Important Questions Class 12 Hindi Antral Chapter 1 Devsena Ka Geet and Karneliya Ka Geet
Important questions help students revise exam-focused themes, line meanings, poetic devices and answer-writing points. In poetry chapters, students should connect भाव, संदर्भ, बिंब, भाषा and काव्य-सौंदर्य with exact lines.
Poetry answers in CBSE Hindi require भावार्थ, संदर्भ and काव्य-सौंदर्य in a precise format. Important Questions Class 12 Hindi Antral Chapter 1 help students revise “Devsena Ka Geet” and “Karneliya Ka Geet” by Jaishankar Prasad for CBSE 2026. The updated NCERT book places both songs in Chapter 1 and links them to Prasad’s plays “Skandagupta” and “Chandragupta”. Students should prepare NCERT exercise questions, poetic line explanations, imagery-based answers and 3-mark or 5-mark answer formats.
Key Takeaways
- Poet: Jaishankar Prasad wrote both “Devsena Ka Geet” and “Karneliya Ka Geet”.
- Devsena Ka Geet: The poem expresses Devsena’s pain, regret, lost hope and emotional farewell.
- Karneliya Ka Geet: The poem presents India’s beauty, compassion, shelter-giving nature and cultural pride.
- CBSE 2026 Focus: Answers should explain line meanings, imagery, poetic beauty and emotional context.
Important Questions Class 12 Hindi Antral Chapter 1 Structure 2026
| Poem | Source Text | Exam Focus |
| Devsena Ka Geet | “Skandagupta” play | वेदना, निराशा, आशा, जीवन-संध्या |
| Karneliya Ka Geet | “Chandragupta” play | भारत-गौरव, प्रकृति-चित्रण, करुणा |
| Question Type | NCERT exercise and extracts | भावार्थ, काव्य-सौंदर्य, व्यंजना |
Class 12 Hindi Antral Chapter 1 Devsena Ka Geet and Karneliya Ka Geet: CBSE 2026 Exam Focus
इस अध्याय में दो गीत हैं, पर दोनों की भावभूमि अलग है। “देवसेना का गीत” निजी वेदना का गीत है और “कानेलिया का गीत” भारत-भूमि के सौंदर्य का गीत है।
CBSE 2026 में इस अध्याय से पंक्ति-व्याख्या, काव्य-सौंदर्य, व्यंजना, प्रकृति-चित्रण और भावार्थ के प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
1. “Devsena Ka Geet” और “Karneliya Ka Geet” के कवि कौन हैं?
“Devsena Ka Geet” और “Karneliya Ka Geet” के कवि जयशंकर प्रसाद हैं। वे छायावाद के प्रमुख कवि और नाटककार थे।
उन्होंने कविता, नाटक, उपन्यास, कहानी और निबंध जैसी कई विधाओं में लेखन किया। उनकी रचनाओं में भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय चेतना और जीवन-मूल्य प्रमुख हैं।
“देवसेना का गीत” “स्कंदगुप्त” नाटक से लिया गया है। “कानेलिया का गीत” “चंद्रगुप्त” नाटक का प्रसिद्ध गीत है।
2. “Devsena Ka Geet” किस प्रसंग से जुड़ा है?
“Devsena Ka Geet” “स्कंदगुप्त” नाटक में देवसेना की भाव-स्थिति से जुड़ा है। देवसेना मालव-राज बंधुवर्मा की बहन है।
जीवन में देवसेना को स्कंदगुप्त से प्रेम था। पर स्कंदगुप्त विजया की ओर आकर्षित थे।
जीवन के अंतिम मोड़ पर स्कंदगुप्त देवसेना को पाना चाहते हैं, पर देवसेना आशा और सुख से विदा लेती है।
3. “Karneliya Ka Geet” किस प्रसंग से जुड़ा है?
“Karneliya Ka Geet” “चंद्रगुप्त” नाटक में कार्नेलिया के भारत-प्रेम से जुड़ा है। कार्नेलिया सिल्यूकस की बेटी है।
वह सिंधु के किनारे बैठकर भारत की प्रकृति और संस्कृति से प्रभावित होती है। उसे यह देश मधुमय, सहारा देने वाला और करुणा से भरा लगता है।
इस गीत में भारत की गौरवगाथा और प्राकृतिक सौंदर्य दोनों साथ आते हैं।
4. दोनों कविताओं की भावभूमि में क्या अंतर है?
“देवसेना का गीत” करुणा और निराशा का गीत है, जबकि “कानेलिया का गीत” सौंदर्य और गौरव का गीत है। दोनों गीतों में प्रसाद की गीतात्मकता दिखाई देती है।
देवसेना अपने जीवन की वेदना और व्यर्थ हुई आशा को याद करती है। कानेलिया भारत के मधुर रूप, प्रकृति और करुणा का गुणगान करती है।
एक गीत आत्मपीड़ा का है। दूसरा देश-प्रेम और सांस्कृतिक उदारता का है।
Devsena Ka Geet Class 12 Question Answer for NCERT Exercise
देवसेना के गीत में वेदना, भ्रम, आशा, हार और आत्मग्लानि के भाव आते हैं। Devsena Ka Geet Class 12 question answer लिखते समय पंक्ति का प्रसंग और भावार्थ दोनों स्पष्ट रखें।
NCERT अभ्यास में “मधुकरियों की भीख”, “आशा बावली”, “दुर्बल पद बल”, “हारी होड़” और काव्य-सौंदर्य पर प्रश्न दिए गए हैं।
5. “मैंने भ्रमवश जीवन संचित, मधुकरियों की भीख लुटाई” पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
इस पंक्ति में देवसेना अपनी जीवन-पूँजी व्यर्थ लुट जाने की वेदना व्यक्त करती है। उसने भ्रम में अपनी संचित भावनाएँ और आशाएँ दे दीं।
“मधुकरियों की भीख” का अर्थ जीवन भर की छोटी-छोटी संचित भावनात्मक पूँजी से है। देवसेना को लगता है कि उसने प्रेम और आशा में अपनी कमाई खो दी।
यह पंक्ति पश्चाताप और हृदय-वेदना को प्रकट करती है।
6. कवि ने आशा को बावली क्यों कहा है?
कवि ने आशा को बावली इसलिए कहा है क्योंकि आशा ने देवसेना को भ्रम में रखा। उसने असंभव सुख की कल्पना की।
देवसेना की आशा ने उसे स्कंदगुप्त के प्रेम और जीवन-सुख से जोड़कर रखा। पर अंत में वह आशा टूट गई।
इसलिए वह अपनी आशा को पागल या बावली कहती है। यह आत्मग्लानि और निराशा का भाव है।
7. “दुर्बल पद बल” में क्या व्यंजना है?
“दुर्बल पद बल” में देवसेना की सीमित शक्ति और टूटे हुए मन की व्यंजना है। उसके कदम कमजोर हैं।
फिर भी वह प्रलय से जूझती रही। यह संघर्ष उसकी असहायता और साहस दोनों दिखाता है।
देवसेना जानती है कि उसकी शक्ति कम है। फिर भी उसने जीवन-संघर्ष से हार मानने से पहले संघर्ष किया।
8. “हारी होड़” में क्या भाव छिपा है?
“हारी होड़” में निश्चित पराजय का भाव छिपा है। देवसेना ने जीवन की विपरीत शक्तियों से संघर्ष किया।
वह जानती थी कि उसकी शक्ति कम है और प्रलय प्रबल है। फिर भी उसने मुकाबला किया।
यह पंक्ति जीवन-संघर्ष, असफलता और दुख की मार्मिक अभिव्यक्ति है।
9. देवसेना की हार और निराशा के क्या कारण हैं?
देवसेना की हार और निराशा का मुख्य कारण अपूर्ण प्रेम और टूटे हुए सपने हैं। उसने स्कंदगुप्त से प्रेम किया।
पर उसे अपेक्षित प्रेम नहीं मिला। जीवन के अंतिम मोड़ पर वह आशा, सुख और आकांक्षा से विदा लेती है।
उसे लगता है कि उसने भ्रम में जीवन की संचित पूँजी गँवा दी। यही उसकी वेदना का मूल है।
10. “श्रमित स्वप्न की मधुमाया” पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
“श्रमित स्वप्न की मधुमाया” में थके हुए सपनों की मीठी पर टूटी हुई छाया का भाव है। देवसेना ने जीवन में अनेक सपने देखे।
वे सपने अब थक चुके हैं। उनकी मधुरता भी पीड़ा में बदल गई है।
यह पंक्ति जीवन-संध्या, स्मृति और टूटे सपनों की करुण छवि बनाती है।
11. “गहन-विपिन की तरु-छाया” में कौन-सा बिंब है?
“गहन-विपिन की तरु-छाया” में प्रकृति-बिंब है। इसमें घने वन और वृक्षों की छाया का दृश्य बनता है।
यह छाया देवसेना के मन की थकान और एकांत को प्रकट करती है। गीत में प्रकृति और मनःस्थिति साथ चलते हैं।
यह बिंब कविता की करुण लय को गहरा करता है।
12. “मेरी करुणा हा-हा खाती” का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
इस पंक्ति में देवसेना की करुणा का मानवीकरण हुआ है। करुणा को हाहाकार करती हुई शक्ति की तरह दिखाया गया है।
देवसेना अपनी वेदना को सँभाल नहीं पा रही। वह विश्व से अपनी थाती लौटाने की बात करती है।
पंक्ति में करुण रस, मानवीकरण और आत्मग्लानि का प्रभाव है।
Karneliya Ka Geet Class 12 Question Answer for NCERT Exercise
कानेलिया का गीत भारत के प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक उदारता का गीत है। Karneliya Ka Geet Class 12 question answer में प्रकृति-चित्र, व्यंजना और राष्ट्र-गौरव को साथ लिखना चाहिए।
NCERT अभ्यास में भारत की विशेषताएँ, “उड़ते खग”, “बरसाती आँखों के बादल”, उषा-चित्र और अनजान क्षितिज पर प्रश्न दिए गए हैं।
13. “कानेलिया का गीत” में प्रसाद ने भारत की किन विशेषताओं की ओर संकेत किया है?
प्रसाद ने भारत की प्राकृतिक सुंदरता, करुणा, सहारा देने की भावना और सांस्कृतिक उदारता की ओर संकेत किया है। भारत मधुमय देश है।
यहाँ अनजान क्षितिज को भी सहारा मिलता है। यहाँ पक्षी अपने प्रिय नीड़ की ओर उड़ते हैं।
भारत दुःखी लोगों की आँखों में करुणा भरता है। यहाँ लहरों को भी किनारा मिलता है।
14. “अरुण यह मधुमय देश हमारा” पंक्ति का भाव क्या है?
इस पंक्ति में भारत की लालिमा, मधुरता और जीवनदायी सौंदर्य का भाव है। “अरुण” सुबह की लालिमा का संकेत देता है।
“मधुमय” भारत की मिठास और सुखद प्रकृति को बताता है। कार्नेलिया भारत को प्रेम और आश्रय से भरी भूमि मानती है।
यह पंक्ति पूरे गीत का मूल स्वर बनाती है।
15. “उड़ते खग” में क्या विशेष अर्थ व्यंजित होता है?
“उड़ते खग” में बाहर से आने वाले लोगों और आश्रय खोजती आत्माओं का भाव व्यंजित होता है। पक्षी अपने प्रिय नीड़ की ओर उड़ते हैं।
भारत उन्हें अपना घर लगता है। इससे भारत की आश्रय देने वाली संस्कृति प्रकट होती है।
यह बिंब देश की उदारता और अपनत्व को दिखाता है।
16. “बरसाती आँखों के बादल” में क्या विशेष अर्थ है?
“बरसाती आँखों के बादल” में करुणा और सहानुभूति का विशेष अर्थ है। भारत की धरती पर दुख देखकर आँखें नम हो जाती हैं।
यह पंक्ति बताती है कि भारत केवल सुंदर नहीं, संवेदनशील भी है। यहाँ करुणा जल बनकर बरसती है।
यह बिंब मानवीय संवेदना और करुण रस से जुड़ा है।
17. “जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा” का आशय स्पष्ट कीजिए।
इस पंक्ति का आशय है कि भारत अजनबी को भी सहारा देता है। जो अनजान है, उसे भी यहाँ आश्रय मिलता है।
क्षितिज सामान्यतः दूर और अनिश्चित होता है। पर भारत में उसे भी सहारा मिल जाता है।
यह पंक्ति भारत की उदारता, विशालता और अतिथि-सत्कार की भावना दिखाती है।
18. “हेम कुंभ ले उषा सवेरे” का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
इस पंक्ति में उषा का मानवीकरण किया गया है। उषा सोने का घड़ा लेकर आती हुई दिखाई गई है।
“हेम कुंभ” सूर्य या सुनहरी किरणों का प्रतीक है। उषा सुख भरती और ढुलकाती है।
पंक्ति में दृश्य-बिंब, मानवीकरण और मधुर लय है।
19. “मदिर ऊँघते रहते जब, जगकर रजनी भर तारा” का भाव क्या है?
इस पंक्ति में रातभर जागे तारों की थकान और भोर की आहट का भाव है। तारे रातभर जागते रहे।
सुबह होते ही वे ऊँघने लगते हैं। उषा जगत में सुख और प्रकाश भरती है।
यह पंक्ति रात से भोर में बदलते दृश्य का चित्र बनाती है।
20. “कानेलिया का गीत” में प्रकृति-चित्रण कैसा है?
“कानेलिया का गीत” में प्रकृति-चित्रण रंग, प्रकाश, हवा, कमल, पक्षी और उषा से बना है। भारत का रूप मधुर और रमणीय है।
कमल, मलय समीर, इंद्रधनुषी पंख, लहरें और उषा गीत को दृश्यात्मक बनाते हैं।
प्रकृति यहाँ भारत की पहचान और सौंदर्य का प्रमाण बनती है।
Class 12 Hindi Antral Chapter 1 Important Questions for Short Answers
छोटे उत्तरों में सीधा भाव, पंक्ति-संदर्भ और काव्य-विशेषता लिखें। Class 12 Hindi Antral Chapter 1 में दोनों कविताएँ गीतात्मक हैं, पर भाव अलग हैं।
उत्तरों में कविता का नाम अवश्य लिखें। इससे देवसेना और कानेलिया के संदर्भ अलग रहेंगे।
21. देवसेना किस भाव-स्थिति में गीत गाती है?
देवसेना जीवन-संध्या की वेदनापूर्ण स्थिति में गीत गाती है। वह अपने अतीत और युवावस्था को याद करती है।
उसे लगता है कि उसने भ्रम में जीवन की पूँजी गँवा दी। वह आशा, सुख और आकांक्षा से विदा ले रही है।
गीत में पश्चाताप, करुणा और निराशा का भाव है।
22. “आह! वेदना मिली विदाई” पंक्ति में कौन-सा भाव है?
इस पंक्ति में विदाई, वेदना और करुणा का भाव है। देवसेना जीवन के सुखों से विदा ले रही है।
उसे विदाई में सुख नहीं, वेदना मिली है। इसलिए पंक्ति में करुण रस प्रधान है।
यह गीत की मूल मनःस्थिति को खोलती है।
23. “नीरवता अनंत अँगड़ाई” का अर्थ क्या है?
“नीरवता अनंत अँगड़ाई” का अर्थ है कि गहरी चुप्पी चारों ओर फैल रही थी। देवसेना की यात्रा पर मौन छाया था।
यह मौन उसके भीतर की रिक्तता और थकान को प्रकट करता है। प्रकृति भी उसकी वेदना में शामिल लगती है।
यह पंक्ति शांति नहीं, पीड़ा भरी निस्तब्धता दिखाती है।
24. “सकल कमाई खो देना” किसका प्रतीक है?
“सकल कमाई खो देना” जीवन की भावनात्मक पूँजी खो देने का प्रतीक है। देवसेना ने प्रेम और आशा में बहुत कुछ लगाया।
अंत में उसे लगता है कि कुछ भी हाथ नहीं आया। उसकी सारी साधना विफल हो गई।
यह पंक्ति निराशा और आत्मग्लानि का गहरा संकेत देती है।
25. कार्नेलिया भारत को “मधुमय” क्यों कहती है?
कार्नेलिया भारत को “मधुमय” इसलिए कहती है क्योंकि उसे भारत मीठा, सुंदर और आत्मीय लगता है। यहाँ की प्रकृति उसे आकर्षित करती है।
भारत का वातावरण, करुणा और आश्रय-दृष्टि उसे प्रभावित करती है। वह यहाँ मन की शांति अनुभव करती है।
“मधुमय” शब्द भारत की रसपूर्ण पहचान बनाता है।
26. “मलय समीर” का अर्थ और प्रभाव क्या है?
“मलय समीर” का अर्थ मलय पर्वत की ओर से आने वाली सुगंधित शीतल हवा है। यह गीत में कोमलता लाती है।
इस हवा के सहारे पक्षी अपने पंख फैलाते हैं। प्रकृति का वातावरण शांत और सुखद बनता है।
यह बिंब भारत की मधुर जलवायु और सौंदर्य दिखाता है।
27. “लहरें टकराती अनंत की” में क्या भाव है?
इस पंक्ति में अनंतता और जीवन-गति का भाव है। लहरें दूर से आती हैं और किनारा पाती हैं।
भारत अनंत लहरों को भी सहारा देता है। यह देश की आश्रय-भावना का प्रतीक है।
पंक्ति में प्रकृति और संस्कृति का मेल है।
28. दोनों गीतों में प्रसाद की गीतात्मकता कैसे दिखती है?
दोनों गीतों में लय, कोमल शब्द, भाव-संगीत और दृश्य-बिंबों से गीतात्मकता दिखाई देती है। पंक्तियाँ गेय हैं।
“आह! वेदना मिली विदाई” में करुण लय है। “अरुण यह मधुमय देश हमारा” में उत्साह और सौंदर्य की लय है।
प्रसाद भावों को संगीतात्मक भाषा में व्यक्त करते हैं।
Devsena Karneliya Ka Geet Important Questions for 3-Mark and 5-Mark Practice
लंबे उत्तरों में कविता की भावभूमि, पंक्ति-संदर्भ और काव्य-सौंदर्य साथ लिखें। Devsena Karneliya Ka Geet important questions में भावार्थ और व्यंजना अधिक उपयोगी हैं।
CBSE 2026 में दोनों कविताओं से तुलनात्मक और स्वतंत्र प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
29. “देवसेना का गीत” में करुणा और निराशा कैसे व्यक्त हुई है?
“देवसेना का गीत” में करुणा और निराशा देवसेना के टूटे सपनों से व्यक्त हुई है। वह अपने जीवन पर पीछे मुड़कर देखती है।
उसे लगता है कि उसने भ्रम में जीवन की संचित पूँजी गँवा दी। आशा ने उसे धोखा दिया।
वह प्रलय से संघर्ष करती रही, पर उसकी शक्ति दुर्बल थी। इसलिए गीत में करुण रस और आत्मग्लानि का गहरा भाव है।
30. “देवसेना का गीत” में प्रकृति और मनःस्थिति का संबंध स्पष्ट कीजिए।
इस गीत में प्रकृति देवसेना की आंतरिक वेदना को व्यक्त करती है। संध्या, नीरवता, गहन-विपिन और तरु-छाया उसके थके मन को दिखाते हैं।
विहाग की तान और आँसू-से गिरते क्षण स्मृति और पीड़ा को गहरा करते हैं। प्रकृति केवल पृष्ठभूमि नहीं है।
वह देवसेना की भाव-स्थिति का विस्तार बन जाती है।
31. “कानेलिया का गीत” में भारत की सांस्कृतिक विशेषताएँ लिखिए।
“कानेलिया का गीत” में भारत को आश्रय, करुणा और मधुरता की भूमि बताया गया है। यहाँ अनजान क्षितिज को भी सहारा मिलता है।
उड़ते पक्षी इसे अपना प्रिय नीड़ समझते हैं। दुखी आँखों के बादल यहाँ करुणा से भरते हैं।
लहरों को भी यहाँ किनारा मिलता है। इन बिंबों से भारत की उदारता और आत्मीयता व्यक्त होती है।
32. “कानेलिया का गीत” में राष्ट्रीय चेतना कैसे प्रकट हुई है?
इस गीत में राष्ट्रीय चेतना भारत की गौरवगाथा और प्रकृति-सौंदर्य से प्रकट हुई है। कार्नेलिया विदेशी होते हुए भी भारत से प्रभावित है।
वह भारत को मधुमय, सहारा देने वाला और करुणामय देश कहती है। भारत केवल भौगोलिक भूमि नहीं रहता।
वह संवेदना, आश्रय और सांस्कृतिक ऊँचाई का प्रतीक बनता है।
33. “देवसेना का गीत” और “कानेलिया का गीत” में मुख्य अंतर लिखिए।
दोनों गीतों का मुख्य अंतर उनकी भाव-दिशा में है। “देवसेना का गीत” व्यक्तिगत वेदना और निराशा का गीत है।
“कानेलिया का गीत” भारत के सौंदर्य और गौरव का गीत है। पहला गीत आत्म-पीड़ा से जुड़ा है।
दूसरा गीत प्रकृति, करुणा और सांस्कृतिक विस्तार से जुड़ा है।
34. जयशंकर प्रसाद की काव्य-शैली इन गीतों में कैसे प्रकट होती है?
इन गीतों में जयशंकर प्रसाद की शैली कोमल, चित्रात्मक और संगीतात्मक है। वे भावों को प्रतीकों और बिंबों से व्यक्त करते हैं।
देवसेना के गीत में करुणा और आत्मग्लानि है। कानेलिया के गीत में प्रकृति और राष्ट्र-गौरव है।
दोनों गीतों में भाषा संस्कृतनिष्ठ, लयपूर्ण और भावप्रधान है।
NCERT Solutions Class 12 Hindi Antral Chapter 1: Extract-Based Questions
Extract-based answers में पंक्ति का संदर्भ, अर्थ और काव्यगत सौंदर्य लिखें। NCERT Solutions Class 12 Hindi Antral Chapter 1 की तैयारी में दोनों गीतों की महत्वपूर्ण पंक्तियाँ याद रखें।
उत्तर में कविता का नाम और भाव-संदर्भ जरूर लिखें। इससे व्याख्या सटीक बनती है।
35. “छलछल थे संध्या के श्रमकण, आँसू-से गिरते थे प्रतिक्षण” का भाव स्पष्ट कीजिए।
इस पंक्ति में संध्या के श्रमकणों को आँसू की तरह गिरते दिखाया गया है। यह देवसेना की वेदना से जुड़ा प्रकृति-बिंब है।
संध्या भी मानो थकी और रोती हुई लगती है। देवसेना की यात्रा पर करुण वातावरण छाया है।
पंक्ति में मानवीकरण और करुण रस है।
36. “पथिक उनींदी श्रुति में किसने यह विहाग की तान उठाई” का भाव क्या है?
इस पंक्ति में थके हुए पथिक के कानों में विहाग की तान सुनाई देती है। यह स्मृति, विरह और पीड़ा का बिंब है।
विहाग राग सामान्यतः रात्रि से जुड़ा है। यहाँ वह देवसेना के अकेले मन को छूता है।
पंक्ति में संगीतात्मकता और विरह का भाव है।
37. “विश्व! न सँभलेगी यह मुझसे” में देवसेना क्या कहना चाहती है?
देवसेना कहना चाहती है कि वह अपनी करुणा और पीड़ा अब सँभाल नहीं सकती। वह विश्व से अपनी थाती लौटाने को कहती है।
उसका मन अपनी लाज गँवा चुका है। वह आत्मग्लानि से भरी है।
यह पंक्ति उसकी वेदना की चरम स्थिति बताती है।
38. “सरस तामरस गर्भ विभा पर नाच रही तरुशिखा मनोहर” का भाव स्पष्ट कीजिए।
इस पंक्ति में कमल की लालिमा और वृक्ष-शिखाओं का मनोहर दृश्य है। सुबह का प्रकाश हरियाली पर नृत्य करता लगता है।
“तामरस” कमल का संकेत है। दृश्य में लालिमा, हरियाली और प्रकाश का सुंदर संयोजन है।
यह भारत के प्राकृतिक सौंदर्य का दृश्य-बिंब है।
39. “लघु सुरधनु से पंख पसारे” का भाव क्या है?
इस पंक्ति में पक्षियों के छोटे पंखों को इंद्रधनुष जैसा रंगीन बताया गया है। वे शीतल मलय समीर के सहारे उड़ते हैं।
यह दृश्य भारत की प्रकृति में रंग और गति जोड़ता है। पक्षी अपने प्रिय नीड़ की ओर उड़ते हैं।
पंक्ति में दृश्य-बिंब और कोमलता है।
40. “लहरें टकराती अनंत की, पाकर जहाँ किनारा” का आशय स्पष्ट कीजिए।
इस पंक्ति का आशय है कि भारत अनंत से आती बेचैन शक्तियों को भी सहारा देता है। लहरें किनारे पर आकर स्थिरता पाती हैं।
यह प्राकृतिक दृश्य सांस्कृतिक अर्थ भी देता है। भारत आश्रय और करुणा की भूमि है।
पंक्ति में प्रतीकात्मकता और राष्ट्र-भाव दोनों हैं।
Class 12 Hindi Chapter 1 Question Answer: High-Scoring Writing Points
Class 12 Hindi Chapter 1 question answer लिखते समय दोनों कविताओं को अलग-अलग संदर्भों में पढ़ें। भावार्थ में कविता की पंक्ति, प्रसंग और काव्य-सौंदर्य साथ आए।
CBSE 2026 में बेहतर उत्तर वही होगा जिसमें भाव, बिंब, प्रतीक और कविता का प्रसंग स्पष्ट हो।
41. 3-mark answer कैसे लिखें?
3-mark answer में पंक्ति का सीधा भाव, प्रसंग और एक काव्य-विशेषता लिखें। उत्तर को लंबा सारांश न बनाएँ।
यदि प्रश्न देवसेना पर है, तो करुणा, निराशा और आत्मग्लानि लिखें। यदि प्रश्न कानेलिया पर है, तो भारत-गौरव और प्रकृति-चित्रण लिखें।
अंतिम वाक्य कविता के भाव से जुड़ा होना चाहिए।
42. 5-mark answer कैसे लिखें?
5-mark answer में भावभूमि, पंक्ति-संदर्भ, प्रतीक और काव्य-सौंदर्य शामिल करें। केवल शब्दार्थ पूरा उत्तर नहीं बनाता।
देवसेना पर उत्तर में भ्रम, आशा, वेदना और जीवन-संध्या जोड़ें। कानेलिया पर उत्तर में प्रकृति, करुणा, आश्रय और भारत-गौरव जोड़ें।
निष्कर्ष तथ्यात्मक रखें। सामान्य देश-प्रेम या दुख की टिप्पणी से बचें।
43. “Devsena Ka Geet” पर 5-mark answer का नमूना लिखिए।
“देवसेना का गीत” जयशंकर प्रसाद की करुण भावभूमि का गीत है। देवसेना अपने जीवन की विफल आशाओं को याद करती है।
वह कहती है कि उसने भ्रम में जीवन की संचित पूँजी लुटा दी। उसकी आशा बावली निकली।
प्रलय उसके जीवन-रथ पर चढ़ा है, फिर भी उसने दुर्बल पद-बल से संघर्ष किया। गीत में करुण रस, आत्मग्लानि और प्रकृति-बिंब प्रभावी हैं।
44. “Karneliya Ka Geet” पर 5-mark answer का नमूना लिखिए।
“कानेलिया का गीत” भारत के प्राकृतिक और सांस्कृतिक सौंदर्य का गीत है। कार्नेलिया भारत को अरुण और मधुमय देश कहती है।
यहाँ अनजान क्षितिज को सहारा मिलता है। उड़ते पक्षी इसे अपना प्रिय नीड़ मानते हैं।
भारत करुणा, आश्रय और सौंदर्य की भूमि के रूप में चित्रित है। गीत में प्रकृति-चित्रण, मानवीकरण और राष्ट्र-भाव स्पष्ट है।
45. परीक्षा के लिए इस अध्याय की कौन-सी पंक्तियाँ सबसे महत्वपूर्ण हैं?
इस अध्याय में “मधुकरियों की भीख”, “आशा बावली”, “दुर्बल पद बल” और “अरुण यह मधुमय देश हमारा” महत्वपूर्ण पंक्तियाँ हैं। इनसे भावार्थ पूछा जा सकता है।
“उड़ते खग”, “बरसाती आँखों के बादल”, “हेम कुंभ ले उषा” और “अनजान क्षितिज” भी उपयोगी हैं।
इन पंक्तियों की तैयारी करते समय कविता का संदर्भ जरूर लिखें।
Class 12 Hindi Important Links
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FAQs (Frequently Asked Questions)
Jaishankar Prasad wrote “Devsena Ka Geet” and “Karneliya Ka Geet”. Both poems appear in Class 12 Hindi Antral Chapter 1.
“Devsena Ka Geet” is about Devsena’s pain, regret and farewell from hope. The poem comes from Prasad’s play “Skandagupta”.
“Karneliya Ka Geet” praises India’s natural beauty and compassionate culture. The poem comes from Prasad’s play “Chandragupta”.
“Arun yah madhumay desh hamara” means India is a radiant and sweet land. The line presents India as beautiful, welcoming and life-giving.
Yes, these poems are important for CBSE 2026. Students should prepare NCERT exercise answers, line meanings and poetic beauty questions.
