Important questions help students revise exam-focused ideas, characters, themes and answer-writing points. In prose chapters, students should connect incidents, symbols, author’s view and language style with the text.
Lalit nibandh questions test observation, symbolism and thought, not only memory. Important Questions Class 12 Hindi Aroh Chapter 14 help students revise “Shirish Ke Phool” by Hazari Prasad Dwivedi for CBSE 2026. The updated NCERT 2026-27 book presents Shirish as a tree that stays soft, fragrant and steady even in harsh heat. The chapter connects nature, jijiivisha, detachment, Gandhi, Kalidas, old age, change and literary values. Students should prepare NCERT exercise answers, extract-based answers, language questions and 5-mark analytical answers.
Key Takeaways
- Author: “Shirish Ke Phool” is written by Hazari Prasad Dwivedi, a major Hindi essayist and critic.
- Genre: The chapter is a lalit nibandh that uses Shirish as a symbol of life-force.
- Central Symbol: Shirish represents softness, strength, detachment and calm action in harsh conditions.
- CBSE 2026 Focus: Answers should explain avadhoot, jijiivisha, Gandhi, Kalidas and old-new generation conflict.
Important Questions Class 12 Hindi Aroh Chapter 14 Structure 2026
| Area |
Core Focus |
Exam Value |
| Shirish Symbol |
कोमलता, कठोरता, जिजीविषा, अवधूत |
NCERT and long answers |
| Literary References |
कालिदास, कबीर, गांधी, रवींद्रनाथ |
Analytical answers |
| Language Style |
ललित निबंध, व्यंग्य, लोकोक्ति, सांस्कृतिक संकेत |
Extract and language questions |
Class 12 Hindi Aroh Chapter 14 Shirish Ke Phool: CBSE 2026 Exam Focus
“शिरीष के फूल” में लेखक एक पेड़ के माध्यम से मनुष्य की जीवन-दृष्टि समझाते हैं। शिरीष प्रचंड गर्मी में भी कोमल फूल देता है।
Class 12 Hindi Aroh Chapter 14 में CBSE 2026 के लिए शिरीष, अवधूत, गांधी, कालिदास, अनासक्ति, पुरानी पीढ़ी और गतिशीलता से जुड़े प्रश्न महत्वपूर्ण हैं।
1. “Shirish Ke Phool” के लेखक कौन हैं?
“Shirish Ke Phool” के लेखक आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी हैं। वे हिंदी के प्रमुख निबंधकार, आलोचक और साहित्य-इतिहासकार हैं।
उनकी प्रमुख रचनाओं में “अशोक के फूल”, “कुटज”, “कल्पलता”, “बाणभट्ट की आत्मकथा” और “कबीर” शामिल हैं।
इस पाठ में वे शिरीष के फूलों के माध्यम से मनुष्य की जिजीविषा और आत्मबल को समझाते हैं।
2. “Shirish Ke Phool” किस विधा की रचना है?
“Shirish Ke Phool” एक ललित निबंध है। इसमें विचार, भाव, प्रकृति-वर्णन और सांस्कृतिक संदर्भ साथ चलते हैं।
लेखक शिरीष के पेड़ से आरंभ करते हैं। फिर वे साहित्य, इतिहास, समाज, गांधी और कवि-स्वभाव तक जाते हैं।
ललित निबंध की यही विशेषता है कि सामान्य वस्तु से गहरा जीवन-दर्शन निकलता है।
3. “Shirish Ke Phool” का मुख्य भाव क्या है?
“Shirish Ke Phool” का मुख्य भाव कठिन परिस्थितियों में भी कोमल, सक्रिय और जिजीविषु बने रहना है। शिरीष गर्मी, लू और धूप में भी फूलता है।
वह दुख-सुख में हार नहीं मानता। लेखक उसे कालजयी अवधूत की तरह देखते हैं।
निबंध मनुष्य को आत्मबल, अनासक्ति और गतिशीलता की सीख देता है।
4. लेखक ने शिरीष को क्यों चुना?
लेखक ने शिरीष को इसलिए चुना क्योंकि वह कोमलता और कठोरता दोनों का अद्भुत मेल है। उसके फूल बहुत कोमल हैं।
उसके फल मजबूत हैं और जल्दी स्थान नहीं छोड़ते। वह भीषण गर्मी में भी रस बनाए रखता है।
इसलिए शिरीष लेखक के लिए जीवन-शक्ति और संतुलन का प्रतीक बन जाता है।
Shirish Ke Phool Class 12 Question Answer for NCERT Exercise
NCERT अभ्यास में शिरीष के प्रतीक, लेखक की जीवन-दृष्टि और साहित्यकार के मानदंड पर प्रश्न हैं। Shirish Ke Phool Class 12 question answer लिखते समय उदाहरण और विचार दोनों जोड़ें।
पाठ में शिरीष को कालजयी अवधूत कहा गया है। अभ्यास प्रश्नों में कोमलता-कठोरता, जिजीविषा, गांधी, अनासक्त कवि और गतिशीलता प्रमुख बिंदु हैं।
5. लेखक ने शिरीष को कालजयी अवधूत क्यों माना है?
लेखक ने शिरीष को कालजयी अवधूत इसलिए माना है क्योंकि वह कठिन परिस्थितियों में भी मस्त रहता है। जेठ की धूप और लू में भी वह फूलता है।
सुख हो या दुख, वह हार नहीं मानता। वह वातावरण से रस खींचकर कोमल फूल देता है।
अवधूत संसार के बंधनों से ऊपर होता है। शिरीष भी गर्मी, आँधी और लू से विचलित नहीं होता।
6. “हृदय की कोमलता को बचाने के लिए व्यवहार की कठोरता भी जरूरी होती है” कैसे?
यह कथन शिरीष के फूल और फल के आधार पर सही है। शिरीष के फूल अत्यंत कोमल होते हैं।
पर उसके फल मजबूत होते हैं। नए फल-पत्ते उन्हें धक्का देकर ही बाहर निकालते हैं।
लेखक इससे बताते हैं कि कोमल हृदय के साथ व्यवहार में कठोरता भी चाहिए। जीवन केवल नरमी से नहीं चलता।
7. शिरीष संघर्षपूर्ण जीवन में जिजीविषा की सीख कैसे देता है?
शिरीष कठिन मौसम में भी फूलकर जिजीविषा की सीख देता है। जब धरती और आकाश जलते हैं, तब भी वह खिला रहता है।
वह बाहरी कठिनाइयों से रस नहीं खोता। वह अपना जीवन-संगीत बनाए रखता है।
लेखक इसे मनुष्य के लिए आदर्श मानते हैं। संघर्ष में भी सक्रिय और शांत रहना ही जिजीविषा है।
8. “हाय, वह अवधूत आज कहाँ है!” में लेखक किसकी ओर संकेत करते हैं?
इस कथन में लेखक गांधीजी की ओर संकेत करते हैं। वे गांधी को शिरीष की तरह कोमल और कठोर मानते हैं।
गांधीजी में आत्मबल था। वे हिंसा, मारकाट और संकट के बीच भी स्थिर रहे।
लेखक आधुनिक सभ्यता में गांधीवादी आत्मबल की कमी से दुखी हैं।
9. लेखक ने वर्तमान सभ्यता के किस संकट की ओर संकेत किया है?
लेखक ने आत्मबल पर देहबल के वर्चस्व के संकट की ओर संकेत किया है। आज शक्ति का अर्थ बाहरी बल से लगाया जाता है।
मारकाट, हिंसा, लूट और रक्तपात ने समाज को अस्थिर किया है। ऐसे समय में गांधी जैसा आत्मबल दुर्लभ लगता है।
लेखक मानते हैं कि सभ्यता को शिरीष जैसी कोमलता और कठोरता चाहिए।
10. कवि के लिए अनासक्त योगी की स्थिर प्रज्ञा क्यों आवश्यक है?
कवि के लिए अनासक्त योगी की स्थिर प्रज्ञा इसलिए आवश्यक है क्योंकि कवि को जीवन से रस लेना होता है। वह दुख-सुख में फँसकर रुक नहीं सकता।
वह संसार में रहता है, पर उसका लेखा-जोखा नहीं करता। वह अनुभव को कविता में बदलता है।
लेखक कालिदास, कबीर और रवींद्रनाथ में यही गुण देखते हैं।
11. कवि के लिए विदग्ध प्रेमी का हृदय क्यों जरूरी है?
कवि के लिए विदग्ध प्रेमी का हृदय इसलिए जरूरी है क्योंकि कविता संवेदना से बनती है। केवल अनासक्ति पर्याप्त नहीं है।
कवि को सौंदर्य, दुख, प्रेम और करुणा समझनी चाहिए। कालिदास शकुंतला के सौंदर्य को भीतर से देख सके।
लेखक मानते हैं कि सच्चा कवि स्थिर प्रज्ञा और प्रेमपूर्ण हृदय दोनों रखता है।
12. “जमे कि मरे” का आशय स्पष्ट कीजिए।
“जमे कि मरे” का आशय है कि जो परिवर्तन नहीं करता, वह नष्ट हो जाता है। लेखक पुरानी पीढ़ी को चेताते हैं।
काल निरंतर आगे बढ़ता है। जड़ता मनुष्य को बचाती नहीं, मारती है।
हिलते-डुलते रहना, स्थान बदलना और आगे देखना जीवन की शर्त है।
13. सर्वग्रासी काल की मार से कौन बच सकता है?
सर्वग्रासी काल की मार से वही बच सकता है जो गतिशील रहता है। जो जड़ होकर एक जगह टिके रहते हैं, वे काल से नहीं बचते।
लेखक शिरीष के पुराने फलों से यह सीख निकालते हैं। नए पत्ते और फल पुराने को हटाते हैं।
जीवन में परिवर्तन स्वीकार करना दीर्घजीविता का आधार है।
14. फूल या पेड़ अपने-आप में समाप्त क्यों नहीं होता?
फूल या पेड़ अपने-आप में समाप्त नहीं होता क्योंकि वह किसी बड़े अर्थ का संकेत होता है। लेखक उसे उठी हुई अँगुली कहते हैं।
फूल सौंदर्य दिखाता है। पेड़ जीवन, धैर्य और परिवर्तन का संकेत देता है।
शिरीष लेखक को मानव जीवन, कवि-स्वभाव और गांधी तक ले जाता है।
Class 12 Hindi Aroh Chapter 14 Important Questions for Short Answers
छोटे उत्तरों में शिरीष की विशेषता और लेखक की दृष्टि साफ लिखें। यह पाठ प्रकृति-वर्णन से अधिक जीवन-दर्शन पर आधारित है।
Class 12 Hindi Aroh Chapter 14 important questions में शिरीष, अवदूत, कोमलता, कठोरता, काल और साहित्यकार की भूमिका मुख्य हैं।
15. शिरीष कब फूलता है?
शिरीष वसंत से फूलना शुरू करता है और आषाढ़ तक मस्त रहता है। कभी-कभी भादों में भी वह निर्घात फूलता रहता है।
जब गर्मी और लू से प्राण उबलते हैं, तब भी वह खिला रहता है।
यही गुण उसे जीवन की अजेयता का प्रतीक बनाता है।
16. शिरीष के फूल कैसे होते हैं?
शिरीष के फूल बहुत कोमल माने जाते हैं। संस्कृत साहित्य में भी उनकी कोमलता प्रसिद्ध है।
कालिदास ने कहा कि शिरीष फूल भँवरों के पैरों का हल्का दबाव सह सकता है। पक्षियों का दबाव वह नहीं सह सकता।
लेखक इस कोमलता को विशेष महत्व देते हैं।
17. शिरीष के फल कैसे होते हैं?
शिरीष के फल बहुत मजबूत होते हैं। वे नए फूलों के आने पर भी स्थान नहीं छोड़ते।
जब नए फल-पत्ते उन्हें धक्का देकर बाहर करते हैं, तभी वे हटते हैं। लेखक इससे पुरानी पीढ़ी की अधिकार-लिप्सा पर संकेत करते हैं।
यह विरोध शिरीष को रोचक प्रतीक बनाता है।
18. लेखक को पुराने फल किसकी याद दिलाते हैं?
लेखक को शिरीष के पुराने फल पुराने नेताओं की याद दिलाते हैं। वे समय रहते स्थान नहीं छोड़ते।
नई पीढ़ी के लोग उन्हें धक्का देकर हटाते हैं। तब तक वे जमे रहते हैं।
यह प्रसंग समाज और राजनीति में पीढ़ी-संघर्ष दिखाता है।
19. “महाकाल देवता साप-साप कोड़े चला रहे हैं” का भाव क्या है?
इस पंक्ति में काल की निरंतर मार का भाव है। काल किसी को स्थिर नहीं रहने देता।
जो जीर्ण और दुर्बल है, वह झर जाता है। जिसमें प्राणधारा ऊपर उठती है, वही टिकता है।
लेखक जीवन में परिवर्तन और सक्रियता को अनिवार्य मानते हैं।
20. लेखक ने कबीर को शिरीष जैसा क्यों कहा है?
लेखक ने कबीर को शिरीष जैसा इसलिए कहा क्योंकि वे मस्त, बेपरवाह, सरस और मादक थे। कबीर संसार के बंधनों से ऊपर थे।
वे लोक के बीच रहते हुए भी निर्भय और स्वतंत्र थे। उनकी वाणी अवधूत जैसी लगती है।
शिरीष की मस्ती और कबीर की फक्कड़ता में लेखक समानता देखते हैं।
21. लेखक ने कालिदास को महान कवि क्यों माना है?
लेखक ने कालिदास को महान कवि इसलिए माना क्योंकि वे सौंदर्य के बाहरी आवरण को भेदकर भीतर तक पहुँचते थे। वे अनासक्त रह सके।
वे दुख-सुख से रस खींच लेते थे। “शकुंतला” के चित्रण में उनकी सूक्ष्म दृष्टि दिखाई देती है।
लेखक उन्हें स्थिर प्रज्ञा और विदग्ध प्रेमी का आदर्श मानते हैं।
22. शिरीष और गांधी में क्या समानता बताई गई है?
शिरीष और गांधी दोनों कोमल और कठोर थे। शिरीष गर्मी में भी कोमल फूल देता है, पर भीतर मजबूत रहता है।
गांधी भी आत्मबल से कोमल और कठोर बन सके। वे हिंसा और संकट के बीच स्थिर रहे।
लेखक दोनों में अवदूत जैसी शक्ति देखते हैं।
23. “दस दिन फूला और फिर खंखड़-खंखड़” किस पर व्यंग्य है?
यह कथन अल्पजीवी चमक पर व्यंग्य है। पलाश दस दिन फूलता है और फिर सूखा दिखता है।
लेखक ऐसी क्षणिक सुंदरता को पर्याप्त नहीं मानते। उन्हें शिरीष का दीर्घ और स्थिर फूलना अधिक प्रिय है।
यह पंक्ति स्थायी जीवन-रस का महत्व बताती है।
24. “लंडूरे” शब्द का प्रयोग किस अर्थ में आया है?
“लंडूरे” शब्द पूँछहीन या अधूरे के अर्थ में आया है। लेखक कहते हैं कि कम समय के दुमदार पेड़ों से लंडूरे भले।
यहाँ हल्का व्यंग्य है। लेखक पलाश की क्षणिक शोभा की तुलना शिरीष से करते हैं।
भाषा में विनोद और चुटीला भाव है।
Shirish Ke Phool Important Questions for 3-Mark and 5-Mark Practice
लंबे उत्तरों में शिरीष को केवल पेड़ की तरह न लिखें। उसे जीवन-दर्शन, साहित्य-दृष्टि और सामाजिक संकेत से जोड़ें।
Shirish Ke Phool important questions में शिरीष की कोमलता, कठोरता, गांधी-संबंध, कालिदास और पीढ़ी-संघर्ष प्रमुख हैं।
25. शिरीष का प्रतीकात्मक महत्व स्पष्ट कीजिए।
शिरीष जीवन की अजेयता, कोमलता और आत्मबल का प्रतीक है। वह जेठ की धूप में भी फूलता है।
उसके फूल कोमल हैं, पर फल मजबूत हैं। वह बाहरी कठिनाइयों से हार नहीं मानता।
लेखक उसे अवधूत की तरह देखते हैं। वह मनुष्य को सिखाता है कि दुख-सुख में मस्त रहकर काम करना चाहिए।
26. “Shirish Ke Phool” में कोमलता और कठोरता का द्वंद्व कैसे आया है?
पाठ में कोमलता और कठोरता शिरीष के फूल और फल से प्रकट होती है। फूल बहुत कोमल हैं।
फल इतने मजबूत हैं कि नए फल-पत्ते उन्हें धक्का देकर हटाते हैं। यह प्रकृति का रोचक विरोध है।
लेखक इसे मनुष्य के व्यवहार से जोड़ते हैं। हृदय को कोमल रखते हुए व्यवहार में आवश्यक कठोरता चाहिए।
27. “Shirish Ke Phool” में जिजीविषा का भाव कैसे प्रकट हुआ है?
जिजीविषा शिरीष के कठोर मौसम में भी खिलने से प्रकट होती है। जब धरती अग्निकुंड बन जाती है, तब भी वह फूलता है।
वह लू और धूप से हार नहीं मानता। वह वातावरण से रस खींचता है।
लेखक इससे मनुष्य को संघर्ष में भी जीवित और सक्रिय रहने की प्रेरणा देते हैं।
28. “Shirish Ke Phool” में गांधीजी का उल्लेख क्यों आया है?
गांधीजी का उल्लेख आत्मबल और नैतिक स्थिरता के कारण आया है। लेखक शिरीष को देखते हुए गांधी को याद करते हैं।
शिरीष की तरह गांधी भी कोमल और कठोर थे। वे बाहरी हिंसा के बीच आत्मबल से टिके रहे।
“हाय, वह अवधूत आज कहाँ है” कथन गांधीवादी मूल्यों की कमी पर दुख व्यक्त करता है।
29. “Shirish Ke Phool” में पुराने और नए का संघर्ष कैसे दिखता है?
पुराने और नए का संघर्ष शिरीष के पुराने फलों और नए पत्तों से दिखता है। पुराने फल स्थान नहीं छोड़ते।
नए फल-पत्ते उन्हें धक्का देकर बाहर करते हैं। लेखक इसे पुराने नेताओं और नई पीढ़ी के संघर्ष से जोड़ते हैं।
यह प्रसंग समाज और राजनीति में परिवर्तन की आवश्यकता बताता है।
30. लेखक ने सच्चे कवि के लिए कौन-सा मानदंड रखा है?
लेखक ने सच्चे कवि के लिए अनासक्त योगी और विदग्ध प्रेमी दोनों गुण जरूरी माने हैं। कवि को स्थिर प्रज्ञा चाहिए।
उसे सौंदर्य और संवेदना को भीतर से समझना चाहिए। वह जीवन से रस ले, पर उसमें अटक न जाए।
लेखक कालिदास को ऐसे कवि का बड़ा उदाहरण मानते हैं।
31. कालिदास के संदर्भ से लेखक क्या सिद्ध करना चाहते हैं?
कालिदास के संदर्भ से लेखक कवि की सूक्ष्म सौंदर्य-दृष्टि सिद्ध करना चाहते हैं। कालिदास केवल बाहरी रूप नहीं देखते थे।
वे सौंदर्य के भीतर छिपे भाव को पकड़ते थे। शकुंतला के चित्रण में शिरीष फूल और मृणाल हार जैसे सूक्ष्म संकेत आते हैं।
लेखक कहते हैं कि महान कवि वस्तु के भीतर का रस पहचानता है।
32. “Shirish Ke Phool” को ललित निबंध क्यों कहा जाता है?
“Shirish Ke Phool” को ललित निबंध कहा जाता है क्योंकि इसमें विचार और सौंदर्य साथ चलते हैं। लेखक शिरीष का वर्णन करते हैं।
फिर वे उससे जीवन, साहित्य, समाज और गांधी तक पहुँचते हैं। भाषा भावपूर्ण, विनोदी और सांस्कृतिक संकेतों से भरी है।
यह निबंध ज्ञान को बोझ नहीं बनाता, अनुभव में बदलता है।
NCERT Solutions Class 12 Hindi Aroh Chapter 14: Extract-Based Questions
Extract-based answers में पंक्ति का संदर्भ, अर्थ और लेखक की दृष्टि लिखें। इस अध्याय में प्रकृति-वर्णन से अधिक प्रतीकात्मक अर्थ महत्वपूर्ण है।
NCERT Solutions Class 12 Hindi Aroh Chapter 14 की तैयारी में “अवधूत”, “जमे कि मरे”, “फूल हो या पेड़” और “कालाग्नि” पर ध्यान दें।
33. “शिरीष कालजयी अवधूत की भाँति जीवन की अजेयता का मंत्र प्रचार करता रहता है” का भाव स्पष्ट कीजिए।
इस पंक्ति का भाव है कि शिरीष कठिन समय में भी हार नहीं मानता। वह जेठ की धूप में फूलता है।
अवधूत संसार से ऊपर रहता है। शिरीष भी बाहरी ताप से विचलित नहीं होता।
लेखक इसे मनुष्य की अजेय जिजीविषा का प्रतीक मानते हैं।
34. “दुरंत प्राणधारा और सर्वव्यापी कालाग्नि का संघर्ष निरंतर चल रहा है” का अर्थ क्या है?
इसका अर्थ है कि जीवन-शक्ति और विनाशकारी काल के बीच निरंतर संघर्ष चलता है। काल सबको नष्ट करता है।
फिर भी जीवन अपनी प्राणधारा से आगे बढ़ता है। जो गतिशील रहते हैं, वे अधिक समय तक टिकते हैं।
लेखक जीवन में जड़ता छोड़ने की बात करते हैं।
35. “हिलते-डुलते रहो, स्थान बदलते रहो” का भाव क्या है?
इस पंक्ति का भाव है कि जीवन में गतिशीलता जरूरी है। जो एक जगह जमे रहते हैं, वे काल की मार से नहीं बचते।
परिवर्तन स्वीकार करना जीवन की रक्षा करता है। आगे की ओर मुँह रखना जरूरी है।
लेखक जड़ता को मृत्यु से जोड़ते हैं।
36. “जमे कि मरे” का भाव स्पष्ट कीजिए।
“जमे कि मरे” का भाव है कि जड़ता अंततः विनाश लाती है। जो समय के साथ नहीं बदलता, वह टिक नहीं पाता।
पुराने फल नए पत्तों को जगह नहीं देते। अंत में उन्हें हटना ही पड़ता है।
लेखक समाज, राजनीति और जीवन में परिवर्तन की आवश्यकता बताते हैं।
37. “कवि बनना है मेरे दोस्तों, तो फक्कड़ बनो” का आशय क्या है?
इसका आशय है कि सच्चा कवि बंधनों और हिसाब-किताब से ऊपर उठता है। वह फक्कड़ और अनासक्त होता है।
वह अनुभव से रस लेता है, पर लाभ-हानि में नहीं उलझता। लेखक ऐसे कवि को ही सृजनशील मानते हैं।
यह कथन साहित्य-कर्म का ऊँचा मानदंड रखता है।
38. “फूल हो या पेड़, वह अपने-आप में समाप्त नहीं है” का अर्थ क्या है?
इसका अर्थ है कि प्रकृति की वस्तुएँ बड़े जीवन-सत्य का संकेत देती हैं। फूल या पेड़ केवल दृश्य वस्तु नहीं हैं।
वे किसी अन्य अर्थ की ओर इशारा करते हैं। शिरीष लेखक को जिजीविषा, गांधी और कवि-दृष्टि तक ले जाता है।
यह पंक्ति ललित निबंध की प्रतीकात्मक शैली दिखाती है।
39. “वह किसी अन्य वस्तु को दिखाने के लिए उठी हुई अँगुली है” का भाव क्या है?
इस पंक्ति में प्रतीक की भूमिका स्पष्ट होती है। वस्तु अपने से आगे किसी बड़े सत्य की ओर संकेत करती है।
शिरीष केवल पेड़ नहीं है। वह जीवन-दृष्टि, आत्मबल और सौंदर्य का संकेत है।
लेखक प्रकृति को विचार का माध्यम बनाते हैं।
40. “गांधी भी वायुमंडल से रस खींचकर इतना कोमल और इतना कठोर हो सका था” का भाव स्पष्ट कीजिए।
इस पंक्ति में गांधीजी की आत्मिक शक्ति का भाव है। वे बाहरी साधनों से नहीं, भीतर की शक्ति से टिके।
शिरीष की तरह वे कोमल भी थे और कठोर भी। वे हिंसा और संकट के बीच शांत रहे।
लेखक गांधी को शिरीष जैसा अवधूत मानते हैं।
Class 12 Hindi Chapter 14 Question Answer: High-Scoring Writing Points
Class 12 Hindi Chapter 14 question answer में प्रकृति के प्रतीकात्मक अर्थ को जरूर लिखें। शिरीष को केवल फूलदार पेड़ मानकर उत्तर लिखना अधूरा रहेगा।
CBSE 2026 में अच्छे उत्तरों में शिरीष, जीवन-दर्शन, साहित्यकार की भूमिका और लेखक की शैली साथ आएँगे।
41. 3-mark answer कैसे लिखें?
3-mark answer में सीधा उत्तर, एक पाठ-संदर्भ और छोटा विश्लेषण लिखें। उत्तर को लंबा सारांश न बनाएं।
यदि प्रश्न शिरीष पर है, तो कोमलता और जिजीविषा लिखें। यदि प्रश्न गांधी पर है, तो आत्मबल और स्थिरता लिखें।
अंतिम वाक्य पाठ के मुख्य विचार से जुड़ा होना चाहिए।
42. 5-mark answer कैसे लिखें?
5-mark answer में प्रतीक, उदाहरण और लेखक की दृष्टि शामिल करें। केवल घटना या वनस्पति-वर्णन पर्याप्त नहीं है।
शिरीष पर उत्तर में फूल, फल, गर्मी, अवदूत और जिजीविषा लिखें। साहित्यकार पर उत्तर में अनासक्ति, प्रेम, कालिदास और फक्कड़पन जोड़ें।
निष्कर्ष तथ्यात्मक रखें। सामान्य प्रकृति-प्रशंसा से बचें।
43. “Shirish Ke Phool” पर 5-mark answer का नमूना लिखिए।
“Shirish Ke Phool” हजारी प्रसाद द्विवेदी का ललित निबंध है। लेखक शिरीष के पेड़ से जीवन-दर्शन निकालते हैं।
शिरीष जेठ की धूप में भी फूलता है। उसके फूल कोमल हैं, पर फल कठोर हैं।
लेखक उसे कालजयी अवधूत मानते हैं। वह मनुष्य को संघर्ष में भी जिजीविषु और संतुलित रहने की सीख देता है।
44. “शिरीष और गांधी” पर 5-mark answer लिखिए।
लेखक ने शिरीष और गांधी में कोमलता तथा कठोरता की समानता देखी है। शिरीष भीषण गर्मी में भी फूलता है।
गांधी हिंसा और संकट के बीच आत्मबल से टिके रहे। दोनों बाहरी शक्ति से नहीं, भीतर के रस से मजबूत हैं।
“हाय, वह अवधूत आज कहाँ है” में लेखक गांधीवादी मूल्यों की कमी पर दुख प्रकट करते हैं।
45. “सच्चा कवि” पर 5-mark answer लिखिए।
लेखक के अनुसार सच्चे कवि में अनासक्त योगी और विदग्ध प्रेमी दोनों गुण होने चाहिए। उसे स्थिर प्रज्ञा चाहिए।
साथ ही उसे सौंदर्य और संवेदना का गहरा अनुभव होना चाहिए। वह जीवन से रस निकाले, पर हिसाब-किताब में न उलझे।
लेखक कालिदास, कबीर और रवींद्रनाथ में यह गुण देखते हैं।
46. परीक्षा के लिए “Shirish Ke Phool” के कौन-से बिंदु महत्वपूर्ण हैं?
परीक्षा के लिए शिरीष का अवदूत रूप, कोमलता-कठोरता, जिजीविषा और गांधी-संबंध महत्वपूर्ण हैं। ये NCERT अभ्यास से जुड़े हैं।
कालिदास का सौंदर्य-बोध, पुराने फल और नई पीढ़ी का संघर्ष, “जमे कि मरे” और “फूल हो या पेड़” भी उपयोगी हैं।
इन बिंदुओं में पाठ का मुख्य जीवन-दर्शन आता है।
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