Class 11 Hindi Antra Chapter 13 Important Questions गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात

Class 11 Hindi Antra Chapter 13 introduces students to भीष्म साहनी and his संस्मरण गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात. The chapter helps CBSE students understand national feeling, human values and international friendship through real-life memories.

भीष्म साहनी हिंदी के प्रमुख कथाकार, नाटककार और संस्मरणकार थे। Class 11 Hindi Antra Chapter 13 में उनकी आत्मकथा आज के अतीत का एक अंश पढ़ाया जाता है। इस संस्मरण में लेखक ने गांधी जी, जवाहरलाल नेहरू और यास्सेर अराफ़ात से जुड़े अपने अनुभवों को याद किया है।

Class 11 Hindi Antra Chapter 13 Important Questions छात्रों को पाठ के मुख्य प्रसंग, व्यक्तित्व-चित्रण और भाषा-शैली समझने में मदद करते हैं। इन प्रश्नों से छात्र सेवाग्राम, कश्मीर और फिलिस्तीन से जुड़े अनुभवों को परीक्षा के अनुसार तैयार कर सकते हैं। ये प्रश्न 2026–27 की तैयारी के लिए उपयोगी हैं।

Key Takeaways

  • भीष्म साहनी: उनका जन्म रावलपिंडी में हुआ था और वे हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकार थे।
  • गांधी जी: सेवाग्राम में उनका व्यवहार सरल, करुणामय और मानवीय दिखाई देता है।
  • नेहरू जी: कश्मीर प्रसंग में उनका व्यक्तित्व विनम्र, सुसंस्कृत और संवेदनशील रूप में उभरता है।
  • यास्सेर अराफ़ात: उनके आतिथ्य से अंतरराष्ट्रीय मैत्री और मानवीय आत्मीयता का भाव प्रकट होता है।

Access Class 11 Hindi Antra Chapter 13 गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात Important Questions in 30 Minutes

Revise the chapter in three parts:

  • First 10 minutes: भीष्म साहनी का जीवन, साहित्य और संस्मरण की पृष्ठभूमि
  • Next 10 minutes: सेवाग्राम, गांधी जी के साथ चलने का अनुभव और रोगी बालक का प्रसंग
  • Final 10 minutes: नेहरू जी, यास्सेर अराफ़ात, अंतरराष्ट्रीय मैत्री और भाषा-शैली

Need help revising गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात के मुख्य प्रसंग?

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लघु उत्तरीय प्रश्न 2 अंक Class 11 Hindi Antra Chapter 13 Important Questions

इन प्रश्नों में दो से तीन पंक्तियों में उत्तर लिखें। उत्तर पाठ की घटना और सही संदर्भ से जुड़ा होना चाहिए।

Q1. भीष्म साहनी का जन्म कहाँ हुआ था?

भीष्म साहनी का जन्म रावलपिंडी में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है। उनकी प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही हुई थी।

Q2. भीष्म साहनी ने उच्च शिक्षा कहाँ से प्राप्त की?

भीष्म साहनी ने गवर्नमेंट कॉलेज लाहौर से अंग्रेजी साहित्य में एम.ए. किया। बाद में उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की।

Q3. भीष्म साहनी की प्रमुख रचनाएँ कौन-सी हैं?

भीष्म साहनी की प्रमुख रचनाओं में तमस, बसंती, मय्यादास की माड़ी, माधवी, हानूश, कबिरा खड़ा बाज़ार में और कई कहानी-संग्रह शामिल हैं।

Q4. भीष्म साहनी को किस रचना के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला?

भीष्म साहनी को उनके प्रसिद्ध उपन्यास तमस के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। यह उनकी महत्वपूर्ण साहित्यिक उपलब्धि मानी जाती है।

Q5. गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात पाठ किस पुस्तक का अंश है?

यह पाठ भीष्म साहनी की आत्मकथा आज के अतीत का एक अंश है। इसमें लेखक ने अपने जीवन के महत्त्वपूर्ण संस्मरण लिखे हैं।

Q6. लेखक सेवाग्राम कब और क्यों गया था?

लेखक लगभग सन् 1938 में सेवाग्राम गया था। उसके भाई बलराज वहाँ नई तालीम पत्रिका के सह-संपादक के रूप में काम कर रहे थे। लेखक कुछ दिन उनके साथ बिताने गया था।

Q7. सेवाग्राम तक पहुँचने के लिए लेखक को कहाँ उतरना पड़ता था?

लेखक को वर्धा स्टेशन पर उतरना पड़ता था। वहाँ से सेवाग्राम लगभग पाँच मील दूर था, जहाँ तक इक्के या ताँगे से जाना होता था।

Q8. गांधी जी प्रातः कितने बजे घूमने निकलते थे?

गांधी जी प्रातः सात बजे घूमने निकलते थे। लेखक ने अगले दिन सुबह उन्हें देखने और उनके साथ चलने की प्रतीक्षा की।

Q9. गांधी जी के साथ चलते समय लेखक ने किन लोगों को पहचाना?

लेखक ने गांधी जी के साथ चलने वालों में डॉ. सुशीला नय्यर और गांधी जी के निजी सचिव महादेव देसाई को पहचाना।

Q10. अराफ़ात ने लेखक और उनकी पत्नी को क्या पिलाया?

अराफ़ात ने लेखक और उनकी पत्नी के लिए शहद की चाय बनाई। वे फल छील-छीलकर भी उन्हें खिला रहे थे।

लघु उत्तरीय प्रश्न 3 अंक गांधी नेहरू और यास्सेर अराफ़ात Question Answer

इन प्रश्नों में घटना, व्यक्तित्व और भाव को थोड़ा विस्तार दें। उत्तर में पाठ का प्रसंग जरूर आए।

Q1. लेखक का गांधी जी के साथ चलने का पहला अनुभव कैसा था?

लेखक गांधी जी को पहली बार पास से देखकर पुलकित हो उठा। उसे गांधी जी वैसे ही लगे जैसे उसने उन्हें चित्रों में देखा था। उनकी कमर से नीचे लटकती घड़ी भी उसे परिचित-सी लगी।

लेखक गांधी जी से बात करना चाहता था, लेकिन उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या कहे। बाद में उसने रावलपिंडी का प्रसंग छेड़ा। गांधी जी ने तुरंत उसे याद किया और मुस्कुराकर उत्तर दिया।

Q2. गांधी जी ने लेखक से “इसे भी घेर लिया” क्यों कहा?

जब लेखक के भाई बलराज ने गांधी जी से उसका परिचय कराया, तो गांधी जी हँसकर बोले, “अच्छा, इसे भी घेर लिया।” उनका आशय था कि बलराज ने अपने भाई को भी आश्रम के वातावरण से जोड़ लिया है।

बलराज ने उत्तर दिया कि लेखक केवल कुछ दिनों के लिए आया है। गांधी जी ने मुस्कुराकर लेखक की ओर देखा और सिर हिला दिया। इस प्रसंग से गांधी जी का हल्का विनोदी स्वभाव दिखाई देता है।

Q3. सेवाग्राम में लेखक ने किन-किन देशभक्तों को देखा?

लेखक ने सेवाग्राम में कई जाने-माने देशभक्तों को देखा। इनमें पृथ्वीसिंह आज़ाद, मीरा बेन, खान अब्दुल गफ्फार खान और राजेंद्र बाबू शामिल थे।

इन व्यक्तियों की उपस्थिति से सेवाग्राम केवल दूर का कस्बा नहीं लगता था। वहाँ राष्ट्रीय चेतना और स्वतंत्रता आंदोलन का वातावरण दिखाई देता था।

Q4. रोगी बालक के प्रति गांधी जी का व्यवहार कैसा था?

रोगी बालक बहुत बेचैन था और बार-बार बापू को बुलाने की बात कह रहा था। गांधी जी स्वयं उसके पास आए। उन्होंने उसके फूले हुए पेट पर हाथ फेरा और समझ गए कि उसने बहुत ईख पी ली है।

गांधी जी ने उसे उल्टी करने को कहा और उसके पास खड़े रहे। उनके चेहरे पर क्रोध या झुंझलाहट नहीं थी। वे हँसते हुए उसे “तू तो पागल है” कहते रहे।

Q5. गांधी जी रोज एक रोगी व्यक्ति से क्यों मिलते थे?

सेवाग्राम की कच्ची सड़क के एक सिरे पर एक कुटिया थी, जिसमें एक रोगी व्यक्ति रहता था। गांधी जी हर दिन उसके पास जाते थे और उसके स्वास्थ्य के बारे में पूछते थे।

लेखक को लगता है कि गांधी जी की देखरेख में उसका इलाज चल रहा था। यह गांधी जी की सेवा-भावना और नियमित मानवीय संवेदना को दिखाता है।

Q6. कश्मीर के लोगों ने नेहरू जी का स्वागत कैसे किया?

कश्मीर में नेहरू जी का बहुत भव्य स्वागत हुआ। झेलम नदी पर शहर के एक सिरे से दूसरे सिरे तक नावों में उनकी शोभायात्रा निकाली गई। नदी के दोनों ओर हजारों कश्मीरी लोग उत्साह के साथ उनका स्वागत कर रहे थे।

यह दृश्य अत्यंत अद्भुत था। इससे नेहरू जी के प्रति लोगों का प्रेम और सम्मान प्रकट होता है।

Q7. नेहरू जी द्वारा सुनाई गई बाजीगर की कहानी का मुख्य भाव क्या था?

नेहरू जी ने फ्रांस के लेखक अनातोले फ्रांस की कहानी सुनाई। इसमें एक गरीब बाजीगर माता मरियम को कोई भेंट नहीं दे पाता। अंत में वह अपने करतब ही श्रद्धा के रूप में दिखाता है।

कहानी का मुख्य भाव यह है कि सच्ची भक्ति बाहरी उपहारों से नहीं, हृदय की सच्चाई से होती है। माता मरियम स्वयं उसके श्रम और श्रद्धा को स्वीकार करती हैं।

Q8. अखबार वाली घटना से नेहरू जी के व्यक्तित्व की कौन-सी विशेषता स्पष्ट होती है?

अखबार वाली घटना से नेहरू जी की विनम्रता और शिष्टता स्पष्ट होती है। लेखक जानबूझकर अखबार हाथ में रखे रहा ताकि नेहरू जी से बातचीत हो सके।

नेहरू जी ने नाराज़ होने के बजाय धीरे से पूछा कि यदि लेखक ने देख लिया हो, तो क्या वे एक नजर देख सकते हैं। इससे उनका संयम और सभ्यता दिखाई देती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 5 अंक Class 11 Hindi Antra Gadh Khand Chapter 13

इन प्रश्नों में घटना, संदर्भ, व्यक्तित्व-चित्रण और लेखक की दृष्टि को साथ लेकर उत्तर लिखें।

Q1. भीष्म साहनी के जीवन और साहित्यिक व्यक्तित्व पर प्रकाश डालिए।

भीष्म साहनी हिंदी साहित्य के प्रमुख कथाकार, नाटककार और संस्मरणकार थे। उनका जन्म रावलपिंडी में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है। उनकी प्रारंभिक शिक्षा घर पर हुई और उन्होंने स्कूल में उर्दू तथा अंग्रेजी का अध्ययन किया।

उन्होंने गवर्नमेंट कॉलेज लाहौर से अंग्रेजी साहित्य में एम.ए. किया। बाद में पंजाब विश्वविद्यालय से पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। देश-विभाजन से पहले उन्होंने व्यापार के साथ-साथ मानद अध्यापन का काम किया।

विभाजन के बाद उन्होंने पत्रकारिता की, इप्टा नाटक मंडली में काम किया और अध्यापन से जुड़े। वे दिल्ली विश्वविद्यालय के जाकिर हुसैन कॉलेज में साहित्य के अध्यापक रहे। उन्होंने मास्को में विदेशी भाषा प्रकाशन गृह में अनुवादक के रूप में भी काम किया।

उनकी प्रमुख रचनाओं में तमस, झरोखे, कड़ियाँ, बसंती, मय्यादास की माड़ी, माधवी, हानूश और कबिरा खड़ा बाज़ार में शामिल हैं। तमस के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। उनकी भाषा सरल, संवादपूर्ण और आत्मीय है।

Q2. गांधी जी के साथ लेखक की सेवाग्राम वाली मुलाकात का वर्णन कीजिए।

लेखक सेवाग्राम अपने भाई बलराज से मिलने गया था। बलराज वहाँ नई तालीम पत्रिका के सह-संपादक थे। रात में लेखक को पता चला कि गांधी जी सुबह सात बजे घूमने निकलते हैं और कोई भी उनके साथ चल सकता है।

अगली सुबह लेखक जल्दी उठकर कच्ची सड़क पर गांधी जी की प्रतीक्षा करने लगा। ठीक सात बजे गांधी जी आश्रम के फाटक से अपने साथियों के साथ बाहर आए। उन्हें देखते ही लेखक पुलकित हो उठा।

बलराज सोता रह गया, इसलिए लेखक ने उसे झिंझोड़कर उठाया। दोनों तेज कदमों से चलकर गांधी जी की टोली से जा मिले। बलराज ने गांधी जी से लेखक का परिचय कराया।

गांधी जी ने हँसकर कहा, “अच्छा, इसे भी घेर लिया।” फिर लेखक ने रावलपिंडी का प्रसंग छेड़ा। गांधी जी ने तुरंत उसे याद किया और मिस्टर जॉन का नाम भी लिया। इस मुलाकात से गांधी जी की स्मरण-शक्ति, सरलता और आत्मीयता सामने आती है।

Q3. रोगी बालक के प्रसंग से गांधी जी के व्यक्तित्व की कौन-सी विशेषताएँ स्पष्ट होती हैं?

रोगी बालक का प्रसंग गांधी जी की करुणा, सेवा-भाव और सहज व्यवहार को दिखाता है। एक लड़का बार-बार चिल्ला रहा था कि वह मर रहा है और बापू को बुलाया जाए। कुछ लोग उसे शांत करने की कोशिश कर रहे थे, पर वह बापू को ही बुला रहा था।

गांधी जी स्वयं उसके पास आए। उन्होंने बालक के फूले हुए पेट पर हाथ फेरा और समझ गए कि उसने बहुत ईख पी ली है। उन्होंने उसे नीचे उतरकर उल्टी करने को कहा।

वे उसके पास खड़े रहे और उसकी पीठ पर हाथ रखे रहे। थोड़ी देर में बालक का पेट हल्का हो गया। गांधी जी ने उसे खोखे में जाकर चुपचाप लेटने को कहा।

इस पूरे प्रसंग में गांधी जी के चेहरे पर क्षोभ नहीं था। वे हँसते हुए बालक को “तू तो पागल है” कहते रहे। इससे उनकी सहजता, धैर्य, करुणा और सेवा-भाव स्पष्ट होते हैं।

Q4. नेहरू जी के कश्मीर प्रवास से जुड़े लेखक के अनुभव लिखिए।

लेखक ने कश्मीर में नेहरू जी को पास से देखने का अवसर पाया। नेहरू जी की कश्मीर यात्रा के समय उनका भव्य स्वागत हुआ। शेख अब्दुल्ला के नेतृत्व में झेलम नदी पर नावों में उनकी शोभायात्रा निकाली गई।

नेहरू जी जिस बंगले में ठहरे थे, वह लेखक के फुफेरे भाई का था। लेखक भी उनकी देखभाल में सहायता करने के लिए वहाँ पहुँचा। शाम को खाने की मेज पर वह नेहरू जी का वार्तालाप सुनता था।

एक दिन धर्म की चर्चा पर नेहरू जी ने अनातोले फ्रांस की एक मार्मिक कहानी सुनाई। सब लोग दत्तचित्त होकर कहानी सुनते रहे। इस प्रसंग से नेहरू जी की साहित्यिक रुचि और संवेदनशीलता दिखाई देती है।

अगली सुबह लेखक ने नेहरू जी को फर्श पर बैठकर चरखा कातते देखा। अखबार वाली घटना में नेहरू जी ने बहुत विनम्रता से लेखक से अखबार माँगा। इससे उनका शिष्ट और संयमित व्यक्तित्व सामने आता है।

Q5. यास्सेर अराफ़ात के आतिथ्य-प्रेम से जुड़ी घटनाओं का वर्णन कीजिए।

लेखक अफ्रो-एशियाई लेखक संघ से जुड़े थे। ट्यूनिस में लेखक संघ का सम्मेलन होने वाला था। उसी समय वहाँ यास्सेर अराफ़ात के नेतृत्व में फिलिस्तीनी अस्थायी सरकार काम कर रही थी।

लेखक और उनकी पत्नी को एक दिन सदरमुकाम में आमंत्रित किया गया। वहाँ यास्सेर अराफ़ात स्वयं बाहर आए और उन्हें अंदर ले गए। अंदर फिलिस्तीनी अधिकारी और लेखक उनसे आत्मीयता से मिले।

अराफ़ात लेखक और उनकी पत्नी के साथ बैठे। वे फल छील-छीलकर उन्हें खिला रहे थे और उनके लिए शहद की चाय बना रहे थे। बातचीत में उन्होंने भारत और फिलिस्तीन के संबंधों को आत्मीयता से याद किया।

भोजन के समय लेखक हाथ धोने गया। जब वह बाहर निकला, तो अराफ़ात स्वयं हाथ में तौलिया लिए खड़े थे। यह घटना उनके आतिथ्य, विनम्रता और आत्मीयता का सुंदर उदाहरण है।

Q6. “वे आपके ही नहीं, हमारे भी नेता हैं” कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।

यह कथन यास्सेर अराफ़ात ने गांधी जी और भारत के अन्य नेताओं के संदर्भ में कहा था। जब लेखक ने बातचीत में गांधी जी और भारतीय नेताओं का उल्लेख किया, तो अराफ़ात ने कहा कि वे केवल भारत के नेता नहीं, उनके भी नेता हैं।

इस कथन से गांधी जी के व्यक्तित्व की विश्वव्यापकता स्पष्ट होती है। गांधी जी का सत्य, अहिंसा और स्वतंत्रता का संदेश केवल भारत तक सीमित नहीं था। दुनिया के संघर्षशील समाजों ने भी उनसे प्रेरणा ली।

फिलिस्तीन के लोग भी साम्राज्यवादी शक्तियों के अन्याय से जूझ रहे थे। इसलिए भारत की स्वतंत्रता-लड़ाई और गांधी जी के विचार उनके लिए भी प्रेरणास्रोत थे।

यह कथन अंतरराष्ट्रीय मैत्री और साझा संघर्ष की भावना को व्यक्त करता है। इससे पता चलता है कि महान नेताओं का प्रभाव सीमाओं से परे जाता है।

Q7. गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात पाठ में राष्ट्रीयता और अंतरराष्ट्रीय मैत्री का भाव कैसे प्रकट होता है?

इस पाठ में भीष्म साहनी ने तीन अलग-अलग प्रसंगों के माध्यम से राष्ट्रीयता और अंतरराष्ट्रीय मैत्री का भाव व्यक्त किया है। सेवाग्राम में गांधी जी से जुड़े प्रसंग भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन, सेवा और मानवीय करुणा को सामने लाते हैं।

कश्मीर में नेहरू जी का स्वागत लोगों के प्रेम और राष्ट्रीय विश्वास को दिखाता है। झेलम नदी पर हजारों लोगों का स्वागत नेहरू जी के प्रति सम्मान और जनता की आशा का प्रतीक है।

यास्सेर अराफ़ात का प्रसंग भारत और फिलिस्तीन के संबंधों को दिखाता है। अराफ़ात भारतीय नेताओं को अपना भी नेता मानते हैं। वे लेखक और उसकी पत्नी के प्रति आत्मीय आतिथ्य दिखाते हैं।

इन तीनों प्रसंगों से पाठ केवल व्यक्तिगत स्मृति नहीं रह जाता। यह देशप्रेम, जननेतृत्व, मानवता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का संस्मरण बन जाता है।

Q8. गांधी, नेहरू और यास्सेर अराफ़ात पाठ की भाषा-शैली की विशेषताएँ लिखिए।

इस पाठ की भाषा सरल, आत्मीय और संस्मरणात्मक है। भीष्म साहनी ने अपने अनुभवों को ऐसे लिखा है कि पाठक घटनाओं को सामने घटते हुए महसूस करता है। छोटे वाक्य और संवाद पाठ को जीवंत बनाते हैं।

गांधी जी के साथ चलने का अनुभव, रोगी बालक का प्रसंग, नेहरू जी द्वारा सुनाई गई कहानी और अराफ़ात का आतिथ्य, सभी दृश्यात्मक ढंग से लिखे गए हैं। लेखक कहीं भी भारी भाषा का प्रयोग नहीं करता।

पाठ में संवाद बहुत प्रभावशाली हैं। “इसे भी घेर लिया”, “तू तो पागल है” और “वे आपके ही नहीं, हमारे भी नेता हैं” जैसे वाक्य व्यक्तित्व को सीधे सामने ला देते हैं।

भाषा में सहजता के साथ भावुकता भी है। संस्मरण होने के कारण इसमें आत्मीयता, स्मृति और अनुभव का सुंदर मेल मिलता है।

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FAQs (Frequently Asked Questions)

यह पाठ लेखक की निजी स्मृतियों पर आधारित है। भीष्म साहनी ने गांधी जी, नेहरू जी और यास्सेर अराफ़ात से जुड़े अपने अनुभव लिखे हैं। इसलिए यह संस्मरणात्मक पाठ है।

इस प्रसंग में गांधी जी की करुणा और सहज सेवा-भाव दिखाई देता है। वे बिना झुंझलाए बालक के पास जाते हैं और उसकी समस्या समझते हैं। इससे उनका मानवीय व्यक्तित्व सामने आता है।

इस घटना से विनम्रता और संयम की सीख मिलती है। नेहरू जी नाराज़ नहीं होते, बल्कि बहुत सभ्य ढंग से अखबार माँगते हैं। उनका व्यवहार उनके संस्कार और शिष्टता को दिखाता है।

अराफ़ात ने लेखक और उनकी पत्नी का आत्मीय स्वागत किया। वे स्वयं फल छीलकर खिला रहे थे, शहद की चाय बना रहे थे और तौलिया लेकर खड़े थे। यह व्यवहार सादगी और अपनापन दिखाता है।

इस अध्याय से भीष्म साहनी का जीवन, सेवाग्राम का अनुभव, गांधी जी का व्यवहार, नेहरू जी का व्यक्तित्व, अराफ़ात का आतिथ्य, अंतरराष्ट्रीय मैत्री और भाषा-शैली पर प्रश्न आ सकते हैं।