Important Questions Class 11 Hindi Antra Chapter 8: भारतवर्ष की उन्नति कैसे हो सकती है?
‘भारतवर्ष की उन्नति कैसे हो सकती है?’ में भारतेंदु हरिश्चंद्र राष्ट्रीय प्रगति के व्यावहारिक उपाय बताते हैं।
वे परिश्रम, शिक्षा, सामाजिक सुधार, स्वदेशी उद्योग, एकता और अपनी भाषा को उन्नति का आधार मानते हैं।
‘भारतवर्ष की उन्नति कैसे हो सकती है?’ भारतेंदु हरिश्चंद्र का प्रसिद्ध भाषण है। इसे बलिया के ददरी मेले में प्रस्तुत किया गया था। लेखक भारतीय समाज के आलस्य, समय के दुरुपयोग, रूढ़ियों और दूसरों पर निर्भर रहने की प्रवृत्ति पर व्यंग्य करते हैं।
इन Important Questions Class 11 Hindi Antra Chapter 8 से विद्यार्थी पाठ के विचार, उदाहरण, व्यंग्य और भाषण-शैली का अभ्यास कर सकते हैं। उत्तरों में लेखक के सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक और राष्ट्रीय सुधारों को स्पष्ट किया गया है।
Key Takeaways
- परिश्रम: लेखक राष्ट्रीय उन्नति के लिए आलस्य छोड़ना आवश्यक मानते हैं।
- एकता: जाति, क्षेत्र और सम्प्रदाय के मतभेद प्रगति में बाधा बनते हैं।
- स्वदेशी उद्योग: देश का धन देश में रखने के लिए स्थानीय कारीगरी आवश्यक है।
- अपनी भाषा: ज्ञान और उन्नति को जनसाधारण तक पहुँचाने का प्रभावी माध्यम है।
Access Class 11 Hindi Antra Chapter 8 Important Questions in 30 Minutes
प्रश्नों का अभ्यास तीन भागों में करें:
पहले 10 मिनट: आलस्य, समय, परिश्रम और आत्मनिर्भरता
अगले 10 मिनट: शिक्षा, धार्मिक सुधार, स्त्री-शिक्षा और सामाजिक एकता
अन्तिम 10 मिनट: स्वदेशी उद्योग, अपनी भाषा, व्यंग्य और भाषण-शैली
लेखक के उन्नति-सुझावों और भाषण में दिए गए उदाहरणों को समझने में कठिनाई हो रही है?
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1 अंक के अति लघु उत्तरीय प्रश्न
ये प्रश्न लेखक, विधा और पाठ के मुख्य विचारों की प्रत्यक्ष समझ जाँचते हैं।
Q1. ‘भारतवर्ष की उन्नति कैसे हो सकती है?’ के लेखक कौन हैं?
उत्तर: इस पाठ के लेखक भारतेंदु हरिश्चंद्र हैं।
Q2. यह पाठ किस विधा में लिखा गया है?
उत्तर: यह पाठ मूल रूप से एक भाषण है।
Q3. भारतेंदु ने यह भाषण कहाँ दिया था?
उत्तर: भारतेंदु ने यह भाषण बलिया के ददरी मेले में दिया था।
Q4. लेखक ने भारतीयों की तुलना किससे की है?
उत्तर: लेखक ने भारतीयों की तुलना इंजन के बिना खड़ी रेलगाड़ी से की है।
Q5. लेखक के अनुसार उन्नति का सबसे बड़ा शत्रु क्या है?
उत्तर: लेखक के अनुसार आलस्य और समय का दुरुपयोग उन्नति के बड़े शत्रु हैं।
Q6. लेखक अपनी भाषा के विषय में क्या सन्देश देता है?
उत्तर: लेखक अपने देश में अपनी भाषा के माध्यम से उन्नति करने का सन्देश देता है।
2–3 अंक के लघु उत्तरीय प्रश्न
इन प्रश्नों में लेखक के विचार और उदाहरण का सम्बन्ध स्पष्ट करना आवश्यक है।
Q7. लेखक ने भारतीयों को रेल की गाड़ी क्यों कहा है?
उत्तर: लेखक के अनुसार भारतीयों में क्षमता की कमी नहीं है। वे रेल के अच्छे डिब्बों के समान हैं, लेकिन उन्हें चलाने वाला इंजन नहीं है।
इस तुलना से वह नेतृत्व, आत्मबल और सक्रियता की कमी पर व्यंग्य करता है।
Q8. “इस अभागे आलसी देश में जो कुछ हो जाए वही बहुत कुछ है” क्यों कहा गया है?
उत्तर: लेखक भारतीय समाज की निष्क्रियता और आलस्य से निराश है। बड़े नगरों में भी सार्वजनिक सुधार के प्रयास कम दिखाई देते थे।
इसलिए बलिया जैसे छोटे नगर में लोगों का उत्साहपूर्वक एकत्र होना उसे प्रशंसनीय लगता है।
Q9. लेखक ने विश्व की उन्नति को घुड़दौड़ क्यों कहा है?
उत्तर: विभिन्न देश ज्ञान, उद्योग और तकनीक में तेजी से आगे बढ़ रहे थे। प्रत्येक देश दूसरों से पहले प्रगति करना चाहता था।
घुड़दौड़ का रूपक बताता है कि पीछे रहने वाला देश आगे बढ़ने का अवसर खो सकता है।
Q10. भारतेंदु समय के सदुपयोग को कैसे समझाते हैं?
उत्तर: लेखक इंग्लैंड के श्रमिकों और गाड़ीवानों का उदाहरण देता है। वे काम के बीच मिले छोटे समय में भी अखबार पढ़ते और उपयोगी विषयों पर चर्चा करते हैं।
इसके विपरीत भारतीय लोग खाली समय को हुक्का पीने और निरर्थक बातचीत में बिताते हैं।
Q11. लेखक राजा-महाराजाओं का मुँह न देखने की सलाह क्यों देता है?
उत्तर: लेखक जनता को अपने विकास के लिए शासकों या धनी लोगों पर निर्भर नहीं रहने देना चाहता। उसके अनुसार समाज को अपनी कमर कसकर स्वयं प्रयास करना चाहिए।
उन्नति सामूहिक परिश्रम और आत्मनिर्भरता से सम्भव है।
Q12. लेखक ने इंग्लैंड की प्रगति का क्या कारण बताया है?
उत्तर: लेखक के अनुसार वहाँ के लोग आजीविका चलाने के साथ नए उपाय भी खोजते हैं। वे समय को व्यर्थ नहीं करते और उत्पादन बढ़ाने के साधनों पर विचार करते हैं।
परिश्रम तथा व्यावहारिक बुद्धि उनकी प्रगति के प्रमुख कारण हैं।
Q13. लेखक व्यापक उन्नति से क्या समझता है?
उत्तर: व्यापक उन्नति का अर्थ केवल धन या शासन का विकास नहीं है। धर्म, शिक्षा, रोजगार, व्यवहार, स्वास्थ्य और समाज सभी क्षेत्रों में सुधार आवश्यक है।
यह सुधार स्त्री-पुरुष, अमीर-गरीब और सभी आयु-वर्गों तक पहुँचना चाहिए।
Q14. लेखक धार्मिक परम्पराओं को पूरी तरह छोड़ने की बात क्यों नहीं करता?
उत्तर: लेखक मानता है कि अनेक परम्पराओं के पीछे सामाजिक या स्वास्थ्य सम्बन्धी उपयोगिता थी। समस्या तब उत्पन्न हुई जब लोग उनका उद्देश्य भूल गए।
वह उपयोगी परम्पराओं को समझकर अपनाने और अनुपयोगी बातों को बदलने का सुझाव देता है।
Q15. भारतेंदु बाल-विवाह का विरोध क्यों करते हैं?
उत्तर: बाल-विवाह बच्चों के शारीरिक विकास, शिक्षा और आयु पर बुरा प्रभाव डालता है। लेखक चाहता है कि युवक पहले स्वस्थ और शिक्षित बनें।
विवाह योग्य समझ तथा जिम्मेदारी विकसित होने के बाद होना चाहिए।
Q16. लेखक स्त्री-शिक्षा को क्यों आवश्यक मानता है?
उत्तर: शिक्षित स्त्री अपने परिवार, बच्चों और समाज के विकास में योगदान दे सकती है। लेखक ऐसी उपयोगी शिक्षा चाहता है जो स्त्रियों को समझदार और सक्षम बनाए।
वह शिक्षा को राष्ट्रीय सुधार का आवश्यक भाग मानता है।
Q17. लेखक मत-मतान्तर छोड़ने का आग्रह क्यों करता है?
उत्तर: धार्मिक, जातीय और क्षेत्रीय विवाद लोगों की शक्ति को विभाजित करते हैं। ऐसी स्थिति में देश सामूहिक रूप से आगे नहीं बढ़ सकता।
लेखक सभी समुदायों को परस्पर प्रेम और सहयोग बढ़ाने का सन्देश देता है।
Q18. लेखक छोटी जातियों के तिरस्कार का विरोध कैसे करता है?
उत्तर: लेखक कहता है कि किसी व्यक्ति का सम्मान उसकी योग्यता के अनुसार होना चाहिए। जाति के आधार पर अपमान करने से लोगों का मनोबल टूटता है।
राष्ट्रीय उन्नति के लिए सभी वर्गों का सम्मान और सहयोग आवश्यक है।
कथन और पंक्ति-आधारित प्रश्न
उत्तर में कथन का सन्दर्भ, सीधा अर्थ और पाठ के विचार से सम्बन्ध लिखें।
Q19. “जो पीछे रह जाएगा, फिर कोटि उपाय किए भी आगे न बढ़ सकेगा।” आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: लेखक प्रगति के उपलब्ध अवसर को तुरन्त अपनाने का आग्रह करता है। संसार तेजी से ज्ञान, उद्योग और तकनीक में आगे बढ़ रहा है।
लम्बे समय तक निष्क्रिय रहने वाला देश दूसरे देशों से बहुत पीछे रह सकता है।
Q20. “तुम आप ही कमर कसो, आलस छोड़ो।” कथन का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: लेखक जनता को आत्मनिर्भर बनने का सन्देश देता है। उन्नति के लिए केवल शासन, राजा या धर्मगुरु से सहायता की आशा नहीं करनी चाहिए।
लोगों को स्वयं परिश्रम करके अपनी सामाजिक और आर्थिक स्थिति सुधारनी चाहिए।
Q21. “वास्तविक धर्म तो केवल परमेश्वर के चरण-कमल का भजन है।” इसका आशय क्या है?
उत्तर: लेखक आध्यात्मिक आस्था और सामाजिक रीति-रिवाजों में अन्तर करता है। उसके अनुसार अनेक व्रत, मेले और परम्पराएँ समाज की सुविधा के लिए बनाई गई थीं।
ऐसी सामाजिक व्यवस्थाओं को समय तथा आवश्यकता के अनुसार बदला जा सकता है।
Q22. “जैसे हजार धारा होकर गंगा समुद्र में मिली है, वैसे ही तुम्हारी लक्ष्मी हजार तरह से विदेश जाती है।” आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: लेखक विदेशी वस्तुओं की खरीद से देश का धन बाहर जाने की समस्या बताता है। छोटी-बड़ी अनेक वस्तुएँ विदेश से मँगाने के कारण स्थानीय उद्योग कमजोर होते हैं।
वह देश में वस्तुओं का निर्माण और स्वदेशी कारीगरी बढ़ाने का आग्रह करता है।
Q23. “अपने देश में अपनी भाषा में उन्नति करो” से लेखक का क्या तात्पर्य है?
उत्तर: लेखक चाहता है कि शिक्षा, ज्ञान और उपयोगी विचार अपनी भाषा में उपलब्ध हों। इससे सामान्य जनता भी उन्हें समझकर विकास में भाग ले सकेगी।
अपनी भाषा का विकास राष्ट्रीय आत्मसम्मान और जनशिक्षा से जुड़ा है।
5 अंक के दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
इन प्रश्नों में लेखक के सुझावों को उदाहरणों सहित क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत करें।
Q24. भारतेंदु हरिश्चंद्र ने भारत की उन्नति के लिए कौन-कौन से उपाय बताए हैं?
उत्तर: भारतेंदु हरिश्चंद्र राष्ट्रीय उन्नति को व्यापक सामाजिक परिवर्तन से जोड़ते हैं।
सबसे पहले वे आलस्य छोड़कर परिश्रम करने का आग्रह करते हैं। उनके अनुसार समय का प्रत्येक क्षण उपयोगी कार्य, शिक्षा और चिंतन में लगना चाहिए।
वे जनता को शासकों तथा धनी लोगों पर निर्भर रहने के बजाय आत्मनिर्भर बनने की सलाह देते हैं। लोगों को स्वयं अपनी आर्थिक और सामाजिक स्थिति सुधारनी चाहिए।
लेखक शिक्षा, स्त्री-शिक्षा और व्यावहारिक ज्ञान को आवश्यक मानता है। वह बाल-विवाह, बहुविवाह, जातिगत भेदभाव और अनुपयोगी रूढ़ियों को दूर करना चाहता है।
वह धार्मिक और क्षेत्रीय मतभेद छोड़कर राष्ट्रीय एकता बढ़ाने का आग्रह करता है। हिन्दू, मुस्लिम और विभिन्न प्रान्तों के लोग मिलकर कार्य करें।
आर्थिक उन्नति के लिए वह स्वदेशी कारीगरी, स्थानीय उत्पादन और अपनी भाषा को बढ़ावा देने का सुझाव देता है।
Q25. पाठ में आलस्य और समय के दुरुपयोग पर किस प्रकार व्यंग्य किया गया है?
उत्तर: लेखक भारतीय समाज की निष्क्रियता पर तीखा, लेकिन रोचक व्यंग्य करता है। वह कहता है कि इस आलसी देश में थोड़ा काम भी बहुत बड़ा माना जाता है।
भारतीयों की तुलना रेलगाड़ी से की गई है। डिब्बे अच्छे हैं, लेकिन इंजन के बिना वे चल नहीं सकते। इसका अर्थ है कि क्षमता होते हुए भी लोग सक्रिय नहीं हैं।
लेखक विदेशी गाड़ीवान का उदाहरण देता है, जो खाली समय में अखबार पढ़ता है। इसके विपरीत भारतीय व्यक्ति हुक्का पीता या निरर्थक गप्पें करता है।
‘अजगर करे न चाकरी’ वाला दोहा भी आलस्यपूर्ण सोच पर व्यंग्य करता है। लेखक समझाता है कि निष्क्रियता गरीबी और पिछड़ेपन को बढ़ाती है।
हास्य, लोककथाओं, मुहावरों और तुलना के माध्यम से लेखक जनता को झकझोरता है।
Q26. पाठ के आधार पर भारतेंदु की सामाजिक सुधार सम्बन्धी दृष्टि स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: भारतेंदु सामाजिक परम्पराओं को विवेक के आधार पर परखना चाहते हैं। वे मानते हैं कि कई रीति-रिवाज मूल रूप से उपयोगी थे, लेकिन लोगों ने उनका उद्देश्य भुला दिया।
वह सामाजिक धर्म और वास्तविक आध्यात्मिक धर्म में अन्तर करते हैं। सामाजिक व्यवस्थाएँ समय और आवश्यकता के अनुसार बदली जा सकती हैं।
लेखक बाल-विवाह, बहुविवाह और जातिगत तिरस्कार का विरोध करता है। वह युवक-युवतियों की शिक्षा और स्वस्थ विकास को महत्त्व देता है।
वह स्त्री-शिक्षा का समर्थन करता है। शिक्षित स्त्री परिवार तथा समाज की प्रगति में उपयोगी भूमिका निभा सकती है।
लेखक सभी जातियों और सम्प्रदायों को समान सम्मान तथा सहयोग का सन्देश देता है। उसकी सुधार-दृष्टि राष्ट्रीय एकता से जुड़ी है।
Q27. पाठ में राष्ट्रीय एकता का सन्देश किस प्रकार दिया गया है?
उत्तर: लेखक राष्ट्रीय उन्नति के लिए आपसी मतभेदों को बड़ी बाधा मानता है। वह धार्मिक, जातीय, भाषायी और क्षेत्रीय विभाजनों को छोड़ने का आग्रह करता है।
वह हिन्दू, जैन और मुस्लिम समुदायों को परस्पर प्रेम तथा सहयोग बढ़ाने की सलाह देता है। किसी समुदाय को दूसरे से नीचा नहीं समझना चाहिए।
बंगाली, मराठी, पंजाबी और मद्रासी जैसे क्षेत्रीय समूहों को एक-दूसरे का हाथ पकड़ने का सन्देश दिया गया है।
लेखक घर में लगी आग का उदाहरण देता है। संकट के समय परिवार के सदस्य निजी विरोध छोड़कर मिलकर आग बुझाते हैं।
इसी प्रकार देश की कठिन स्थिति में सभी समुदायों को एकजुट होना चाहिए। एकता से राष्ट्रीय शक्ति और विकास दोनों बढ़ते हैं।
Q28. भारतेंदु ने आर्थिक आत्मनिर्भरता की आवश्यकता कैसे समझाई है?
उत्तर: लेखक विदेशी वस्तुओं पर अत्यधिक निर्भरता को देश की आर्थिक कमजोरी मानता है। उसके अनुसार भारत का धन अनेक मार्गों से विदेश जा रहा था।
वह कपड़ा, कंघी, बत्ती और माचिस जैसी सामान्य वस्तुओं के उदाहरण देता है। ऐसी वस्तुएँ भी देश में न बनना आर्थिक निर्भरता को दिखाता है।
लेखक स्थानीय कारीगरी और उद्योग बढ़ाने का आग्रह करता है। लोगों को ऐसी वस्तुएँ बनानी चाहिए जिनसे देश का धन देश में ही रहे।
युवाओं को केवल नौकरी पर निर्भर रहने के बजाय कोई उपयोगी रोजगार और कौशल सीखना चाहिए।
आर्थिक उन्नति के लिए उत्पादन, परिश्रम, व्यावहारिक शिक्षा और स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग आवश्यक है।
Q29. सिद्ध कीजिए कि ‘भारतवर्ष की उन्नति कैसे हो सकती है?’ एक भाषण है।
उत्तर: इस पाठ में भाषण-विधा की अनेक विशेषताएँ दिखाई देती हैं।
लेखक श्रोताओं को ‘भाइयो’ और अन्य सीधे सम्बोधनों से पुकारता है। इससे वक्ता और श्रोताओं का प्रत्यक्ष सम्बन्ध बनता है।
पाठ में प्रश्नोत्तर शैली का प्रयोग हुआ है। लेखक स्वयं सम्भावित प्रश्न उठाकर उनके उत्तर देता है।
लोकप्रचलित कथाएँ, दोहे, मुहावरे और उदाहरण भाषण को रोचक बनाते हैं। रेलगाड़ी, घुड़दौड़ और गंगा की धाराओं जैसे उदाहरण विचार समझाते हैं।
लेखक आदेशात्मक वाक्यों का उपयोग करता है, जैसे आलस छोड़ो, कमर कसो और आपस में मिलो। ये वाक्य श्रोताओं को कार्य करने के लिए प्रेरित करते हैं।
सरल बोलचाल की भाषा, व्यंग्य और भावपूर्ण आह्वान इसे प्रभावशाली भाषण बनाते हैं।
Q30. “अपने देश में अपनी भाषा में उन्नति करो” की वर्तमान प्रासंगिकता स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: अपनी भाषा में शिक्षा और ज्ञान उपलब्ध होने से अधिक लोग उसे समझ सकते हैं। इससे समाज के विभिन्न वर्ग विकास की प्रक्रिया में भाग लेते हैं।
मातृभाषा जटिल विचारों को समझने और अभिव्यक्त करने में सहायता करती है। इसके माध्यम से स्थानीय अनुभवों और ज्ञान को भी सुरक्षित रखा जा सकता है।
लेखक विदेशी भाषाओं का ज्ञान निषिद्ध नहीं करता। उसका मुख्य आग्रह अपनी भाषा की उपेक्षा न करने पर है।
विज्ञान, तकनीक, प्रशासन और रोजगार से सम्बन्धित सामग्री भारतीय भाषाओं में उपलब्ध होने से ज्ञान का दायरा बढ़ सकता है।
इसलिए अपनी भाषा का विकास शिक्षा, जनभागीदारी और सांस्कृतिक आत्मविश्वास के लिए आज भी उपयोगी है।
भारत की उन्नति के प्रमुख उपाय
| क्षेत्र | लेखक का सुझाव | उद्देश्य |
| व्यक्तिगत जीवन | आलस्य छोड़कर परिश्रम | कार्यक्षमता बढ़ाना |
| समय | प्रत्येक क्षण का उपयोग | ज्ञान और उत्पादन बढ़ाना |
| शिक्षा | उपयोगी और व्यावहारिक शिक्षा | विवेक तथा कौशल का विकास |
| स्त्री-शिक्षा | लड़कियों को शिक्षित करना | परिवार और समाज की उन्नति |
| सामाजिक सुधार | बाल-विवाह और भेदभाव हटाना | स्वस्थ और समान समाज |
| धर्म | उपयोगी परम्पराओं को समझना | रूढ़ियों से मुक्ति |
| राष्ट्रीय एकता | मत-मतान्तर छोड़ना | सामूहिक शक्ति बढ़ाना |
| अर्थव्यवस्था | स्वदेशी उद्योग और कारीगरी | धन को देश में रखना |
| रोजगार | युवाओं को कौशल सिखाना | आत्मनिर्भरता |
| भाषा | अपनी भाषा में ज्ञान-विकास | जनसाधारण तक शिक्षा पहुँचाना |
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FAQs (Frequently Asked Questions)
नहीं। लेखक उनकी मेहनत और समय-प्रबन्धन से सीखने की बात करता है, लेकिन औपनिवेशिक व्यवस्था पर व्यंग्य भी करता है। उसका मुख्य उद्देश्य भारतीय समाज को सक्रिय और आत्मनिर्भर बनाना है।
वह वास्तविक आस्था और सामाजिक रूढ़ियों में अन्तर करते हैं। उनके अनुसार धर्म का नैतिक पक्ष उपयोगी है। समय के प्रतिकूल सामाजिक नियमों को समझकर बदलना आवश्यक है।
लेखक निष्क्रियता को आर्थिक पिछड़ेपन का एक कारण मानता है। परिश्रम, कौशल और नए उत्पादन-उपाय आय बढ़ा सकते हैं। केवल भाग्य या दूसरों की सहायता पर निर्भरता स्थिति नहीं बदलती।
विदेशी उदाहरण भारत की स्थिति से तुलना करने के लिए दिए गए हैं। इनके माध्यम से लेखक समय के सदुपयोग, श्रम और व्यावहारिक सोच का महत्त्व समझाता है।
नहीं। इसका अर्थ अपनी भाषा की उपेक्षा न करना है। दूसरी भाषाओं से ज्ञान लिया जा सकता है, लेकिन शिक्षा और उपयोगी विचार अपनी भाषा में भी उपलब्ध होने चाहिए।