q8. “करुणया” शब्देन द्वे संस्कृतवाक्ये लिखत।
नामदेवः करुणया धावितवान्।
अस्माभिः जीवेषु करुणया व्यवहर्तव्यम्।
“करुणया” पाठ का प्रमुख शब्द है। नामदेव ने श्वान को दण्ड देने के स्थान पर करुणा दिखाई।
Q9. हिन्दी वाक्यस्य संस्कृते अनुवादं कुरुत: ईश्वर सभी जीवों में रहता है।
ईश्वरः सर्वेषु जीवेषु निवसति।
यह वाक्य विसोबा के उपदेश से जुड़ा है। यही कथा का मुख्य आध्यात्मिक भाव है।
Q10. हिन्दी वाक्यस्य संस्कृते अनुवादं कुरुत: नामदेव ने श्वान का पीछा किया।
नामदेवः श्वानस्य पृष्ठे अनुधावितवान्।
यह वाक्य क्तवतु-प्रत्यय और पाठ-घटना दोनों का अभ्यास कराता है। “अनुधावितवान्” का अर्थ है पीछे दौड़ा।
Q11. “अहिंसा” शब्देन एकं संस्कृतवाक्यं रचयत।
अहिंसा महात्मनां श्रेष्ठः गुणः अस्ति।
यह वाक्य पाठ के जीवनमूल्यों से जुड़ा है। भारत के महात्माओं के चरित्र में अहिंसा और करुणा प्रमुख मानी गई है।
Q12. कपिलः माधवी च इति पात्रयोः आधारेण एकं संस्कृतवाक्यं लिखत।
कपिलः माधवी च मातुलगृहं गतवन्तौ।
यह वाक्य पाठ की आरम्भिक घटना बताता है। इसमें क्तवतु-प्रत्यय का द्विवचन रूप “गतवन्तौ” आता है।
Section C: अनुप्रयुक्त-व्याकरणम् – 25 Marks
अनुप्रयुक्त-व्याकरणम् में Class 9 Sanskrit kta vatu pratyaya practice, उपपदविभक्ति, समास-विग्रह, भूतकाल-रूप और प्रश्ननिर्माण पूछे जा सकते हैं। इस पाठ में “गतवन्तौ”, “दृष्टवती”, “अनुधावितवान्” जैसे रूप बार-बार आते हैं।
Q13. “गतवन्तौ” इति क्तवतु-प्रत्ययान्तशब्दस्य लिङ्गं वचनं च लिखत।
“गतवन्तौ” पुल्लिङ्गे प्रथमा-द्विवचनम् अस्ति।
यह रूप कपिलः माधवी च के लिए प्रयुक्त हुआ है। पाठ में “मातुलगृहं गतवन्तौ” वाक्य आता है।
Q14. “दृष्टवती” इति रूपस्य लिङ्गं वचनं च लिखत।
“दृष्टवती” स्त्रीलिङ्गे प्रथमा-एकवचनम् अस्ति।
यह रूप मातामही के लिए प्रयोग हुआ है। वाक्य है — मातामही तं प्रसङ्गं दूरात् दृष्टवती।
Q15. “अनुधावितवान्” इति शब्दस्य अर्थं लिखत।
“अनुधावितवान्” इति शब्दस्य अर्थः पृष्ठतः अधावत्।
हिन्दी में इसका अर्थ है पीछे दौड़ा। नामदेवः श्वानस्य पृष्ठे अनुधावितवान्।
Q16. “पाषाणखण्डम्” इति समस्तपदस्य विग्रहं कुरुत।
पाषाणस्य खण्डः, तम्।
इसका अर्थ है पत्थर का टुकड़ा। कपिल और माधवी ने श्वान को मारने के लिए पाषाणखण्ड लिया था।
Q17. “घृतपात्रम्” इति समस्तपदस्य विग्रहं कुरुत।
घृतस्य पात्रम्, तत्।
नामदेव ने श्वान के पीछे घृतपात्र लेकर दौड़ लगाई। यह करुणा का मुख्य दृश्य है।
Q18. “मातुलगृहम्” इति पदस्य विग्रहं कुरुत।
मातुलस्य गृहम्, तत्।
कपिल और माधवी अवकाशकाले मातुलगृहं गतवन्तौ। इसी स्थान पर कहानी की आरम्भिक घटना होती है।
Q19. उपपदविभक्तिं लिखत: नामदेवः प्रतिदिनं मन्दिरं प्रति गच्छति स्म।
“प्रति” शब्दयोगे द्वितीया विभक्तिः भवति।
इसलिए “मन्दिरम्” द्वितीया विभक्ति में है। प्रति का अर्थ है अभिमुख या की ओर।
Q20. उपपदविभक्तिं लिखत: अहं कारणं विना श्वानं ताडितवान्।
“विना” शब्दयोगे द्वितीया, तृतीया और पञ्चमी विभक्तयः भवन्ति।
इस वाक्य में “कारणम्” द्वितीया विभक्ति में है। अर्थ है बिना कारण।
Q21. रेखाङ्कितपदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत: पाण्डुरङ्गः नामदेवस्य मित्रम् आसीत्।
कस्य मित्रम् आसीत् पाण्डुरङ्गः?
यह प्रश्न “नामदेवस्य” पद पर आधारित है। उत्तर होगा — पाण्डुरङ्गः नामदेवस्य मित्रम् आसीत्।
Q22. रेखाङ्कितपदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत: ईश्वरः सर्वेषु भूतेषु निवसति।
केषु ईश्वरः निवसति?
यह प्रश्न “सर्वेषु भूतेषु” पद पर आधारित है। उत्तर पाठ के मुख्य संदेश को दोहराता है।
Section D: पठित-अवबोधनम् – 30 Marks
पठित-अवबोधनम् में संवाद, घटनाक्रम, कथन-कर्ता, पात्रों की प्रतिक्रिया और पाठ के ध्येय-वाक्य पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं। Sanskrit Sharada Chapter 3 extract practice के लिए नामदेव और श्वान की घटना सबसे महत्वपूर्ण है।
Q23. कपिलः माधवी च अवकाशकाले कुत्र गतवन्तौ?
कपिलः माधवी च अवकाशकाले मातुलगृहं गतवन्तौ।
वहाँ क्रीडावेला में दोनों ने एक श्वान को देखा। उन्होंने उसे मारने के लिए पाषाणखण्ड उठाया।
Q24. मातामही कस्य कथां श्रावितवती?
मातामही नामदेवमहाराजस्य कथां श्रावितवती।
उन्होंने कपिल और माधवी को करुणा सिखाने के लिए यह कथा सुनाई। कथा में नामदेव की भक्ति और जीवदया दोनों दिखती हैं।
Q25. नामदेवस्य गुरुः विसोबा तम् किम् अध्यापितवान्?
विसोबा नामदेवं अध्यापितवान् यत् ईश्वरः सर्वेषु भूतेषु निवसति।
उन्होंने बताया कि ईश्वर केवल मन्दिर में नहीं रहता। उसका निवास सभी जीवों में है।
Q26. नामदेवः प्रतिदिनं पाण्डुरङ्गाय किं समर्पयति स्म?
नामदेवः प्रतिदिनं पाण्डुरङ्गाय नैवेद्यं समर्पयति स्म।
वह नैवेद्य अर्पित कर पाण्डुरङ्ग को भोजयित्वा ही अन्न ग्रहण करता था। इससे उसकी भक्ति दिखाई देती है।
Q27. नैवेद्यस्थालिकायां रोटिका किमर्थं नासीत्?
नैवेद्यस्थालिकायां रोटिका नासीत्, क्योंकि बुभुक्षितः श्वानः तां मुखे गृहीत्वा धावितवान्।
श्वान भूखा था। उसने रोटिका उठाई और वहाँ से भाग गया।
Q28. नामदेवः कया भावनया श्वानस्य पृष्ठे धावितवान्?
नामदेवः करुणया श्वानस्य पृष्ठे धावितवान्।
वह क्रोध से नहीं दौड़ा। वह घृतपात्र लेकर दौड़ा ताकि श्वान शुष्क रोटी न खाए।
Q29. पाण्डुरङ्गः नामदेवं किम् उक्तवान्?
पाण्डुरङ्गः नामदेवं उक्तवान् — “उत्तीर्णः भवान् परीक्षाम्।”
इसका अर्थ है कि नामदेव ने गुरु-उपदेश का पालन किया। उसने सर्वभूतेषु ईश्वर-दर्शन को व्यवहार में दिखाया।
Q30. “आत्मवत्सर्वभूतेषु यः पश्यति सः पण्डितः” इति वाक्यस्य भावं लिखत।
इस वाक्य का भाव है कि जो व्यक्ति सभी जीवों को अपने समान देखता है, वही सच्चा पण्डित है।
पाठ में नामदेवमहाराज श्वान में भी भगवान् का दर्शन करते हैं। इसलिए वे करुणा, अहिंसा और भूतदया का आदर्श प्रस्तुत करते हैं।
NCERT Class 9 Sanskrit Sharada Chapter-Wise Questions
| Chapter No. | Chapter Name |
| Chapter 1 | सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम् |
| Chapter 2 | सुखस्य मूलं धर्मः धर्मस्य मूलम् अर्थः |
| Chapter 4 | न खलु वयस्तेजसो हेतुः |
| Chapter 5 | एषा सा कृतकबुद्धिः मानवबुद्धेः सहकरी |
| Chapter 6 | मनःपूतं समाचरेत् |
| Chapter 7 | उपायं चिन्तयेत् प्राज्ञस्तथापायं च चिन्तयेत् |
| Chapter 8 | अन्नाद् आनन्दं प्रति |
| Chapter 9 | कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः |
| Chapter 10 | णमो अरिहंताणम् |
| Chapter 11 | वर्णोच्चारण-शिक्षा २ |
| Chapter 12 | अन्वयः |
| Chapter 13 | समासः |
| Chapter 14 | वाच्यम् |
| Chapter 15 | शब्दरूपाणि |
| Chapter 16 | धातुरूपाणि |
FAQs (Frequently Asked Questions)
आत्मवत्सर्वभूतेषु यः पश्यति सः पण्डितः means one who sees all beings like oneself is truly wise. The line teaches compassion, equality and respect for every living being.
नामदेवमहाराज is the saintly devotee shown in Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 3. He sees God in all beings and follows his guru’s teaching through compassionate action.
नामदेव ran after the dog with घृतपात्रम् because the dog had taken a dry roti. He wanted the dog to eat it with ghee so that it would not suffer stomach pain.
विसोबा taught नामदेव that God does not live only in the temple. He lives in all beings, so one should worship the all-pervading form of God through compassion.
पाण्डुरङ्ग is the form of God worshipped by नामदेव. In the chapter, he appears after the dog disappears and tells नामदेव that he has passed the test.