NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 9

“राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद” तुलसीदास के रामचरितमानस के बालकांड से लिया गया अंश है, जिसमें शिव-धनुष भंग के बाद परशुराम के क्रोध और राम-लक्ष्मण की प्रतिक्रियाओं का चित्रण है।

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 9 में textbook MCQs, विचार-आधारित उत्तर, कल्पनात्मक प्रश्न, कविता का सौंदर्य, भाव-पहचान, अवधी शब्द, गद्य-रूप और writing tasks हल किए गए हैं।

जनक की सभा में शिव-धनुष टूट चुका है और परशुराम क्रोध से भरे हुए वहाँ पहुँचते हैं। इस एक ही स्थिति में अलग-अलग पात्रों के स्वभाव खुलते हैं—सभा भयभीत है, जनक मौन हैं, सीता चिंतित हैं, राम विनम्र हैं और लक्ष्मण व्यंग्यपूर्ण उत्तर देते हैं। तुलसीदास इस प्रसंग में संवाद, भाव, नाटकीयता और चरित्र-चित्रण का सुंदर मेल प्रस्तुत करते हैं। ये NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 9 students को राम लक्ष्मण परशुराम संवाद exercise answers, MCQs, काव्य-पंक्ति विश्लेषण, अवधी भाषा और grammar tasks revise करने में मदद करते हैं।

Key Takeaways

  • कवि: “राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद” गोस्वामी तुलसीदास के रामचरितमानस से लिया गया है।
  • मुख्य प्रसंग: सीता स्वयंवर में शिव-धनुष भंग होने के बाद परशुराम का क्रोधित होकर सभा में आना।
  • मुख्य भाव: क्रोध, भय, विनम्रता, व्यंग्य, मर्यादा, संयम और नाटकीय संवाद।
  • भाषा-कौशल: पाठ में MCQ, भाव-पहचान, कविता का सौंदर्य, अलंकार, अवधी शब्द, गद्य-रूप और रचनात्मक लेखन शामिल हैं।

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 9 Structure 2026

Section Text / Skill Area Main Question Type
अभ्यास मेरे उत्तर मेरे तर्क, मेरी समझ मेरे विचार MCQ, तर्क सहित उत्तर
कल्पना मेरी कल्पना मेरे अनुमान कल्पनात्मक और विश्लेषणात्मक उत्तर
काव्य-बोध कविता का सौंदर्य, भाव-पहचान, काव्य-पंक्ति और भाव संवाद, भाव, अलंकार
भाषा अवधी शब्द, लोक में भाषा, गद्य-रूप Grammar और vocabulary
गतिविधियाँ नाटक, परिचर्चा, पहेली, भाषा संगम Creative और oral tasks

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 9: राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

Ram Lakshman Parshuram Samvad NCERT Solutions में उत्तर पुस्तक के अभ्यास क्रम में दिए गए हैं। यह section विद्यार्थियों को Class 9 Hindi Ganga Chapter 9 Question Answer को textbook-based school-answer format में समझने में मदद करता है।

मेरे उत्तर मेरे तर्क

इस section में Class 9 Hindi Ganga Chapter 9 MCQ और राम लक्ष्मण परशुराम संवाद MCQ के उत्तर तर्क सहित दिए गए हैं।

1. “पितु समेत कहि कहि निज नामा। लगे करन सब दंड प्रनामा।।” यह पंक्ति सभा में उपस्थित लोगों की किस मनःस्थिति को दर्शाती है?

उत्तर: सही विकल्प है (ग) भय और शिष्टाचार

तर्क: परशुराम का भयानक और क्रोधित रूप देखकर सभा में उपस्थित राजा भयभीत हो जाते हैं। वे अपने पिता सहित अपना नाम बताते हुए दंडवत प्रणाम करने लगते हैं। इसमें सम्मान तो है, लेकिन उसका मूल कारण परशुराम के क्रोध से उत्पन्न भय भी है।

2. “जनक बहोरि आइ सिरु नावा। सीय बोलाइ प्रनामु करावा” पंक्ति से राजा जनक के व्यवहार की कौन-सी विशेषता उद्घाटित होती है?

उत्तर: सही विकल्प है (ख) शिष्टता

तर्क: राजा जनक परशुराम को सम्मान देते हैं और सीता को बुलाकर प्रणाम करवाते हैं। इस स्थिति में वे राजधर्म और शिष्टाचार निभाते हैं। इससे उनका सभ्य, मर्यादित और विनम्र व्यवहार सामने आता है।

3. “अति रिस बोले बचन कठोरा।” जनक के प्रति परशुराम के कठोर वचन बोलने का मूल कारण था—

उत्तर: सही विकल्प है (ग) शिव-धनुष का खंडित होना

तर्क: परशुराम शिव-धनुष को अत्यंत पूज्य मानते थे। जब वे उसे टूटा हुआ देखते हैं, तो वे क्रोध से भर जाते हैं। इसलिए वे जनक से कठोर वचन कहते हैं और धनुष तोड़ने वाले को सामने लाने की माँग करते हैं।

4. राम का कथन “होइहि केउ एक दास तुम्हारा” उनके व्यक्तित्व की किस विशेषता को दर्शाता है?

उत्तर: सही विकल्प है (ख) विनम्रता और मर्यादा

तर्क: राम जानते हैं कि शिव-धनुष उन्होंने तोड़ा है, फिर भी वे परशुराम से अत्यंत विनम्र स्वर में कहते हैं कि धनुष तोड़ने वाला आपका कोई दास ही होगा। यह उनकी मर्यादा, संयम और नम्रता को दर्शाता है।

5. “सुनि मुनि बचन लखन मुसुकाने। बोले परसुधरहि अपमाने।।” लक्ष्मण के मुस्कराने और उपहास भरे वचनों का क्या कारण था?

उत्तर: सही विकल्प है (घ) वे परशुराम को चुनौती देना चाहते थे।

तर्क: परशुराम के कठोर वचनों को सुनकर लक्ष्मण व्यंग्यपूर्ण ढंग से मुस्कराते हैं। वे परशुराम के क्रोध और धनुष के प्रति उनकी ममता पर कटाक्ष करते हैं। उनके उत्तर में चुनौती और उपहास दोनों हैं।

मेरी समझ मेरे विचार

यह section राम लक्ष्मण परशुराम संवाद question answer का मुख्य भाग है। इसमें कविता के भाव, पात्रों की प्रतिक्रियाएँ और राम-लक्ष्मण के स्वभाव से जुड़े उत्तर दिए गए हैं।

1. “अरध निमेष कलप सम बीता” पंक्ति का भाव स्पष्ट करते हुए बताइए कि कविता में यह किसके संदर्भ में कहा गया है और क्यों?

उत्तर: “अरध निमेष कलप सम बीता” का अर्थ है कि आधा पल भी कल्प के समान बहुत लंबा लगने लगा।

यह पंक्ति सीता के संदर्भ में कही गई है। परशुराम अत्यंत क्रोधित होकर सभा में आए हैं और शिव-धनुष तोड़ने वाले को दंड देने की बात कर रहे हैं। सीता को राम की चिंता है। भय और चिंता के कारण उन्हें थोड़ा-सा समय भी बहुत लंबा लग रहा है। इस पंक्ति से सीता की व्याकुलता और मानसिक तनाव व्यक्त होता है।

2. “सो बिलगाउ बिहाइ समाजा। न त मारे जैहहिं सब राजा।।” पंक्ति के आधार पर बताइए कि परशुराम द्वारा दी गई इस चेतावनी का सभा में उपस्थित राज-समाज पर क्या प्रभाव पड़ा होगा?

उत्तर: परशुराम की चेतावनी से सभा में उपस्थित राजाओं पर भय और तनाव का प्रभाव पड़ा होगा।

परशुराम ने कहा कि जिसने शिव-धनुष तोड़ा है, वह सभा से अलग हो जाए, नहीं तो सारे राजा मारे जाएँगे। उनके क्रोध, तेज और पराक्रम को देखकर राजा पहले से ही भयभीत थे। इस चेतावनी ने उनके मन में और अधिक डर पैदा किया होगा। वे सोच रहे होंगे कि यदि दोषी सामने नहीं आया, तो सबको दंड मिल सकता है। इससे सभा का वातावरण और अधिक गंभीर तथा भयपूर्ण हो गया होगा।

3. तुलसीदास ने राम और लक्ष्मण के माध्यम से एक ही परिस्थिति के प्रति दो अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ दिखाई हैं। आपकी दृष्टि में परशुराम के क्रोध को शांत करने के लिए राम का ‘विनय’ का मार्ग उचित है या लक्ष्मण के ‘तर्क’ का? कारण सहित लिखिए।

उत्तर: मेरी दृष्टि में परशुराम के क्रोध को शांत करने के लिए राम का विनय का मार्ग अधिक उचित है।

परशुराम उस समय अत्यंत क्रोधित हैं। ऐसे व्यक्ति के सामने व्यंग्य या चुनौती देने से क्रोध और बढ़ सकता है। लक्ष्मण के तर्क में साहस और बुद्धि है, लेकिन उनका स्वर परशुराम को और उत्तेजित करता है। इसके विपरीत राम शांत, विनम्र और मर्यादित भाषा में बात करते हैं। वे परशुराम का सम्मान करते हुए स्थिति को संभालते हैं। कठिन परिस्थिति में संयम, धैर्य और विनम्रता ही अधिक प्रभावी होती है।

4. “हृदयँ न हरषु बिषादु कछु बोले श्रीरघबीरु॥” श्री राम के हृदय में न हर्ष था, न विषाद। यह उनके व्यक्तित्व के किन गुणों को दर्शाता है?

उत्तर: यह पंक्ति श्रीराम के धैर्य, संतुलन, संयम और उदात्त चरित्र को दर्शाती है।

परशुराम के क्रोध से सभा भयभीत है, लेकिन राम न प्रसन्नता में बहते हैं, न दुख या भय में डूबते हैं। वे स्थिति को शांत भाव से देखते हैं। उनका यह भावनात्मक संतुलन उन्हें अन्य पात्रों से अलग बनाता है। लक्ष्मण उत्साह और व्यंग्य से प्रतिक्रिया देते हैं, पर राम मर्यादा और विनम्रता से। यही गुण उन्हें आदर्श पुरुष और कुशल नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित करते हैं।

मेरी कल्पना मेरे अनुमान

यह section राम लक्ष्मण परशुराम संवाद exercise answers में कल्पना और विश्लेषण को जोड़कर उत्तर लिखने में मदद करता है।

1. कल्पना कीजिए कि आप जनक की सभा में उपस्थित एक राजा हैं। परशुराम जी के आगमन से लेकर उनके गमन तक की कथा अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर: मैं जनक की सभा में उपस्थित एक राजा था। शिव-धनुष टूट चुका था और सभा में हलचल थी। तभी परशुराम जी क्रोध से भरे हुए वहाँ आए। उनका रूप भयानक था। सभा में बैठे सभी राजा भयभीत हो गए। हम सबने अपने-अपने नाम बताकर उन्हें दंडवत प्रणाम किया।

राजा जनक ने विनम्रता से उनका सम्मान किया और सीता से भी प्रणाम करवाया। जब परशुराम ने टूटा हुआ धनुष देखा, तो वे अत्यंत क्रोधित हो उठे। उन्होंने जनक से पूछा कि यह धनुष किसने तोड़ा। कोई भी उत्तर देने का साहस नहीं कर पाया। तब श्रीराम ने विनम्रता से कहा कि यह काम आपके किसी दास ने किया होगा। परशुराम और क्रोधित हुए। लक्ष्मण ने मुस्कराकर व्यंग्यपूर्ण उत्तर दिए। सभा में तनाव बढ़ गया, पर अंत में राम की विनम्रता और तेज से परशुराम का क्रोध शांत हुआ।

2. “अति डरु उतरु देत नृप नाहीं। कुटिल भूप हरषे मन माहीं॥” जनक द्वारा डर से चुप रहने पर अन्य राजा मन में प्रसन्न क्यों हुए होंगे?

उत्तर: जनक द्वारा चुप रहने पर अन्य राजा इसलिए प्रसन्न हुए होंगे क्योंकि वे स्वयं सीता स्वयंवर में असफल हो चुके थे।

शिव-धनुष कोई राजा नहीं तोड़ सका था। राम ने धनुष तोड़कर सीता का वरण करने की योग्यता प्राप्त कर ली थी। इससे अन्य राजाओं को ईर्ष्या हुई होगी। जब परशुराम क्रोध से जनक को डाँटते हैं और जनक मौन हो जाते हैं, तो कुटिल राजा मन ही मन प्रसन्न होते हैं। यह मनुष्य के व्यवहार की उस सच्चाई को दिखाता है कि ईर्ष्यालु लोग दूसरों की कठिनाई देखकर प्रसन्न हो जाते हैं।

कविता का सौंदर्य

यह section राम लक्ष्मण परशुराम संवाद कविता का सौंदर्य और संवाद-प्रस्तुति को समझने के लिए है। तुलसीदास ने इस प्रसंग में संवादों के माध्यम से चरित्र, भाव और नाटकीयता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है।

1. संवादों की विशेषताओं को दर्शाने वाली पंक्तियाँ कविता से लिखिए।

उत्तर:

संवादों की विशेषता उदाहरण
राम की विनम्रता “नाथ संभुधनु भंजनिहारा। होइहि केउ एक दास तुम्हारा॥”
परशुराम का रौद्र रूप “अति रिस बोले बचन कठोरा। कहु जड़ जनक धनुष कै तोरा॥”
लक्ष्मण का प्रत्युत्तर “बहु धनुहीं तोरीं लरिकाईं। कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं॥”
पौराणिक संदर्भ “सुनहु राम जेहिं सिवधनु तोरा। सहसबाहु सम सो रिपु मोरा॥”
नाटकीयता “सो बिलगाउ बिहाइ समाजा। न त मारे जैहहिं सब राजा॥”

भाव-पहचान एवं विश्लेषण

यह section कविता में पात्रों की मनःस्थिति और भावों को पहचानने के लिए है।

1. दिए गए भावों / मनःस्थितियों को दर्शाने वाली पंक्तियाँ लिखिए और उनका कारण बताइए।

उत्तर:

भाव / मनःस्थिति संबंधित पंक्ति संबंधित पात्र मनःस्थिति का कारण
चिंता “बिधि अब सँवरी बात बिगारी” सीता की माता सुनयना उन्हें सीता के विवाह और भविष्य की चिंता है।
क्रोध “अति रिस बोले बचन कठोरा” परशुराम शिव-धनुष टूटने से वे क्रोधित हैं।
व्यग्रता “अरध निमेष कलप सम बीता” सीता परशुराम के क्रोध से राम के लिए चिंता हो रही है।
भय “उठे सकल भय बिकल भुआला” सभा के राजा परशुराम का भयानक रूप देखकर वे डर गए।
संयम / विनम्रता “होइहि केउ एक दास तुम्हारा” श्रीराम वे क्रोधित परशुराम को शांत भाव से उत्तर देते हैं।
ईर्ष्या / कुटिलता “कुटिल भूप हरषे मन माहीं” अन्य राजा राम की सफलता से ईर्ष्या के कारण वे जनक की कठिनाई देखकर प्रसन्न हैं।

2. “अति डरु उतरु देत नृप नाहीं।” परशुराम के पूछने पर जनक का मौन भयजनित है या विवेकपूर्ण निर्णय? विश्लेषण कीजिए।

उत्तर: यह पंक्ति उस समय की है जब परशुराम शिव-धनुष टूटने पर अत्यंत क्रोधित होकर जनक से पूछते हैं कि धनुष किसने तोड़ा। उनके क्रोध और तेज को देखकर राजा जनक उत्तर नहीं दे पाते।

जनक का मौन केवल भयजनित नहीं, बल्कि विवेकपूर्ण भी कहा जा सकता है। वे जानते हैं कि परशुराम अत्यंत क्रोध में हैं। यदि वे तुरंत राम का नाम ले देते, तो परशुराम का क्रोध राम की ओर मुड़ सकता था। इसलिए उनका मौन स्थिति को बिगड़ने से रोकने का प्रयास भी हो सकता है। इस मौन में भय और सावधानी दोनों हैं। इससे स्पष्ट होता है कि कठिन स्थिति में चुप रहना कभी-कभी विवेक का संकेत भी हो सकता है।

काव्य-पंक्ति और भाव

यह section तुलसीदास रामचरितमानस में भाव-अभिनय और पात्रों की प्रस्तुति को समझने के लिए है।

1. “रे नृप बालक काल बस बोलत तोहि न सँभार। धनुही सम तिपुरारि धनु बिदित सकल संसार॥” यदि आप इन पंक्तियों को मंच पर बोलते, तो चेहरे पर कौन-सा भाव होता?

उत्तर: यदि मैं इन पंक्तियों को मंच पर बोलता, तो मेरे चेहरे पर क्रोध, रोष और चेतावनी का भाव होता।

ये पंक्तियाँ परशुराम की ओर से कही गई हैं। वे लक्ष्मण को बालक कहकर डाँट रहे हैं और कह रहे हैं कि शिव-धनुष को साधारण धनुष मत समझो। इसलिए चेहरे पर तेज, आँखों में क्रोध और आवाज में कठोरता होनी चाहिए।

2. इस कविता में पात्रों को आप कौन-कौन से भावों द्वारा प्रदर्शित करेंगे?

उत्तर:

पात्र प्रमुख भाव
परशुराम क्रोध, तेज, रोष और गर्व
राजा जनक भय, शिष्टता, चिंता और विवेक
लक्ष्मण साहस, व्यंग्य, तर्क और चुनौती
राम विनम्रता, धैर्य, मर्यादा और संयम
सभा में उपस्थित अन्य राजा भय, ईर्ष्या और कुटिल प्रसन्नता
सीता चिंता, आशंका, प्रेम और व्याकुलता
सुनयना मातृ-चिंता और भय

3. सभा में परशुराम के प्रति राम के व्यवहार से विनम्रता, मर्यादा और धीरता का पता चलता है। आपको किन परिस्थितियों में इन विशेषताओं का परिचय देना पड़ता है?

उत्तर: हमें कई परिस्थितियों में विनम्रता, मर्यादा और धीरता का परिचय देना पड़ता है।

यदि कोई बड़ा व्यक्ति क्रोध में डाँट दे, तो हमें तुरंत उल्टा उत्तर नहीं देना चाहिए। स्कूल में शिक्षक की बात सुनते समय, घर में माता-पिता के सामने, मित्रों से विवाद होने पर या किसी कठिन स्थिति में शांत रहना जरूरी होता है। विनम्रता कमजोरी नहीं, बल्कि आत्मसंयम का संकेत है। इससे समस्या बिगड़ने के बजाय सुलझ सकती है।

4. स्वयंवर विधि द्वारा विवाह की किसी पौराणिक या ऐतिहासिक घटना का वर्णन कीजिए।

उत्तर: स्वयंवर विधि का प्रसिद्ध उदाहरण द्रौपदी स्वयंवर है।

द्रुपद राजा ने द्रौपदी के स्वयंवर में एक कठिन धनुर्विद्या परीक्षा रखी थी। ऊपर घूमती हुई मछली की आँख को नीचे रखे जल में देखकर भेदना था। अनेक राजाओं ने प्रयास किया, पर सफल नहीं हुए। अर्जुन ने ब्राह्मण वेश में यह लक्ष्य भेदा और द्रौपदी ने उन्हें वर के रूप में स्वीकार किया। इस प्रसंग से पता चलता है कि प्राचीन समय में स्वयंवर में वर-चयन के लिए कौशल, वीरता और योग्यता की परीक्षा होती थी।

5. परशुराम के क्रोध को देखकर सीता और उनकी माता सुनयना के बीच चल रहा मौन संवाद लिखिए।

उत्तर:

सुनयना का मन: हे विधाता! अभी तो सीता का विवाह राम से निश्चित हुआ था। अब यह कैसी विपत्ति आ गई? परशुराम का क्रोध कहीं सब बिगाड़ न दे।

सीता का मन: माता! मेरा मन भय से काँप रहा है, पर मुझे राम पर विश्वास है। वे शांत और विनम्र हैं। वे इस स्थिति को संभाल लेंगे।

सुनयना का मन: पुत्री, परशुराम का क्रोध बहुत भयानक है। सभा का कोई भी राजा उत्तर नहीं दे पा रहा।

सीता का मन: माँ, राम का धैर्य और मर्यादा ही हमारी आशा है। मैं प्रभु से प्रार्थना करती हूँ कि सब मंगल हो।

6. सीता के दृष्टिकोण से पूरी घटना का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर: सीता के दृष्टिकोण से यह घटना अत्यंत चिंता और आशंका से भरी थी।

श्रीराम ने शिव-धनुष तोड़कर स्वयंवर की शर्त पूरी कर दी थी। इससे सीता के मन में आनंद था। लेकिन तभी परशुराम क्रोध से भरे हुए सभा में आए। उनका रोष देखकर सीता को लगा कि बनी-बनाई बात बिगड़ सकती है। लक्ष्मण के व्यंग्यपूर्ण उत्तर से उन्हें चिंता भी हुई होगी, क्योंकि इससे परशुराम और क्रोधित हो सकते थे। दूसरी ओर, राम की विनम्रता देखकर सीता को संतोष और विश्वास भी रहा होगा। इस घटना में सीता के मन में भय, गर्व, हँसी, शंका और आशा— सभी भाव साथ-साथ रहे होंगे।

7. यदि आपको अपना परिचय देना हो, तो आप किस प्रकार देंगे?

उत्तर: मेरा नाम अनिरुद्ध है। मैं कक्षा 9 का विद्यार्थी हूँ। मुझे पढ़ना, लिखना और नई बातें सीखना पसंद है। मैं अपने कार्य समय पर पूरा करने की कोशिश करता हूँ। मुझे हिंदी और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों में रुचि है। मैं अपने परिवार, शिक्षकों और मित्रों का सम्मान करता हूँ। मेरा विश्वास है कि मेहनत, विनम्रता और ईमानदारी से व्यक्ति जीवन में आगे बढ़ सकता है।

व्याकरण की बात

यह section Class 9 Hindi Chapter 9 grammar answers में अलंकार, अवधी शब्द, लोकोक्तियाँ और गद्य-रूप को समझाता है।

1. कविता की विशेषताओं के उदाहरण लिखिए।

उत्तर:

विशेषता अर्थ उदाहरण
अनुप्रास अलंकार एक ही वर्ण की बार-बार आवृत्ति “अरि करनी करि करिअ लराई”
अतिशयोक्ति अलंकार बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहना “अरध निमेष कलप सम बीता”
रूपक अलंकार उपमेय में उपमान का आरोप “पद सरोज मेले दोउ भाई”
दोहा-चौपाई क्रम रामचरितमानस की विशिष्ट रचना-शैली चौपाइयों के बाद दोहा
संवादात्मकता पात्रों के कथनों से कथा आगे बढ़ना राम, परशुराम और लक्ष्मण के संवाद

बहुभाषिकता

यह section अवधी भाषा और उसके खड़ी बोली रूप को समझने में मदद करता है।

1. कविता में आए अवधी शब्दों के खड़ी बोली रूप लिखिए।

उत्तर:

अवधी शब्द खड़ी बोली का शब्द मेरी भाषा में शब्द
कोही क्रोधी गुस्सैल
बेषु वेष रूप / रूप-रंग
भुआला राजा राजा
चितवहिं देखते हैं देखना
बहोरि फिर फिर
असीस आशीर्वाद blessing
ढोटा पुत्र / बालक बेटा
लोचन आँखें eyes
रिस क्रोध गुस्सा
बेगि जल्दी quickly
महि पृथ्वी धरती
त्रास भय डर
भंजनिहारा तोड़ने वाला breaker
आयसु आज्ञा order
लरिकाई बचपन childhood

लोक में भाषा

यह section लोकोक्तियों और स्वतंत्र वाक्य-प्रयोग के लिए है।

1. दिए गए शब्दों से संबंधित लोकोक्तियाँ और उनके अर्थ लिखिए।

उत्तर:

शब्द लोकोक्ति अर्थ वाक्य
मन मन के जीते जीत है, मन के हारे हार सफलता मनोबल पर निर्भर है कठिन परीक्षा में मन के जीते जीत है, मन के हारे हार वाली बात सही लगी।
राम राम नाम सत्य है जीवन नश्वर है मृत्यु-यात्रा में लोग राम नाम सत्य है कहते हैं।
राजा जैसा राजा वैसी प्रजा नेतृत्व का प्रभाव समाज पर पड़ता है विद्यालय में अच्छा मॉनिटर हो तो अनुशासन अच्छा रहता है, जैसा राजा वैसी प्रजा।
बात बात का बतंगड़ बनाना छोटी बात को बड़ा बना देना छोटी गलती पर बात का बतंगड़ मत बनाओ।
सिर सिर मुंडाते ही ओले पड़ना काम शुरू होते ही कठिनाई आना दुकान खोली ही थी कि बारिश से नुकसान हो गया, सिर मुंडाते ही ओले पड़ गए।

गद्य-रूप

यह section चौपाई को सरल गद्य में बदलने का अभ्यास कराता है।

1. दी गई चौपाई को गद्य-रूप में लिखिए।

चौपाई:
“अति डरु उतरु देत नृपु नाहीं। कुटिल भूप हरषे मन माहीं॥
सुर मुनि नाग नगर नर नारी। सोचहिं सकल त्रास उर भारी॥”

उत्तर: परशुराम के क्रोध को देखकर राजा जनक अत्यंत डर गए और कोई उत्तर नहीं दे सके। यह देखकर कुटिल राजा मन ही मन प्रसन्न हुए। देवता, मुनि, नाग, नगर के पुरुष और स्त्रियाँ— सभी भय और चिंता से भर गए। सबको लगा कि अब यह स्थिति और अधिक कठिन हो सकती है।

2. तालिका में दिए गए कथनों को सही पात्रों से मिलाइए।

उत्तर:

कथन पात्र
शिव के धनुष को तोड़ने वाला आपका कोई दास ही हो सकता है। राम
विधाता ने बनी-बनाई बात बिगाड़ दी। सीता की माता सुनयना
सेवक वह होता है जो सेवा का काम करे। परशुराम
इस कारण ये सब राजा आए हैं। जनक
बचपन में हमने ऐसी बहुत-सी धनुहियाँ तोड़ डाली हैं। लक्ष्मण
क्या आज्ञा है, मुझसे क्यों नहीं कहते? राम
कहो जनक, किस कारण यह भीड़ है? परशुराम
इसी धनुष पर इतनी ममता क्यों! लक्ष्मण

3. कविता को दृश्य-नाटक के रूप में प्रस्तुत करने के लिए क्या-क्या तैयारी की जा सकती है?

उत्तर: इस कविता को दृश्य-नाटक के रूप में प्रस्तुत करने के लिए मंच पर जनक की सभा बनाई जा सकती है।

राम, लक्ष्मण, परशुराम, जनक, सीता, विश्वामित्र और राजाओं के पात्र तय किए जाएँ। परशुराम के प्रवेश पर गंभीर संगीत और तेज ध्वनि का प्रयोग किया जा सकता है। उनके लिए फरसा, जटा और तपस्वी वेश रखा जा सकता है। राम का स्वर शांत और विनम्र हो, लक्ष्मण का स्वर व्यंग्यपूर्ण और तेज हो। सीता और सुनयना के भाव चिंता और आशंका से भरे हों। इस प्रकार ध्वनि, भाव, संगीत और वेशभूषा से प्रसंग जीवंत बन सकता है।

4. “कठिन परिस्थितियों में भी सत्य कहने का साहस करना आवश्यक है” विषय पर अपने विचार लिखिए।

उत्तर: कठिन परिस्थितियों में सत्य कहना सरल नहीं होता, लेकिन यह आवश्यक है।

यदि व्यक्ति डरकर झूठ बोलता है, तो समस्या और बढ़ सकती है। सत्य बोलने से कभी-कभी विरोध या कठिनाई आती है, लेकिन अंत में विश्वास और सम्मान बढ़ता है। लक्ष्मण परशुराम के सामने निर्भीक होकर अपनी बात रखते हैं। हालांकि उनकी शैली व्यंग्यपूर्ण है, फिर भी उनमें साहस है। सत्य कहने के साथ संयम और मर्यादा भी आवश्यक है।

मेरी पहेली

यह section Class 9 Hindi Ganga Chapter 9 writing task में रचनात्मक भाषा-प्रयोग का अभ्यास कराता है।

1. दिए गए शब्दों के लिए पहेलियाँ बनाइए।

उत्तर:

उत्तर पहेली
समाचार मैं बातों को दूर-दूर पहुँचाता, दुनिया की खबर तुम्हें बताता।
धनुष मैं तना रहूँ तो बाण चलाऊँ, वीरों के हाथों शौर्य दिखाऊँ।
मन दिखता नहीं, पर सोचता बहुत; जीत-हार का रहस्य हूँ मैं।
नाग फन फैलाऊँ, सरसर चलूँ; लोग मुझे देखकर दूर हटें।
नगर घर, गली, बाजार जहाँ; लोगों से भरा मेरा संसार वहाँ।

भाषा संगम

यह section भारतीय भाषाओं में “धनुष” शब्द को समझाता है।

1. ‘धनुष’ शब्द के लिए अलग-अलग भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्द लिखिए।

उत्तर:

भाषा शब्द
हिंदी कमान / धनुष
संस्कृत धनुः / चापम्
पंजाबी धणुख
उर्दू कमान / क़ौस
कश्मीरी कमान
सिंधी धनुष / कमान
मराठी धनुष्य
गुजराती ધનુષ / कामठुं
कोंकणी धनुश
नेपाली धनु
बांग्ला धनुक
असमिया धनु
मणिपुरी लिरुऱ
ओड़िआ धनुष / धनु
तेलुगु धनुस्सु / विल्‍लु
तमिल विल
मलयालम धनुस्सु / विल्लु
कन्नड़ बिल्लु / धनुष

2. “अति रिस बोले बचन कठोरा। कहु जड़ जनक धनुष कै तोरा॥” वाक्य को अपनी मातृभाषा में लिखिए।

उत्तर: विद्यार्थी अपनी मातृभाषा के अनुसार उत्तर लिख सकते हैं। उदाहरण के लिए अंग्रेजी में यह वाक्य होगा:

In great anger, he spoke harsh words and asked, “Tell me, foolish Janak, who broke the bow?”

अतिरिक्त पठन: तुलसीदास और रामचरितमानस

यह section तुलसीदास रामचरितमानस और बालकांड प्रसंग को समझने में मदद करता है।

1. तुलसीदास की भाषा और काव्य-विशेषताओं पर संक्षेप में लिखिए।

उत्तर: तुलसीदास संस्कृत, अवधी और ब्रजभाषा के श्रेष्ठ ज्ञाता थे।

उन्होंने रामचरितमानस की रचना अवधी में की। उनकी भाषा सरल, भावपूर्ण, लोकधर्मी और काव्यात्मक है। वे संवाद, चरित्र-चित्रण, नाटकीयता, अलंकार और गेयता का सुंदर प्रयोग करते हैं। रामचरितमानस में राम को मर्यादा, नीति, त्याग, शील और आदर्श का प्रतीक बनाया गया है।

2. राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद में राम का चरित्र कैसा दिखाई देता है?

उत्तर: इस संवाद में राम का चरित्र शांत, विनम्र, धैर्यवान और मर्यादित दिखाई देता है।

सभा भयभीत है, पर राम संतुलित हैं। वे परशुराम के क्रोध का उत्तर नम्रता से देते हैं। उनके भीतर न हर्ष है, न विषाद। वे स्थिति को बिगड़ने नहीं देते। यही गुण उन्हें आदर्श और उदात्त व्यक्तित्व बनाते हैं।

शब्द-संपदा

यह section Ram Lakshman Parshuram Samvad summary और पाठ-समझ में आने वाले कठिन शब्दों के अर्थ समझाता है।

शब्द अर्थ
भृगुपति भृगुकुल के स्वामी, परशुराम
कराला भयानक, डरावना
भुआला राजा
सुभायँ स्वभाव, सहज प्रकृति
चितवहिं देखते हैं
खुटानी समाप्त होना
बहोरि फिर
आसिष / असीस आशीर्वाद
ढोटा पुत्र, बेटा
जोटा जोड़ी
लोचन आँख
अनत अन्यत्र
चापखंड धनुष का टुकड़ा
रिस क्रोध
बेगि शीघ्र
महि पृथ्वी
त्रास भय
बिधि विधाता
अरध निमेष आधा पल
कलप कल्प, बहुत लंबा समय
भंजनिहारा तोड़ने वाला
आयसु आज्ञा
कोही क्रोधी
बिलगाउ अलग होना
परसुधर परशुराम
लरिकाईं बचपन में
भृगुकुलकेतू भृगुकुल के दीपक, परशुराम

Topics Covered in NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 9

Class 9 Hindi Ganga Chapter 9 में तुलसीदास के रामचरितमानस से लिए गए “राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद” के सभी textbook exercise sections को cover किया गया है।

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  • बालकांड राम लक्ष्मण परशुराम संवाद
  • कविता का सौंदर्य
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Important Concepts in NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 9

इस chapter में concepts संवाद, चरित्र-चित्रण, भाव-पहचान, अलंकार और अवधी भाषा से जुड़े हैं।

Concept Explanation Exam Use
संवाद-प्रस्तुति राम, लक्ष्मण और परशुराम के संवाद से कथा आगे बढ़ती है। कविता का सौंदर्य
राम की विनम्रता क्रोध के सामने भी राम शांत और मर्यादित रहते हैं। चरित्र-विश्लेषण
लक्ष्मण का व्यंग्य लक्ष्मण परशुराम को तर्क और उपहास से उत्तर देते हैं। विचारात्मक उत्तर
परशुराम का रौद्र भाव शिव-धनुष टूटने से उनका क्रोध प्रकट होता है। MCQ और भाव-पहचान
नाटकीयता भय, क्रोध, व्यंग्य और विनम्रता से दृश्य जीवंत बनता है। काव्य-सौंदर्य
अवधी भाषा कविता में अवधी शब्दों और दोहा-चौपाई शैली का प्रयोग है। Grammar
अलंकार अनुप्रास, अतिशयोक्ति और रूपक अलंकार मिलते हैं। साहित्यिक विशेषता

Chapter-Wise NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga

Chapter No. Chapter-Wise NCERT Solutions
Chapter 1 Do Bailon Ki Katha
Chapter 2 Kya Likhoon
Chapter 3 Samvadheen
Chapter 4 Aisi Bhi Baatein Hoti Hain
Chapter 5 Aakhiri Chattan Tak
Chapter 6 Reedh Ki Haddi
Chapter 7 Main Aur Mera Desh
Chapter 8 Pad
Chapter 9 Ram Lakshman Parashuram Samvad
Chapter 10 Bharati Jay Vijay Kare
Chapter 11 Jhansi Ki Rani
Chapter 12 Ghar Ki Yaad

FAQs (Frequently Asked Questions)

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Ganga Chapter 9 तुलसीदास के रामचरितमानस के बालकांड से लिए गए “राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद” पर आधारित हैं। इसमें शिव-धनुष भंग के बाद परशुराम, राम और लक्ष्मण के संवाद आते हैं।

Ram Lakshman Parshuram Samvad Class 9 का मुख्य विषय परशुराम के क्रोध, राम की विनम्रता और लक्ष्मण के व्यंग्यपूर्ण प्रत्युत्तर के माध्यम से मर्यादा, साहस और संवाद-कौशल को दिखाना है।

राम लक्ष्मण परशुराम संवाद MCQ में सभा का भय, जनक की शिष्टता, परशुराम का क्रोध, राम की विनम्रता और लक्ष्मण के उपहासपूर्ण उत्तर जैसे topics important हैं।

“अरध निमेष कलप सम बीता” का भाव है कि चिंता और भय के कारण आधा पल भी बहुत लंबा लगने लगा। यह पंक्ति सीता की व्याकुल मनःस्थिति को दिखाती है।

Class 9 Hindi Chapter 9 grammar answers में अनुप्रास, अतिशयोक्ति, रूपक अलंकार, अवधी शब्द, खड़ी बोली रूप, लोकोक्तियाँ, गद्य-रूप, भाषा संगम और शब्द-संपदा जैसे topics आते हैं।