Class 11 Hindi Antra Chapter 11 Important Questions सुमिरिनी के मनके

Class 11 Hindi Antra Chapter 11 introduces students to पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी and his three short essays from सुमिरिनी के मनके. The chapter helps CBSE students understand child psychology, धर्म-चिंतन, blind belief and rational thinking through sharp prose.

पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी हिंदी के विद्वान लेखक, भाषाविद् और निबंधकार थे। Class 11 Hindi Antra Chapter 11 में उनके तीन लघु निबंध पढ़ाए जाते हैं। ये हैं बालक बच गया, घड़ी के पुर्जे और ढेले चुन लो।

Class 11 Hindi Antra Chapter 11 Important Questions छात्रों को पाठ के मुख्य विचार, भाषा-शैली, व्यंग्य और सामाजिक संदेश समझने में मदद करते हैं। इन प्रश्नों से छात्र शिक्षा, धर्म, अंधविश्वास और तर्क से जुड़े उत्तरों का अभ्यास कर सकते हैं। ये प्रश्न 2026–27 की परीक्षा तैयारी के लिए उपयोगी हैं।

Key Takeaways

  • चंद्रधर शर्मा गुलेरी: वे बहुभाषाविद् थे और संस्कृत, पाली, प्राकृत, अपभ्रंश, ब्रज, अवधी और अंग्रेजी सहित कई भाषाओं के ज्ञाता थे।
  • बालक बच गया: यह निबंध बालक की स्वाभाविक रुचियों और शिक्षा के सही समय पर केंद्रित है।
  • घड़ी के पुर्जे: इसमें धर्म के रहस्य पर कुछ लोगों के एकाधिकार का विरोध किया गया है।
  • ढेले चुन लो: यह निबंध लोक-विश्वासों और अंधविश्वासी मान्यताओं पर चोट करता है।

Access Class 11 Hindi Antra Chapter 11 सुमिरिनी के मनके Important Questions in 30 Minutes

Revise the chapter in three parts:

First 10 minutes: चंद्रधर शर्मा गुलेरी का जीवन, विद्वत्ता और रचनाएँ

Next 10 minutes: बालक बच गया और घड़ी के पुर्जे के मुख्य विचार

Final 10 minutes: ढेले चुन लो, अंधविश्वास, तर्क और भाषा-शैली

Need help revising सुमिरिनी के मनके के तीनों निबंध?

Access interactive practice, chapter-wise questions and doubt-solving support on the Extramarks Learning App. Sign Up Free

लघु उत्तरीय प्रश्न 2 अंक Class 11 Hindi Antra Chapter 11 Important Questions

इन प्रश्नों में दो से तीन पंक्तियों में उत्तर लिखें। उत्तर सीधे और पाठ से जुड़े होने चाहिए।

Q1. पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी का जन्म कहाँ हुआ था?

पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी का जन्म पुरानी बस्ती, जयपुर में हुआ था। वे हिंदी साहित्य के विद्वान लेखक और बहुभाषाविद् थे।

Q2. गुलेरी जी किन-किन भाषाओं के ज्ञाता थे?

गुलेरी जी संस्कृत, पाली, प्राकृत, अपभ्रंश, ब्रज, अवधी, मराठी, गुजराती, राजस्थानी, पंजाबी और बांग्ला जानते थे। उन्हें अंग्रेजी, लैटिन और फ्रेंच का भी अच्छा ज्ञान था।

Q3. गुलेरी जी की तीन प्रसिद्ध कहानियाँ कौन-सी हैं?

गुलेरी जी की तीन प्रसिद्ध कहानियाँ सुखमय जीवन, बुद्धू का काँटा और उसने कहा था हैं। इनमें उसने कहा था उनकी सबसे प्रसिद्ध कहानी मानी जाती है।

Q4. सुमिरिनी के मनके में कौन-कौन से तीन निबंध दिए गए हैं?

सुमिरिनी के मनके में बालक बच गया, घड़ी के पुर्जे और ढेले चुन लो नामक तीन लघु निबंध दिए गए हैं। ये तीनों समाज की मूल समस्याओं पर विचार करते हैं।

Q5. बालक बच गया निबंध का मुख्य प्रतिपाद्य क्या है?

बालक बच गया निबंध का मुख्य प्रतिपाद्य शिक्षा ग्रहण करने की सही उम्र है। लेखक का मत है कि शिक्षा बच्चे पर लादी नहीं जानी चाहिए।

Q6. लेखक के अनुसार शिक्षा का लक्ष्य क्या होना चाहिए?

लेखक के अनुसार शिक्षा का लक्ष्य मनुष्य और मनुष्यता को बचाए रखना होना चाहिए। मनुष्य बचेगा, तो समय आने पर उसे शिक्षित किया जा सकता है।

Q7. बालक से कौन-सा सीखा-सिखाया उत्तर दिलवाया गया?

बालक से यह उत्तर दिलवाया गया कि वह यावज्जन्म लोकसेवा करेगा। यह उत्तर उसकी स्वाभाविक इच्छा नहीं था, बल्कि उसे सिखाया गया था।

Q8. बालक ने इनाम में क्या माँगा?

बालक ने इनाम में “लट्टू” माँगा। यह उसकी स्वाभाविक बाल-प्रवृत्ति का संकेत था।

Q9. घड़ी के पुर्जे में घड़ी का दृष्टांत किसलिए दिया गया है?

घड़ी का दृष्टांत धर्म के रहस्य को समझाने के लिए दिया गया है। लेखक बताता है कि जैसे घड़ी के पुर्जे जानने से रोकना उचित नहीं, वैसे ही धर्म को समझने से भी नहीं रोका जाना चाहिए।

Q10. ढेले चुन लो निबंध में किस पर चोट की गई है?

ढेले चुन लो निबंध में लोक-विश्वासों में छिपी अंधविश्वासी मान्यताओं पर चोट की गई है। लेखक तर्क और अनुभव के आधार पर सोचने की बात करता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न 3 अंक सुमिरिनी के मनके Question Answer

इन प्रश्नों में प्रसंग और विचार को थोड़ा विस्तार दें। उत्तर में पाठ की घटना या लेखक का तर्क अवश्य जोड़ें।

Q1. बालक से उसकी उम्र और योग्यता से ऊपर के कौन-कौन से प्रश्न पूछे गए?

बालक से धर्म के दस लक्षण सुनाए गए। उसने नौ रसों के उदाहरण दिए। उसने पानी के चार डिग्री के नीचे फैलने और मछलियों की प्राणरक्षा का कारण समझाया।

उससे चंद्रग्रहण का वैज्ञानिक समाधान भी पूछा गया। उसने इंग्लैंड के राजा आठवें हेनरी की पत्नियों के नाम और पेशवाओं का कुर्सीनामा भी सुनाया। ये सभी प्रश्न उसकी उम्र से बहुत ऊपर थे।

Q2. बालक के “लट्टू” माँगने पर लेखक ने सुख की साँस क्यों भरी?

बालक से सब लोग विद्वानों जैसे उत्तर सुन रहे थे। उसका पिता और शिक्षक चाहते थे कि वह इनाम में कोई पुस्तक माँगे। बालक के भीतर कृत्रिम और स्वाभाविक भावों की लड़ाई चल रही थी।

जब उसने धीरे से “लट्टू” माँगा, तो लेखक ने सुख की साँस ली। इससे पता चला कि बालक की स्वाभाविक बाल-प्रवृत्ति अभी बची हुई है।

Q3. “बालक बच गया” कथन का भाव स्पष्ट कीजिए।

“बालक बच गया” का अर्थ है कि बालक की सहज बाल-प्रकृति पूरी तरह नष्ट नहीं हुई थी। उससे कठिन और रटे हुए उत्तर दिलवाए जा रहे थे। फिर भी उसके भीतर खेलने की स्वाभाविक इच्छा जीवित थी।

लट्टू माँगना इस बात का प्रमाण था कि वह अभी केवल रटने की मशीन नहीं बना। उसमें बचपन की सरलता और जीवंतता बची थी।

Q4. लेखक शिक्षा को बच्चे पर लादने के विरुद्ध क्यों है?

लेखक मानता है कि शिक्षा बच्चे की उम्र, रुचि और मानसिक विकास के अनुसार होनी चाहिए। बच्चे पर बहुत अधिक ज्ञान लादना उसकी स्वाभाविक प्रवृत्तियों को दबा देता है।

शिक्षा का उद्देश्य बालक को मनुष्य बनाना है। यदि बालक का मन ही कुचल दिया जाए, तो शिक्षा जीवनदायी नहीं रह जाती।

Q5. घड़ी के पुर्जे में लेखक धर्म-उपदेशकों पर क्या व्यंग्य करता है?

लेखक उन धर्म-उपदेशकों पर व्यंग्य करता है जो धर्म के रहस्य को कुछ विशेष लोगों तक सीमित रखना चाहते हैं। वे कहते हैं कि सामान्य मनुष्य केवल धर्म का समय पूछे, उसके पुर्जे न देखे।

लेखक इस सोच का विरोध करता है। वह कहता है कि जिज्ञासु व्यक्ति को समझने और परखने का अधिकार मिलना चाहिए।

Q6. “अनाड़ी के हाथ में चाहे घड़ी मत दो” कथन का आशय क्या है?

इस कथन का आशय है कि जिसे ज्ञान या समझ नहीं है, उसे जटिल विषय सावधानी से समझाना चाहिए। लेकिन जो व्यक्ति सीख चुका है या समझने की योग्यता रखता है, उसे रोकना उचित नहीं।

लेखक धर्म को समझने के अधिकार की बात कर रहा है। धर्म केवल कुछ लोगों की मुट्ठी में बंद नहीं रहना चाहिए।

Q7. ढेले चुन लो में वैदिक काल की किस लॉटरी का उल्लेख है?

लेखक बताता है कि वैदिक काल में विवाह के समय लड़की के सामने मिट्टी के ढेले रखे जाते थे। ये ढेले अलग-अलग स्थानों से लाए जाते थे। लड़की को उनमें से एक ढेला चुनना होता था।

ढेले के आधार पर भावी जीवन या संतान के बारे में अनुमान लगाया जाता था। लेखक इस प्रथा की तर्कहीनता पर व्यंग्य करता है।

Q8. दुर्लभ बंधु की पेटियों की कथा क्या है?

दुर्लभ बंधु में पुरश्री के सामने तीन पेटियाँ रखी जाती हैं। एक सोने की, दूसरी चाँदी की और तीसरी लोहे की। इनमें से एक पेटी में उसकी प्रतिमूर्ति होती है।

अकड़बाज सोने की पेटी चुनता है और लौट जाता है। लोभी चाँदी की पेटी चुनता है। सच्चा प्रेमी लोहे की पेटी छूता है और सफल होता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 5 अंक Class 11 Hindi Antra Gadh Khand Chapter 11

इन प्रश्नों में पाठ का संदर्भ, लेखक का विचार और उदाहरण साथ रखें। उत्तर को छोटे अनुच्छेदों में लिखें।

Q1. पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी के जीवन और साहित्यिक व्यक्तित्व पर प्रकाश डालिए।

पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी हिंदी साहित्य के विद्वान लेखक, भाषाविद् और निबंधकार थे। उनका जन्म पुरानी बस्ती, जयपुर में हुआ था। वे बहुभाषाविद् थे और संस्कृत, पाली, प्राकृत, अपभ्रंश, ब्रज, अवधी, मराठी, गुजराती, राजस्थानी, पंजाबी और बांग्ला जैसी भाषाओं के ज्ञाता थे।

गुलेरी जी को अंग्रेजी, लैटिन और फ्रेंच का भी अच्छा ज्ञान था। वे संस्कृत के पंडित थे। प्राचीन इतिहास और पुरातत्त्व उनके प्रिय विषय थे। उनकी गहरी रुचि भाषा विज्ञान में भी थी।

उनकी सृजनशीलता समालोचक, मर्यादा, प्रतिभा और नागरी प्रचारिणी पत्रिका जैसी पत्रिकाओं में विकसित हुई। उन्होंने उत्कृष्ट निबंधों के साथ तीन कहानियाँ भी लिखीं। उसने कहा था कहानी ने उन्हें हिंदी जगत में विशेष पहचान दी।

गुलेरी जी ने कई महत्वपूर्ण संस्थानों में अध्यापन कार्य किया। वे इतिहास दिवाकर की उपाधि से सम्मानित हुए। बाद में वे काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्राच्य विभाग के प्राचार्य बने।

Q2. बालक बच गया निबंध में शिक्षा-प्रणाली पर क्या विचार व्यक्त हुआ है?

बालक बच गया निबंध में लेखक ने अपने समय की शिक्षा-प्रणाली पर तीखा विचार व्यक्त किया है। वह दिखाता है कि एक आठ वर्ष के बालक पर उसकी उम्र से बहुत अधिक ज्ञान लादा गया है। उससे धर्म, रस, विज्ञान, इतिहास और दर्शन से जुड़े कठिन प्रश्न पूछे जाते हैं।

बालक सभी उत्तर रटकर दे देता है। सभा उसकी प्रशंसा करती है और पिता आनंदित होता है। पर लेखक को यह सब अस्वाभाविक लगता है। उसे लगता है कि बालक की सहज प्रवृत्तियों का गला घोंटा जा रहा है।

जब बालक इनाम में लट्टू माँगता है, तब लेखक राहत महसूस करता है। यह बताता है कि उसके भीतर अभी बचपन जीवित है। लेखक का संदेश है कि शिक्षा बच्चे के मन में रुचि पैदा करे, उसे रटने की वस्तु न बनाए।

लेखक का मत है कि शिक्षा मनुष्य के विकास के लिए होनी चाहिए। मनुष्य को शिक्षा के लिए नहीं कुचलना चाहिए। यही इस निबंध का मुख्य विचार है।

Q3. “बालक की प्रवृत्तियों का गला घोंटना अनुचित है” पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

पाठ में बालक को एक वार्षिकोत्सव में प्रदर्शनी की वस्तु की तरह दिखाया जाता है। उसकी उम्र आठ वर्ष है, लेकिन उससे बड़े-बड़े विषयों के उत्तर दिलवाए जाते हैं। वह धर्म के लक्षण, नौ रस, चंद्रग्रहण और विदेशी इतिहास तक बताता है।

बालक का मुख पीला है, आँखें सफेद हैं और उसकी दृष्टि भूमि से उठती नहीं। इससे उसकी अस्वाभाविक स्थिति स्पष्ट होती है। वह बालक कम और पढ़ाई का पुतला अधिक लगता है।

जब उसे इनाम माँगने को कहा जाता है, तो पिता और शिक्षक सोचते हैं कि वह कोई पुस्तक माँगेगा। लेकिन वह धीरे से “लट्टू” माँगता है। यही उसकी असली बाल-इच्छा है।

लेखक इसी प्रसंग से बताता है कि बालक की स्वाभाविक प्रवृत्तियों को दबाना अनुचित है। बच्चे को उसकी उम्र के अनुसार बढ़ने देना चाहिए। रटाई और दिखावे की शिक्षा उसके व्यक्तित्व को कमजोर बनाती है।

Q4. घड़ी के पुर्जे निबंध का मुख्य संदेश लिखिए।

घड़ी के पुर्जे निबंध में लेखक धर्म के रहस्य को समझने के अधिकार पर विचार करता है। कुछ धर्म-उपदेशक यह मानते हैं कि धर्म के गहरे रहस्य केवल वेदशास्त्रज्ञों और धर्माचार्यों का विषय हैं। सामान्य मनुष्य को केवल वही मानना चाहिए जो कहा जाए।

लेखक इस विचार का विरोध करता है। वह घड़ी का उदाहरण देता है। यदि कोई व्यक्ति समय देखने के साथ घड़ी के पुर्जे समझना चाहता है, तो उसे पूरी तरह रोकना ठीक नहीं। योग्य व्यक्ति को समझने का अवसर मिलना चाहिए।

इसी तरह धर्म को भी कुछ लोगों की मुट्ठी में बंद नहीं किया जाना चाहिए। धर्म का संबंध आम आदमी और समाज से है। यदि धर्म जीवन को दिशा देता है, तो उसे समझने का अधिकार भी व्यापक होना चाहिए।

इस निबंध का संदेश है कि जिज्ञासा को दबाना गलत है। धर्म को तर्क, विवेक और अनुभव से समझना चाहिए। अंधस्वीकार से धर्म का विकास नहीं होता।

Q5. “धर्म का रहस्य जानना केवल धर्माचार्यों का काम नहीं है” इस विचार पर पाठ के आधार पर टिप्पणी कीजिए।

लेखक घड़ी के पुर्जे निबंध में बताता है कि धर्म को केवल कुछ विशेष लोगों तक सीमित रखना उचित नहीं है। धर्म यदि मनुष्य और समाज से जुड़ा है, तो सामान्य मनुष्य को भी उसे समझने का अधिकार होना चाहिए।

धर्माचार्य कहते हैं कि घड़ी के पुर्जे जानना तुम्हारा काम नहीं। तुम समय पूछो और काम चलाओ। लेखक इसी तर्क को धर्म के संदर्भ में चुनौती देता है।

वह कहता है कि यदि कोई व्यक्ति देखने, समझने और परखने की योग्यता रखता है, तो उसे रोका क्यों जाए। अनाड़ी को सावधानी से रोकना अलग बात है, पर समझदार जिज्ञासु को रोकना गलत है।

धर्म का रहस्य समझने से मनुष्य का विवेक बढ़ता है। इससे धर्म संकुचित नहीं, बल्कि व्यापक बनता है। लेखक धर्म में अंधानुकरण के बजाय विचार और अनुभव का समर्थन करता है।

Q6. ढेले चुन लो निबंध में अंधविश्वास पर किस प्रकार प्रहार किया गया है?

ढेले चुन लो निबंध में लेखक ने लोक-विश्वासों में छिपी अंधविश्वासी मान्यताओं पर व्यंग्य किया है। वह वैदिक काल की एक प्रथा का उल्लेख करता है, जिसमें विवाह के समय लड़की से मिट्टी के ढेले चुनवाए जाते थे।

इन ढेलों को अलग-अलग स्थानों से लाया जाता था। माना जाता था कि जिस स्थान की मिट्टी चुनी जाएगी, उससे भविष्य का संकेत मिलेगा। जैसे वेदी की मिट्टी से विद्वान संतान, गोशाला की मिट्टी से पशु-धन और मसान की मिट्टी से अशुभ परिणाम माना जाता था।

लेखक इस सोच की तर्कहीनता दिखाता है। वह पूछता है कि जीवन-साथी का चयन मिट्टी के ढेलों पर छोड़ना बुद्धिमानी कैसे हो सकता है। वह ग्रहों और दूर बैठे पिंडों के काल्पनिक हिसाब पर भरोसा करने की भी आलोचना करता है।

निबंध में कबीर की साखी का प्रयोग भी है। इससे लेखक दिखाता है कि उपयोगी और अनुभव-सिद्ध वस्तु अंधविश्वास से बेहतर है। इस प्रकार निबंध तर्क, शिक्षा और विवेक का समर्थन करता है।

Q7. “जन्मभर के साथी का चुनाव मिट्टी के ढेलों पर छोड़ना बुद्धिमानी नहीं है” इस कथन को स्पष्ट कीजिए।

लेखक ढेले चुन लो निबंध में एक पुरानी प्रथा का उल्लेख करता है। उसमें विवाह के समय लड़की से मिट्टी का ढेला चुनवाया जाता था। उस ढेले के आधार पर भावी जीवन या संतान के बारे में अनुमान लगाया जाता था।

लेखक इस व्यवस्था को तर्कहीन मानता है। जीवन-साथी का चुनाव बहुत गंभीर निर्णय है। इसे मिट्टी के ढेलों, ग्रहों या अंधविश्वास पर छोड़ना उचित नहीं।

लेखक अनुभव, शिक्षा और विवेक को महत्त्व देता है। वह संकेत करता है कि बेटी का शिक्षित होना जरूरी है ताकि वह अपने जीवन से जुड़े निर्णय समझदारी से ले सके।

यह विचार आज भी महत्वपूर्ण है। विवाह, शिक्षा और जीवन के निर्णय अंधविश्वास से नहीं, बल्कि समझ, समानता और तर्क से होने चाहिए।

Q8. सुमिरिनी के मनके की भाषा-शैली की विशेषताएँ लिखिए।

सुमिरिनी के मनके की भाषा-शैली सरल, बोलचाल के निकट और व्यंग्यपूर्ण है। गुलेरी जी गंभीर विषयों को भी रोचक ढंग से प्रस्तुत करते हैं। उनके निबंध छोटे हैं, पर उनमें विचार की गहराई है।

बालक बच गया में शिक्षा-प्रणाली पर करुणा और व्यंग्य दोनों हैं। घड़ी के पुर्जे में दृष्टांत के माध्यम से धर्म पर विचार किया गया है। ढेले चुन लो में लोक-विश्वास और अंधविश्वास पर चुटीली चोट की गई है।

लेखक उदाहरणों का बहुत प्रभावी प्रयोग करता है। घड़ी, लट्टू, मिट्टी के ढेले और पेटियों जैसे प्रसंग विचार को स्पष्ट बना देते हैं।

भाषा में सहजता के साथ तीखापन है। पाठक को हँसी भी आती है और सोचने की प्रेरणा भी मिलती है। यही इस पाठ की सबसे बड़ी शैलीगत विशेषता है।

Useful Links for CBSE Class 11 Hindi Antra

Section Useful Links
Important Questions Important Questions Class 11 Hindi Antra
Chapter Questions Important Questions Class 11 Hindi Antra Chapter 1
Chapter Questions Important Questions Class 11 Hindi Antra Chapter 2
Chapter Questions Important Questions Class 11 Hindi Antra Chapter 3
Hindi Syllabus CBSE Class 11 Hindi Syllabus
NCERT Solutions NCERT Solutions for Class 11 Hindi
NCERT Books NCERT Books for Class 11 Hindi
Class 11 Support CBSE Class 11 Syllabus

FAQs (Frequently Asked Questions)

तीनों निबंध अलग विषयों पर हैं, लेकिन उनका उद्देश्य समाज की सोच पर प्रश्न उठाना है। एक शिक्षा पर है, दूसरा धर्म-रहस्य पर और तीसरा अंधविश्वास पर। तीनों में तर्क और मानवीय दृष्टि महत्त्वपूर्ण है।

लेखक को लगता है कि बालक पर उसकी उम्र से अधिक ज्ञान लादा गया है। वह स्वाभाविक रूप से खेलने वाला बच्चा है। लट्टू माँगने पर लेखक को लगता है कि उसका बचपन अभी बचा हुआ है।

घड़ी का उदाहरण धर्म को समझने के अधिकार को सरल बनाता है। जैसे घड़ी के पुर्जे समझे जा सकते हैं, वैसे ही धर्म पर भी विचार किया जा सकता है। इससे लेखक का तर्क स्पष्ट और रोचक बनता है।

लेखक मिट्टी के ढेलों से जीवन-साथी या भविष्य तय करने की प्रथा पर व्यंग्य करता है। वह अनुभव और तर्क को अधिक महत्व देता है। इससे अंधविश्वासी सोच की कमजोरी सामने आती है।

इस अध्याय से गुलेरी जी का जीवन, तीनों निबंधों के मुख्य विचार, बालक की स्वाभाविक प्रवृत्ति, धर्म पर लेखक की दृष्टि, अंधविश्वास और भाषा-शैली पर प्रश्न आ सकते हैं। कथन-आधारित व्याख्या भी महत्वपूर्ण है।