NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 9

“कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः” पाठ महाभारत-प्रसंग पर आधारित एकचक्रम् रूपक से लिया गया है, जिसमें भीम, कुन्ती, पाण्डव और बकासुर-वध का प्रसंग प्रस्तुत है।

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 9 में एकपदेन उत्तरम्, पूर्णवाक्य उत्तर, कथन-मेलन, सन्धिविच्छेद, पर्यायवाची, विपरीतार्थक शब्द, विशेषण-विशेष्य, समस्तपद और वाच्यपरिवर्तनम् अभ्यास हल किए गए हैं।

कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः Class 9 में उपकार और प्रत्युपकार के सनातन धर्म को भीम के साहस और कुन्ती के निर्णय के माध्यम से समझाया गया है। पाण्डव एकचक्रनगरे ब्राह्मण के घर रहते हैं और उसके परिवार पर आए संकट को जानकर कुन्ती अपने पुत्रों में से एक को बकासुर के पास भेजने का वचन देती हैं। भीम इस प्रतिज्ञा को क्षत्रिय-धर्म और उपकार का प्रत्युपकार मानकर स्वीकार करता है। ये NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 9 students को Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 9 Question Answer, कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः exercise answers, Class 9 Sanskrit Chapter 9 grammar answers, सन्धिविच्छेद और वाच्यपरिवर्तनम् revise करने में मदद करते हैं।

Key Takeaways

  • पाठ का नाम: कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः
  • स्रोत: एकचक्रम् रूपकम्, महाभारत के बकासुर-वध प्रसंग पर आधारित
  • मुख्य पात्र: कुन्ती, भीम, युधिष्ठिर, अर्जुन, नकुल, सहदेव, बकासुर
  • मुख्य विषय: उपकार, प्रत्युपकार, क्षत्रिय-धर्म, साहस, कर्तव्य और अन्याय का विनाश
  • मुख्य अभ्यास: एकपदेन उत्तरम्, पूर्णवाक्य उत्तर, कथन-मेलन, सन्धिविच्छेद, समस्तपद, वाच्यपरिवर्तनम्

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 9 Structure 2026

Section Text / Skill Area Main Question Type
अभ्यासाद् जायते सिद्धिः textbook exercises एकपदेन, पूर्णवाक्य, कथन-मेलन
व्याकरण सन्धिविच्छेद, समस्तपद, वाच्यपरिवर्तनम् Grammar practice
शब्द-ज्ञान पर्यायवाची, विपरीतार्थक, विशेषण-विशेष्य Vocabulary
रूपक-समझ एकचक्रम्, बकासुर-वध, पात्र-विश्लेषण Literature
स्वाध्याय अभिनय, पात्र-टिप्पणी, महाभारत-पठन Activity-based learning
कवि-परिचय एन. रङ्गनाथशर्मा Author study

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 9: कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः

इस section में कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः question answer पुस्तक के अभ्यास-क्रम के अनुसार दिए गए हैं। यह विद्यार्थियों को Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 9 solutions को textbook-based format में समझने में मदद करता है।

अभ्यासाद् जायते सिद्धिः

1. अधः प्रदत्तप्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखत

यह भाग NCERT Class 9 Sanskrit Solutions के अनुसार पाठ-आधारित एकपदेन उत्तरों का अभ्यास कराता है।

(क) भीमस्य जननी का?

उत्तर: कुन्ती।

(ख) कुन्त्या निश्चितं कः न समर्थयति?

उत्तर: युधिष्ठिरः।

(ग) पाण्डवानाम् उपकर्ता कः?

उत्तर: ब्राह्मणः।

(घ) कं चिन्तयन् दुर्योधनः निद्रां न लभते?

उत्तर: भीमम्।

(ङ) पाण्डवाः कुत्र निवसन्ति स्म?

उत्तर: एकचक्रनगरे।

(च) भरतवंशप्रदीपः कः?

उत्तर: भीमः।

(छ) कः भृशं परिदेवयते?

उत्तर: ब्राह्मणः।

2. पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत

यह section Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 9 Question Answer में संस्कृत पूर्णवाक्य उत्तरों का अभ्यास कराता है।

(क) “भैक्षप्रदानेन...” इति श्लोकानुसारं सनातनः धर्मः कः?

उत्तर: “कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः” इति श्लोकानुसारं उपकारस्य प्रत्युपकारः सनातनः धर्मः अस्ति।

हिंदी अर्थ: इस श्लोक के अनुसार किए गए उपकार का प्रत्युपकार करना सनातन धर्म है।

(ख) बकनामा दैत्यः कुत्र वसति?

उत्तर: बकनामा दैत्यः एकचक्रस्य पुरस्य अदूरवर्तिनि पर्वते वसति।

हिंदी अर्थ: बक नामक दैत्य एकचक्र नगर के पास स्थित पर्वत पर रहता है।

(ग) कुन्ती किं प्रतिश्रुतवती?

उत्तर: कुन्ती प्रतिश्रुतवती यत् सा स्वपुत्रेषु एकं बकासुरस्य समीपं प्रेषयिष्यति।

हिंदी अर्थ: कुन्ती ने वचन दिया कि वह अपने पुत्रों में से एक को बकासुर के पास भेजेगी।

(घ) भीमस्य अग्रजः कः?

उत्तर: भीमस्य अग्रजः युधिष्ठिरः अस्ति।

हिंदी अर्थ: भीम का बड़ा भाई युधिष्ठिर है।

(ङ) का प्रत्यादेशं न अर्हति?

उत्तर: मातुराज्ञा प्रत्यादेशं न अर्हति।

हिंदी अर्थ: माता की आज्ञा का उल्लंघन नहीं करना चाहिए।

(च) पौराः बकासुराय कथं बलिम् आहरन्ति?

उत्तर: पौराः पर्यायक्रमेण बकासुराय बलिम् आहरन्ति।

हिंदी अर्थ: नगरवासी बारी-बारी से बकासुर को बलि पहुँचाते हैं।

(छ) क्षत्रियाणां धर्मः कः?

उत्तर: नररक्षणं क्षत्रियाणां धर्मः अस्ति।

हिंदी अर्थ: मनुष्यों की रक्षा करना क्षत्रियों का धर्म है।

3. अधस्तात् दत्तानि वाक्यानि केन कं प्रति उक्तानि इति निर्दिशत

यह अभ्यास कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः exercise answers में कथन किसने किससे कहा, इसकी समझ विकसित करता है।

क्र.सं. वाक्यानि केन / कया कं / कां प्रति
यथा तस्माद् बालकस्य पिता तपस्वी शोचति। कुन्त्या भीमम्
1 न हि मातुराज्ञा प्रत्यादेशम् अर्हति। भीमेन युधिष्ठिरम्
2 न हि खरदंष्ट्रो मृगाधिपः सहायम् अपेक्षते। भीमेन अर्जुनम्
3 क्षत्रियाण्या यदुचितं तदनुष्ठितम्। भीमेन कुन्तीम्
4 अपि हस्तद्वयेन भोक्ष्यसे? सहदेवेन भीमम्
5 तस्य भीमस्य प्रेषणं कथं नु त्वया सङ्कल्पितम्? युधिष्ठिरेण कुन्तीम्
6 नरभक्षणं नाम मांसाशिनां राक्षसानां धर्मः। बकेन भीमसेनम्

4. रेखाङ्कितपदेषु सन्धिं विभज्य सन्धिनाम लिखत

यह section Class 9 Sanskrit Chapter 9 grammar answers में सन्धिविच्छेद और सन्धि-नाम का अभ्यास कराता है।

यथा: न चैतावत्।
उत्तर: च + एतावत् — वृद्धि-सन्धिः

(क) सम्यगनुष्ठितम्।

उत्तर: सम्यक् + अनुष्ठितम् — जश्त्व-सन्धिः।

(ख) पुरस्यादूरवर्तिनि पर्वते वसति बकनामा दैत्यः।

उत्तर: पुरस्य + अदूरवर्तिनि — सवर्णदीर्घ-सन्धिः।

(ग) श्रुतं तस्य दुरात्मनो वृत्तम्।

उत्तर: दुः + आत्मनः — विसर्ग-सन्धिः।

(घ) भोज्यसमाहारे मानुषोऽपि तस्मै प्रेषयितव्यः।

उत्तर: मानुषः + अपि — पूर्वरूप-सन्धिः।

(ङ) मातः! नास्त्यत्र किमप्यनुशोचितव्यम्।

उत्तर: न + अस्ति — सवर्णदीर्घ-सन्धिः।

(च) क्षत्रियाण्या यदुचितं तदनुष्ठितम्।

उत्तर: यत् + उचितम् — जश्त्व-सन्धिः।

(छ) स खल्वेकपुत्रस्तपस्वी भृशं परिदेवयते।

उत्तर: खलु + एकपुत्रः — यण्-सन्धिः।

(ज) कथं नु त्वया सङ्कल्पितम्।

उत्तर: नु + त्वया — यण्-सन्धिः।

(झ) धर्मसङ्ग्रहोऽत्र द्रष्टव्यः।

उत्तर: धर्मसङ्ग्रहः + अत्र — पूर्वरूप-सन्धिः।

(ञ) मानुषभोजी स राक्षस इति श्रूयते।

उत्तर: राक्षसः + इति — विसर्ग-सन्धिः।

5. पर्यायवाचि-पदानां मेलनं कुरुत

पदम् पर्यायवाची पदम्
(क) आयोधनम् 5. युद्धम्
(ख) विप्रः 1. ब्राह्मणः
(ग) असुरः 4. दैत्यः
(घ) अम्ब 2. जननी
(ङ) हुताशनः 3. अग्निः

6. अधोलिखितानां पदानां विपरीतार्थक-शब्दान् लिखत

यथा: पीवरः — कृशः

(क) उपकृतः

उत्तर: अपकृतः।

(ख) अग्रजस्य

उत्तर: अनुजस्य।

(ग) उचितम्

उत्तर: अनुचितम्।

(घ) हर्षः

उत्तर: शोकः।

7. मञ्जूषातः समुचितं विशेषणपदं चित्वा लिखत

मञ्जूषा: क्षत्रियाणी, शकटपूरं, प्रतिवेशी, खरदंष्ट्रः, जठरस्थः, कौन्तेयः, पीवरौ

यथा: पीवरौ बाहू

(क) __________ मृष्टान्नम्

उत्तर: शकटपूरं मृष्टान्नम्।

(ख) __________ ब्राह्मणः

उत्तर: प्रतिवेशी ब्राह्मणः।

(ग) __________ मृगाधिपः

उत्तर: खरदंष्ट्रः मृगाधिपः।

(घ) __________ भीमः

उत्तर: कौन्तेयः भीमः।

(ङ) __________ कुन्ती

उत्तर: क्षत्रियाणी कुन्ती।

(च) __________ हुताशनः

उत्तर: जठरस्थः हुताशनः।

8. समस्तपदानि लिखत

यह section समस्तपदानि और विग्रह की समझ मजबूत करता है।

यथा: मृष्टम् अन्नं शकटपूरं पूरयित्वा प्रेषणीयम्।
उत्तर: मृष्टान्नम्।

(क) वीरस्य भुजयोः बलम् आश्रित्य वयं सुखं शेमहे।

उत्तर: भुजबलम्।

(ख) भवता धर्माणां सङ्ग्रहः द्रष्टव्यः।

उत्तर: धर्मसङ्ग्रहः।

(ग) न हि मातुः आज्ञा प्रत्यादेशम् अर्हति।

उत्तर: मातुराज्ञा।

(घ) धनुः धरति इति अहम् अनुगमिष्यामि।

उत्तर: धनुर्धरः।

(ङ) न हि खरदंष्ट्रः मृगाणाम् अधिपः सहायम् अपेक्षते।

उत्तर: मृगाधिपः।

(च) अस्य पुरस्य न दूरे वर्तते पर्वते वसति बकनामा दैत्यः।

उत्तर: अदूरवर्तिनि।

9. अधोलिखितवाक्यानाम् उचितभावैः सह सम्मेलनं कुरुत

वाक्यम् उचितभावः
यथा— प्रभूतम् उपस्थितं मे भोजनम्। हर्षः
(क) धनुर्धरोऽहम् अनुगमिष्यामि। 4. अधिकारः
(ख) भीमस्य प्रेषणं कथं नु त्वया सङ्कल्पितम्? 3. ग्लानिः
(ग) अपि हस्तद्वयेन भोक्ष्यसे? 1. हासः
(घ) हनिष्यामि तं दुरात्मानम्। 5. ओजः
(ङ) स खल्वेकपुत्रस्तपस्वी भृशं परिदेवयते। 2. निराशा
(च) मानुषापसद, परिवेषय मे भोजनम्। 6. धैर्यम्

10. वाच्यपरिवर्तनं कुरुत

यह section वाच्यपरिवर्तनम् और कर्तृवाच्य-कर्मवाच्य अभ्यास के लिए उपयोगी है।

यथा: भवत्या प्रतिश्रुतम्।
उत्तर: भवती प्रतिश्रुतवती।

(क) क्षत्रियाण्या अनुष्ठितम्।

उत्तर: क्षत्रियाणी अनुष्ठितवती।

(ख) भवत्या सज्जीक्रियताम्।

उत्तर: भवती सज्जीकरोतु।

(ग) भवत्या उपक्षिप्तम्।

उत्तर: भवती उपाक्षिपत्।

(घ) त्वया सङ्कल्पितम्।

उत्तर: त्वं सङ्कल्पितवान्।

(ङ) भवता धर्मसङ्ग्रहः द्रष्टव्यः।

उत्तर: भवान् धर्मसङ्ग्रहं द्रष्टुम् अर्हति।

(च) पौरजनैः मानुषः प्रेषयितव्यः।

उत्तर: पौरजनाः मानुषं प्रेषयेयुः।

स्वाध्यायान्मा प्रमदः

श्लोकानां भावार्थः

(क) “भैक्षप्रदानेन चिरं परैरुपकृता वयम्...” श्लोकस्य भावार्थं लिखत।

उत्तर:

इस श्लोक का भाव है कि हम नगरवासियों और ब्राह्मण के द्वारा लंबे समय तक भिक्षा देकर पोषित हुए हैं। इसलिए उनके उपकार का प्रत्युपकार करना हमारा कर्तव्य है। जो उपकार किया गया हो, उसका प्रत्युपकार होना चाहिए—यही सनातन धर्म है।

(ख) “इमौ हि पीवरौ बाहू...” श्लोकस्य भावार्थं लिखत।

उत्तर:

इस श्लोक में भीम अपने बल और साहस को व्यक्त करते हैं। वे कहते हैं कि मेरे ये दोनों मजबूत भुजाएँ ही मेरे स्वाभाविक सहायक हैं। जैसे सिंह छोटे वन्यप्राणी का विनाश करता है, वैसे ही मैं बक नामक असुर का विनाश करूँगा।

यस्तु क्रियावान् मनुजः स विद्वान्

1. अस्य रूपकस्य अभिनय-अंशान् ज्ञात्वा स्वशालायाम् अभिनयम् कुरुत।

(क) रूपक-अभिनयस्य संक्षिप्त योजना लिखत।

उत्तर:

विद्यार्थी “कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः” पाठ का नाट्य-रूप प्रस्तुत कर सकते हैं। पात्र होंगे—कुन्ती, भीम, युधिष्ठिर, अर्जुन, नकुल, सहदेव, ब्राह्मण और बकासुर। पहले कुन्ती द्वारा ब्राह्मण-परिवार की समस्या जानने का दृश्य दिखाया जाए। फिर भीम का बकासुर के पास जाने का निर्णय, पाण्डवों का संवाद, भोजन-शकट लेकर भीम का जाना और अंत में बकासुर-वध का दृश्य प्रस्तुत किया जा सकता है।

2. अस्मिन् रूपके विद्यमानानां पात्राणां नामानि विलिख्य तेषां विषये टिप्पणीं लिखत।

(क) रूपक-पात्राणां नामानि टिप्पणीं च लिखत।

उत्तर:

पात्रम् टिप्पणी
कुन्ती पाण्डवानां माता, करुणामयी और धर्मपरायणा।
भीमः बलवान, साहसी, उपकार का प्रत्युपकार करने वाला।
युधिष्ठिरः धर्मज्ञ, विचारशील और भीम की सुरक्षा को लेकर चिंतित।
अर्जुनः धनुर्धर, भीम के साथ जाने को तत्पर।
नकुलः विनोदी और भीम के स्वभाव को समझने वाला।
सहदेवः हास्यपूर्ण शैली में भीम से प्रश्न करने वाला।
बकासुरः नरभक्षी राक्षस, अन्याय और क्रूरता का प्रतीक।
ब्राह्मणः पाण्डवों का उपकर्ता और संकटग्रस्त गृहस्वामी।

3. विद्यालयस्य ग्रन्थालयं गत्वा महाभारतस्य विविधपात्राणां विषये पठित्वा मित्रैः सह आलोचनां कुरुत।

(क) महाभारतस्य प्रमुखपात्राणां विषये संक्षिप्त टिप्पणी लिखत।

उत्तर:

पात्रम् संक्षिप्त टिप्पणी
युधिष्ठिरः धर्मराज, सत्य और न्याय के पालनकर्ता।
भीमः बल, साहस और अन्याय-विनाश के प्रतीक।
अर्जुनः श्रेष्ठ धनुर्धर और श्रीकृष्ण के प्रिय शिष्य।
कुन्ती पाण्डवों की माता, धैर्य और धर्मनिष्ठा की प्रतीक।
द्रौपदी साहस, आत्मसम्मान और दृढ़ता की प्रतीक।
श्रीकृष्णः मार्गदर्शक, नीतिज्ञ और गीता के उपदेशक।
दुर्योधनः ईर्ष्या, अहंकार और अधर्म का प्रतिनिधि।
कर्णः दानवीर, महान योद्धा और जटिल चरित्र वाला नायक।

कविकालकृतीनां विचारः

(क) “एकचक्रम्” रूपकस्य लेखकः कः?

उत्तर: “एकचक्रम्” रूपकस्य लेखकः विद्वान् एन. रङ्गनाथशर्मा अस्ति।

हिंदी अर्थ: “एकचक्रम्” रूपक के लेखक विद्वान एन. रङ्गनाथशर्मा हैं।

(ख) एन. रङ्गनाथशर्मणः जन्म कदा कुत्र च अभवत्?

उत्तर: एन. रङ्गनाथशर्मणः जन्म 7.4.1926 दिनाङ्के कर्णाटक-राज्यस्य शिवमोग्गमण्डलस्य नडळल्ली ग्रामे अभवत्।

हिंदी अर्थ: एन. रङ्गनाथशर्मा का जन्म 7 अप्रैल 1926 को कर्नाटक के शिवमोग्गा मंडल के नडळल्ली गाँव में हुआ था।

(ग) एन. रङ्गनाथशर्मणः प्रसिद्धाः कृतयः काः सन्ति?

उत्तर: एन. रङ्गनाथशर्मणः बाहुबलिविजयम्, एकचक्रम्, कुसुमाञ्जलिः, श्रीशङ्करचरितामृतम् इत्यादयः प्रसिद्धाः कृतयः सन्ति।

हिंदी अर्थ: उनकी प्रमुख कृतियाँ बाहुबलिविजयम्, एकचक्रम्, कुसुमाञ्जलिः और श्रीशङ्करचरितामृतम् आदि हैं।

अमरकोषः

(क) असुरस्य पर्यायाः लिखत।

उत्तर: असुरः, दैत्यः, दैतेयः, दनुजेन्द्रारिः, दानवः इत्यादयः असुरस्य पर्यायाः सन्ति।

(ख) आयोधनस्य पर्यायाः लिखत।

उत्तर: युद्धम्, आयोधनम्, जन्यम्, प्रधनम्, प्रविदारणम् इत्यादयः आयोधनस्य पर्यायाः सन्ति।

(ग) तनयस्य पर्यायाः लिखत।

उत्तर: आत्मजः, तनयः, सूनुः, पुत्रः इत्यादयः तनयस्य पर्यायाः सन्ति।

शब्द-संपदा

शब्द हिन्दी अर्थ English Meaning
अभिहितम् कहा गया Said
आकर्णय सुनो Listen
आतिथेयः अतिथि की सेवा करने वाला Host
आयोधनम् युद्ध Battle
उत्फुल्लाक्षः विकसित नेत्रों वाला One with wide-open eyes
औदरिकः पेटू / भोजनप्रिय One who eats continuously
कामम् निश्चित ही Certainly
जठरस्थाय पेट में स्थित के लिए For what is inside the stomach
निषूदकः विनाशक Destroyer
क्षुद्रमृगम् छोटे पशु को Small animal
क्षत्रियाण्या क्षत्रिय की पत्नी से By the wife of Kshatriya
परिदेवयते विलाप करता है Laments
परिवेषय परोसो Serve
पीवरौ दो स्थूल / मजबूत Two stout
पौराः नागरिक Citizens
प्रतिवेशी पड़ोसी Neighbour
प्रतिश्रुतम् प्रतिज्ञात Promised
प्रभूतम् अधिक Abundant
प्रतिश्रवः प्रतिज्ञा-वचन Promise
प्रत्यादेशम् अवज्ञा / उल्लंघन Disobedience
बाढम् निश्चित Certainly
मल्लयुद्धम् पहलवानों का युद्ध Wrestling
मानुषापसद हे निकृष्ट मानव O human of low cadre
मृष्टान्नम् स्वादिष्ट भोजन Tasty food
वाचाट हे डींग मारने वाले O boastful
विप्रस्य ब्राह्मण का Of Brahmana
विशङ्कया विशेष संदेह से By doubt
व्याघ्रगह्वरम् बाघ का निवास-स्थान Tiger-cave
श्रोत्रियः जिसने वेद पढ़ा हो One who has read the Vedas
हनिष्यामि मार दूँगा Will kill
हुताशनाय अग्नि को For the fire

Chapter-Wise NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada

Chapter No. Chapter Name
Chapter 1 सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम्
Chapter 2 सुखस्य मूलं धर्मः धर्मस्य मूलम् अर्थः
Chapter 3 आत्मवत्सर्वभूतेषु यः पश्यति सः पण्डितः
Chapter 4 न खलु वयस्तेजसो हेतुः
Chapter 5 एषा सा कृतकबुद्धिः मानवबुद्धेः सहकरी
Chapter 6 मनःपूतं समाचरेत्
Chapter 7 उपायं चिन्तयेत् प्राज्ञस्तथापायं च चिन्तयेत्
Chapter 8 अन्नाद् आनन्दं प्रति
Chapter 9 कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः
Chapter 10 णमो अरिहंताणम्
Chapter 11 वर्णोच्चारण-शिक्षा २
Chapter 12 अन्वयः
Chapter 13 समासः
Chapter 14 वाच्यम्
Chapter 15 शब्दरूपाणि
Chapter 16 धातुरूपाणि

Topics Covered in NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 9

NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 9 cover the Mahabharata-based dramatic text, grammar exercises and activity-based learning from “कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः”.

  • महाभारत के बकासुर-वध प्रसंग पर आधारित एकचक्रम् रूपक
  • एकचक्रनगरे पाण्डवों का ब्राह्मण-गृह में निवास
  • कुन्ती द्वारा ब्राह्मण-परिवार की रक्षा का निर्णय
  • उपकार और प्रत्युपकार को सनातन धर्म के रूप में समझना
  • भीम का साहस, क्षत्रिय-धर्म और बकासुर-वध का संकल्प
  • युधिष्ठिर, अर्जुन, नकुल और सहदेव के संवादों से चरित्र-चित्रण
  • बकासुर और भीम के बीच धर्म-अधर्म का संवाद
  • एकपदेन उत्तरम् और पूर्णवाक्येन उत्तर लेखन
  • कथन किसने किससे कहा, इसका अभ्यास
  • सन्धिविच्छेद और सन्धि-नाम की पहचान
  • पर्यायवाची, विपरीतार्थक और विशेषण-विशेष्य अभ्यास
  • समस्तपद और विग्रह की समझ
  • भाव-मेलन और संवाद-भाव पहचानना
  • वाच्यपरिवर्तनम् और कर्तृवाच्य-कर्मवाच्य अभ्यास
  • रूपक-अभिनय, पात्र-टिप्पणी और महाभारत-पात्र चर्चा

Important Concepts in NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 9

Concept Explanation Exam Use
कृतं प्रतिकृतम् उपकार का प्रत्युपकार करना सनातन धर्म है। मुख्य भाव
एकचक्रम् एन. रङ्गनाथशर्मा द्वारा रचित लघु रूपकम् स्रोत-परिचय
बकासुरवधः महाभारत का प्रसंग जिसमें भीम बकासुर का वध करते हैं। कथा-समझ
कुन्ती करुणा और धर्मपूर्ण निर्णय की प्रतीक चरित्र-विश्लेषण
भीमः बल, साहस और क्षत्रिय-धर्म का प्रतीक पाठ-आधारित उत्तर
नररक्षणम् मनुष्यों की रक्षा क्षत्रिय का धर्म है। पूर्णवाक्य उत्तर
सन्धिविच्छेद संयुक्त पदों को अलग करना और सन्धि-नाम लिखना Grammar
समस्तपद विग्रह से संयुक्त पद बनाना Grammar
वाच्यपरिवर्तनम् कर्तृवाच्य और कर्मवाच्य में परिवर्तन Grammar
पर्यायवाची आयोधनम्-युद्धम्, विप्रः-ब्राह्मणः जैसे शब्द शब्दज्ञान

FAQs (Frequently Asked Questions)

इसका अर्थ है कि किए गए उपकार का प्रत्युपकार होना चाहिए; यही सनातन धर्म है। पाठ में भीम ब्राह्मण परिवार के उपकार को याद कर उनके संकट में सहायता करने का निर्णय लेता है।

Chapter 9 महाभारत के बकासुर-वध प्रसंग पर आधारित है। यह पाठ एन. रङ्गनाथशर्मा के “एकचक्रम्” नामक लघु रूपक के तृतीय और चतुर्थ अंकों से लिया गया है।

भीम इसलिए तैयार होता है क्योंकि ब्राह्मण परिवार ने पाण्डवों का भिक्षा देकर उपकार किया था। भीम मानता है कि उपकार का प्रत्युपकार करना सनातन धर्म है और नरभक्षी राक्षस का विनाश करना क्षत्रिय का धर्म है।

युधिष्ठिर इसलिए चिंतित होते हैं क्योंकि वे भीम के बल पर पाण्डवों की सुरक्षा निर्भर मानते हैं। उन्हें लगता है कि जिस भीम से दुर्योधन भी डरता है, उसे बकासुर के पास भेजना जोखिमपूर्ण है।