NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 1
“सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम्” पाठ में संस्कृत भाषा को भारतीय एकता, ज्ञान, शांति, संस्कार, विश्वबंधुत्व और संस्कृति की वाहक भाषा के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 1 में एकपदेन उत्तरम्, पूर्णवाक्येन उत्तरम्, रिक्तस्थानपूर्ति, वाक्य-रचना, समस्तपद-विग्रह, पर्यायपद, मेलनम् और भाषण-लेखन जैसे अभ्यास हल किए गए हैं।
संस्कृत को केवल एक प्राचीन भाषा मानना इस पाठ की दृष्टि से पर्याप्त नहीं है। “सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम्” में कवि वासुदेव-शास्त्री-द्विवेदी संस्कृत को भारतीयता, सद्गुण, ज्ञान-विज्ञान, त्याग, सेवा, शांति और विश्वकल्याण से जोड़ते हैं। कविता में बार-बार “संस्कृतम्” शब्द का प्रयोग भाषा के गौरव और उपयोगिता को रेखांकित करता है। ये NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 1 students को श्लोकों के अर्थ, textbook exercises, समस्तपद-विग्रह, पर्यायपद और संस्कृत वाक्य-रचना को सरल school-answer format में revise करने में मदद करते हैं।
Key Takeaways
- पाठ का नाम: सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम्
- कवि: पण्डित वासुदेव-शास्त्री-द्विवेदी
- मुख्य विषय: संस्कृत भाषा का महत्व, भारतीय एकता, ज्ञान, संस्कार और विश्वबंधुत्व
- मुख्य अभ्यास: एकपदेन उत्तरम्, पूर्णवाक्येन उत्तरम्, रिक्तस्थानपूर्ति, वाक्य-रचना, समस्तपद-विग्रह और मेलनम्
NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 1 Structure 2026
| Section | Text / Skill Area | Main Question Type |
| अभ्यासाद् जायते सिद्धिः | textbook exercises | एकपदेन, पूर्णवाक्येन, रिक्तस्थानपूर्ति |
| व्याकरण | समस्तपद, पर्यायपद, मेलनम् | Grammar और शब्द-ज्ञान |
| गतिविधियाँ | गीतगान, भाषण, चर्चा | Oral और creative tasks |
| स्वाध्याय | पञ्चशील, विश्वबंधुत्व, संस्कृत-भाषण | Value-based learning |
| शब्द-संपदा | संस्कृत-हिंदी-English meanings | Vocabulary building |
NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 1: सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम्
इस section में “सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम्” के उत्तर पुस्तक के अभ्यास-क्रम के अनुसार दिए गए हैं। यह विद्यार्थियों को Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 1 Question Answer को textbook-based format में समझने में मदद करता है।
अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
1. गीतगान-अभ्यासः
(क) छात्राः मिलित्वा पञ्चानां छात्राणां लघुसमूहान् निर्माय यति-गति-लयपूर्वकं गीतगानस्य अभ्यासं करिष्यन्ति।
उत्तर: यह गतिविधि कक्षा में समूह बनाकर की जानी चाहिए।
विद्यार्थी पाँच-पाँच के समूह बनाकर “सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम्” गीत का अभ्यास करेंगे। पाठ करते समय उच्चारण, यति, गति, लय और भाव पर ध्यान देना चाहिए। प्रत्येक समूह एक-एक श्लोक का गायन कर सकता है। इससे संस्कृत उच्चारण, छंद-लय और पाठ की भावपूर्ण प्रस्तुति का अभ्यास होगा।
2. एकपदेन उत्तरं लिखत
यह अभ्यास विद्यार्थियों को पाठ से सीधे एकपदेन उत्तर लिखने की तैयारी कराता है।
उदाहरण: ज्ञानपुञ्जप्रभादर्शकं किम्?
उत्तर: संस्कृतम्।
(क) संस्कृतं कस्याः साधकम्?
उत्तर: भारतीयैकतायाः।
(ख) सर्वदा संस्कृतं कस्य सन्दोहदम्?
उत्तर: आनन्दस्य।
(ग) संस्कृतं कस्य प्रेरणादायकम्?
उत्तर: सत्पथस्य।
(घ) संस्कृतं कासां परिष्कारकम्?
उत्तर: वाणीनाम्।
(ङ) कस्य विस्तारकं संस्कृतम्?
उत्तर: विश्वबन्धुत्वस्य।
3. अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि पूर्णवाक्येन लिखत
इस भाग में विद्यार्थियों को संस्कृत में पूर्ण वाक्य बनाकर उत्तर लिखने का अभ्यास मिलता है।
(क) सर्वतः कस्याः संस्थापकं संस्कृतम्?
उत्तर: संस्कृतं सर्वतः शान्तेः संस्थापकम्।
हिंदी अर्थ: संस्कृत हर ओर शांति की स्थापना करने वाली भाषा है।
(ख) कीदृशं व्रतं संस्कृतम्?
उत्तर: संस्कृतं त्यागसन्तोषसेवाव्रतम्।
हिंदी अर्थ: संस्कृत त्याग, संतोष और सेवा का व्रत है।
(ग) कयोः सम्मेलनं संस्कृतम्?
उत्तर: संस्कृतं ज्ञानविज्ञानयोः सम्मेलनम्।
हिंदी अर्थ: संस्कृत ज्ञान और विज्ञान का संगम है।
(घ) संस्कृतं कस्य चमत्कारकम्?
उत्तर: संस्कृतं विश्वचेतसः चमत्कारकम्।
हिंदी अर्थ: संस्कृत समस्त विश्व के मन को चमत्कृत करने वाली है।
(ङ) केषां यशः स्मारकं संस्कृतम्?
उत्तर: संस्कृतं पूर्वजानां यशः स्मारकम्।
हिंदी अर्थ: संस्कृत हमारे पूर्वजों के यश की स्मृति को सुरक्षित रखने वाली भाषा है।
4. रिक्तस्थानानि पूरयन्तु
इस अभ्यास में श्लोक-पंक्तियों की समझ, शब्द-स्मरण और पाठ-आधारित रिक्तस्थानपूर्ति शामिल है।
उदाहरण: सर्वभूतैकता-कारकं संस्कृतम्।
उत्तर: सर्वभूतैकता।
(क) __________ सम्पादकं संस्कृतम्।
उत्तर: भारतीयत्वसम्पादकं संस्कृतम्।
(ख) __________ दर्शकं संस्कृतम्।
उत्तर: ज्ञानपुञ्जप्रभादर्शकं संस्कृतम्।
(ग) __________ संस्कारकं संस्कृतम्।
उत्तर: सर्वमस्तिष्कसंस्कारकं संस्कृतम्।
(घ) कर्मदं __________ भक्तिदं संस्कृतम्।
उत्तर: कर्मदं ज्ञानदं भक्तिदं संस्कृतम्।
(ङ) सत्यनिष्ठं __________ संस्कृतम्।
उत्तर: सत्यनिष्ठं शिवं सुन्दरं संस्कृतम्।
(च) शब्दलालित्य __________ संस्कृतम्।
उत्तर: शब्दलालित्यलीलावनं संस्कृतम्।
5. मञ्जूषायाः पदानि उपयुज्य षड् वाक्यानि रचयत
मञ्जूषा: वाणीपरिष्कारिका, एकता, सर्वतः, सेवा, सुन्दरम्, पूर्वजानाम्, सत्पथे प्रेरयितुम्, विश्वकल्याणाय, त्यागस्य, सन्तोषस्य, विश्वबन्धुत्वविस्तारकम्
उदाहरण: वाणीपरिष्कारिका संस्कृत-भाषा भवति।
उत्तर: वाणीपरिष्कारिका संस्कृत-भाषा भवति।
(क) एकता
उत्तर: संस्कृतं भारतीयानाम् एकतां साधयति।
(ख) सर्वतः
उत्तर: संस्कृतं सर्वतः शान्तिं स्थापयति।
(ग) सेवा
उत्तर: संस्कृतं सेवायाः महत्त्वं बोधयति।
(घ) सुन्दरम्
उत्तर: संस्कृतं सत्यं शिवं सुन्दरं च अस्ति।
(ङ) पूर्वजानाम्
उत्तर: संस्कृतं पूर्वजानां यशः स्मारकम्।
(च) विश्वकल्याणाय
उत्तर: संस्कृतं विश्वकल्याणाय प्रेरयति।
6. अधोलिखितानां समस्तपदानाम् उदाहरणानुसारं विग्रहं कुरुत
यह section समस्तपद-विग्रह और Sanskrit grammar practice के लिए उपयोगी है।
उदाहरण: भारतीयैकतासाधकम्
उत्तर: भारतीयैकतायाः साधकम्।
(क) ज्ञानपुञ्जप्रभादर्शकम्
उत्तर: ज्ञानपुञ्जप्रभायाः दर्शकम्।
(ख) सर्ववाणीपरिष्कारकम्
उत्तर: सर्वासां वाणीनां परिष्कारकम्।
(ग) विश्वबन्धुत्वविस्तारकम्
उत्तर: विश्वबन्धुत्वस्य विस्तारकम्।
(घ) सर्वभूतैकताकारकम्
उत्तर: सर्वेषां भूतानाम् एकतायाः कारकम्।
(ङ) शान्तिसंस्थापकम्
उत्तर: शान्तेः संस्थापकम्।
(च) ज्ञानविज्ञानसम्मेलनम्
उत्तर: ज्ञानस्य विज्ञानस्य च सम्मेलनम्।
7. प्रदत्तमञ्जूषातः पर्यायपदानि चित्वा रिक्तस्थाने लिखत
मञ्जूषा: उल्लासः, किरणः, जगत्, अनुपमा, तेजोराशयः, मानम्
(क) विद्वांसः __________ भवन्ति।
उत्तर: तेजोराशयः।
वाक्य: विद्वांसः तेजोराशयः भवन्ति।
(ख) सूर्यस्य __________ सर्वेषां प्राणिनां कृते हितकरः भवति।
उत्तर: किरणः।
वाक्य: सूर्यस्य किरणः सर्वेषां प्राणिनां कृते हितकरः भवति।
(ग) ईश्वरं स्मृत्वा __________ उपजायते।
उत्तर: उल्लासः।
वाक्य: ईश्वरं स्मृत्वा उल्लासः उपजायते।
(घ) विद्यायाः __________ अजरं भवति।
उत्तर: मानम्।
वाक्य: विद्यायाः मानम् अजरं भवति।
(ङ) प्रकृतेः शोभा __________ विद्यते।
उत्तर: अनुपमा।
वाक्य: प्रकृतेः शोभा अनुपमा विद्यते।
(च) यत्र __________ एकनीडं भवति।
उत्तर: जगत्।
वाक्य: यत्र जगत् एकनीडं भवति।
8. अधोलिखितानां मेलनं कुरुत
यह section “सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम्” exercise answers में पद-मिलान का अभ्यास कराता है।
| स्तम्भः अ | स्तम्भः ब |
| (क) भारतीयैकतायाः | साधकम् |
| (ख) सत्पथे | प्रेरणादायकम् |
| (ग) त्यागसन्तोषसेवारूपम् | व्रतम् |
| (घ) ज्ञानपुञ्जप्रभायाः | दर्शकम् |
| (ङ) विश्वबन्धुत्वस्य | विस्तारकम् |
स्वाध्यायान्मा प्रमदः
पञ्चशीलं किम्?
यह section पाठ में दिए गए अतिरिक्त ज्ञान से जुड़ा है।
(क) पञ्चशीलानि कानि सन्ति?
उत्तर: बौद्धधर्मे सदाचरणस्य पालनाय पञ्च शीलानि सन्ति। तानि मनुष्याणाम् अत्यन्तं लाभाय भवन्ति।
पञ्चशीलानि सन्ति—
| क्रम | पञ्चशीलम् | अर्थ |
| 1 | अस्तेयम् | चोरी न करना |
| 2 | अहिंसा | हिंसा न करना |
| 3 | ब्रह्मचर्यम् | संयमित जीवन |
| 4 | सत्यम् | सत्य बोलना |
| 5 | मादकद्रव्याणां परिहारः | नशे वाली वस्तुओं से दूर रहना |
भाषणप्रतियोगिता
यह section Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 1 writing task में भाषण-लेखन और oral presentation के लिए है।
(क) “संस्कृताधारिता भारतीयैकता” इति विषयम् आधृत्य भाषणं लिखत।
उत्तर:
आदरणीयाः अध्यापकाः, प्रियाः सहपाठिनः च,
अद्य अहं “संस्कृताधारिता भारतीयैकता” इति विषयम् अधिकृत्य भाषणं करोमि।
संस्कृतभाषा भारतदेशस्य महती सम्पत् अस्ति। अस्यां भाषायां वेदाः, उपनिषदः, पुराणानि, काव्यानि, नाटकानि च रचितानि सन्ति। संस्कृतं केवलं भाषा न, अपितु भारतीयसंस्कृतेः आधारः अस्ति। एषा भाषा भारतीयभाषाणां मूलम् इव वर्तते। अनेकासु भारतीयभाषासु संस्कृतशब्दाः दृश्यन्ते।
संस्कृतं भारतीयानाम् एकतां साधयति। एषा भाषा सत्पथे प्रेरयति, सद्गुणान् उत्पादयति, विश्वबन्धुत्वभावनां विस्तारयति च। यदि वयं संस्कृतम् अधीयेम, तर्हि वयं स्वसंस्कृतिं, स्वइतिहासं, स्वज्ञानपरम्परां च ज्ञातुं शक्नुमः।
अतः अस्माभिः संस्कृतभाषायाः अध्ययनं, संरक्षणं, प्रचारं च करणीयम्।
धन्यवादः।
विश्वबन्धुत्वभावना
(क) विश्वबन्धुत्वभावनायाः विकासाय के मार्गाः अवलम्बनीयाः?
उत्तर: विश्वबन्धुत्वभावनायाः विकासाय मनुष्यैः परस्परं प्रेम, सम्मानं, सहिष्णुतां च धारयितव्यम्।
सर्वे मानवाः एकस्य विश्वकुटुम्बस्य सदस्याः इति भावना विकसितव्या। जाति, भाषा, देश, धर्म इत्यादिभेदान् त्यक्त्वा सर्वेषां हितं चिन्तनीयम्। अहिंसा, सत्यं, सेवा, दया, शान्तिः च विश्वबन्धुत्वस्य प्रमुखाः आधाराः सन्ति। संस्कृतभाषायां “वसुधैव कुटुम्बकम्” इति विचारः अस्य भावस्य श्रेष्ठं उदाहरणम् अस्ति।
शब्द-संपदा
इस शब्द-संपदा section में पाठ में आए कठिन संस्कृत शब्दों के हिंदी और English अर्थ दिए गए हैं।
| शब्द | हिन्दी अर्थ | English Meaning |
| आमुष्मिकम् | परलोक का | Of the other world |
| उत्कर्षदम् | उन्नति देने वाली | Bestower of excellence |
| उद्वेलनम् | उत्थान करने वाला | Awakener |
| ऐहिकम् | इस संसार का | Of this world |
| कर्मदम् | कर्म / पुरुषार्थ देने वाली | Bestower of righteous action |
| चारु | सुन्दर / मनोहर | Beautiful |
| परिष्कारकम् | शुद्ध करने वाली | Refiner |
| पुञ्जः | समूह / राशि | Clump / group |
| प्रभा | प्रकाश | Light |
| भक्तिदम् | भक्ति देने वाली | Bestower of devotion |
| माधुर्यधारा | मधुर रस की धारा | Flow of sweetness |
| विस्तारकम् | विस्तार करने वाली | Expander |
| लीलावनम् | क्रीड़ा का उद्यान | Garden for play |
| सत्पथः | सत्य मार्ग | Noble path |
| सन्दोहः | समूह | Group |
कवि-काव्य-परिचय
(क) “सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम्” के रचयिता कौन हैं?
उत्तर: इस गीत के रचयिता पण्डित वासुदेव-शास्त्री-द्विवेदी हैं।
वे वाराणसी में स्थित सार्वभौमसंस्कृतप्रचारकार्यालय के संस्थापक थे। उन्होंने सरल संस्कृत में अनेक ग्रंथ लिखे और संस्कृत-प्रचार के लिए विपुल साहित्य प्रकाशित किया। “सुरभारतीसन्देशः”, “स्वर्गीयसंस्कृतकविसम्मेलनम्”, “भोजराज्ये संस्कृतसाम्राज्यम्” और “कौत्सस्य गुरुदक्षिणा” उनकी प्रसिद्ध कृतियों में गिने जाते हैं।
Chapter-Wise NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada
| Chapter No. | Chapter Name |
| Chapter 1 | सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम् |
| Chapter 2 | सुखस्य मूलं धर्मः धर्मस्य मूलम् अर्थः |
| Chapter 3 | आत्मवत्सर्वभूतेषु यः पश्यति सः पण्डितः |
| Chapter 4 | न खलु वयस्तेजसो हेतुः |
| Chapter 5 | एषा सा कृतकबुद्धिः मानवबुद्धेः सहकरी |
| Chapter 6 | मनःपूतं समाचरेत् |
| Chapter 7 | उपायं चिन्तयेत् प्राज्ञस्तथापायं च चिन्तयेत् |
| Chapter 8 | अन्नाद् आनन्दं प्रति |
| Chapter 9 | कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः |
| Chapter 10 | णमो अरिहंताणम् |
| Chapter 11 | वर्णोच्चारण-शिक्षा २ |
| Chapter 12 | अन्वयः |
| Chapter 13 | समासः |
| Chapter 14 | वाच्यम् |
| Chapter 15 | शब्दरूपाणि |
| Chapter 16 | धातुरूपाणि |
Topics Covered in NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 1
NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 1 cover the poem, meaning, grammar and activity-based exercises from “सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम्”.
- संस्कृत भाषा का भारतीय एकता और भारतीयत्व से संबंध
- संस्कृत को ज्ञान, आनंद, सद्गुण और सत्पथ की प्रेरक भाषा के रूप में समझना
- विश्वबंधुत्व, सर्वभूत-एकता, शांति और पञ्चशील की भावना
- त्याग, संतोष, सेवा, विश्वकल्याण, ज्ञान-विज्ञान और भक्ति-मुक्ति के विचार
- धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष और ऐहिक-आमुष्मिक उत्कर्ष का भाव
- कविता के श्लोकों का भावार्थ और मुख्य संदेश
- एकपदेन उत्तरम् और पूर्णवाक्येन उत्तरम् लिखने का अभ्यास
- रिक्तस्थानपूर्ति और संस्कृत वाक्य-रचना
- समस्तपद-विग्रह और पद-रचना की समझ
- पर्यायपद, शब्दार्थ और Sanskrit-Hindi-English vocabulary
- संस्कृत गीतगान में यति, गति, लय और उच्चारण
- “संस्कृताधारिता भारतीयैकता” विषय पर भाषण-लेखन
- विश्वबन्धुत्वभावना पर कक्षा-चर्चा और मूल्य-आधारित उत्तर
Important Concepts in NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 1
इस chapter में concepts संस्कृत भाषा, भारतीय संस्कृति, शब्दरचना और मूल्य-शिक्षा से जुड़े हैं।
| Concept | Explanation | Exam Use |
| भारतीयैकता | संस्कृत भारतीय एकता को साधने वाली भाषा है। | एकपदेन / भावार्थ |
| भारतीयत्व | संस्कृत भारतीय पहचान और संस्कृति को विकसित करती है। | पूर्णवाक्य उत्तर |
| वाणीपरिष्कार | संस्कृत वाणी को परिष्कृत करती है। | श्लोक-व्याख्या |
| सत्पथ | संस्कृत सन्मार्ग की प्रेरणा देती है। | रिक्तस्थान / MCQ |
| विश्वबन्धुत्व | संस्कृत विश्वबंधुत्व का विस्तार करती है। | भाषण / चर्चा |
| पञ्चशील | अस्तेय, अहिंसा, ब्रह्मचर्य, सत्य और मादकद्रव्य-परिहार | अतिरिक्त ज्ञान |
| समस्तपद-विग्रह | संयुक्त पदों को अलग करके अर्थ समझना | Grammar |
| पर्यायपद | समान अर्थ वाले शब्दों का प्रयोग | शब्द-ज्ञान |
| यति-गति-लय | संस्कृत गीतगान में सही विराम, गति और लय | गतिविधि |
FAQs (Frequently Asked Questions)
इस पाठ में संस्कृत को भारतीय भाषाओं, संस्कृति, ज्ञान-परंपरा और विचारधारा को जोड़ने वाली भाषा बताया गया है। कवि के अनुसार संस्कृत केवल अध्ययन की भाषा नहीं, बल्कि भारतीयत्व और सर्वभूत-एकता की भावना को मजबूत करने वाली भाषा है।
इसका अर्थ है कि संस्कृत ज्ञानरूपी प्रकाश को दिखाने वाली भाषा है। संस्कृत में वेद, उपनिषद, पुराण, काव्य, नाटक, दर्शन और विज्ञान से जुड़े अनेक ग्रंथ उपलब्ध हैं, इसलिए इसे ज्ञान की दिशा दिखाने वाली भाषा कहा गया है।
संस्कृत की शब्द-रचना, ध्वनि, व्याकरण और उच्चारण बहुत व्यवस्थित माने जाते हैं। इसके अध्ययन से भाषा की शुद्धता, स्पष्टता और अभिव्यक्ति सुधरती है। इसी कारण पाठ में संस्कृत को वाणी-परिष्कारिका भाषा कहा गया है।
पाठ में संस्कृत को विश्वबंधुत्व का विस्तार करने वाली भाषा बताया गया है। इसका भाव है कि मनुष्य जाति, भाषा, देश या धर्म के भेद से ऊपर उठकर सभी को एक विश्व-परिवार के रूप में देखे।
इस chapter में एकपदेन उत्तरम्, पूर्णवाक्येन उत्तरम्, रिक्तस्थानपूर्ति, समस्तपद-विग्रह, पर्यायपद, मेलनम् और संस्कृत वाक्य-रचना जैसे अभ्यास आते हैं।