NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 11

“वर्णोच्चारण-शिक्षा २” पाठ में संस्कृत वर्णों के उच्चारण में आभ्यन्तर-प्रयत्न, स्वर-व्यञ्जन भेद, स्पर्श, अन्तःस्थ, ऊष्म और अयोगवाह वर्णों की व्याख्या दी गई है।

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 11 में एकपदेन उत्तरम्, पूर्णवाक्य उत्तर, मेलनम्, आम्/न अभ्यास, प्रश्ननिर्माणम् और वर्णसमुच्चय से जुड़े अभ्यास हल किए गए हैं।

वर्णोच्चारण-शिक्षा २ Class 9 विद्यार्थियों को संस्कृत वर्णों के शुद्ध उच्चारण का आधार समझाता है। पूर्व कक्षा में स्थान और करण के बारे में बताया गया था; इस पाठ में आभ्यन्तर-प्रयत्नः को विस्तार से समझाया गया है। करण स्थान को किस प्रकार स्पर्श करता है या उसके समीप जाता है, उसी के आधार पर स्पृष्ट-प्रयत्नः, ईषत्स्पृष्ट-प्रयत्नः, ईषद्विवृत-प्रयत्नः, विवृत-प्रयत्नः और संवृत-प्रयत्नः बताए गए हैं। ये NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 11 students को Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 11 Question Answer, वर्णोच्चारण-शिक्षा २ exercise answers, Class 9 Sanskrit Chapter 11 grammar answers, स्वराः, व्यञ्जनानि और पाणिनीय-शिक्षा concepts revise करने में मदद करते हैं।

Key Takeaways

  • पाठ का नाम: वर्णोच्चारण-शिक्षा २
  • मुख्य विषय: आभ्यन्तर-प्रयत्नः और संस्कृत वर्णों का उच्चारण
  • मुख्य प्रयत्न: स्पृष्ट, ईषत्स्पृष्ट, ईषद्विवृत, विवृत और संवृत
  • मुख्य वर्ण-भेद: स्वराः, व्यञ्जनानि, स्पर्शाः, अन्तःस्थाः, ऊष्माणः और अयोगवाहौ
  • मुख्य अभ्यास: एकपदेन उत्तरम्, पूर्णवाक्य उत्तर, मेलनम्, आम्/न, प्रश्ननिर्माणम् और वर्णसमुच्चय

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 11 Structure 2026

Section Text / Skill Area Main Question Type
अभ्यासाद् जायते सिद्धिः textbook exercises एकपदेन, पूर्णवाक्य, मेलनम्
उच्चारण-शिक्षा आभ्यन्तर-प्रयत्नः Concept-based answers
वर्ण-विभाग स्वराः और व्यञ्जनानि वर्णसमुच्चय
व्याकरण प्रश्ननिर्माणम्, आम्/न, भेद-उपभेद Grammar practice
स्वाध्याय पाणिनीय-शिक्षा सूत्र सूत्र-अर्थ और revision
शब्द-संपदा संस्कृत-हिंदी-English meanings Vocabulary building

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 11: वर्णोच्चारण-शिक्षा २

इस section में वर्णोच्चारण-शिक्षा २ question answer पुस्तक के अभ्यास-क्रम के अनुसार दिए गए हैं। यह विद्यार्थियों को Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 11 solutions को textbook-based format में समझने में मदद करता है।

अभ्यासाद् जायते सिद्धिः

1. अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखत

यह भाग NCERT Class 9 Sanskrit Solutions के अनुसार पाठ-आधारित एकपदेन उत्तरों का अभ्यास कराता है।

(क) वर्णानाम् उत्पत्यर्थं कति आवश्यकानि तत्त्वानि भवन्ति?

उत्तर: त्रीणि।

(ख) कति स्थानानि सन्ति?

उत्तर: षट्।

(ग) आभ्यन्तर-प्रयत्नः कतिविधः?

उत्तर: पञ्चविधः।

(घ) करणं यदा स्थानं स्पष्टरूपेण स्पृशति, तदा करणस्य कः प्रयत्नः भवति?

उत्तर: स्पृष्ट-प्रयत्नः।

(ङ) अवर्णस्य कति उपभेदाः सन्ति?

उत्तर: त्रयः।

(च) संवृत-प्रयत्नः कुत्र भवति?

उत्तर: कण्ठे।

2. अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि पूर्णवाक्येन लिखत

यह section Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 11 Question Answer में संस्कृत पूर्णवाक्य उत्तरों का अभ्यास कराता है।

(क) आभ्यन्तर-प्रयत्नः कः उच्यते?

उत्तर: आस्यस्य अभ्यन्तरे करणं येन प्रयत्नेन स्थानं स्पृशति, स्थानस्य समीपं वा याति, सः प्रयत्नः आभ्यन्तर-प्रयत्नः इति उच्यते।

हिंदी अर्थ: मुख के भीतर करण जिस प्रयास से स्थान को स्पर्श करता है या उसके समीप जाता है, उस प्रयास को आभ्यन्तर-प्रयत्न कहते हैं।

(ख) ईषत्स्पृष्ट-प्रयत्नः कदा भवति?

उत्तर: करणं यदा स्थानं स्वल्पम् एव स्पृशति, तदा करणस्य ईषत्स्पृष्ट-प्रयत्नः भवति।

हिंदी अर्थ: जब करण स्थान को थोड़ा-सा स्पर्श करता है, तब ईषत्स्पृष्ट-प्रयत्न होता है।

(ग) करणस्य विवृत-प्रयत्नेन के स्वराः उच्चार्यन्ते?

उत्तर: करणस्य विवृत-प्रयत्नेन अकारं विहाय अन्ये सर्वे स्वराः उच्चार्यन्ते।

हिंदी अर्थ: विवृत-प्रयत्न से अकार को छोड़कर अन्य सभी स्वर उच्चारित होते हैं।

(घ) आभ्यन्तर-प्रयत्नाः कुत्र दृश्यन्ते?

उत्तर: कण्ठ्य-तालव्य-मूर्धन्य-दन्त्य-ओष्ठ्येषु पञ्चप्रकारेषु वर्णेषु आभ्यन्तर-प्रयत्नाः दृश्यन्ते।

हिंदी अर्थ: कण्ठ्य, तालव्य, मूर्धन्य, दन्त्य और ओष्ठ्य वर्णों में आभ्यन्तर-प्रयत्न दिखाई देते हैं।

(ङ) आभ्यन्तर-प्रयत्ने स्वरेषु विशिष्टः स्वरः कः अस्ति?

उत्तर: आभ्यन्तर-प्रयत्ने स्वरेषु विशिष्टः स्वरः अकारः अस्ति।

हिंदी अर्थ: आभ्यन्तर-प्रयत्न में स्वरों में विशेष स्वर अकार है।

3. अधोलिखितानां वर्णानां क-स्तम्भेन सह मेलनं कुरुत

यह अभ्यास वर्णोच्चारण-शिक्षा २ exercise answers में आभ्यन्तर-प्रयत्न और वर्णों को मिलाने में मदद करता है।

क-स्तम्भः ख-स्तम्भः
(क) विवृत-प्रयत्नः 3. ॠ
(ख) स्पृष्ट-प्रयत्नः 5. ध्
(ग) ईषत्स्पृष्ट-प्रयत्नः 1. व्
(घ) ईषद्विवृत-प्रयत्नः 2. श्
(ङ) संवृत-प्रयत्नः 4. अ

4. अधोलिखितानां वाक्यानाम् उत्तराणि आम् / न इति सन्दर्भानुसारं लिखत

यह section Class 9 Sanskrit Chapter 11 grammar answers में वर्ण-भेद और उपभेद की पहचान कराता है।

(क) ‘ई’ वर्णः सन्ध्यक्षरम् अस्ति। — आम् / न

उत्तर: न।

तर्क: ‘ई’ समानाक्षरस्वरः है, सन्ध्यक्षर नहीं।

(ख) ‘ऐ’ वर्णः सन्ध्यक्षरम् अस्ति। — आम् / न

उत्तर: आम्।

तर्क: ‘ऐ’ सन्ध्यक्षरस्वरः है।

(ग) ‘झ’ वर्णः स्पर्शः अस्ति। — आम् / न

उत्तर: आम्।

तर्क: ‘झ’ वर्गीय स्पर्श-व्यञ्जन है।

(घ) ‘र’ वर्णः स्पर्शेषु परिगण्यते। — आम् / न

उत्तर: न।

तर्क: ‘र’ अन्तःस्थ-व्यञ्जन है।

(ङ) ‘य, र, ल, व’ वर्णाः ऊष्माणः सन्ति। — आम् / न

उत्तर: न।

तर्क: ‘य, र, ल, व’ अन्तःस्थ-व्यञ्जन हैं।

5. रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत

यह अभ्यास रेखांकित पदों से संस्कृत प्रश्न बनाने में मदद करता है।

(क) स्वराः स्वतन्त्रवर्णाः सन्ति।

उत्तर: के स्वतन्त्रवर्णाः सन्ति?

(ख) व्यञ्जनानि अर्धमात्रिकाणि भवन्ति।

उत्तर: कानि अर्धमात्रिकाणि भवन्ति?

(ग) स्वराणां द्वौ भेदौ भवतः।

उत्तर: स्वराणां कति भेदौ भवतः?

(घ) ह्रस्वस्य उपभेदाः न भवन्ति।

उत्तर: कस्य उपभेदाः न भवन्ति?

(ङ) व्यञ्जनानां चत्वारो भेदाः भवन्ति।

उत्तर: केषां चत्वारो भेदाः भवन्ति?

6. वर्णसमुच्चयं पाठात् चित्वा लिखत

(क) एकस्थानि-वर्णाः

उत्तर: अ, आ, अ३, इ, ई, इ३, उ, ऊ, उ३, ऋ, ॠ, ऋ३, ऌ, ऌ३।

(ख) स्पर्श-व्यञ्जनानि

उत्तर: क्, ख्, ग्, घ्, ङ्, च्, छ्, ज्, झ्, ञ्, ट्, ठ्, ड्, ढ्, ण्, त्, थ्, द्, ध्, न्, प्, फ्, ब्, भ्, म्।

(ग) अयोगवाह-व्यञ्जनानि

उत्तर: अं, अः।

(घ) ऊष्म-व्यञ्जनानि

उत्तर: श्, ष्, स्, ह्।

(ङ) द्विस्थानि-वर्णाः

उत्तर: ए, ए३, ऐ, ऐ३, ओ, ओ३, औ, औ३।

स्वाध्यायान्मा प्रमदः

पाणिनीय-शिक्षा-सूत्राणि

यह section पाणिनीय-शिक्षा में आभ्यन्तर-प्रयत्न से जुड़े सूत्रों को समझने में मदद करता है।

(क) “प्रयत्नोऽपि द्विविधः” इति सूत्रस्य अर्थः लिखत।

उत्तर: वर्णोच्चारणार्थं प्रयत्नः द्विप्रकारकः भवति।

हिंदी अर्थ: वर्णों के उच्चारण के लिए प्रयत्न दो प्रकार का होता है।

(ख) प्रयत्नस्य द्वौ प्रकारौ कौ स्तः?

उत्तर: प्रयत्नस्य द्वौ प्रकारौ आभ्यन्तर-प्रयत्नः बाह्य-प्रयत्नः च स्तः।

हिंदी अर्थ: प्रयत्न के दो प्रकार हैं—आभ्यन्तर-प्रयत्न और बाह्य-प्रयत्न।

(ग) “स्पृष्ट-करणाः स्पर्शाः” इति सूत्रस्य अर्थः लिखत।

उत्तर: स्पर्शानां वर्णानाम् उच्चारणे करणं स्पृष्ट-प्रयत्नेन स्थानं स्पृशति।

हिंदी अर्थ: स्पर्श वर्णों के उच्चारण में करण स्पष्ट रूप से स्थान को स्पर्श करता है।

(घ) “ईषत्स्पृष्ट-करणा अन्तस्थाः” इति सूत्रस्य अर्थः लिखत।

उत्तर: अन्तःस्थानां वर्णानाम् उच्चारणे करणम् ईषत्स्पृष्ट-प्रयत्नेन स्थानं स्वल्पं स्पृशति।

हिंदी अर्थ: अन्तःस्थ वर्णों के उच्चारण में करण स्थान को थोड़ा-सा स्पर्श करता है।

(ङ) “ईषद्विवृत-करणा ऊष्माणः” इति सूत्रस्य अर्थः लिखत।

उत्तर: ऊष्मणां वर्णानाम् उच्चारणे करणम् ईषद्विवृत-प्रयत्नेन स्थानस्य समीपं याति।

हिंदी अर्थ: ऊष्म वर्णों के उच्चारण में करण हल्के खुले प्रयत्न से स्थान के समीप जाता है।

(च) “विवृत-करणाः स्वराः” इति सूत्रस्य अर्थः लिखत।

उत्तर: स्वराणां वर्णानाम् उच्चारणे करणं विवृत-प्रयत्नेन स्थानं प्रति किञ्चित् दूरपर्यन्तं याति।

हिंदी अर्थ: स्वरों के उच्चारण में करण विवृत-प्रयत्न से स्थान की ओर कुछ दूरी तक जाता है।

(छ) “संवृतस्त्वकारः” इति सूत्रस्य अर्थः लिखत।

उत्तर: ह्रस्व-अकारस्य उच्चारणे करणं संवृत-प्रयत्नेन स्थानं प्रति सङ्कुचितः भवति।

हिंदी अर्थ: ह्रस्व अकार के उच्चारण में करण संवृत-प्रयत्न से संकुचित होता है।

आभ्यन्तर-प्रयत्नः

(क) आभ्यन्तर-प्रयत्नस्य पञ्च भेदाः लिखत।

उत्तर:

क्रम आभ्यन्तर-प्रयत्नः वर्ण / वर्ग
1 स्पृष्ट-प्रयत्नः स्पर्श-व्यञ्जनानि
2 ईषत्स्पृष्ट-प्रयत्नः अन्तःस्थ-व्यञ्जनानि
3 ईषद्विवृत-प्रयत्नः ऊष्म-व्यञ्जनानि, अयोगवाहौ
4 विवृत-प्रयत्नः अकारं विहाय अन्ये स्वराः
5 संवृत-प्रयत्नः अकारः

(ख) स्पृष्ट-प्रयत्नेन के वर्णाः उत्पद्यन्ते?

उत्तर: स्पृष्ट-प्रयत्नेन स्पर्श-व्यञ्जनानि उत्पद्यन्ते।

उदाहरण: क्, ख्, ग्, घ्, ङ्, च्, छ्, ज्, झ्, ञ्, ट्, ठ्, ड्, ढ्, ण्, त्, थ्, द्, ध्, न्, प्, फ्, ब्, भ्, म्।

(ग) ईषत्स्पृष्ट-प्रयत्नेन के वर्णाः जायन्ते?

उत्तर: ईषत्स्पृष्ट-प्रयत्नेन अन्तःस्थ-व्यञ्जनानि जायन्ते।

उदाहरण: य्, र्, ल्, व्।

(घ) ईषद्विवृत-प्रयत्नेन के वर्णाः जायन्ते?

उत्तर: ईषद्विवृत-प्रयत्नेन ऊष्म-व्यञ्जनानि तथा अयोगवाहौ जायन्ते।

उदाहरण: श्, ष्, स्, ह्, अं, अः।

(ङ) विवृत-प्रयत्नेन के वर्णाः उच्चार्यन्ते?

उत्तर: विवृत-प्रयत्नेन अकारं विहाय अन्ये सर्वे स्वराः उच्चार्यन्ते।

उदाहरण: आ, अ३, इ, ई, इ३, उ, ऊ, उ३, ऋ, ॠ, ऋ३, ऌ, ऌ३, ए, ए३, ऐ, ऐ३, ओ, ओ३, औ, औ३।

(च) संवृत-प्रयत्नेन कः वर्णः उच्चार्यते?

उत्तर: संवृत-प्रयत्नेन ह्रस्वः अकारः उच्चार्यते।

वर्णानां मुख्यभेदाः

(क) वर्णानां द्वौ मुख्यभेदौ कौ स्तः?

उत्तर: वर्णानां द्वौ मुख्यभेदौ स्वरः व्यञ्जनं च स्तः।

(ख) स्वरः कः?

उत्तर: स्वरः स्वतन्त्रः वर्णः अस्ति। उच्चारणार्थम् अन्यवर्णः आवश्यकः न भवति।

हिंदी अर्थ: स्वर स्वतंत्र वर्ण है। उसके उच्चारण के लिए किसी अन्य वर्ण की आवश्यकता नहीं होती।

(ग) व्यञ्जनं किम्?

उत्तर: व्यञ्जनं परतन्त्रः वर्णः अस्ति। उच्चारणार्थम् आधारस्वरः आवश्यकः भवति।

हिंदी अर्थ: व्यंजन परतंत्र वर्ण है। उसके उच्चारण के लिए आधार स्वर की आवश्यकता होती है।

(घ) स्वराणां द्वौ भेदौ कौ स्तः?

उत्तर: स्वराणां द्वौ भेदौ समानाक्षरस्वरः सन्ध्यक्षरस्वरः च स्तः।

(ङ) व्यञ्जनानां चत्वारः भेदाः के सन्ति?

उत्तर: व्यञ्जनानां चत्वारः भेदाः स्पर्श-व्यञ्जनम्, अन्तःस्थ-व्यञ्जनम्, ऊष्म-व्यञ्जनम्, अयोगवाह-व्यञ्जनम् च सन्ति।

शब्द-संपदा

शब्द हिन्दी अर्थ English Meaning
प्रयत्नः उच्चारण में प्रयुक्त बल या दबाव Effort in speech
अभ्यन्तरे अंदर Inside
आभ्यन्तरम् अंदर स्थित Internal
आभ्यन्तरप्रयत्नः मुख के भीतर करण का स्थान की ओर प्रयुक्त बल Internal effort in articulation
स्पृष्टः स्पर्श किया हुआ Touched
ईषत् थोड़ा Slightly
ईषत्स्पृष्टः थोड़ा स्पर्श किया हुआ Slightly touched
विवृतः खुला हुआ Opened
विवरः अंतराल / छिद्र Opening / gap
ईषद्विवृतः थोड़ा खुला हुआ Slightly opened
संवृतः सिकुड़ा हुआ Contracted
संकोचः सिकुड़ना Compression
संकुचितः सिकुड़ा हुआ Constricted
स्वरः स्वतंत्र वर्ण Vowel
व्यञ्जनम् आधारस्वर पर निर्भर वर्ण Consonant
स्पर्शः स्पष्ट स्पर्श से उच्चरित व्यंजन Stop consonant
अन्तःस्थः हल्के स्पर्श से उच्चरित व्यंजन Semi-vowel
ऊष्मा ऊष्म ध्वनि वाला व्यंजन Sibilant / aspirate
अयोगवाहः अनुस्वार और विसर्ग Anusvara and visarga

Chapter-Wise NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada

Chapter No. Chapter Name
Chapter 1 सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम्
Chapter 2 सुखस्य मूलं धर्मः धर्मस्य मूलम् अर्थः
Chapter 3 आत्मवत्सर्वभूतेषु यः पश्यति सः पण्डितः
Chapter 4 न खलु वयस्तेजसो हेतुः
Chapter 5 एषा सा कृतकबुद्धिः मानवबुद्धेः सहकरी
Chapter 6 मनःपूतं समाचरेत्
Chapter 7 उपायं चिन्तयेत् प्राज्ञस्तथापायं च चिन्तयेत्
Chapter 8 अन्नाद् आनन्दं प्रति
Chapter 9 कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः
Chapter 10 णमो अरिहंताणम्
Chapter 11 वर्णोच्चारण-शिक्षा २
Chapter 12 अन्वयः
Chapter 13 समासः
Chapter 14 वाच्यम्
Chapter 15 शब्दरूपाणि
Chapter 16 धातुरूपाणि

Topics Covered in NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 11

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 11 cover Sanskrit pronunciation, internal articulation and grammar-based classification from “वर्णोच्चारण-शिक्षा २”.

  • वर्णों की उत्पत्ति के लिए आवश्यक तत्त्व: स्थानम्, करणम् और आभ्यन्तर-प्रयत्नः
  • षट् स्थानानि और षट् करणानि का पुनरावलोकन
  • आस्यस्य अभ्यन्तरे करण और स्थान का संबंध
  • आभ्यन्तर-प्रयत्नः की परिभाषा और पाँच भेद
  • स्पृष्ट-प्रयत्नः और स्पर्श-व्यञ्जनों का उच्चारण
  • ईषत्स्पृष्ट-प्रयत्नः और अन्तःस्थ-व्यञ्जनों की पहचान
  • ईषद्विवृत-प्रयत्नः, ऊष्म-व्यञ्जन और अयोगवाहौ
  • विवृत-प्रयत्नः और अकार को छोड़कर अन्य स्वरों का उच्चारण
  • संवृत-प्रयत्नः और ह्रस्व अकार की विशेष स्थिति
  • स्वर और व्यञ्जन के मुख्य अंतर
  • समानाक्षरस्वर और सन्ध्यक्षरस्वर की पहचान
  • स्पर्श, अन्तःस्थ, ऊष्म और अयोगवाह व्यञ्जनों का वर्गीकरण
  • पाणिनीय-शिक्षा सूत्र और उनके सरल अर्थ
  • आम्/न, मेलनम्, प्रश्ननिर्माणम् और वर्णसमुच्चय अभ्यास

Important Concepts in NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 11

Concept Explanation Exam Use
आभ्यन्तर-प्रयत्नः मुख के भीतर करण का स्थान की ओर प्रयत्न मुख्य विषय
स्पृष्ट-प्रयत्नः करण स्थान को स्पष्ट रूप से स्पर्श करता है स्पर्श-व्यञ्जन
ईषत्स्पृष्ट-प्रयत्नः करण स्थान को थोड़ा स्पर्श करता है अन्तःस्थ-व्यञ्जन
ईषद्विवृत-प्रयत्नः करण स्थान के समीप जाता है और हल्का अंतर रहता है ऊष्म / अयोगवाह
विवृत-प्रयत्नः स्थान-करण में स्पष्ट विवर होता है स्वर
संवृत-प्रयत्नः कण्ठ में संकोच के साथ ह्रस्व अकार का उच्चारण अकार
स्वरः स्वतन्त्र वर्ण वर्णभेद
व्यञ्जनम् परतन्त्र वर्ण, आधारस्वर की आवश्यकता वर्णभेद
अयोगवाहौ अनुस्वार और विसर्ग वर्णसमुच्चय
पाणिनीय-शिक्षा वर्णोच्चारण से जुड़े सूत्र स्वाध्याय

FAQs (Frequently Asked Questions)

“वर्णोच्चारण-शिक्षा २” पाठ में संस्कृत वर्णों के उच्चारण में आभ्यन्तर-प्रयत्नः को समझाया गया है। इसमें बताया गया है कि करण स्थान को कैसे स्पर्श करता है या उसके समीप जाता है, और इसी आधार पर वर्णों का उच्चारण व वर्गीकरण होता है।

आस्य के भीतर करण जिस प्रयत्न से स्थान को स्पर्श करता है या उसके समीप जाता है, उसे आभ्यन्तर-प्रयत्नः कहते हैं। इसके पाँच भेद हैं—स्पृष्ट, ईषत्स्पृष्ट, ईषद्विवृत, विवृत और संवृत।

स्पृष्ट-प्रयत्नः से स्पर्श-व्यञ्जन उत्पन्न होते हैं। इनमें क-वर्ग, च-वर्ग, ट-वर्ग, त-वर्ग और प-वर्ग के वर्ण आते हैं।

संवृत-प्रयत्नः केवल ह्रस्व अकार के उच्चारण में होता है। पाठ के अनुसार यह कण्ठ-स्थान में होता है और अकार को अन्य स्वरों से अलग बनाता है।

वर्णोच्चारण-शिक्षा २ exercise answers revise करते समय पहले आभ्यन्तर-प्रयत्नः के पाँच भेद याद करें। फिर स्पर्श, अन्तःस्थ, ऊष्म, अयोगवाह और स्वर-वर्ग की सूची को अलग-अलग revise करें। अंत में आम्/न, मेलनम् और प्रश्ननिर्माणम् का अभ्यास करें।