Important questions help students revise exam-focused ideas, characters, incidents and answer-writing points. In prose chapters, they help students explain conflict, setting, language, symbolism and character development clearly.
Class 12 Hindi Aroh Chapter 13 presents “Pahalwan Ki Dholak”, a story by Phanishwar Nath Renu. Important Questions Class 12 Hindi Aroh Chapter 13 help students prepare NCERT exercise answers, short answers, long answers and extract-based questions for CBSE 2026. The story shows Luttan Singh’s rise as a wrestler, his dependence on the dholak, the collapse of old patronage, and the village’s struggle during malaria and cholera. NCERT asks direct questions on the dholak’s sound, Luttan’s life changes, epidemic scenes, personification, wrestling vocabulary and the dholak’s effect on the village.
Key Takeaways
- Author: “Pahalwan Ki Dholak” is written by Phanishwar Nath Renu, a major regional storyteller in Hindi.
- Central Character: Luttan Singh’s strength depends on wrestling skill, courage and the dholak’s rhythm.
- Main Conflict: The story shows folk art losing support after the old royal system changes.
- CBSE 2026 Focus: Answers should explain the dholak, epidemic, wrestling scenes, language and social change.
Important Questions Class 12 Hindi Aroh Chapter 13 Structure 2026
| Area |
What to Revise |
Exam Value |
| Characters |
Luttan Singh, Raja Sahib, new prince, sons, villagers |
Character and incident-based answers |
| Main Ideas |
Folk art, patronage, epidemic, courage, social change |
Long-answer questions |
| Key Expressions |
Dholak sounds, wrestling commentary, personification |
Extract and language-based answers |

Class 12 Hindi Aroh Chapter 13 Pahalwan Ki Dholak: CBSE 2026 Exam Focus
यह कहानी केवल एक पहलवान की कथा नहीं है। इसमें लोक-कला, बदलती व्यवस्था, गरीबी, महामारी और मनुष्य की जिजीविषा साथ चलती है।
CBSE 2026 में इस पाठ से लुट्टन सिंह, ढोलक, कुश्ती, गाँव की महामारी, राज-व्यवस्था, नए राजकुमार और रेणु की भाषा-शैली पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
1. “Pahalwan Ki Dholak” के लेखक कौन हैं?
“Pahalwan Ki Dholak” के लेखक फणीश्वरनाथ रेणु हैं। वे हिंदी साहित्य में आंचलिक कथाकार के रूप में प्रसिद्ध हैं।
उनकी रचनाओं में गाँव, लोकभाषा, लोक-संस्कृति और आंचलिक जीवन जीवंत रूप में आते हैं। “पहलवान की ढोलक” उनकी प्रतिनिधि कहानियों में गिनी जाती है।
इस कहानी में रेणु ने लोक-कला और कलाकार की बदलती सामाजिक स्थिति को मार्मिक ढंग से दिखाया है।
2. “Pahalwan Ki Dholak” कहानी का मुख्य विषय क्या है?
इस कहानी का मुख्य विषय लोक-कला, संघर्ष और बदलती व्यवस्था में कलाकार की उपेक्षा है। लुट्टन सिंह कभी राज-दरबार का प्रसिद्ध पहलवान था।
राजा साहब के समय उसे सम्मान, भोजन और प्रतिष्ठा मिली। नए राजकुमार के आने पर दंगल की जगह घुड़दौड़ ने ले ली।
इसके बाद लुट्टन गाँव लौटता है। महामारी के समय उसकी ढोलक गाँव में संजीवनी शक्ति भरती है।
3. “ढोलक” कहानी में केवल वाद्य-यंत्र क्यों नहीं है?
कहानी में ढोलक केवल वाद्य-यंत्र नहीं, लुट्टन की गुरु, साथी और जीवन-शक्ति है। कुश्ती में ढोलक की ताल उसे दाँव बताती है।
गाँव में महामारी के दौरान वही ढोलक भयभीत लोगों को साहस देती है। वह रात की विभीषिका को चुनौती देती है।
ढोलक लोक-कला और लोक-ऊर्जा का प्रतीक बन जाती है।
4. लुट्टन सिंह को राज-पहलवान कैसे बनाया गया?
लुट्टन सिंह ने श्यामनगर मेले के दंगल में चाँद सिंह को हराकर राज-पहलवान बनने का अवसर पाया। चाँद सिंह को “शेर का बच्चा” कहा जाता था।
लुट्टन ने पहले उससे लड़ने की जिद की। कुश्ती में ढोलक की आवाज़ से उसे साहस और संकेत मिले।
जीत के बाद राजा साहब ने उसे दरबार में रख लिया। वे उसे लुट्टन सिंह कहकर बुलाने लगे।
Pahalwan Ki Dholak Class 12 Question Answer for NCERT Exercise
NCERT अभ्यास इस कहानी की तैयारी का सबसे मजबूत आधार है। Pahalwan Ki Dholak Class 12 question answer लिखते समय छात्रों को घटना, पात्र और प्रतीकात्मक अर्थ साथ लिखना चाहिए।
अभ्यास में ढोलक की आवाज़, लुट्टन के जीवन-परिवर्तन, गुरु के रूप में ढोल, महामारी, गाँव पर प्रभाव, सूर्योदय-सूर्यास्त और भाषा-प्रयोग से जुड़े प्रश्न हैं।
5. कुश्ती के समय ढोल की आवाज़ और लुट्टन के दाँव-पेंच में क्या तालमेल था?
कुश्ती के समय ढोल की आवाज़ लुट्टन के दाँव-पेंच को दिशा देती थी। ढोल की थाप उसे चुनौती, सावधानी और आक्रमण का संकेत देती थी।
“चट्-धा, गिड़-धा” उसे “आ जा भिड़ जा” जैसा सुनाई देता था। “धाक-धिना, तिरकट-तिना” उसे दाँव काटने का संकेत देता था।
लुट्टन ढोल की ताल से अपनी शक्ति सँभालता था। ढोल उसकी कुश्ती का मौन गुरु था।
6. पाठ में आए ध्वन्यात्मक शब्द कौन-सी ध्वनि पैदा करते हैं?
ध्वन्यात्मक शब्द दंगल, थाप और कुश्ती की जीवंत ध्वनि पैदा करते हैं। “चट्-धा”, “गिड़-धा”, “धाक-धिना” जैसे शब्द ढोल की ताल सुनाते हैं।
ये शब्द केवल आवाज़ नहीं बताते। वे लुट्टन की गति, दाँव और जोश को भी व्यक्त करते हैं।
इनसे पाठ में संगीत और कुश्ती का एक साथ प्रभाव बनता है। रेणु गद्य में भी ताल पैदा करते हैं।
7. कहानी के किन मोड़ों पर लुट्टन के जीवन में परिवर्तन आया?
लुट्टन के जीवन में कई निर्णायक मोड़ों पर परिवर्तन आया। पहला मोड़ उसके बचपन में आया, जब वह अनाथ हो गया।
दूसरा मोड़ श्यामनगर मेले में आया, जहाँ उसने चाँद सिंह को हराया। उसके बाद वह राज-पहलवान बना।
तीसरा मोड़ पुराने राजा की मृत्यु के बाद आया। नए राजकुमार ने उसे दरबार से निकाल दिया।
अंतिम मोड़ महामारी के समय आया। वह ढोलक बजाकर पूरे गाँव को साहस देता रहा।
8. लुट्टन ने क्यों कहा कि “मेरा गुरु कोई पहलवान नहीं, यही ढोल है”?
लुट्टन ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि उसने अपनी कुश्ती की प्रेरणा ढोल की आवाज़ से पाई थी। उसका कोई पारंपरिक गुरु नहीं था।
दंगल में ढोल की थाप उसे बताती थी कि कब भिड़ना है, कब दाँव काटना है और कब उठाकर पटकना है। वह हर ताल को आदेश की तरह सुनता था।
इसलिए वह ढोल को अपना वास्तविक गुरु मानता था।
9. गाँव में महामारी फैलने के बाद भी लुट्टन ढोल क्यों बजाता रहा?
लुट्टन महामारी के समय ढोल इसलिए बजाता रहा क्योंकि उसकी आवाज़ गाँव में साहस भरती थी। गाँव मलेरिया और हैजा से भयभीत था।
रात में लोग झोंपड़ियों में चुप पड़े रहते थे। ढोलक की आवाज़ उन्हें मृत्यु से लड़ने की मानसिक शक्ति देती थी।
लुट्टन खुद दुखी था, पर उसने ढोल बजाना नहीं छोड़ा। यही उसकी जीवटता थी।
10. अपने बेटों की मृत्यु के बाद भी लुट्टन ढोल क्यों बजाता रहा?
अपने बेटों की मृत्यु के बाद भी लुट्टन ढोल इसलिए बजाता रहा क्योंकि वह गाँव का साहस टूटने नहीं देना चाहता था। उसके दोनों बेटे महामारी में मर गए।
उसने उन्हें नदी में बहाया और फिर रात को ढोल बजाया। लोगों ने उसकी हिम्मत देखकर अपना धैर्य सँभाला।
यह घटना लुट्टन की असाधारण मानसिक शक्ति और लोक-कलाकार की जिम्मेदारी दिखाती है।
11. ढोलक की आवाज़ का पूरे गाँव पर क्या असर होता था?
ढोलक की आवाज़ पूरे गाँव में संजीवनी शक्ति भरती थी। बीमारी से टूटे लोग उसे सुनकर दंगल का दृश्य याद करते थे।
बूढ़े, बच्चे और जवान उसकी ताल से साहस पाते थे। उनकी शिथिल नसों में मानो बिजली दौड़ जाती थी।
ढोलक बीमारी नहीं हटाती थी, पर मृत्यु का भय कम कर देती थी।
12. महामारी फैलने के बाद गाँव में सूर्योदय और सूर्यास्त के दृश्य में क्या अंतर था?
महामारी के बाद सूर्योदय पर लोग कुछ हिम्मत जुटाते थे, पर सूर्यास्त के बाद पूरा गाँव भय में डूब जाता था। दिन में लोग बाहर आकर एक-दूसरे को ढाँढस देते थे।
वे मृतकों के घरों में जाकर सांत्वना भी देते थे। सूर्यास्त होते ही सब झोंपड़ियों में चुप हो जाते थे।
रात में बोलने की शक्ति तक समाप्त हो जाती थी। उस समय केवल लुट्टन की ढोलक आवाज़ उठाती थी।
13. “भावुक तारा” वाले कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।
इस कथन का आशय है कि उस भयावह रात में संवेदना भी असफल हो जाती थी। आकाश से टूटकर आने वाला तारा पृथ्वी तक नहीं पहुँच पाता।
उसकी ज्योति और शक्ति रास्ते में ही समाप्त हो जाती। बाकी तारे उसकी भावुकता पर हँसते लगते।
यह चित्र गाँव की निराशा और असहायता को गहरा बनाता है। रेणु प्रकृति के माध्यम से भय दिखाते हैं।
14. पाठ में प्रकृति का मानवीकरण कैसे हुआ है?
पाठ में प्रकृति का मानवीकरण रात, निस्तब्धता और अंधकार के वर्णन से हुआ है। अंधेरी रात चुपचाप आँसू बहाती है।
निस्तब्धता करुण सिसकियों को अपने हृदय में दबाती है। रात अपनी भीषणता के साथ चलती रहती है।
इन प्रयोगों से वातावरण जीवित और भयावह बन जाता है। पाठक गाँव की पीड़ा को महसूस करता है।
Class 12 Hindi Aroh Chapter 13 Important Questions for Short Answers
छोटे उत्तरों में पात्र, प्रसंग और कथ्य स्पष्ट लिखें। Class 12 Hindi Aroh Chapter 13 important questions में लुट्टन, ढोलक, दंगल, महामारी और बदलती व्यवस्था मुख्य बिंदु हैं।
उत्तर को सामान्य लोक-कला निबंध न बनाएँ। हर उत्तर कहानी की किसी घटना से जुड़ा होना चाहिए।
15. लुट्टन सिंह बचपन में अनाथ कैसे हुआ?
लुट्टन सिंह नौ वर्ष की आयु में अनाथ हो गया था। उसके माता-पिता उसे छोड़कर चल बसे।
उसकी विधवा सास ने उसे पाल-पोसकर बड़ा किया। बचपन में वह गाय चराता, दूध पीता और कसरत करता था।
धीरे-धीरे उसका शरीर मजबूत हो गया। वह गाँव का अच्छा पहलवान माना जाने लगा।
16. लुट्टन ने चाँद सिंह को चुनौती क्यों दी?
लुट्टन ने चाँद सिंह को जोश, युवा साहस और ढोल की ललकार से प्रेरित होकर चुनौती दी। चाँद सिंह प्रसिद्ध पहलवान था।
वह “शेर का बच्चा” कहलाता था और दूसरे पहलवान उससे लड़ने से डरते थे। लुट्टन ने बिना अधिक सोचे उसे चुनौती दे दी।
यह घटना उसके साहस और जोखिम उठाने की प्रवृत्ति दिखाती है।
17. राजा साहब ने लुट्टन को क्यों सम्मान दिया?
राजा साहब ने लुट्टन को इसलिए सम्मान दिया क्योंकि उसने चाँद सिंह को हराकर मिट्टी की लाज रखी। वह अकेला स्थानीय युवक था जिसने प्रसिद्ध बाहरी पहलवान को चुनौती दी।
उसकी हिम्मत, शक्ति और जीत ने सबको प्रभावित किया। राजा साहब ने उसे दरबार में रख लिया।
लुट्टन के लिए यह जीवन बदलने वाला क्षण था।
18. राज-पंडितों और मैनेजर को लुट्टन का सम्मान क्यों अच्छा नहीं लगा?
राज-पंडितों और मैनेजर को लुट्टन का सम्मान जातिगत और सामाजिक कारणों से अच्छा नहीं लगा। वे उसे “सिंह” कहलाने योग्य नहीं मानते थे।
राजा साहब ने कहा कि उसने क्षत्रिय का काम किया है। यह कथन उसके साहस को जाति से ऊपर रखता है।
इस प्रसंग में रेणु सामाजिक संकीर्णता पर व्यंग्य करते हैं।
19. पुराने राजा के समय लुट्टन का जीवन कैसा था?
पुराने राजा के समय लुट्टन का जीवन सम्मान और सुविधा से भरा था। उसे राज-पहलवान का दर्जा मिला था।
उसे पौष्टिक भोजन, अभ्यास और राजा की स्नेह-दृष्टि मिली। वह मेलों में शान से घूमता था।
उसकी प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैल गई थी। वह दरबार का दर्शनीय व्यक्तित्व बन गया था।
20. नए राजकुमार के आने से लुट्टन के जीवन में क्या परिवर्तन आया?
नए राजकुमार के आने से लुट्टन का दरबारी जीवन समाप्त हो गया। राजकुमार विलायत से आया था और उसने पुरानी व्यवस्था बदल दी।
दंगल की जगह घोड़ों की रेस ने ले ली। लुट्टन और उसके बेटों का खर्च अनावश्यक समझा गया।
उसे बिना गिड़गिड़ाने का अवसर दिए दरबार से विदा कर दिया गया। यह लोक-कला की उपेक्षा का संकेत है।
21. गाँव लौटकर लुट्टन ने क्या काम शुरू किया?
गाँव लौटकर लुट्टन ने युवकों और चरवाहों को कुश्ती सिखाना शुरू किया। गाँव वालों ने उसके लिए झोंपड़ी बना दी।
वह सुबह-शाम ढोलक बजाकर अपने शिष्यों और बेटों को दाँव-पेंच सिखाता था। खाने-पीने का खर्च गाँव की ओर से तय हुआ।
लेकिन गरीबी के कारण उसके शिष्य धीरे-धीरे कम हो गए। अंत में वह अपने बेटों को ही सिखाता रह गया।
22. लुट्टन के दोनों बेटे कैसे थे?
लुट्टन के दोनों बेटे मजबूत और गठीले थे। लोग उन्हें देखकर कहते थे कि ये पिता से भी बढ़कर निकलेंगे।
दोनों को राज-दरबार के भावी पहलवान माना गया था। उनका पालन-पोषण भी दरबार से होता था।
बाद में वे मजदूरी करके घर चलाते रहे। महामारी में दोनों की मृत्यु हो गई।
Pahalwan Ki Dholak Important Questions for 3-Mark and 5-Mark Practice
लंबे उत्तरों में कहानी की घटना के साथ सामाजिक अर्थ भी लिखें। Pahalwan Ki Dholak important questions में लोक-कला, कलाकार की स्थिति और बदलती व्यवस्था को साथ समझना जरूरी है।
CBSE 2026 में ऐसे प्रश्न आ सकते हैं जिनमें लुट्टन के चरित्र, ढोलक की प्रतीकात्मकता और गाँव पर ढोलक के प्रभाव को समझाना पड़े।
23. लुट्टन सिंह का चरित्र-चित्रण कीजिए।
लुट्टन सिंह साहसी, जीवट, सरल और लोक-जीवन से जुड़ा हुआ पात्र है। वह बचपन में अनाथ हो गया, पर कसरत से मजबूत बना।
वह चाँद सिंह जैसे प्रसिद्ध पहलवान को चुनौती देता है। ढोल की ताल से प्रेरणा लेकर उसे हरा देता है।
दरबार से हटाए जाने के बाद भी वह टूटता नहीं। महामारी में वह ढोलक बजाकर गाँव को साहस देता है।
अपने बेटों की मृत्यु के बाद भी वह ढोलक बजाता है। यह उसकी असाधारण हिम्मत दिखाता है।
24. ढोलक की प्रतीकात्मक भूमिका स्पष्ट कीजिए।
ढोलक कहानी में लोक-कला, साहस और जीवन-ऊर्जा का प्रतीक है। कुश्ती में वह लुट्टन को दाँव-पेंच का संकेत देती है।
महामारी में वही ढोलक पूरे गाँव में जीवित रहने की शक्ति भरती है। वह भय और मृत्यु के विरुद्ध आवाज़ बनती है।
लुट्टन उसे अपना गुरु मानता है। इस प्रकार ढोलक कलाकार और समाज दोनों की प्राण-शक्ति बन जाती है।
25. कहानी में लोक-कला की उपेक्षा कैसे दिखाई गई है?
कहानी में लोक-कला की उपेक्षा नए राजकुमार के आने से दिखाई देती है। पुराने राजा दंगल और पहलवानी को संरक्षण देते थे।
नए राजकुमार के लिए घुड़दौड़ आधुनिक रुचि का प्रतीक है। वह लुट्टन और उसके बेटों का खर्च “टेरीबुल” समझता है।
लुट्टन का दरबार से हटना केवल व्यक्ति की हार नहीं है। यह लोक-कला के सामाजिक आधार टूटने का संकेत है।
26. “भारत” पर “इंडिया” के छा जाने की समस्या कहानी में कैसे आती है?
कहानी में “भारत” पर “इंडिया” के छा जाने की समस्या पुरानी लोक-व्यवस्था और नई पश्चिमी रुचि के टकराव से आती है। दंगल की जगह घुड़दौड़ लेती है।
नया राजकुमार विलायत से लौटा है। वह लोक-पहलवानी को महत्व नहीं देता।
लुट्टन जैसे लोक-कलाकार का जीवन इसी बदलाव से बिखर जाता है। यह परिवर्तन सामाजिक और सांस्कृतिक दोनों है।
27. महामारी के समय गाँव की स्थिति कैसी थी?
महामारी के समय गाँव भय, बीमारी और मृत्यु से घिरा हुआ था। मलेरिया और हैजा ने लोगों को तोड़ दिया था।
घर खाली हो रहे थे। रोज़ दो-तीन लाशें उठती थीं।
दिन में लोग एक-दूसरे को ढाँढस देते थे। रात होते ही गाँव मौन, भयभीत और असहाय हो जाता था।
28. लुट्टन की ढोलक मृत गाँव में संजीवनी शक्ति कैसे भरती थी?
लुट्टन की ढोलक मृतप्राय गाँव में साहस और जीवन-इच्छा भरती थी। उसकी थाप रात की चुप्पी को तोड़ती थी।
लोगों की आँखों के सामने दंगल का दृश्य जीवित हो उठता था। वे मृत्यु से डरना कम कर देते थे।
ढोलक रोग का इलाज नहीं थी। पर वह मनुष्य को मृत्यु के सामने हिम्मत देती थी।
29. लुट्टन के बेटों की मृत्यु का प्रसंग क्यों मार्मिक है?
लुट्टन के बेटों की मृत्यु का प्रसंग इसलिए मार्मिक है क्योंकि वह पिता की निजी त्रासदी और सामुदायिक साहस दोनों दिखाता है। दोनों बेटे महामारी में मर जाते हैं।
मरते समय वे पिता से “उठाकर पटक दो” वाली ताल बजाने को कहते हैं। यह बताता है कि वे भी ढोलक से साहस पाते थे।
लुट्टन उन्हें नदी में बहाकर भी रात को ढोल बजाता है। उसका दुख निजी है, पर उसका साहस सामूहिक बन जाता है।
30. फणीश्वरनाथ रेणु की भाषा-शैली की विशेषताएँ लिखिए।
रेणु की भाषा आंचलिक, ध्वन्यात्मक, जीवंत और संगीतात्मक है। वे लोकभाषा, कुश्ती-शब्दावली और ध्वनि-चित्रों का प्रभावी उपयोग करते हैं।
“चट्-धा”, “गिड़-धा”, “धाक-धिना” जैसे शब्द ढोलक की ताल को पाठ में जीवित करते हैं। कहानी पढ़ते हुए दंगल की आवाज़ सुनाई देती है।
रेणु वातावरण, पात्र और ध्वनि को मिलाकर गद्य में संगीत पैदा करते हैं।
NCERT Solutions Class 12 Hindi Aroh Chapter 13: Extract-Based Questions
Extract-based answers में पंक्ति का अर्थ, प्रसंग और कहानी से संबंध लिखना चाहिए। NCERT Solutions Class 12 Hindi Aroh Chapter 13 की तैयारी में ध्वनि, प्रकृति और प्रतीकात्मक पंक्तियाँ बहुत उपयोगी हैं।
उत्तर में केवल शब्दार्थ न लिखें। पंक्ति को लुट्टन, ढोलक, महामारी या सामाजिक परिवर्तन से जोड़ें।
31. “यही आवाज़ मृत-गाँव में संजीवनी शक्ति भरती रहती थी” का भाव स्पष्ट कीजिए।
इस पंक्ति का भाव है कि ढोलक की आवाज़ निराश गाँव को जीवित रहने का साहस देती थी। गाँव बीमारी और मृत्यु से टूट चुका था।
रात में लोग चुप और भयभीत रहते थे। ढोलक की थाप उन्हें दंगल, शक्ति और संघर्ष की याद दिलाती थी।
इसलिए वह आवाज़ संजीवनी शक्ति जैसी लगती थी।
32. “आ जा भिड़ जा” का संकेत कहानी में क्या है?
“आ जा भिड़ जा” संघर्ष और चुनौती का संकेत है। ढोलक की ताल लुट्टन को लड़ने के लिए उकसाती है।
कुश्ती में यह ताल उसे साहस देती है। महामारी में यही ताल गाँव को मृत्यु से मानसिक रूप से भिड़ने की शक्ति देती है।
यह ध्वनि कहानी के संघर्ष-भाव को मजबूत करती है।
33. “उठाकर पटक दे” वाली ताल का भाव लिखिए।
“उठाकर पटक दे” वाली ताल जीत और आक्रमण की प्रेरणा देती है। कुश्ती में यह प्रतिद्वंद्वी को परास्त करने का संकेत है।
लुट्टन के बेटों ने मृत्यु से जूझते समय भी यही ताल सुननी चाही। इससे पता चलता है कि ढोलक उनके भीतर लड़ने की शक्ति जगाती थी।
यह ताल कहानी में जिजीविषा का प्रतीक है।
34. “रात अपनी भीषणताओं के साथ चलती रहती” का आशय क्या है?
इस पंक्ति का आशय है कि महामारी की रातें भय और मृत्यु से भरी थीं। गाँव में कराह, सिसकी और चुप्पी थी।
रात जैसे जीवित होकर अपना आतंक फैलाती थी। केवल पहलवान की ढोलक इस आतंक को ललकारती थी।
यह पंक्ति वातावरण को भयावह और मानवीय बनाती है।
35. “मैं जिंदगी में कभी चित नहीं हुआ” कथन का भाव स्पष्ट कीजिए।
इस कथन का भाव है कि लुट्टन ने जीवन में हार स्वीकार नहीं की। वह पहलवान था और चित होना हार का संकेत था।
वह चाहता था कि मृत्यु के बाद भी उसे चिता पर पेट के बल रखा जाए। यह उसकी योद्धा-मानसिकता दिखाता है।
लुट्टन के लिए जीवन और मृत्यु दोनों संघर्ष के अखाड़े थे।
Class 12 Hindi Chapter 13 Question Answer: High-Scoring Writing Points
Class 12 Hindi Chapter 13 question answer लिखते समय कहानी के प्रतीक, ध्वनि और सामाजिक अर्थ पर ध्यान दें। केवल कथानक लिखना पूरा उत्तर नहीं बनाता।
CBSE 2026 में बेहतर उत्तर वही होगा जिसमें लुट्टन, ढोलक, महामारी, लोक-कला और व्यवस्था-परिवर्तन साथ आएँ।
36. 3-mark answer कैसे लिखें?
3-mark answer में सीधा उत्तर, एक घटना और छोटा भावार्थ लिखें। उत्तर को कहानी का पूरा सार न बनाएँ।
यदि प्रश्न ढोलक पर है, तो कुश्ती और महामारी दोनों का संकेत दें। यदि प्रश्न लुट्टन पर है, तो साहस और जीवटता लिखें।
अंतिम वाक्य कहानी के मुख्य भाव से जुड़ा होना चाहिए।
37. 5-mark answer कैसे लिखें?
5-mark answer में घटना, पात्र, प्रतीक और सामाजिक अर्थ शामिल करें। केवल लुट्टन की जीवनी न लिखें।
ढोलक पर उत्तर में गुरु, दंगल, गाँव और महामारी का संबंध लिखें। व्यवस्था-परिवर्तन पर उत्तर में राजा, राजकुमार और घुड़दौड़ का प्रसंग जोड़ें।
निष्कर्ष तथ्यात्मक रखें। सामान्य लोक-कला प्रशंसा से बचें।
38. “ढोलक” पर 5-mark answer का नमूना लिखिए।
“पहलवान की ढोलक” में ढोलक कहानी की केंद्रीय शक्ति है। कुश्ती में ढोलक लुट्टन को दाँव-पेंच सिखाती लगती है।
चाँद सिंह से लड़ते समय वह ढोलक की ताल से संकेत पाता है। इसी कारण वह कहता है कि उसका गुरु कोई पहलवान नहीं, यही ढोल है।
महामारी के समय वही ढोलक पूरे गाँव को साहस देती है। वह मृत्यु के भय को कम करती है और जीवन की इच्छा जगाती है।
इसलिए ढोलक लोक-कला, संघर्ष और संजीवनी शक्ति का प्रतीक है।
39. “लुट्टन सिंह” पर 5-mark answer का नमूना लिखिए।
लुट्टन सिंह कहानी का संघर्षशील और जीवट नायक है। वह बचपन में अनाथ हो जाता है, पर कसरत से मजबूत बनता है।
वह चाँद सिंह जैसे प्रसिद्ध पहलवान को हराकर राज-पहलवान बनता है। पुराने राजा के समय उसे सम्मान मिलता है।
नई व्यवस्था आने पर वह दरबार से बाहर कर दिया जाता है। गाँव में महामारी फैलने पर वह ढोलक बजाकर लोगों को साहस देता है।
अपने बेटों की मृत्यु के बाद भी वह ढोलक नहीं छोड़ता। यह उसकी असाधारण हिम्मत दिखाता है।
40. परीक्षा के लिए इस पाठ के कौन-से बिंदु सबसे महत्वपूर्ण हैं?
इस पाठ में लुट्टन सिंह, ढोलक, चाँद सिंह की कुश्ती, राज-व्यवस्था और महामारी सबसे महत्वपूर्ण हैं। ये NCERT अभ्यास से जुड़े हैं।
ध्वन्यात्मक शब्द, प्रकृति का मानवीकरण, गाँव पर ढोलक का प्रभाव और लोक-कला की उपेक्षा भी उपयोगी हैं।
इन बिंदुओं की तैयारी करते समय कहानी का सामाजिक संदर्भ अवश्य लिखें।
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