NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 6
“मनःपूतं समाचरेत्” पाठ में मन, वाणी, आचरण, अभ्यास, धैर्य, पुरुषार्थ और विवेक से जुड़े संस्कृत सुभाषित दिए गए हैं।
NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 6 में पूर्णवाक्येन उत्तरम्, रिक्तस्थानपूर्ति, प्रश्ननिर्माणम्, श्लोक-विश्लेषण, अन्वय, सन्धिविच्छेद और समस्तपद अभ्यास हल किए गए हैं।
किसी भी कार्य की सफलता केवल बाहरी विधि से नहीं, बल्कि मन की पवित्रता, विचार की स्पष्टता और आचरण की शुद्धता से जुड़ी होती है। “मनःपूतं समाचरेत्” में मनुस्मृति, श्रीमद्भगवद्गीता, नीतिशतक, पंचतंत्र, मालविकाग्निमित्र और किरातार्जुनीयम् जैसे ग्रंथों से चुने गए सुभाषित विद्यार्थियों को जीवन-मूल्य सिखाते हैं। ये श्लोक बताते हैं कि कार्य सोच-समझकर करना चाहिए, अभ्यास से कठिन काम भी संभव होते हैं, पुरुषार्थ भाग्य से बड़ा है और श्रेष्ठ व्यक्ति का आचरण समाज को दिशा देता है।
Key Takeaways
- पाठ का नाम: मनःपूतं समाचरेत्
- मुख्य विषय: शुद्ध आचरण, धर्मलक्षण, अभ्यास, धैर्य, पुरुषार्थ और विवेक
- मुख्य स्रोत: मनुस्मृति, श्रीमद्भगवद्गीता, सुभाषितरत्नभाण्डागार, नीतिशतक, पंचतंत्र, मालविकाग्निमित्रम् और किरातार्जुनीयम्
- मुख्य अभ्यास: पूर्णवाक्येन उत्तरम्, रिक्तस्थानपूर्ति, प्रश्ननिर्माणम्, श्लोक-पठन, भावार्थ, अन्वय, सन्धिविच्छेद और समस्तपद
NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 6 Structure 2026
| Section | Text / Skill Area | Main Question Type |
| अभ्यासाद् जायते सिद्धिः | textbook exercises | पूर्णवाक्य उत्तर, रिक्तस्थान, प्रश्ननिर्माणम् |
| श्लोक-विश्लेषण | क्रियापद, विशेषण, अर्थ और भाव | पद-पहचान और व्याख्या |
| व्याकरण | सन्धिविच्छेद, समस्तपद, अन्वय | Grammar practice |
| स्वाध्याय | जीवन-मूल्य और अनुभव | Value-based writing |
| भारतीय ज्ञान-परंपरा | ग्रंथ और ग्रंथकर्ता | Project / table-based learning |
NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 6: मनःपूतं समाचरेत्
Manahputam Samacharet NCERT Solutions में उत्तर पुस्तक के अभ्यास क्रम में दिए गए हैं। यह section विद्यार्थियों को Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 6 Question Answer को textbook-based format में समझने में मदद करता है।
अभ्यासाद् जायते सिद्धिः
1. अधः प्रदत्तानां प्रश्नानां पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत
(क) लोकः कस्य आचरणम् अनुकरोति?
उत्तर: लोकः श्रेष्ठस्य आचरणम् अनुकरोति।
हिंदी अर्थ: लोग श्रेष्ठ व्यक्ति के आचरण का अनुसरण करते हैं।
(ख) कीदृशी वाणी वक्तव्या?
उत्तर: सत्यपूता वाणी वक्तव्या।
हिंदी अर्थ: सत्य से पवित्र वाणी बोलनी चाहिए।
(ग) लक्ष्मीः कम् उपैति?
उत्तर: लक्ष्मीः उद्योगिनं पुरुषसिंहम् उपैति।
हिंदी अर्थ: लक्ष्मी परिश्रमी और सिंह के समान पराक्रमी व्यक्ति के पास आती है।
(घ) उत्तमजनाः कार्यं प्रारभ्य किं न कुर्वन्ति?
उत्तर: उत्तमजनाः कार्यं प्रारभ्य विघ्नैः पुनः पुनः प्रतिहन्यमानाः अपि कार्यं न परित्यजन्ति।
हिंदी अर्थ: उत्तम लोग कार्य शुरू करने के बाद बार-बार बाधाएँ आने पर भी कार्य नहीं छोड़ते।
(ङ) धर्मस्य लक्षणानि कानि?
उत्तर: धृतिः, क्षमा, दमः, अस्तेयम्, शौचम्, इन्द्रियनिग्रहः, धीः, विद्या, सत्यम्, अक्रोधः च धर्मस्य दशकं लक्षणम् अस्ति।
हिंदी अर्थ: धैर्य, क्षमा, दम, चोरी न करना, पवित्रता, इन्द्रिय-निग्रह, बुद्धि, विद्या, सत्य और क्रोध न करना—ये धर्म के दस लक्षण हैं।
(च) सकलाः कलाः कस्मात् सिध्यन्ति?
उत्तर: सकलाः कलाः अभ्यासात् सिध्यन्ति।
हिंदी अर्थ: सभी कलाएँ अभ्यास से सिद्ध होती हैं।
(छ) सम्पदः कं वृणुते?
उत्तर: सम्पदः विमृश्यकारिणं गुणलुब्धं जनं स्वयमेव वृणुते।
हिंदी अर्थ: संपत्तियाँ विचारपूर्वक कार्य करने वाले और गुणों की चाह रखने वाले व्यक्ति को स्वयं चुनती हैं।
2. अधोलिखितेषु श्लोकांशेषु रिक्तस्थानानि पूरयत
(क) ............................................ परमापदां पदम्।
उत्तर: अविवेकः परमापदां पदम्।
(ख) सन्तः ............................................ अन्यतरद् भजन्ते।
उत्तर: सन्तः परीक्ष्य अन्यतरद् भजन्ते।
(ग) दैवं निहत्य कुरु ............................................ आत्मशक्त्या।
उत्तर: दैवं निहत्य कुरु पौरुषम् आत्मशक्त्या।
(घ) स यत् ............................................ कुरुते।
उत्तर: स यत् प्रमाणं कुरुते।
(ङ) धीर्विद्या सत्यमक्रोधो ............................................ धर्मलक्षणम्।
उत्तर: धीर्विद्या सत्यमक्रोधो दशकं धर्मलक्षणम्।
3. रेखाङ्कितानि पदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत
(क) नीचैः विघ्नभयेन कार्यं न प्रारभ्यते।
उत्तर: कैः विघ्नभयेन कार्यं न प्रारभ्यते?
(ख) सकलाः कलाः अभ्यासात् सिध्यन्ति।
उत्तर: सकलाः कलाः कस्मात् सिध्यन्ति?
(ग) वस्त्रपूतं जलं पिबेत्।
उत्तर: कीदृशं जलं पिबेत्?
(घ) लक्ष्मीः पुरुषसिंहम् उपैति।
उत्तर: लक्ष्मीः कम् उपैति?
(ङ) सन्तः परीक्ष्य अन्यतरद् भजन्ते।
उत्तर: के परीक्ष्य अन्यतरद् भजन्ते?
(च) क्रियां सहसा न विदधीत।
उत्तर: कां सहसा न विदधीत?
4. अधोलिखितं श्लोकं पठित्वा प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत
श्लोकः:
दृष्टिपूतं न्यसेत् पादं वस्त्रपूतं जलं पिबेत्।
सत्यपूतां वदेत् वाचं मनःपूतं समाचरेत्॥
(क) अस्मिन् श्लोके प्रथमं क्रियापदं किम्?
उत्तर: अस्मिन् श्लोके प्रथमं क्रियापदं “न्यसेत्” अस्ति।
(ख) कं न्यसेत्?
उत्तर: पादं न्यसेत्।
(ग) कीदृशं पादं न्यसेत्?
उत्तर: दृष्टिपूतं पादं न्यसेत्।
(घ) द्वितीयं किं क्रियापदम् अस्ति?
उत्तर: द्वितीयं क्रियापदं “पिबेत्” अस्ति।
(ङ) किं पिबेत्?
उत्तर: जलं पिबेत्।
(च) कीदृशं जलं पिबेत्?
उत्तर: वस्त्रपूतं जलं पिबेत्।
(छ) तृतीयं किं क्रियापदम् अस्ति?
उत्तर: तृतीयं क्रियापदं “वदेत्” अस्ति।
(ज) कां वदेत्?
उत्तर: वाचं वदेत्।
(झ) कीदृशीं वाणीं वदेत्?
उत्तर: सत्यपूतां वाचं वदेत्।
(ञ) चतुर्थं किं क्रियापदम् अस्ति?
उत्तर: चतुर्थं क्रियापदं “समाचरेत्” अस्ति।
(ट) कथं समाचरेत्?
उत्तर: मनःपूतं समाचरेत्।
5. मञ्जूषातः पदानि चित्वा भावार्थेषु रिक्तस्थानानि पूरयत
मञ्जूषा: बुद्धिः, लक्ष्यं, पुरुषस्य, अभिप्रायं, धीराः, नूतनम्
(क) लक्ष्मीः प्रयत्नशीलस्य पराक्रमिणः __________ समीपं स्वयम् आगच्छति...
उत्तर:
लक्ष्मीः प्रयत्नशीलस्य पराक्रमिणः पुरुषस्य समीपं स्वयम् आगच्छति। कापुरुषाः तु ‘विधिः एव बलीयान्’ इति वदन्ति। ये पौरुषेण परिस्थितिम् अतिक्रम्य कार्याणि साधयन्ति ते एव धीराः। प्रयत्नं कृत्वा अपि यदि लक्ष्यं न प्राप्तं तर्हि तत्र दोषः नास्ति खलु।
(ख) पुरातनम् अस्ति इति कारणेन किमपि वस्तु...
उत्तर:
पुरातनम् अस्ति इति कारणेन किमपि वस्तु, तत्त्वं, व्यक्तित्वं वा समीचीनं भवेदेव इति नियमः नास्ति। तथैव नूतनम् अस्ति इति कारणेन दोषरहितं भवेत् इत्यपि नियमः नास्ति। येषां बुद्धिः पक्वा अस्ति ते परीक्षण-निरीक्षणानन्तरम् एव उत्तमं स्वीकुर्वन्ति। किन्तु अज्ञानाः अन्येषाम् अभिप्रायं श्रुत्वा तदनुसारेण प्रवर्तन्ते।
6. श्लोकानाम् अन्वयेषु रिक्तस्थानानि पूरयत
(क) सर्वाः .................... अभ्यासेन सिध्यन्ति...
उत्तर:
सर्वाः क्रियाः अभ्यासेन सिध्यन्ति। सकलाः कलाः अभ्यासात् सिध्यन्ति। ध्यानमौनादि अपि अभ्यासात् सिध्यति। अभ्यासस्य दुष्करं किम् अस्ति?
(ख) श्रेष्ठः यत् यत् .................... इतरः जनः...
उत्तर:
श्रेष्ठः यत् यत् आचरति, इतरः जनः तत्तत् एव आचरति। सः यत् प्रमाणं कुरुते, लोकः तत् अनुवर्तते।
7. यथोचितं मेलनं कुरुत
| श्लोकांशः | स्रोतोग्रन्थः |
| (क) पुराणमित्येव न साधु सर्वम् | 4. मालविकाग्निमित्रम् |
| (ख) प्रारभ्य चोत्तमजनाः न परित्यजन्ति | 3. नीतिशतकम् |
| (ग) यद्यदाचरति श्रेष्ठः | 5. श्रीमद्भगवद्गीता |
| (घ) धृतिः क्षमा दमोऽस्तेयम् | 1. मनुस्मृतिः |
| (ङ) उद्योगिनं पुरुषसिंहमुपैति लक्ष्मीः | 2. पञ्चतन्त्रम् |
8. रेखाङ्कितेषु पदेषु सन्धिविच्छेदं कुरुत
यथा— यो बहून्यपि साधयेत्
उत्तर: बहूनि + अपि
(क) धृतिः क्षमा दमोऽस्तेयम्।
उत्तर: दमः + अस्तेयम्।
(ख) पुराणमित्येव न साधु सर्वम्।
उत्तर: पुराणम् + इति + एव।
(ग) विघ्नैः पुनरपि प्रतिहन्यमानाः।
उत्तर: पुनः + अपि।
(घ) प्रारभ्य चोत्तमजनाः न परित्यजन्ति।
उत्तर: च + उत्तमजनाः।
(ङ) विघ्नविहता विरमन्ति मध्याः।
उत्तर: विघ्नविहताः + विरमन्ति।
(च) लोकस्तदनुवर्तते।
उत्तर: लोकः + तत् + अनुवर्तते।
(छ) सन्तः परीक्ष्यान्यतरद् भजन्ते।
उत्तर: परीक्ष्य + अन्यतरद्।
9. अत्र कतिचन विग्रहवाक्यानि दत्तानि सन्ति। तेषां समस्तपदानि पाठात् चित्वा लिखत
यथा— मनसा पूतं समाचरेत्
उत्तर: मनःपूतम्।
(क) विघ्नैः विहताः कार्यात् विरमन्ति।
उत्तर: विघ्नविहताः।
(ख) वस्त्रेण पूतं जलं पिबेत्।
उत्तर: वस्त्रपूतम्।
(ग) पुरुषः सिंहः इव तम् उपैति लक्ष्मीः।
उत्तर: पुरुषसिंहम्।
(घ) उत्तमाः जनाः न परित्यजन्ति।
उत्तर: उत्तमजनाः।
(ङ) न विवेकः परमापदां पदम्।
उत्तर: अविवेकः।
स्वाध्यायान्मा प्रमदः
1. पाठे आगतेषु सुभाषितेषु कानि-कानि जीवनमूल्यानि सन्ति? तानि जीवनमूल्यानि अधिकृत्य पञ्च-पञ्च सुभाषितानि सङ्गृह्णीत। तेषां सन्दर्भग्रन्थानां नामानि अपि लिखत।
(क) पाठे आगतेषु सुभाषितेषु कानि-कानि जीवनमूल्यानि सन्ति?
उत्तर: पाठ में आए सुभाषितों में मन की शुद्धता, सत्यवादिता, धर्मपालन, श्रेष्ठ आचरण, अभ्यास, धैर्य, पुरुषार्थ, विवेक और विचारपूर्वक कार्य करने जैसे जीवन-मूल्य हैं।
| जीवनमूल्यम् | पाठ से संकेत |
| मनःशुद्धि | मनःपूतं समाचरेत् |
| सत्यवादिता | सत्यपूतां वदेत् वाचम् |
| धर्मपालन | धृतिः क्षमा दमोऽस्तेयम् |
| श्रेष्ठ आचरण | यद्यदाचरति श्रेष्ठः |
| अभ्यास | अभ्यासेन क्रियाः सर्वाः |
| धैर्य | उत्तमजनाः विघ्नेषु अपि कार्यं न त्यजन्ति |
| पुरुषार्थ | दैवं निहत्य कुरु पौरुषम् |
| विवेक | पुराण और नूतन दोनों का परीक्षण आवश्यक है |
| विमृश्यकारिता | सहसा विदधीत न क्रियाम् |
(ख) पञ्च जीवनमूल्यानि अधिकृत्य पञ्च सुभाषितानि लिखत।
उत्तर:
| जीवनमूल्यम् | सुभाषितम् | सन्दर्भ / स्रोत |
| सत्य | सत्यमेव जयते नानृतम्। | मुण्डकोपनिषद् |
| अहिंसा | अहिंसा परमो धर्मः। | नीति-वचन |
| परिश्रम | उद्योगिनं पुरुषसिंहमुपैति लक्ष्मीः। | पञ्चतन्त्रम् |
| अभ्यास | अभ्यासेन क्रियाः सर्वाः। | सुभाषितरत्नभाण्डागार |
| विवेक | सहसा विदधीत न क्रियाम्। | किरातार्जुनीयम् |
2. दृष्टिपूतं, वस्त्रपूतं, सत्यपूतं च आचरणं कथं भवेत् इति विषये स्वस्य अनुभवम् कक्षायां कथयत
(क) दृष्टिपूतं, वस्त्रपूतं, सत्यपूतं च आचरणं कथं भवेत्?
उत्तर: दृष्टिपूतम् आचरणम् यह है कि हम कोई भी कार्य करने से पहले उसके परिणाम को समझें। जैसे सड़क पार करते समय पहले देखकर कदम रखना चाहिए, वैसे ही जीवन में भी निर्णय सोच-समझकर लेना चाहिए।
वस्त्रपूतम् जलम् स्वच्छता और सावधानी का संकेत है। पीने का पानी शुद्ध होना चाहिए, क्योंकि स्वास्थ्य जीवन का आधार है।
सत्यपूता वाणी का अर्थ है कि हमारी वाणी सत्य, विनम्र और हितकारी होनी चाहिए। झूठ बोलने से विश्वास टूटता है। इसी प्रकार मनःपूतं समाचरेत् का अर्थ है कि सभी कार्य शुद्ध मन और अच्छे उद्देश्य से करने चाहिए।
यस्तु क्रियावान् मनुजः स विद्वान्
भारतीय-ज्ञान-परम्परा
नीचे दी गई सारिणी पाठ में दिए गए भारतीय ज्ञान-परंपरा से जुड़े ग्रंथों और ग्रंथकारों को समझने में मदद करती है।
| क्र. सं. | ग्रन्थस्य नाम | भारतीय-ज्ञानपरम्परा-स्थानम् | ग्रन्थकर्ता |
| 1 | रामायणम् | ऐतिहासिकं काव्यम् | महर्षिः वाल्मीकिः |
| 2 | मनुस्मृतिः | धर्मशास्त्रीयग्रन्थः | मनुः |
| 3 | श्रीमद्भगवद्गीता | ज्ञानोपदेशः | महर्षिः व्यासः |
| 4 | हठयोगप्रदीपिका | योग-दर्शनम् | स्वात्मारामः |
| 5 | नीतिशतकम् | नीति-साहित्यम् | भर्तृहरिः |
| 6 | पञ्चतन्त्रम् | कथा-साहित्यम् | विष्णुशर्मा |
| 7 | मालविकाग्निमित्रम् | रूपकम् | कालिदासः |
| 8 | किरातार्जुनीयम् | महाकाव्यम् | भारविः |
शब्द-संपदा
| शब्द | हिन्दी अर्थ | English Meaning |
| अनुवर्तते | अनुसरण करता है | Follows |
| अवद्यम् | निम्नस्तरीय / निंदनीय | Inferior |
| अस्तेयम् | चोरी न करना | Not stealing |
| आपदाम् | खतरों का | Of dangers |
| उद्योगिनम् | प्रयत्न करने वाले को | Industrious person |
| कापुरुषाः | कायर / अधम लोग | Cowards |
| गुणलुब्धाः | गुण चाहने वाले | Those who desire qualities |
| दमः | इन्द्रिय और मन को वश में करना | Self-control |
| दैवम् | भाग्य | Luck |
| निहत्य | अतिक्रमण करके | Having crossed |
| नीचैः | अधम लोगों द्वारा | By inferior people |
| न्यसेत् | रखे | Should place |
| पदम् | स्थान | Place |
| पुराणम् | पुराना | Old |
| पूतम् | शुद्ध | Cleansed |
| परप्रत्ययनेयबुद्धिः | दूसरों की राय से चलने वाला | Influenced by others |
| प्रतिहन्यमानाः | बाधित | Obstructed |
| भजन्ते | स्वीकारते हैं | Accept |
| मूढः | मूर्ख | Fool |
| यत्ने | यत्न में | By effort |
| वाचम् | वाणी को | Speech |
| विदधीत | करना चाहिए | Should be done |
| विघ्नविहताः | विघ्नों से बाधित | Struck by obstacles |
| विमृश्यकारिणम् | सोचकर कार्य करने वाले को | Thoughtful doer |
| विरमन्ति | छोड़ते हैं | Leave |
| वृणुते | आश्रय लेते हैं | Take refuge |
| शौचम् | पवित्रता | Purity |
| सन्तः | सज्जन लोग | Great people |
| सम्पदः | संपत्तियाँ | Wealth |
NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada
NCERT Solutions Class 9 Sanskrit Sharada में chapter-wise answers विद्यार्थियों को textbook अभ्यास, संस्कृत व्याकरण, शब्दार्थ और परीक्षा-तैयारी में मदद करते हैं।
Topics Covered in NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 6
NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 6 cover Sanskrit subhashitas, meanings, grammar exercises and life-value based activities from “मनःपूतं समाचरेत्”.
- शुद्ध मन, सत्य वाणी, स्वच्छ आचरण और सावधानीपूर्ण जीवन का संदेश
- धर्म के दस लक्षण: धृति, क्षमा, दम, अस्तेय, शौच, इन्द्रियनिग्रह, धी, विद्या, सत्य और अक्रोध
- श्रेष्ठ व्यक्ति के आचरण का समाज पर प्रभाव
- अभ्यास से कार्य, कला, ध्यान और मौन की सिद्धि
- विघ्नों में भी कार्य न छोड़ने वाले उत्तमजनों की विशेषता
- भाग्य की अपेक्षा पुरुषार्थ, आत्मशक्ति और यत्न का महत्व
- पुरानी और नई वस्तुओं को विवेकपूर्वक परखकर स्वीकार करने की दृष्टि
- जल्दबाजी से बचना और विचारपूर्वक कार्य करना
- सुभाषितों के अन्वय, सरलार्थ और भावार्थ की समझ
- संस्कृत में पूर्णवाक्येन उत्तरम् लिखने का अभ्यास
- रिक्तस्थानपूर्ति और श्लोकांशों की पुनरावृत्ति
- रेखांकित पदों के आधार पर प्रश्ननिर्माणम्
- श्लोक से क्रियापद, कर्म, विशेषण और भाव पहचानना
- सन्धिविच्छेद और समस्तपद की व्याकरणिक समझ
- भारतीय ज्ञान-परंपरा के ग्रंथ: मनुस्मृति, गीता, नीतिशतक, पंचतंत्र, मालविकाग्निमित्रम् और किरातार्जुनीयम्
Important Concepts in NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 6
| Concept | Explanation | Exam Use |
| मनःपूतम् | मन की पवित्रता से किया गया आचरण | मुख्य भाव |
| सत्यपूता वाणी | सत्य से पवित्र वाणी बोलना | श्लोक-व्याख्या |
| धर्मलक्षणम् | धर्म के दस लक्षण बताए गए हैं | पूर्णवाक्य उत्तर |
| श्रेष्ठ आचरण | श्रेष्ठ व्यक्ति का व्यवहार समाज अपनाता है | भावार्थ |
| अभ्यास | अभ्यास से सभी कार्य और कलाएँ सिद्ध होती हैं | रिक्तस्थान / अन्वय |
| विघ्न-सहनशीलता | उत्तमजन बाधाओं के बाद भी कार्य नहीं छोड़ते | जीवन-मूल्य |
| पौरुषम् | भाग्य से अधिक आत्मशक्ति और पुरुषार्थ पर बल | भावार्थ |
| विवेक | पुराना या नया होने से नहीं, परीक्षण से श्रेष्ठता तय होती है | विचारात्मक उत्तर |
| विमृश्यकारिता | सोच-समझकर कार्य करने की आदत | जीवन-मूल्य |
| सन्धिविच्छेद | संयुक्त पदों को अलग करना | Grammar |
| समस्तपद | विग्रहवाक्य से compound word पहचानना | Grammar |
| अन्वय | श्लोक-पंक्तियों को सरल गद्यक्रम में रखना | श्लोक-समझ |
Chapter-Wise NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada
| Chapter No. | Chapter Name |
| Chapter 1 | सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम् |
| Chapter 2 | सुखस्य मूलं धर्मः धर्मस्य मूलम् अर्थः |
| Chapter 3 | आत्मवत्सर्वभूतेषु यः पश्यति सः पण्डितः |
| Chapter 4 | न खलु वयस्तेजसो हेतुः |
| Chapter 5 | एषा सा कृतकबुद्धिः मानवबुद्धेः सहकरी |
| Chapter 6 | मनःपूतं समाचरेत् |
| Chapter 7 | उपायं चिन्तयेत् प्राज्ञस्तथापायं च चिन्तयेत् |
| Chapter 8 | अन्नाद् आनन्दं प्रति |
| Chapter 9 | कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः |
| Chapter 10 | णमो अरिहंताणम् |
| Chapter 11 | वर्णोच्चारण-शिक्षा २ |
| Chapter 12 | अन्वयः |
| Chapter 13 | समासः |
| Chapter 14 | वाच्यम् |
| Chapter 15 | शब्दरूपाणि |
| Chapter 16 | धातुरूपाणि |
FAQs (Frequently Asked Questions)
“मनःपूतं समाचरेत्” का अर्थ है कि मनुष्य को शुद्ध मन से आचरण करना चाहिए। कोई भी कार्य करने से पहले उद्देश्य पवित्र, उचित और हितकारी होना चाहिए।
इस chapter में धर्म के दस लक्षण बताए गए हैं—धृति, क्षमा, दम, अस्तेय, शौच, इन्द्रियनिग्रह, धी, विद्या, सत्य और अक्रोध। ये गुण व्यक्ति को श्रेष्ठ जीवन और सही आचरण की ओर ले जाते हैं।
इस श्लोक से शिक्षा मिलती है कि समाज श्रेष्ठ व्यक्तियों के आचरण का अनुसरण करता है। इसलिए नेता, शिक्षक, माता-पिता और आदर्श व्यक्ति जो करते हैं, उसका प्रभाव दूसरों पर पड़ता है।
इसका भाव है कि अभ्यास से सभी कार्य सिद्ध होते हैं। कला, अध्ययन, ध्यान, मौन और जीवन-कौशल बार-बार अभ्यास करने से ही विकसित होते हैं।
पाठ में कहा गया है कि लक्ष्मी परिश्रमी और साहसी व्यक्ति के पास आती है। कायर लोग केवल भाग्य पर निर्भर रहते हैं, लेकिन श्रेष्ठ व्यक्ति अपनी आत्मशक्ति और प्रयास से कार्य सिद्ध करने का प्रयत्न करते हैं।