NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 12
“अन्वयः” पाठ में संस्कृत श्लोकों के पदों को सही गद्यक्रम में रखकर अर्थ समझने की विधि सिखाई गई है।
NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 12 में दण्डान्वयः, खण्डान्वयः, पदच्छेदः, आकाङ्क्षा, योग्यता, आसत्तिः, तात्पर्यम् और श्लोक-अर्थ से जुड़े grammar concepts समझाए गए हैं।
संस्कृत श्लोकों में शब्द हमेशा सामान्य वाक्य-क्रम में नहीं आते, क्योंकि कवि छन्द, लय और अर्थ-सौंदर्य के अनुसार पदों को आगे-पीछे रखता है। इसी कारण विद्यार्थी कई बार कर्ता, कर्म, क्रिया और विशेषण का संबंध समझने में अटक जाते हैं। अन्वयः Class 9 इसी समस्या का समाधान देता है। इसमें श्लोक के पदों को सरल गद्यक्रम में व्यवस्थित करने की दो विधियाँ—दण्डान्वयः और खण्डान्वयः—समझाई गई हैं। ये NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 12 students को Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 12 Question Answer, अन्वयः exercise answers, श्लोक-अर्थ और Class 9 Sanskrit Chapter 12 grammar answers revise करने में मदद करते हैं।
Key Takeaways
- पाठ का नाम: अन्वयः
- मुख्य विषय: श्लोकों का गद्यक्रम और अर्थ-समझ
- मुख्य विधियाँ: दण्डान्वयविधिः और खण्डान्वयविधिः
- मुख्य सहायक कारण: आकाङ्क्षा, योग्यता, आसत्तिः और तात्पर्यम्
- मुख्य अभ्यास: पदच्छेद, अन्वय, श्लोक-अर्थ, प्रश्नोत्तर और उदाहरण-विश्लेषण
NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 12 Structure 2026
| Section | Text / Skill Area | Main Learning Focus |
| अन्वय-परिचय | श्लोक-पदों का संबंध | अर्थ-समझ |
| दण्डान्वयः | पूर्ण श्लोक का क्रमबद्ध अन्वय | कर्ता-कर्म-क्रिया |
| खण्डान्वयः | प्रश्नोत्तर से चरणवार अन्वय | आकाङ्क्षा-विधि |
| सहकारि-कारणानि | आकाङ्क्षा, योग्यता, आसत्तिः, तात्पर्यम् | भाषा-सम्बन्ध |
| उदाहरण | शास्त्राण्यधीत्यापि…, सम्पूर्णकुम्भः… | श्लोक-विश्लेषण |
| शब्द-संपदा | Sanskrit-Hindi-English meanings | Vocabulary |
NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 12: अन्वयः
इस section में अन्वयः question answer और grammar explanations पुस्तक के क्रम के अनुसार दिए गए हैं। यह विद्यार्थियों को Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 12 solutions को textbook-based format में समझने में मदद करता है।
अन्वयः
(क) अन्वयः किम्?
उत्तर: श्लोके विद्यमानानां पदानां परस्परं सम्बन्धं सरल-गद्यक्रमेण दर्शयितुं यः क्रमः क्रियते, सः अन्वयः इति कथ्यते।
हिंदी अर्थ: श्लोक में आए शब्दों के आपसी संबंध को सरल गद्य-क्रम में दिखाने की प्रक्रिया को अन्वय कहते हैं।
(ख) श्लोकानाम् अर्थम् अवगन्तुं अन्वयः किमर्थम् आवश्यकः?
उत्तर: श्लोके छन्दसः अनुगुणं कर्तृपदं, कर्मपदं, क्रियापदं, विशेषणादिकं च पूर्वापरं भवितुम् अर्हति। अतः पदानां सम्बन्धं ज्ञातुं अन्वयः आवश्यकः।
हिंदी अर्थ: श्लोक में छन्द के कारण शब्द सामान्य क्रम में नहीं होते। इसलिए उनके संबंध और अर्थ को समझने के लिए अन्वय आवश्यक है।
(ग) श्लोकान्वयविधिः कतिविधः?
उत्तर: श्लोकान्वयविधिः द्विविधः—दण्डान्वयविधिः खण्डान्वयविधिः च।
हिंदी अर्थ: श्लोक का अन्वय करने की दो विधियाँ हैं—दण्डान्वय और खण्डान्वय।
श्लोकान्वयविधिः
1. दण्डान्वयविधिः
(क) दण्डान्वयः कः?
उत्तर: दण्डवत् अन्वयः दण्डान्वयः इति कथ्यते। अस्मिन् विधौ श्लोकस्य सम्पूर्णः अन्वयः एकस्मिन् क्रमबद्धे गद्यरूपे क्रियते।
हिंदी अर्थ: दण्ड की तरह सीधे, क्रमबद्ध रूप में पूरे श्लोक का अन्वय करना दण्डान्वय कहलाता है।
(ख) दण्डान्वये सामान्यः क्रमः कः भवति?
उत्तर: दण्डान्वये विशेषणं विशेष्यस्य पूर्वं योज्यते, कर्तृपदं कर्मपदं च क्रमशः स्थापिते भवतः, सर्वान्ते क्रियापदं लिख्यते।
हिंदी अर्थ: दण्डान्वय में विशेषण को विशेष्य से पहले रखा जाता है, फिर कर्ता-कर्म आदि पद रखे जाते हैं और अंत में क्रिया लिखी जाती है।
(ग) यदि श्लोके कर्तृपदं क्रियापदं वा न दृश्यते तर्हि किं करणीयम्?
उत्तर: यदि श्लोके कर्तृपदं क्रियापदं वा न दृश्यते, तर्हि अर्थपूर्णतायै अध्याहाररूपेण तत् पदं योजनीयम्।
हिंदी अर्थ: यदि श्लोक में कर्ता या क्रिया स्पष्ट न हो, तो अर्थ पूरा करने के लिए उपयुक्त शब्द जोड़ा जाता है। इसे अध्याहार कहते हैं।
दण्डान्वयः — उदाहरणम्
श्लोकः:
शास्त्राण्यधीत्यापि भवन्ति मूर्खाः
यस्तु क्रियावान् पुरुषस्स विद्वान्।
सुचिन्तितं चौषधमातुराणां
न नाममात्रेण करोत्यरोगम्॥
(क) अस्य श्लोकस्य पदच्छेदः लिखत।
उत्तर: शास्त्राणि, अधीत्य, अपि, भवन्ति, मूर्खाः, यः, तु, क्रियावान्, पुरुषः, सः, विद्वान्, सुचिन्तितम्, च, औषधम्, आतुराणाम्, न, नाममात्रेण, करोति, अरोगम्।
(ख) अस्य श्लोकस्य दण्डान्वयः लिखत।
उत्तर: केचन शास्त्राणि अधीत्य अपि मूर्खाः भवन्ति। यः क्रियावान् सः पुरुषः तु विद्वान् भवति। यथा सुचिन्तितम् औषधं नाममात्रेण आतुराणाम् अरोगं न करोति।
(ग) अस्य श्लोकस्य सरलार्थः लिखत।
उत्तर: कुछ लोग शास्त्रों का अध्ययन करके भी मूर्ख रहते हैं। जो व्यक्ति कर्मशील होता है, वही वास्तव में विद्वान होता है। जैसे अच्छी तरह सोची गई औषधि केवल नाम लेने से रोगियों को स्वस्थ नहीं करती, वैसे ही केवल ज्ञान का नाम लेने से लाभ नहीं होता; उसे आचरण में लाना पड़ता है।
(घ) अस्मिन् श्लोके “केचन” इति पदस्य अध्याहारः किमर्थं कृतः?
उत्तर: “शास्त्राणि अधीत्यापि मूर्खाः भवन्ति” इति वाक्ये “के मूर्खाः भवन्ति?” इति जिज्ञासा भवति। श्लोके तदुत्तरं नास्ति, अतः अर्थपूर्णतायै “केचन” इति पदस्य अध्याहारः कृतः।
हिंदी अर्थ: “शास्त्र पढ़कर भी मूर्ख होते हैं”—यहाँ प्रश्न उठता है कि कौन मूर्ख होते हैं? इसलिए “केचन” शब्द जोड़ा गया है।
(ङ) “यस्तु क्रियावान् पुरुषस्स विद्वान्” इत्यत्र किं अध्याहार्यम्?
उत्तर: अत्र “भवति” इति क्रियापदं अध्याहार्यम्।
हिंदी अर्थ: यहाँ “भवति” क्रिया जोड़ी जानी चाहिए।
2. खण्डान्वयविधिः
(क) खण्डान्वयः कः?
उत्तर: खण्डशः अन्वयः खण्डान्वयः इति कथ्यते। अस्मिन् विधौ सम्पूर्णश्लोकस्य अन्वयः आरम्भे न क्रियते, अपि तु प्रश्नोत्तरमाध्यमेन प्रतिपदं परस्परम् अन्वयः क्रियते।
हिंदी अर्थ: श्लोक को छोटे-छोटे खण्डों में प्रश्नोत्तर के माध्यम से जोड़कर अन्वय करना खण्डान्वय कहलाता है।
(ख) खण्डान्वयविधिः अन्येन नाम्ना किम् उच्यते?
उत्तर: खण्डान्वयविधिः आकाङ्क्षाविधिः इत्यपि उच्यते।
हिंदी अर्थ: खण्डान्वय विधि को आकाङ्क्षा-विधि भी कहते हैं।
(ग) खण्डान्वये प्रथमं कस्य आधारेण प्रश्नः क्रियते?
उत्तर: खण्डान्वये प्रथमं क्रियापदेन आकाङ्क्षाप्रश्नः क्रियते।
हिंदी अर्थ: खण्डान्वय में पहले क्रियापद के आधार पर प्रश्न किया जाता है।
(घ) खण्डान्वयविधौ प्रश्नाः कीदृशाः भवन्ति?
उत्तर: खण्डान्वयविधौ प्रश्नाः सामान्यतया द्विपदात्मकाः, त्रिपदात्मकाः, चतुष्पदात्मकाः वा भवन्ति।
हिंदी अर्थ: खण्डान्वय में प्रश्न छोटे होते हैं—दो, तीन या चार पदों वाले।
खण्डान्वयः — उदाहरणम्
श्लोकः:
सम्पूर्णकुम्भो न करोति शब्दम्
अर्धो घटो घोषमुपैति नूनम्।
विद्वान् कुलीनो न करोति गर्वम्
अल्पो जनो जल्पति साट्टहासम्॥
(क) अस्य श्लोकस्य पदच्छेदः लिखत।
उत्तर: सम्पूर्णकुम्भः, न, करोति, शब्दम्, अर्धः, घटः, घोषम्, उपैति, नूनम्, विद्वान्, कुलीनः, न, करोति, गर्वम्, अल्पः, जनः, जल्पति, साट्टहासम्।
(ख) प्रथमचरणस्य खण्डान्वयः कथं क्रियते?
उत्तर:
| प्रश्नः | उत्तरम् |
| क्रियापदं किम्? | करोति |
| कः न करोति? | सम्पूर्णकुम्भः न करोति |
| सम्पूर्णकुम्भः किं न करोति? | सम्पूर्णकुम्भः शब्दं न करोति |
(ग) द्वितीयचरणस्य खण्डान्वयः लिखत।
उत्तर:
| प्रश्नः | उत्तरम् |
| क्रियापदं किम्? | उपैति |
| कः उपैति? | घटः उपैति |
| कीदृशः घटः उपैति? | अर्धः घटः उपैति |
| अर्धः घटः किम् उपैति? | अर्धः घटः घोषम् उपैति |
| अर्धः घटः घोषं कथम् उपैति? | अर्धः घटः घोषं नूनम् उपैति |
(घ) तृतीयचरणस्य खण्डान्वयः लिखत।
उत्तर:
| प्रश्नः | उत्तरम् |
| क्रियापदं किम्? | करोति |
| कः न करोति? | विद्वान् न करोति |
| कीदृशः विद्वान् न करोति? | कुलीनः विद्वान् न करोति |
| कुलीनः विद्वान् किं न करोति? | कुलीनः विद्वान् गर्वं न करोति |
(ङ) चतुर्थचरणस्य खण्डान्वयः लिखत।
उत्तर:
| प्रश्नः | उत्तरम् |
| क्रियापदं किम्? | जल्पति |
| कः जल्पति? | जनः जल्पति |
| कीदृशः जनः जल्पति? | अल्पः जनः जल्पति |
| अल्पः जनः कथं जल्पति? | अल्पः जनः साट्टहासं जल्पति |
(च) सम्पूर्णश्लोकस्य अन्वयः लिखत।
उत्तर: सम्पूर्णकुम्भः शब्दं न करोति। अर्धः घटः घोषं नूनम् उपैति। कुलीनः विद्वान् गर्वं न करोति। अल्पः जनः साट्टहासं जल्पति।
(छ) अस्य श्लोकस्य सरलार्थः लिखत।
उत्तर: भरा हुआ घड़ा आवाज नहीं करता, लेकिन आधा भरा घड़ा अधिक आवाज करता है। उसी प्रकार सच्चा विद्वान और कुलीन व्यक्ति घमंड नहीं करता, जबकि अल्पज्ञ व्यक्ति हँस-हँसकर अधिक बोलता है।
अन्वयार्थं सहकारि-कारणानि
श्लोक का सही पदच्छेदः, अन्वय और अर्थ समझने के लिए चार सहायक कारण बताए गए हैं—आकाङ्क्षा, योग्यता, आसत्तिः और तात्पर्यम्।
(क) आकाङ्क्षा का अर्थ क्या है?
उत्तर: अपेक्षित-विषयस्य ज्ञाने इच्छा आकाङ्क्षा इति कथ्यते।
हिंदी अर्थ: अपेक्षित पद या अर्थ को जानने की इच्छा को आकाङ्क्षा कहते हैं।
उदाहरण: “पठति” सुनकर प्रश्न उठता है—कः पठति? किं पठति? कुत्र पठति? कदा पठति?
(ख) योग्यता का अर्थ क्या है?
उत्तर: पदानां मध्ये परस्पर-सम्बन्धस्य पात्रता एव योग्यता।
हिंदी अर्थ: शब्दों के बीच उचित अर्थ-संबंध की क्षमता को योग्यता कहते हैं।
उदाहरण: “गगने पुष्पं विकसति” में योग्यता नहीं है, क्योंकि आकाश में फूल नहीं खिलता।
(ग) आसत्तिः किम्?
उत्तर: पदानां परस्परं सामीप्यम् आसत्तिः इति कथ्यते।
हिंदी अर्थ: शब्दों का परस्पर निकट होना आसत्ति कहलाता है।
उदाहरण: “सः पुस्तकं पठति” एक साथ कहा जाए तो अर्थ स्पष्ट होता है; बहुत अंतराल देकर बोलने पर संबंध टूट सकता है।
(घ) तात्पर्यम् किम्?
उत्तर: शब्दविशेषात् अर्थविशेषस्य ज्ञाने इच्छा तात्पर्यम् इति कथ्यते।
हिंदी अर्थ: किसी विशेष शब्द से सही अर्थ जानने की इच्छा तात्पर्य कहलाती है।
उदाहरण: “शतायुर्भव” का अर्थ केवल “100 वर्ष जीवित रहो” नहीं, बल्कि “चिरंजीवी भव” है।
श्लोकान्वये ध्यानयोग्याः विषयाः
(क) अन्वय करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर:
- पहले श्लोक का पदच्छेदः करना चाहिए।
- क्रियापद पहचानना चाहिए।
- कर्ता और कर्म का संबंध देखना चाहिए।
- विशेषण को विशेष्य से जोड़ना चाहिए।
- तृतीया आदि विभक्तियों वाले पदों का सही संबंध समझना चाहिए।
- यदि कोई आवश्यक पद छूटा हो, तो अर्थ के अनुसार उसका अध्याहार करना चाहिए।
- अंत में पूरा गद्यक्रम सरल रूप में लिखना चाहिए।
(ख) दण्डान्वय और खण्डान्वय में मुख्य अंतर क्या है?
उत्तर:
| आधार | दण्डान्वयः | खण्डान्वयः |
| पद्धति | पूरा अन्वय एक क्रम में | प्रश्नोत्तर से खण्डों में |
| उपयोग | पूरे श्लोक का गद्यक्रम | कठिन श्लोक को चरणवार समझना |
| आधार | कर्ता-कर्म-क्रिया क्रम | आकाङ्क्षा और प्रश्न |
| विद्यार्थी-हित | जल्दी revision | गहरी समझ |
शब्द-संपदा
| शब्द | हिन्दी अर्थ | English Meaning |
| अन्वयः | पदों का संबंध / गद्यक्रम | Syntactic arrangement |
| पदच्छेदः | शब्द-विभाजन | Word separation |
| दण्डान्वयः | पूर्ण क्रमबद्ध अन्वय | Linear prose order |
| खण्डान्वयः | खण्डों में अन्वय | Segment-wise arrangement |
| आकाङ्क्षा | अपेक्षित पद जानने की इच्छा | Expectancy |
| योग्यता | उचित अर्थ-संबंध | Semantic fitness |
| आसत्तिः | शब्दों की निकटता | Proximity |
| तात्पर्यम् | अभिप्रेत अर्थ | Intended meaning |
| अध्याहारः | अर्थ के लिए जोड़ा गया पद | Supplying implied word |
| कर्तृपदम् | कर्ता पद | Subject word |
| कर्मपदम् | कर्म पद | Object word |
| क्रियापदम् | क्रिया पद | Verb |
| विशेषणम् | गुण बताने वाला शब्द | Adjective |
| विशेष्यम् | जिसका गुण बताया जाए | Qualified noun |
| तृतीयादिविभक्त्यन्तम् | तृतीया आदि विभक्ति वाला पद | Inflected word |
| कृदन्तपदम् | प्रत्यययुक्त धातु-पद | Participle |
| श्लोकः | छन्दबद्ध रचना | Verse |
| गद्यक्रमः | साधारण वाक्य-क्रम | Prose order |
| जिज्ञासा | जानने की इच्छा | Curiosity |
| अन्वयक्रमः | अन्वय का क्रम | Order of arrangement |
Topics Covered in NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 12
NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 12 cover the method of arranging Sanskrit verse into meaningful prose order through “अन्वयः”.
- श्लोकों में पद-क्रम और गद्य-क्रम के अंतर की समझ
- कर्तृपद, कर्मपद, क्रियापद, विशेषण और विभक्त्यन्त पदों का संबंध
- श्लोक का अर्थ समझने के लिए पदच्छेद और अन्वय की आवश्यकता
- श्लोकान्वयविधिः के दो प्रकार: दण्डान्वयः और खण्डान्वयः
- दण्डान्वय में पूरे श्लोक का सीधा क्रमबद्ध अन्वय
- खण्डान्वय में प्रश्नोत्तर के माध्यम से चरणवार अर्थ-निर्माण
- श्लोक में अप्रयुक्त आवश्यक पदों का अध्याहार
- “शास्त्राण्यधीत्यापि…” श्लोक का पदच्छेद, दण्डान्वय और अर्थ
- “सम्पूर्णकुम्भो…” श्लोक का पदच्छेद, खण्डान्वय और सरलार्थ
- आकाङ्क्षा के आधार पर प्रश्न बनाकर पद-संबंध समझना
- योग्यता, आसत्ति और तात्पर्य के माध्यम से सही अर्थ ग्रहण करना
- Sanskrit verse comprehension, grammar analysis and answer writing
Important Concepts in NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 12
| Concept | Explanation | Exam Use |
| अन्वयः | श्लोक के पदों को गद्यक्रम में रखना | श्लोक-अर्थ |
| पदच्छेदः | संयुक्त पदों या श्लोक-पंक्ति के शब्द अलग करना | Grammar |
| दण्डान्वयः | पूरे श्लोक का एक साथ क्रमबद्ध अन्वय | अन्वय-लेखन |
| खण्डान्वयः | प्रश्नोत्तर द्वारा खण्डों में अन्वय | अर्थ-समझ |
| अध्याहारः | छूटे हुए आवश्यक पद को अर्थानुसार जोड़ना | श्लोक-व्याख्या |
| आकाङ्क्षा | अपेक्षित पद जानने की इच्छा | प्रश्ननिर्माण |
| योग्यता | पदों में उचित अर्थ-संबंध | सही अर्थ |
| आसत्तिः | पदों का सामीप्य | वाक्य-संबंध |
| तात्पर्यम् | शब्द का अभिप्रेत अर्थ | भावार्थ |
| कर्तृ-कर्म-क्रिया | सरल गद्यक्रम की मूल रचना | अन्वय |
Chapter-Wise NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada
| Chapter No. | Chapter Name |
| Chapter 1 | सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम् |
| Chapter 2 | सुखस्य मूलं धर्मः धर्मस्य मूलम् अर्थः |
| Chapter 3 | आत्मवत्सर्वभूतेषु यः पश्यति सः पण्डितः |
| Chapter 4 | न खलु वयस्तेजसो हेतुः |
| Chapter 5 | एषा सा कृतकबुद्धिः मानवबुद्धेः सहकरी |
| Chapter 6 | मनःपूतं समाचरेत् |
| Chapter 7 | उपायं चिन्तयेत् प्राज्ञस्तथापायं च चिन्तयेत् |
| Chapter 8 | अन्नाद् आनन्दं प्रति |
| Chapter 9 | कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः |
| Chapter 10 | णमो अरिहंताणम् |
| Chapter 11 | वर्णोच्चारण-शिक्षा २ |
| Chapter 12 | अन्वयः |
| Chapter 13 | समासः |
| Chapter 14 | वाच्यम् |
| Chapter 15 | शब्दरूपाणि |
| Chapter 16 | धातुरूपाणि |
FAQs (Frequently Asked Questions)
इस chapter में “अन्वयः” इसलिए पढ़ाया गया है ताकि विद्यार्थी श्लोकों को केवल पढ़ें नहीं, बल्कि उनके पदों का संबंध समझकर अर्थ भी निकाल सकें। संस्कृत श्लोकों में पद-क्रम छन्द के अनुसार बदल सकता है, इसलिए अन्वय अर्थ-समझ का जरूरी साधन है।
Beginners के लिए खण्डान्वयः अधिक आसान हो सकता है, क्योंकि इसमें छोटे-छोटे प्रश्नों के माध्यम से कर्ता, कर्म, क्रिया और विशेषण का संबंध समझाया जाता है। दण्डान्वय पूरे श्लोक को एक साथ गद्यक्रम में रखता है, इसलिए उसमें अभ्यास की आवश्यकता अधिक होती है।
सबसे पहले श्लोक का पदच्छेदः करना चाहिए। उसके बाद क्रियापद, कर्तृपद, कर्मपद, विशेषण, विभक्त्यन्त पद और अव्यय को पहचानना चाहिए। फिर इन पदों को अर्थपूर्ण गद्यक्रम में रखना चाहिए।
ये चारों श्लोक का सही अर्थ समझने में मदद करते हैं। आकाङ्क्षा बताती है कि कौन-सा पद अपेक्षित है, योग्यता अर्थ-संबंध की जाँच करती है, आसत्ति पदों की निकटता बताती है और तात्पर्य सही अभिप्राय समझने में मदद करता है।
अन्वयः exercise answers revise करते समय पहले दण्डान्वय और खण्डान्वय के अंतर को समझें। फिर दोनों उदाहरण-श्लोकों का पदच्छेद लिखें, क्रियापद से प्रश्न बनाकर खण्डान्वय करें और अंत में पूरा गद्यक्रम लिखें।
Class 9 Sanskrit Chapter 12 grammar answers में पदच्छेदः, दण्डान्वयः, खण्डान्वयः, अध्याहारः, आकाङ्क्षा, योग्यता, आसत्तिः, तात्पर्यम्, कर्तृपद-कर्मपद-क्रियापद संबंध और श्लोक-अर्थ जैसे topics आते हैं।