NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 10
“भारति, जय, विजयकरे!” सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की देशप्रेम से भरी कविता है, जिसमें भारतभूमि को प्रकृति, ज्ञान, संस्कृति और विजय की चेतना से युक्त रूप में चित्रित किया गया है।
NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 10 में textbook MCQs, अर्थ और भाव, कविता का सौंदर्य, समास, अलंकार, बहुभाषिकता और writing tasks हल किए गए हैं।
भारत को एक जीवंत देवी के रूप में देखने वाली यह कविता प्रकृति और राष्ट्रभाव का सुंदर संगम है। निराला भारतभूमि को सोने जैसी फसलों, कमल, गंगा की धवल धारा, हिमालय के मुकुट और दिशाओं में गूँजते ओंकार से सजाते हैं। कविता में देशप्रेम केवल भावुकता नहीं, बल्कि भारत की प्रकृति, कृषि, संस्कृति, ज्ञान और विविध स्वरों के सम्मान से जुड़ा है। ये NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 10 students को भारति जय विजयकरे exercise answers, MCQs, अर्थ-भाव, कविता का सौंदर्य, समास और अलंकार revise करने में मदद करते हैं।
Key Takeaways
- कवि: “भारति, जय, विजयकरे!” सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की कविता है।
- मुख्य विषय: भारतभूमि की महिमा, प्रकृति-सौंदर्य, संस्कृति और देशप्रेम।
- मुख्य भाव: भारत की विजय, समृद्धि, पवित्रता, विविधता और सांस्कृतिक गौरव।
- भाषा-कौशल: पाठ में MCQ, अर्थ-भाव, कविता का सौंदर्य, समास, अलंकार, बहुभाषिकता और रचनात्मक लेखन शामिल हैं।
NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 10 Structure 2026
| Section | Text / Skill Area | Main Question Type |
| अभ्यास | मेरे उत्तर मेरे तर्क, अर्थ और भाव | MCQ, भावार्थ, तर्क सहित उत्तर |
| काव्य-बोध | मेरी समझ मेरे विचार, कविता का सौंदर्य | प्रकृति-वर्णन, देशप्रेम, प्रतीक |
| गतिविधियाँ | विविध रंग भारत के, नदी की यात्रा | Poster, collage, travel writing |
| भाषा | बहुभाषी देश हमारा, मातृभाषा और भाव, समास, अलंकार | Grammar और vocabulary |
| विस्तार | मिलकर लें शपथ, भाषा संगम, अतिरिक्त पठन | पर्यावरण, भारतीय भाषाएँ, देशप्रेम |
NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 10: भारति, जय, विजयकरे!
Bharati Jai Vijay Kare NCERT Solutions में उत्तर पुस्तक के अभ्यास क्रम में दिए गए हैं। यह section विद्यार्थियों को Class 9 Hindi Ganga Chapter 10 Question Answer को textbook-based school-answer format में समझने में मदद करता है।
मेरे उत्तर मेरे तर्क
इस section में Class 9 Hindi Ganga Chapter 10 MCQ और भारति जय विजयकरे MCQ के उत्तर तर्क सहित दिए गए हैं।
1. “भारति, जय, विजयकरे” कविता में विशेष रूप से—
उत्तर: सही विकल्प है (ग) भारत के ज्ञान, प्रकृति और संपन्नता की प्रशंसा की गई है।
तर्क: कविता में भारत को कनक-शस्य-कमलधरा कहा गया है। गंगा, हिमालय, सागर, वन, लता और दिशाओं में गूँजते ओंकार के माध्यम से भारत की प्रकृति, ज्ञान, संस्कृति और समृद्धि की प्रशंसा की गई है।
2. “कनक-शस्य-कमलधरे” पंक्ति का भावार्थ है—
उत्तर: सही विकल्प है (क) भारत की धन-धान्य संपन्नता।
तर्क: “कनक-शस्य” का अर्थ है सोने जैसी फसलें और “कमलधरे” का अर्थ है कमल धारण करने वाली। यह पंक्ति भारतभूमि की कृषि-संपन्नता, सुंदरता और प्राकृतिक वैभव को व्यक्त करती है।
3. समस्त विश्व में भारत के महत्व का उद्घोष करने वाली पंक्तियाँ हैं—
उत्तर: सही विकल्प है (घ) ध्वनित दिशाएँ उदार / शतमुख-शतरव-मुखरे!
तर्क: इन पंक्तियों में कवि भारत की ध्वनि, विचार और स्वर को अनेक दिशाओं में फैलता हुआ दिखाते हैं। “शतमुख-शतरव” भारत की बहुवाणी, विविधता और व्यापक प्रभाव का संकेत देता है।
4. कविता की भाषा और शैली किस विशेषता से संपन्न है?
उत्तर: सही विकल्प है (ख) संस्कृतनिष्ठ और समासयुक्त।
तर्क: कविता में “कनक-शस्य-कमलधरे”, “गर््जितोर्मि”, “ज्योतिर्जल”, “शतमुख-शतरव” जैसे संस्कृतनिष्ठ और सामासिक पद आए हैं। इससे कविता की भाषा ओजस्वी और गंभीर बनती है।
5. भारत के वस्त्रों में ‘तरु-तृण-वन-लता’ और गले में ‘गंगा-धारा’ को चित्रित कर कवि किस प्रकार की चेतना का संदेश देते हैं?
उत्तर: सही विकल्प है (क) पर्यावरणीय और सांस्कृतिक।
तर्क: कवि भारत को पेड़ों, घास, वनों, लताओं और गंगा की धारा से सुसज्जित रूप में देखते हैं। इससे प्रकृति के प्रति सम्मान और संस्कृति से जुड़ी पर्यावरणीय चेतना प्रकट होती है।
अर्थ और भाव
यह section भारति जय विजयकरे अर्थ और भाव को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। यहाँ कविता की पंक्तियों का सरल अर्थ और भाव स्पष्ट किया गया है।
1. “लंका पदतल शतदल, गर््जितोर्मि सागर-जल मि धोता शुचि चरण युगल!” पंक्ति का अर्थ और भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: इन पंक्तियों में कवि भारतभूमि को देवी के रूप में देखते हैं। लंका उसके चरणों के पास कमल के समान स्थित है और गरजती लहरों वाला सागर उसके पवित्र दोनों चरणों को धो रहा है।
भाव यह है कि भारतभूमि अत्यंत पवित्र, विशाल और पूजनीय है। समुद्र भी उसके चरण धोकर उसकी स्तुति करता हुआ प्रतीत होता है। यहाँ भारत की भौगोलिक स्थिति को दिव्य और काव्यात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया है।
2. “प्राण प्रणव ओंकार, ध्वनित दिशाएँ उदार, शतमुख-शतरव-मुखरे!” पंक्ति का अर्थ और भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: इन पंक्तियों में कवि कहते हैं कि भारत के प्राणों में प्रणव यानी ओंकार की ध्वनि है। उसकी उदार दिशाएँ अनेक मुखों और अनेक स्वरों से गूँज रही हैं।
भाव यह है कि भारत आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और वैचारिक विविधता से भरा देश है। यहाँ अनेक भाषाएँ, स्वर, विचार और परंपराएँ हैं, लेकिन उनमें एक व्यापक आध्यात्मिक चेतना भी है। यह पंक्ति भारत की बहुवाणी और सांस्कृतिक एकता को प्रकट करती है।
मेरी समझ मेरे विचार
यह section Class 9 Hindi Ganga Chapter 10 Question Answer का मुख्य भाग है। इसमें कविता के देशप्रेम, प्रकृति-सौंदर्य और सांस्कृतिक भावों पर आधारित उत्तर दिए गए हैं।
1. कविता में कवि की किस भावना की अभिव्यक्ति मिलती है?
उत्तर: कविता में कवि की गहरी देशभक्ति, सांस्कृतिक गर्व और भारतभूमि के प्रति श्रद्धा की भावना व्यक्त हुई है।
कवि भारत को केवल भौगोलिक क्षेत्र नहीं मानते, बल्कि एक पवित्र, सुंदर और चेतन सत्ता के रूप में देखते हैं। वे भारत की विजय, समृद्धि और महिमा की कामना करते हैं। गंगा, हिमालय, सागर, वन और फसलों के माध्यम से वे भारत की प्राकृतिक और सांस्कृतिक गरिमा का गुणगान करते हैं।
2. कविता में भारत के प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन किस प्रकार किया गया है? क्या आप मानते हैं कि प्रकृति का संरक्षण करना भी देशप्रेम का काम है? क्यों?
उत्तर: कविता में भारत के प्राकृतिक सौंदर्य का चित्र बहुत भव्य और चित्रात्मक ढंग से किया गया है।
कवि भारत को सोने जैसी फसलों, कमल, वन, लता, गंगा की धवल धारा और हिमालय के शुभ्र मुकुट से सजाते हैं। समुद्र उसके चरण धोता है और दिशाएँ ओंकार की ध्वनि से गूँजती हैं। यह प्रकृति भारत की पहचान का हिस्सा है।
हाँ, प्रकृति का संरक्षण करना भी देशप्रेम का काम है, क्योंकि नदियाँ, पर्वत, वन, खेत और जैव-विविधता देश की वास्तविक संपत्ति हैं। यदि हम इन्हें नष्ट करते हैं, तो हम देश की सुंदरता और जीवन-शक्ति को कमजोर करते हैं।
3. “कनक-शस्य-कमलधरे!” पंक्ति भारतभूमि की किन-किन विशेषताओं की ओर संकेत कर रही है?
उत्तर: “कनक-शस्य-कमलधरे!” पंक्ति भारतभूमि की कृषि-संपन्नता, प्राकृतिक सुंदरता और पवित्रता की ओर संकेत करती है।
“कनक-शस्य” से सोने जैसी चमकती फसलों का भाव आता है। यह भारत की कृषि-परंपरा और अन्न-संपन्नता को दिखाता है। “कमलधरे” भारत की सुंदरता, शुद्धता और सांस्कृतिक गरिमा का प्रतीक है। इस एक पंक्ति में भारत का श्रम, सौंदर्य और समृद्धि एक साथ व्यक्त होते हैं।
4. “मुकुट शुभ्र हिम-तुषार” पंक्ति में हिमालय को भारत का मुकुट बताया गया है, क्यों?
उत्तर: हिमालय भारत के उत्तर में स्थित विशाल पर्वत-श्रृंखला है। वह ऊँचा, भव्य, श्वेत और गौरवपूर्ण है।
कवि ने उसे भारत का मुकुट इसलिए कहा है क्योंकि जैसे मुकुट किसी व्यक्ति की गरिमा बढ़ाता है, वैसे ही हिमालय भारत की भौगोलिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक गरिमा बढ़ाता है। उसकी बर्फ से ढकी चोटियाँ भारत की पवित्रता और महानता का प्रतीक हैं।
कविता का सौंदर्य
यह section भारति जय विजयकरे कविता का सौंदर्य और काव्य-विशेषताओं को समझने के लिए है। निराला ने इस कविता में चित्रात्मक भाषा, मानवीकरण, रूपक, अनुप्रास और समासयुक्त शैली का प्रभावशाली प्रयोग किया है।
1. कविता की विशेषताओं को दर्शाने वाली पंक्तियाँ लिखिए।
उत्तर:
| विशेषता | कविता की पंक्तियाँ |
| प्रकृति का मानवीकरण | “गर््जितोर्मि सागर-जल मि / धोता शुचि चरण युगल” |
| आलंकारिक प्रयोग | “मुकुट शुभ्र हिम-तुषार” |
| समस्त पद / सामासिक पद | “कनक-शस्य-कमलधरे” |
| संस्कृतनिष्ठ भाषा प्रयोग | “प्राण प्रणव ओंकार” |
| चित्रात्मक भाषा | “गंगा ज्योतिर्जल-कण / धवल धार हार गले” |
2. वर्तमान संदर्भ में भारत को एक नए रूप में प्रस्तुत करने का अवसर मिले तो आप किन विशेषताओं और विविधताओं को शामिल करेंगे?
उत्तर: वर्तमान संदर्भ में भारत को प्रस्तुत करते समय मैं उसकी परंपरा और आधुनिकता दोनों को शामिल करूँगा।
मैं भारत की भाषाई विविधता, विज्ञान और तकनीक, अंतरिक्ष-कार्यक्रम, कृषि, लोकतंत्र, युवा-शक्ति, महिला-शक्ति, लोककला, शास्त्रीय संगीत, योग, खेल, डिजिटल प्रगति और पर्यावरण-जागरूकता को दिखाऊँगा। साथ ही हिमालय, गंगा, रेगिस्तान, समुद्र, वन और त्योहारों की विविधता भी शामिल करूँगा। इससे भारत का आधुनिक, जीवंत और बहुरंगी रूप सामने आएगा।
3. “शतमुख-शतरव-मुखरे!” पंक्ति में भारत के विविध पर्व, उत्सव और रीति-रिवाज किस प्रकार ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की संकल्पना को साकार करते हैं?
उत्तर: “शतमुख-शतरव-मुखरे!” पंक्ति भारत की अनेक भाषाओं, अनेक स्वरों और अनेक परंपराओं का संकेत देती है।
भारत में दीपावली, ईद, क्रिसमस, गुरुपर्व, बिहू, पोंगल, ओणम, नवरात्रि, बैसाखी और होली जैसे अनेक पर्व मनाए जाते हैं। इनके तरीके अलग हो सकते हैं, लेकिन इनमें आनंद, परिवार, समाज, श्रद्धा और साझा संस्कृति का भाव होता है। यही विविधता भारत को एकता में बाँधती है और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की संकल्पना को साकार करती है।
4. भारत को सुदृढ़ करने में प्रकृति, संस्कृति और ज्ञान-परंपरा के महत्व पर संक्षिप्त लेख लिखिए।
उत्तर: भारत की शक्ति केवल उसकी सीमाओं या जनसंख्या में नहीं, बल्कि उसकी प्रकृति, संस्कृति और ज्ञान-परंपरा में भी है।
हिमालय, गंगा, वन, खेत, समुद्र और ऋतुएँ भारत के जीवन को आधार देती हैं। संस्कृति लोगों को भाषा, त्योहार, कला, संगीत और मूल्यों से जोड़ती है। ज्ञान-परंपरा ने भारत को वेद, उपनिषद, गणित, योग, आयुर्वेद, साहित्य और दर्शन की समृद्ध विरासत दी है। यदि हम प्रकृति की रक्षा करें, संस्कृति का सम्मान करें और ज्ञान को आगे बढ़ाएँ, तो भारत और अधिक सशक्त बनेगा।
5. बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन ने हमारी नदियों और हिमालय को किस प्रकार प्रभावित किया है?
उत्तर: बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन ने नदियों और हिमालय दोनों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
नदियों में औद्योगिक कचरा, प्लास्टिक, गंदा पानी और धार्मिक सामग्री फेंकने से उनका जल प्रदूषित होता है। गंगा जैसी नदियों की स्वच्छता पर इसका प्रभाव पड़ता है। हिमालय में तापमान बढ़ने से ग्लेशियर पिघल रहे हैं, भूस्खलन बढ़ रहा है और नदियों के प्रवाह पर असर पड़ रहा है। इसलिए नदियों और हिमालय की रक्षा पर्यावरण और देश दोनों के भविष्य के लिए जरूरी है।
विविध रंग भारत के
यह section Bharati Jai Vijay Kare Class 9 में भारत की सांस्कृतिक विविधता, प्रतीकों और रचनात्मक प्रस्तुति को समझने के लिए है।
1. भारत को एक मनुष्य के रूप में कल्पित करते हुए आप अपने राज्य के किन सांस्कृतिक, पारंपरिक वेशभूषा, आभूषण, चिह्नों और पुष्पों से उसकी साज-सज्जा करेंगे?
उत्तर: यदि मुझे भारत को एक मनुष्य के रूप में सजाने का अवसर मिले, तो मैं उसे भारतीय विविधता के प्रतीकों से सजाऊँगा।
मैं सिर पर हिमालय जैसा शुभ्र मुकुट रखूँगा। वस्त्रों में उत्तर भारत की कढ़ाई, दक्षिण भारत का रेशमी वस्त्र, पूर्वोत्तर के रंगीन पैटर्न और राजस्थान-गुजरात की लोक-सजावट जोड़ूँगा। गले में गंगा-यमुना जैसी नदियों की माला होगी। हाथ में कमल, चंपा और चमेली जैसे फूल होंगे। इस साज-सज्जा से भारत की प्रकृति, संस्कृति और विविधता का सुंदर रूप प्रकट होगा।
2. भारत पर आधारित एक डाक टिकट, पोस्टर या पुस्तक के लिए आवरण पृष्ठ बनाइए और बताइए कि उसमें किन प्रतीकों को शामिल करेंगे और क्यों?
उत्तर: भारत पर आधारित पोस्टर या आवरण पृष्ठ में मैं हिमालय, गंगा, कमल, खेत, तिरंगा, पुस्तक, चक्र और विविध वेशभूषा वाले लोगों को शामिल करूँगा।
हिमालय भारत की गरिमा का प्रतीक होगा। गंगा पवित्रता और जीवन का प्रतीक होगी। खेत कृषि-संपन्नता दिखाएँगे। कमल सौंदर्य और संस्कृति का संकेत देगा। तिरंगा राष्ट्रीय एकता का प्रतीक होगा। पुस्तक ज्ञान-परंपरा दिखाएगी और विविध वेशभूषा वाले लोग भारत की सांस्कृतिक एकता को प्रकट करेंगे।
3. गंगा नदी की अपने उद्गम से लेकर बंगाल की खाड़ी में विलीन होने तक की यात्रा का यात्रा-वृत्तांत लिखिए।
उत्तर: गंगा की यात्रा हिमालय की गोद से शुरू होती है। गंगोत्री ग्लेशियर से निकलकर वह भागीरथी के रूप में बहती है। पहाड़ों में उसका जल तेज, ठंडा और निर्मल होता है। देवप्रयाग में भागीरथी और अलकनंदा के संगम से वह गंगा कहलाती है।
हरिद्वार और ऋषिकेश में गंगा आस्था और आध्यात्मिकता का रूप लेती है। आगे वह उत्तर भारत के मैदानों में खेतों को सींचती हुई बहती है। प्रयागराज में यमुना और सरस्वती से उसका संगम माना जाता है। वाराणसी में वह संस्कृति, संगीत और मोक्ष की भावना से जुड़ती है। बिहार और बंगाल से गुजरते हुए गंगा अनेक भाषाओं, लोक-जीवन और सभ्यताओं को जोड़ती है। अंत में वह सुंदरवन के पास बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है। यह यात्रा केवल नदी की नहीं, भारत की संस्कृति और जीवनधारा की यात्रा है।
व्याकरण की बात: बहुभाषी देश हमारा
यह section Class 9 Hindi Chapter 10 grammar answers में भाषा, संस्कृति और मातृभाषा के महत्व को समझाता है।
1. यदि आपको एक सचेत नागरिक के रूप में भारत से अपनी मातृभाषा में संवाद का अवसर मिले, तो आप किन विषयों पर संवाद करना चाहेंगे?
उत्तर: मैं भारत से समाज, पर्यावरण, शिक्षा, संस्कृति और एकता पर संवाद करना चाहूँगा।
हिंदी में संवाद:
प्रिय भारत, मैं चाहता हूँ कि तुम्हारी नदियाँ स्वच्छ रहें, तुम्हारे वन सुरक्षित रहें और तुम्हारे सभी नागरिक शिक्षा प्राप्त करें। तुम्हारी भाषाएँ, लोककलाएँ और परंपराएँ हमारी धरोहर हैं। मैं चाहता हूँ कि हम सब मिलकर तुम्हें स्वच्छ, सशक्त और सुंदर बनाएँ।
English version:
Dear India, I want your rivers to remain clean, your forests to stay protected and every citizen to receive education. Your languages, folk arts and traditions are our heritage. I wish that all of us work together to make you clean, strong and beautiful.
मातृभाषा और भाव
यह section कविता-रचना और भावार्थ लिखने का अभ्यास कराता है।
1. अपनी मातृभाषा में भारत की स्तुति के लिए एक कविता लिखिए और उसका भावार्थ हिंदी में लिखिए।
उत्तर:
Poem in English:
O India, land of rivers bright,
Of mountains high and fields of light.
Your voices many, your heart is one,
You rise with every morning sun.
भावार्थ:
इस कविता में भारत को उजली नदियों, ऊँचे पर्वतों और प्रकाश से भरे खेतों की भूमि कहा गया है। भारत में अनेक भाषाएँ और स्वर हैं, लेकिन उसका हृदय एक है। हर सुबह वह नई ऊर्जा और आशा के साथ आगे बढ़ता है।
समास — समस्त पद एवं विग्रह
यह section समास और अलंकार तथा सामासिक पदों को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
1. कविता से चुने गए सामासिक पदों का समास-विग्रह लिखिए।
उत्तर:
| सामासिक पद | समास-विग्रह | समास का प्रकार |
| कनक-शस्य | कनक के समान शस्य | कर्मधारय समास |
| कमलधरे | कमल को धारण करने वाली | बहुव्रीहि / तत्पुरुष भाव |
| शतदल | शत दलों वाला | बहुव्रीहि समास |
| ज्योतिर्जल | ज्योति जैसा जल / ज्योति से युक्त जल | कर्मधारय समास |
| शतमुख | सौ मुखों वाला | बहुव्रीहि समास |
| सागरजल | सागर का जल | तत्पुरुष समास |
| हिम-तुषार | हिम के समान तुषार / हिम और तुषार | कर्मधारय / द्वंद्व भाव |
| चरण युगल | चरणों का युगल | तत्पुरुष समास |
अलंकार — समझ और प्रयोग
यह section भारति जय विजयकरे कविता का सौंदर्य में आए अनुप्रास और रूपक अलंकार को समझाता है।
1. कविता में जहाँ-जहाँ अनुप्रास अलंकार आया है, उन पंक्तियों को खोजकर लिखिए।
उत्तर:
| पंक्ति | अनुप्रास का कारण |
| “भारति, जय, विजयकरे!” | ‘य’ ध्वनि की आवृत्ति |
| “कनक-शस्य-कमलधरे!” | ‘क’ ध्वनि की आवृत्ति |
| “गर््जितोर्मि सागर-जल” | ‘ग/ज’ ध्वनियों का प्रभाव |
| “गंगा ज्योतिर्जल-कण” | ‘ज’ ध्वनि की आवृत्ति |
| “धवल धार हार गले” | ‘ध/ह’ ध्वनियों की आवृत्ति |
| “शतमुख-शतरव-मुखरे” | ‘श’ ध्वनि की पुनरावृत्ति |
2. कविता की उन पंक्तियों को खोजिए जहाँ रूपक अलंकार है। साथ ही बताइए कि कवि ने किस प्राकृतिक दृश्य या वस्तु को भारत का रूप मानकर चित्रित किया है।
उत्तर:
| पंक्ति | रूपक / चित्रण |
| “तरु-तृण-वन-लता वसन” | वृक्ष, घास, वन और लताओं को भारत के वस्त्र माना गया है। |
| “गंगा ज्योतिर्जल-कण / धवल धार हार गले” | गंगा की धवल धारा को भारत के गले का हार माना गया है। |
| “मुकुट शुभ्र हिम-तुषार” | हिमालय को भारत का मुकुट माना गया है। |
| “लंका पदतल शतदल” | लंका को भारत के चरणों के पास स्थित कमल जैसा चित्रित किया गया है। |
| “सागर-जल मि धोता शुचि चरण युगल” | समुद्र को भारत के पवित्र चरण धोते हुए दिखाया गया है। |
मिलकर लें शपथ
यह section पर्यावरण-संरक्षण, वन-संरक्षण और नागरिक जिम्मेदारी से जुड़ा है।
1. वन-संरक्षण के लिए बनाए गए नियमों पर विचार करते हुए शपथ लिखिए।
उत्तर:
हम शपथ लेते हैं कि हम पेड़-पौधों, वनों, नदियों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करेंगे। हम अनावश्यक रूप से पेड़ नहीं काटेंगे और अधिक से अधिक पौधे लगाएंगे। हम प्लास्टिक का कम उपयोग करेंगे और जल-स्रोतों को गंदा नहीं करेंगे।
हम वन्यजीवों को नुकसान नहीं पहुँचाएँगे और पर्यावरण-संरक्षण से जुड़े नियमों का पालन करेंगे। हम समझते हैं कि प्रकृति की रक्षा करना देश की रक्षा करना है।
भाषा संगम
यह section भारतीय भाषाओं में “शस्य / उपज” शब्द को समझाता है।
1. ‘शस्य’ या ‘उपज’ शब्द के लिए अलग-अलग भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्द लिखिए।
उत्तर:
| भाषा | शब्द |
| हिंदी | उपज / पैदावार / फसल |
| संस्कृत | शस्यम् |
| पंजाबी | उपज / पैदावार |
| उर्दू | पैदावार |
| कश्मीरी | पॉदावार |
| सिंधी | उपज / पैदावार |
| मराठी | पीक |
| गुजराती | ऊपज / पेदाश |
| कोंकणी | पीक |
| नेपाली | उब्जाबाली / उपज |
| बांग्ला | फसल |
| असमिया | शस्य / खेति / फचल |
| मणिपुरी | महै मरोङ्थाबा पोत्थोक |
| ओड़िआ | फसल / खेति |
| तेलुगु | पंट |
| तमिल | विळैच्चल |
| मलयालम | विळव |
| कन्नड़ | बेळे / फसल |
2. “कनक-शस्य-कमलधरे” वाक्य को अपनी मातृभाषा में लिखिए।
उत्तर: विद्यार्थी अपनी मातृभाषा के अनुसार उत्तर लिख सकते हैं। उदाहरण के लिए अंग्रेजी में यह भाव इस प्रकार लिखा जा सकता है:
O land that holds golden crops and lotuses.
अतिरिक्त पठन: जय जय भारतमाता
यह section निराला देशप्रेम कविता को अन्य देशप्रेम कविताओं से जोड़ता है।
1. मैथिलीशरण गुप्त की “जय जय भारतमाता” और “भारति, जय, विजयकरे!” में क्या समानता दिखाई देती है?
उत्तर: दोनों कविताओं में भारतमाता की महिमा और देशप्रेम का भाव है।
निराला भारत को प्रकृति, गंगा, हिमालय और ओंकार की आध्यात्मिक चेतना से जोड़ते हैं। मैथिलीशरण गुप्त भारतमाता के वात्सल्य, हिमालय की ऊँचाई और जीवनदायी स्रोतों का वर्णन करते हैं। दोनों कविताएँ भारत को केवल भूमि नहीं, बल्कि जीवंत, पूजनीय और प्रेरणादायक रूप में देखती हैं।
2. देशप्रेम से संबंधित किसी अन्य कविता पर अपने विचार लिखिए।
उत्तर: “वर दे, वीणावादिनि वर दे!” निराला की प्रसिद्ध कविता है, जिसमें कवि ज्ञान, प्रकाश और नवजीवन की कामना करते हैं।
यह कविता सीधे देशप्रेम की घोषणा नहीं करती, लेकिन देश के भीतर जागृति, ज्ञान और सृजन की इच्छा रखती है। ऐसी कविताएँ हमें बताती हैं कि देशप्रेम केवल जय-घोष नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कृति और मानवता को आगे बढ़ाने का संकल्प भी है।
शब्द-संपदा
यह section Bharati Jai Vijay Kare summary और पाठ-समझ में आने वाले कठिन शब्दों के अर्थ समझाता है।
| शब्द | अर्थ |
| भारति / भारती | सरस्वती, वाणी, भारतमाता |
| कनक | सोना |
| शस्य | फसल, अन्न, धान्य |
| पदतल | पैरों के नीचे का भाग |
| शतदल | कमल |
| गर््जितोर्मि | गरजती तरंगों वाला |
| शुचि | पवित्र, स्वच्छ |
| युगल | जोड़ा |
| स्तव | स्तुति, प्रशंसा |
| तरु | पेड़ |
| तृण | घास |
| लता | बेल |
| वसन | वस्त्र |
| अंचल | वस्त्र का छोर, तट |
| खचित | जड़ा हुआ, अंकित |
| सुमन | फूल |
| ज्योतिर्जल | प्रकाश जैसा जल |
| धवल | सफेद, स्वच्छ |
| धार | धारा, प्रवाह |
| शुभ्र | सफेद, उज्ज्वल |
| हिम | बर्फ, हिमालय |
| तुषार | बर्फ के कण |
| प्रणव | ओंकार |
| ओंकार | ओम् ध्वनि |
| उदार | विशाल, दयालु |
| शतमुख | सौ मुखों वाला |
| शतरव | अनेक ध्वनियों वाला |
| मुखरे | ध्वनित, गूँजता हुआ |
Topics Covered in NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 10
Class 9 Hindi Ganga Chapter 10 में सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की कविता “भारति, जय, विजयकरे!” के सभी textbook exercise sections को cover किया गया है।
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- Class 9 Hindi Chapter 10 grammar answers
- सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
- निराला देशप्रेम कविता
- कविता का सौंदर्य
- समास और अलंकार
- Class 9 Hindi Ganga Chapter 10 writing task
Important Concepts in NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 10
इस chapter में concepts देशप्रेम, प्रकृति-सौंदर्य, सांस्कृतिक चेतना, समास और अलंकार से जुड़े हैं।
| Concept | Explanation | Exam Use |
| देशप्रेम | कवि भारत की विजय और गौरव की कामना करता है। | मुख्य भाव |
| भारत का मानवीकरण | भारतभूमि को देवी के रूप में चित्रित किया गया है। | कविता का सौंदर्य |
| प्रकृति-सौंदर्य | गंगा, हिमालय, सागर, वन और फसलें भारत की शोभा हैं। | भावार्थ |
| सांस्कृतिक विविधता | “शतमुख-शतरव” भारत की अनेक आवाज़ों का संकेत देता है। | विचारात्मक उत्तर |
| पर्यावरणीय चेतना | प्रकृति को भारत के वस्त्र, हार और मुकुट के रूप में देखा गया है। | लेखन कार्य |
| समास | कविता में संस्कृतनिष्ठ सामासिक पदों का प्रयोग है। | Grammar |
| अलंकार | अनुप्रास और रूपक से कविता का प्रभाव बढ़ता है। | साहित्यिक विशेषता |
Chapter-Wise NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga
| Chapter No. | Chapter-Wise NCERT Solutions |
| Chapter 1 | Do Bailon Ki Katha |
| Chapter 2 | Kya Likhoon |
| Chapter 3 | Samvadheen |
| Chapter 4 | Aisi Bhi Baatein Hoti Hain |
| Chapter 5 | Aakhiri Chattan Tak |
| Chapter 6 | Reedh Ki Haddi |
| Chapter 7 | Main Aur Mera Desh |
| Chapter 8 | Pad |
| Chapter 9 | Ram Lakshman Parashuram Samvad |
| Chapter 10 | Bharati Jay Vijay Kare |
| Chapter 11 | Jhansi Ki Rani |
| Chapter 12 | Ghar Ki Yaad |
FAQs (Frequently Asked Questions)
NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 10 सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की कविता “भारति, जय, विजयकरे!” पर आधारित हैं। इसमें भारतभूमि की विजय, प्रकृति-सौंदर्य और सांस्कृतिक गरिमा का वर्णन है।
Bharati Jai Vijay Kare Class 9 का मुख्य विषय भारतभूमि की महिमा और देशप्रेम है। कवि भारत को गंगा, हिमालय, सागर, वन, फसल और ओंकार की ध्वनि से सुसज्जित रूप में चित्रित करते हैं।
भारति जय विजयकरे MCQ में भारत की ज्ञान-प्रकृति-संपन्नता, “कनक-शस्य-कमलधरे” का भाव, समस्त विश्व में भारत का महत्व, संस्कृतनिष्ठ भाषा और पर्यावरणीय चेतना important topics हैं।
“कनक-शस्य-कमलधरे” का भाव है कि भारत सोने जैसी फसलों और कमल जैसी पवित्र सुंदरता से युक्त भूमि है। यह पंक्ति भारत की कृषि-संपन्नता और प्राकृतिक शोभा को व्यक्त करती है।
Class 9 Hindi Chapter 10 grammar answers में समास-विग्रह, सामासिक पद, अनुप्रास अलंकार, रूपक अलंकार, बहुभाषिकता, मातृभाषा में संवाद, भाषा संगम और शब्द-संपदा जैसे topics आते हैं।