NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 13
“समासः” पाठ में दो या अधिक अर्थयुक्त पदों को मिलाकर एक संक्षिप्त पद बनाने की प्रक्रिया समझाई गई है।
NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 13 में समास की परिभाषा, पूर्वपद-उत्तरपद, विग्रहवाक्यम्, स्वपदविग्रहः, अस्वपदविग्रहः, तत्पुरुष, द्वन्द्व, बहुव्रीहि और अव्ययीभाव समास से जुड़े grammar concepts समझाए गए हैं।
संस्कृत में बड़े अर्थ को छोटे और प्रभावी पद में व्यक्त करने की क्षमता बहुत महत्वपूर्ण है। समासः Class 9 इसी भाषा-कौशल को समझाता है। “सीतायाः पतिः” से “सीतापतिः” और “रामश्च कृष्णश्च” से “रामकृष्णौ” जैसे उदाहरण दिखाते हैं कि समास केवल शब्द-जोड़ नहीं, बल्कि पदों के संबंध और प्रधानता को पहचानने की प्रक्रिया है। ये NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 13 students को Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 13 Question Answer, समासः exercise answers, Class 9 Sanskrit Chapter 13 grammar answers, विग्रहवाक्यम्, समस्तपदम् और चार मुख्य समासों को revise करने में मदद करते हैं।
Key Takeaways
- पाठ का नाम: समासः
- मुख्य विषय: अर्थयुक्त पदों का एकीकरण और संक्षेपण
- मुख्य शब्द: समस्तपदम्, विग्रहवाक्यम्, पूर्वपदम्, उत्तरपदम्
- मुख्य भेद: केवलसमासः और विशेषसमासः
- विशेषसमास के प्रकार: तत्पुरुषसमासः, द्वन्द्वसमासः, बहुव्रीहिसमासः, अव्ययीभावसमासः
- मुख्य अभ्यास: समास-पहचान, विग्रह, समस्तपद, प्रधानपद-निर्णय और उदाहरण
NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 13 Structure 2026
| Section | Text / Skill Area | Main Learning Focus |
| समास-परिचय | समसनं, समस्तपदम् | समास की मूल परिभाषा |
| विग्रहवाक्यम् | स्वपद और अस्वपद विग्रह | अर्थ-विस्तार |
| समास-निर्णय | पूर्वपद, उत्तरपद, प्रधानता | समास-भेद पहचान |
| विशेषसमास | तत्पुरुष, द्वन्द्व, बहुव्रीहि, अव्ययीभाव | मुख्य grammar |
| उपभेद | विभक्ति-तत्पुरुष, कर्मधारय, द्विगु, नञ् आदि | विस्तृत वर्गीकरण |
| शब्द-संपदा | Sanskrit-Hindi-English meanings | Vocabulary |
NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 13: समासः
इस section में समासः question answer और grammar explanations पुस्तक के क्रम के अनुसार दिए गए हैं। यह विद्यार्थियों को Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 13 solutions को textbook-based format में समझने में मदद करता है।
समासः
(क) समासः किम्?
उत्तर: समसनं समासः भवति। समसनं नाम सङ्क्षेपणम्। अर्थयुक्तं पदद्वयं, पदत्रयम् अथवा अनेकपदं मिलित्वा यदा एकं पदं भवति, तदा सः समासः इति कथ्यते।
हिंदी अर्थ: दो या अधिक अर्थयुक्त पदों का संक्षेप होकर एक पद बनना समास कहलाता है।
(ख) समासस्य उदाहरणं लिखत।
उत्तर: महा + पुरुषः = महापुरुषः।
हिंदी अर्थ: “महा” और “पुरुष” ये दो अर्थयुक्त पद मिलकर “महापुरुषः” बनाते हैं।
(ग) समासः केषां मध्ये भवति?
उत्तर: समासः सामान्यतः परस्परं सुबन्तानां मध्ये भवति।
हिंदी अर्थ: समास सामान्यतः परस्पर सम्बद्ध सुबन्त पदों के बीच होता है।
(घ) समासः कदा न भवति?
उत्तर: यदि पदानां मध्ये परस्परम् अन्वयः न भवति, तर्हि समासः अपि न भवति।
हिंदी अर्थ: यदि पदों के बीच संबंध न हो, तो समास नहीं होता।
(ङ) समासे पूर्वपदं उत्तरपदं च किम्?
उत्तर: समासे पूर्वं प्रयुक्तं पदं पूर्वपदम्, अनन्तरं प्रयुक्तं पदम् उत्तरपदम् इति कथ्यते।
हिंदी अर्थ: समास में पहले आने वाला पद पूर्वपद और बाद में आने वाला पद उत्तरपद कहलाता है।
विग्रहवाक्यम्
यह section विग्रहवाक्यम् और समस्तपदम् के संबंध को समझाता है।
(क) विग्रहवाक्यम् किम्?
उत्तर: वृत्त्यर्थस्य अवबोधकं वाक्यं विग्रहः इति कथ्यते। समासस्य अर्थं बोधयितुं यत् वाक्यम् उच्यते, तत् विग्रहवाक्यम्।
हिंदी अर्थ: समास का अर्थ बताने वाला वाक्य विग्रहवाक्य कहलाता है।
(ख) विग्रहवाक्यस्य उदाहरणं लिखत।
उत्तर: राष्ट्रस्य नायकः = राष्ट्रनायकः।
हिंदी अर्थ: “राष्ट्रनायकः” समस्तपद है और “राष्ट्रस्य नायकः” उसका विग्रहवाक्य है।
(ग) विग्रहः कतिविधः?
उत्तर: विग्रहः द्विविधः—स्वपदविग्रहः अस्वपदविग्रहः च।
हिंदी अर्थ: विग्रह दो प्रकार का होता है—स्वपदविग्रह और अस्वपदविग्रह।
(घ) स्वपदविग्रहः कः?
उत्तर: यदि समासस्य अर्थः समस्तपदे विद्यमानैः पदैः एव वर्णितः भवति, तर्हि सः स्वपदविग्रहः भवति।
हिंदी अर्थ: यदि समास का अर्थ उसी समस्तपद में आए पदों से बताया जाए, तो वह स्वपदविग्रह कहलाता है।
उदाहरण: कृष्णस्य सखा = कृष्णसखा।
(ङ) अस्वपदविग्रहः कः?
उत्तर: यदि समासस्य अर्थः समस्तपदे विद्यमानानि पदानि विहाय अन्यैः पदैः वर्णितः भवति, तर्हि सः अस्वपदविग्रहः भवति।
हिंदी अर्थ: यदि समास का अर्थ समस्तपद में आए पदों के अतिरिक्त अन्य पदों से समझाया जाए, तो वह अस्वपदविग्रह कहलाता है।
उदाहरण: मतिम् अनतिक्रम्य = यथामति।
समासस्य मुख्यभेदाः
(क) मुख्यतया समासः कतिविधः?
उत्तर: मुख्यतया समासः द्विविधः—केवलसमासः विशेषसमासः च।
हिंदी अर्थ: मुख्य रूप से समास दो प्रकार का होता है—केवलसमास और विशेषसमास।
(ख) केवलसमासः कः?
उत्तर: तत्पुरुषादिसंज्ञाभिः विनिर्मुक्तः समाससंज्ञामात्रयुक्तः समासः केवलसमासः इति कथ्यते।
हिंदी अर्थ: जो समास तत्पुरुष आदि विशेष संज्ञाओं से रहित केवल समास-संज्ञा वाला हो, उसे केवलसमास कहते हैं।
उदाहरण: पूर्वं भूतः = भूतपूर्वः।
(ग) विशेषसमासः कतिविधः?
उत्तर: विशेषसमासः चतुर्धा—तत्पुरुषसमासः, द्वन्द्वसमासः, बहुव्रीहिसमासः, अव्ययीभावसमासः च।
समासस्य निर्णयः
(क) समासस्य निर्णयाय किं ज्ञातव्यम्?
उत्तर: समासस्य निर्णयाय पूर्वपदस्य उत्तरपदस्य च ज्ञानं सम्यक् भवेत्। ततः कस्य पदस्य प्राधान्यम् अस्ति इति ज्ञातव्यम्।
हिंदी अर्थ: समास का निर्णय करने के लिए पहले पूर्वपद और उत्तरपद को पहचानना चाहिए। फिर यह देखना चाहिए कि कौन-सा पद प्रधान है।
(ख) पदस्य प्राधान्यं कथं ज्ञायते?
उत्तर: समासघटितपदस्य श्रवणानन्तरं तेन सह किञ्चन क्रियापदं योजयेत्। यस्य पदस्य सम्बन्धः क्रियापदेन सह भवति, तत् पदं प्रधानम् भवति।
हिंदी अर्थ: समस्तपद के साथ कोई क्रिया जोड़कर देखा जाता है कि क्रिया का संबंध किस पद से बनता है। जिस पद से संबंध बने, वही प्रधान होता है।
तत्पुरुषसमासः
यह भाग तत्पुरुषसमासः और उसके उपभेदों को समझने के लिए उपयोगी है।
(क) तत्पुरुषसमासः कः?
उत्तर: प्रायः उत्तरपदार्थप्रधानः तत्पुरुषसमासः।
हिंदी अर्थ: जिस समास में सामान्यतः उत्तरपद प्रधान होता है, वह तत्पुरुषसमास कहलाता है।
उदाहरण: रामस्य दूतः = रामदूतः।
(ख) विभक्तितत्पुरुषः कतिविधः?
उत्तर: विभक्तितत्पुरुषः षड्विधः।
(ग) विभक्तितत्पुरुषस्य भेदान् उदाहरणैः सह लिखत।
उत्तर:
| समासः | विग्रहवाक्यम् | समस्तपदम् |
| द्वितीयातत्पुरुषः | गृहं गतः | गृहगतः |
| तृतीयातत्पुरुषः | नखैः भिन्नः | नखभिन्नः |
| चतुर्थीतत्पुरुषः | गवे हितम् | गोहितम् |
| पञ्चमीतत्पुरुषः | चोरात् भयम् | चोरभयम् |
| षष्ठीतत्पुरुषः | वृक्षस्य मूलम् | वृक्षमूलम् |
| सप्तमीतत्पुरुषः | कार्ये कुशलः | कार्यकुशलः |
कर्मधारयसमासः
(क) कर्मधारयसमासः कस्य अन्तर्गतः भवति?
उत्तर: कर्मधारयसमासः अपि तत्पुरुषसमासान्तर्गतः भवति।
(ख) कर्मधारयसमासः कतिविधः?
उत्तर: कर्मधारयसमासः नवधा भवति।
(ग) कर्मधारयसमासस्य उदाहरणानि लिखत।
उत्तर:
| समासः | विग्रहवाक्यम् | समस्तपदम् |
| विशेषणपूर्वपदः | नीलः मेघः | नीलमेघः |
| विशेषणोत्तरपदः | वैयाकरणः खसूचिः | वैयाकरणखसूचिः |
| विशेषणोभयपदः | शीतम् उष्णम् | शीतोष्णम् |
| उपमानपूर्वपदः | मेघः इव श्यामः | मेघश्यामः |
| उपमानोत्तरपदः | नरः व्याघ्रः इव | नरव्याघ्रः |
| अवधारणापूर्वपदः | विद्या इव धनम् | विद्याधनम् |
| सम्भावनापूर्वपदः | आम्रः इति वृक्षः | आम्रवृक्षः |
| मध्यमपदलोपः | शाकप्रियः पार्थिवः | शाकपार्थिवः |
| मयूरव्यंसकादिः | अन्यः देशः | देशान्तरम् |
द्विगुसमासः
(क) द्विगुसमासः कस्य भेदः अस्ति?
उत्तर: द्विगुसमासः अपि तत्पुरुषस्य एव भेदः अस्ति।
(ख) द्विगुसमासः कतिविधः?
उत्तर: द्विगुसमासः त्रिविधः।
(ग) द्विगुसमासस्य उदाहरणानि लिखत।
उत्तर:
| समासः | विग्रहवाक्यम् | समस्तपदम् |
| समाहारद्विगुः | त्रयाणां लोकानां समाहारः | त्रिलोकी |
| तद्धितार्थद्विगुः | षण्णां मातॄणाम् अपत्यम् | षाण्मातुरः |
| उत्तरपदद्विगुः | पञ्च गावः धनं यस्य सः | पञ्चगवधनः |
नञ्-प्रभृतिः तत्पुरुषसमासः
(क) नञ्-प्रभृतिः तत्पुरुषसमासः कतिविधः?
उत्तर: नञ्-प्रभृतिः तत्पुरुषसमासः षड्विधः।
(ख) नञ्-प्रभृतिः तत्पुरुषसमासस्य उदाहरणानि लिखत।
उत्तर:
| समासः | विग्रहवाक्यम् | समस्तपदम् |
| नञ्-तत्पुरुषः | न धर्मः | अधर्मः |
| कु-तत्पुरुषः | कुत्सितः पुत्रः | कुपुत्रः |
| गति-तत्पुरुषः | अशुक्लं शुक्लं कृत्वा | शुक्लीकृत्य |
| प्रादि-तत्पुरुषः | प्रगतः आचार्यः | प्राचार्यः |
| उपपद-तत्पुरुषः | कुम्भं करोति इति | कुम्भकारः |
| एकदेशी-तत्पुरुषः | अर्धं ग्रामस्य | अर्धग्रामः |
द्वन्द्वसमासः
यह भाग द्वन्द्वसमासः में उभयपदार्थ-प्रधानता को समझाता है।
(क) द्वन्द्वसमासः कः?
उत्तर: प्रायः उभयपदार्थप्रधानः द्वन्द्वसमासः।
हिंदी अर्थ: जिस समास में दोनों या सभी पद प्रधान होते हैं, वह द्वन्द्वसमास कहलाता है।
उदाहरण: रामश्च कृष्णश्च = रामकृष्णौ।
(ख) द्वन्द्वसमासस्य भेदौ कौ स्तः?
उत्तर: द्वन्द्वसमासस्य भेदौ इतरेतरद्वन्द्वसमासः समाहारद्वन्द्वसमासः च।
(ग) इतरेतरद्वन्द्वसमासस्य उदाहरणानि लिखत।
उत्तर:
| भेदः | विग्रहः | समस्तपदम् |
| द्विपदद्वन्द्वसमासः | रामश्च कृष्णश्च | रामकृष्णौ |
| बहुपदद्वन्द्वसमासः | रामश्च कृष्णश्च सुरेशश्च गिरीशश्च | रामकृष्णसुरेशगिरीशाः |
(घ) समाहारद्वन्द्वसमासस्य उदाहरणानि लिखत।
उत्तर:
| भेदः | विग्रहः | समस्तपदम् |
| समाहारद्वन्द्वसमासः | संज्ञा च परिभाषा च | संज्ञापरिभाषम् |
| नित्यसमाहारद्वन्द्वसमासः | पाणी च पादौ च | पाणिपादम् |
बहुव्रीहिसमासः
यह section बहुव्रीहिसमासः में अन्यपदार्थ-प्रधानता समझाता है।
(क) बहुव्रीहिसमासः कः?
उत्तर: प्रायः अन्यपदार्थप्रधानः बहुव्रीहिसमासः।
हिंदी अर्थ: जिस समास में पूर्वपद या उत्तरपद नहीं, बल्कि कोई अन्य पद प्रधान हो, वह बहुव्रीहिसमास कहलाता है।
उदाहरण: पीतम् अम्बरं यस्य सः = पीताम्बरः।
(ख) सामान्यबहुव्रीहिः कतिविधः?
उत्तर: सामान्यबहुव्रीहिः षोढा।
(ग) सामान्यबहुव्रीहिसमासस्य उदाहरणानि लिखत।
उत्तर:
| भेदः | विग्रहः | समस्तपदम् |
| द्वितीयार्थबहुव्रीहिः | प्राप्तम् उदकं यं सः | प्राप्तोदकः ग्रामः |
| तृतीयार्थबहुव्रीहिः | पीतं क्षीरं येन सः | पीतक्षीरः शिशुः |
| चतुर्थ्यर्थबहुव्रीहिः | दत्तः पशुः यस्मै सः | दत्तपशुः शिवः |
| पञ्चम्यर्थबहुव्रीहिः | उद्धृतं जलं यस्मात् सः | उद्धृतजलः कूपः |
| षष्ठ्यर्थबहुव्रीहिः | पीतम् अम्बरं यस्य सः | पीताम्बरः विष्णुः |
| सप्तम्यर्थबहुव्रीहिः | बहूनि फलानि यस्मिन् सः | बहुफलः वृक्षः |
(घ) विशेषबहुव्रीहिसमासस्य उदाहरणानि लिखत।
उत्तर:
| भेदः | विग्रहः | समस्तपदम् |
| व्यधिकरणबहुव्रीहिः | चक्रं पाणौ यस्य सः | चक्रपाणिः |
| सङ्ख्योत्तरपदबहुव्रीहिः | विंशतेः समीपे ये सन्ति ते | उपविंशाः |
| संख्योभयपदबहुव्रीहिः | द्वौ वा त्रयो वा | द्वित्राः |
| सहपूर्वपदबहुव्रीहिः | शिष्येण सह वर्तते इति | सशिष्यः |
| व्यतिहारलक्षणबहुव्रीहिः | केशेषु केशेषु गृहीत्वा प्रवृत्तं युद्धम् | केशाकेशि |
| दिगन्तराललक्षणबहुव्रीहिः | दक्षिणस्याः पूर्वस्याः दिशोः अन्तरालम् | दक्षिणपूर्वा |
| नञर्थबहुव्रीहिः | अविद्यमानः पुत्रः यस्य सः | अपुत्रः |
| प्रादिबहुव्रीहिः | निर्गता कृपा यस्मात् सः | निष्कृपः |
| उपमानपूर्वपदबहुव्रीहिः | गजस्य आननम् इव आननं यस्य सः | गजाननः |
अव्ययीभावसमासः
यह भाग अव्ययीभावसमासः और पूर्वपद-प्रधानता को समझाता है।
(क) अव्ययीभावसमासः कः?
उत्तर: पूर्वपदार्थप्रधानः अव्ययीभावसमासः। अनव्ययम् अव्ययं भवति इति अव्ययीभावः।
हिंदी अर्थ: जिस समास में पूर्वपद प्रधान होता है और पूरा पद अव्यय की तरह प्रयुक्त होता है, वह अव्ययीभावसमास कहलाता है।
उदाहरण: नगरस्य समीपम् = उपनगरम्।
(ख) अव्ययीभावसमासस्य प्रसिद्धानि उदाहरणानि लिखत।
उत्तर:
| अर्थः | विग्रहः | समस्तपदम् |
| समीपार्थे | ग्रामस्य समीपे | उपग्रामम् |
| अभावार्थे | मशकानाम् अभावः | निर्मशकम् |
| योग्यतार्थे | रूपस्य योग्यम् | अनुरूपम् |
| वीप्सार्थे | दिने दिने | प्रतिदिनम् |
| पदार्थ-अनतिवृत्त्यर्थे | शक्तिम् अनतिक्रम्य | यथाशक्ति |
| मर्यादार्थे | आ मुक्तेः | आमुक्ति |
| अभिविध्यर्थे | आ बालेभ्यः | आबालम् |
| आभिमुख्यार्थे | अग्निम् अभि | अभ्यग्नि |
| मात्रार्थे | शाकस्य लेशः | शाकप्रति |
| अवधारणार्थे | यावन्तः श्लोकाः | यावच्छ्लोकम् |
| पश्चादर्थे | रामस्य पश्चात् | अनुरामम् |
| सादृश्यार्थे | सख्या सदृशः | ससखि |
| साकल्यार्थे | तृणम् अपि अपरित्यज्य | सतृणम् |
| समृद्ध्यर्थे | धान्यानां समृद्धिः | सुधान्यम् |
| आनुपूर्व्यार्थे | ज्येष्ठस्य आनुपूर्व्येण | अनुज्येष्ठम् |
समास-निर्णय सारिणी
(क) समासभेदानां प्रधानता-सारिणी लिखत।
उत्तर:
| समासः | प्रधानता | उदाहरणम् |
| तत्पुरुषसमासः | उत्तरपदार्थप्रधानः | रामदूतः |
| द्वन्द्वसमासः | उभयपदार्थप्रधानः | रामकृष्णौ |
| बहुव्रीहिसमासः | अन्यपदार्थप्रधानः | पीताम्बरः |
| अव्ययीभावसमासः | पूर्वपदार्थप्रधानः | उपनगरम् |
शब्द-संपदा
| शब्द | हिन्दी अर्थ | English Meaning |
| समासः | संक्षेप / compound | Compound |
| समसनम् | संक्षेपण | Compression |
| समस्तपदम् | समास से बना पद | Compound word |
| विग्रहवाक्यम् | समास का अर्थ बताने वाला वाक्य | Analytical sentence |
| पूर्वपदम् | पहला पद | Former member |
| उत्तरपदम् | बाद वाला पद | Latter member |
| स्वपदविग्रहः | उन्हीं पदों से किया गया विग्रह | Analysis using same words |
| अस्वपदविग्रहः | अन्य पदों से किया गया विग्रह | Analysis using other words |
| केवलसमासः | केवल समास-संज्ञा वाला समास | Simple compound |
| विशेषसमासः | विशेष संज्ञा वाला समास | Specific compound |
| तत्पुरुषः | उत्तरपदप्रधान समास | Determinative compound |
| द्वन्द्वः | दोनों पद प्रधान | Copulative compound |
| बहुव्रीहिः | अन्य पद प्रधान | Exocentric compound |
| अव्ययीभावः | पूर्वपद प्रधान अव्ययी समास | Indeclinable compound |
| विभक्तितत्पुरुषः | विभक्ति-अर्थ वाला तत्पुरुष | Case-based Tatpurusha |
| कर्मधारयः | समानाधिकरण तत्पुरुष | Appositional compound |
| द्विगुः | संख्यावाचक तत्पुरुष | Numeral compound |
| नञ्-तत्पुरुषः | नकारात्मक तत्पुरुष | Negative compound |
| समाहारः | समूह | Collection |
| प्रधानता | मुख्य अर्थ | Dominance |
| अन्वयः | संबंध | Syntactic connection |
Topics Covered in NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 13
NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 13 cover Sanskrit compound formation, vigraha and compound classification through “समासः”.
- समसनम् या संक्षेपण के रूप में समास की मूल अवधारणा
- अर्थयुक्त दो या अधिक पदों से समस्तपदम् बनने की प्रक्रिया
- सुबन्त पदों के परस्पर अन्वय से समास बनना
- पूर्वपद और उत्तरपद की पहचान
- समस्तपदम् और विग्रहवाक्यम् का संबंध
- स्वपदविग्रहः और अस्वपदविग्रहः के उदाहरण
- केवलसमासः और विशेषसमासः का अंतर
- समासभेद निर्णय में पद-प्रधानता की भूमिका
- तत्पुरुषसमासः और विभक्तितत्पुरुष के छह भेद
- कर्मधारयसमासः, द्विगुसमासः और नञ्-प्रभृति तत्पुरुष
- द्वन्द्वसमासः में उभयपदार्थ-प्रधानता
- इतरेतरद्वन्द्व और समाहारद्वन्द्व के उदाहरण
- बहुव्रीहिसमासः में अन्यपदार्थ-प्रधानता
- सामान्यबहुव्रीहि और विशेषबहुव्रीहि के भेद
- अव्ययीभावसमासः में पूर्वपदार्थ-प्रधानता
- समास-निर्णय, विग्रह और समस्तपद अभ्यास
Important Concepts in NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 13
| Concept | Explanation | Exam Use |
| समासः | अर्थयुक्त पदों का संक्षेप होकर एक पद बनना | मुख्य परिभाषा |
| समस्तपदम् | समास से बना संयुक्त पद | Grammar |
| विग्रहवाक्यम् | समास का अर्थ बताने वाला वाक्य | विग्रह |
| स्वपदविग्रहः | समस्तपद में आए पदों से अर्थ बताना | विग्रह-भेद |
| अस्वपदविग्रहः | अन्य पदों की सहायता से अर्थ बताना | नित्यसमास |
| तत्पुरुषसमासः | उत्तरपद प्रधान होता है | समास-भेद |
| द्वन्द्वसमासः | दोनों / सभी पद प्रधान होते हैं | समास-भेद |
| बहुव्रीहिसमासः | कोई अन्य पद प्रधान होता है | समास-भेद |
| अव्ययीभावसमासः | पूर्वपद प्रधान और पद अव्ययवत् होता है | समास-भेद |
| कर्मधारयः | तत्पुरुष का उपभेद | उदाहरण |
| द्विगुः | संख्या-प्रधान तत्पुरुष का भेद | उदाहरण |
| नञ्-तत्पुरुषः | नकारार्थक तत्पुरुष | उदाहरण |
Chapter-Wise NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada
| Chapter No. | Chapter Name |
| Chapter 1 | सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम् |
| Chapter 2 | सुखस्य मूलं धर्मः धर्मस्य मूलम् अर्थः |
| Chapter 3 | आत्मवत्सर्वभूतेषु यः पश्यति सः पण्डितः |
| Chapter 4 | न खलु वयस्तेजसो हेतुः |
| Chapter 5 | एषा सा कृतकबुद्धिः मानवबुद्धेः सहकरी |
| Chapter 6 | मनःपूतं समाचरेत् |
| Chapter 7 | उपायं चिन्तयेत् प्राज्ञस्तथापायं च चिन्तयेत् |
| Chapter 8 | अन्नाद् आनन्दं प्रति |
| Chapter 9 | कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः |
| Chapter 10 | णमो अरिहंताणम् |
| Chapter 11 | वर्णोच्चारण-शिक्षा २ |
| Chapter 12 | अन्वयः |
| Chapter 13 | समासः |
| Chapter 14 | वाच्यम् |
| Chapter 15 | शब्दरूपाणि |
| Chapter 16 | धातुरूपाणि |
FAQs (Frequently Asked Questions)
इस chapter में समास इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि संस्कृत में कई बार बड़ा अर्थ एक छोटे पद में व्यक्त किया जाता है। समास जानने से विद्यार्थी समस्तपद का अर्थ समझते हैं, विग्रहवाक्य बना पाते हैं और श्लोकों या गद्य में आए कठिन पदों को आसानी से पढ़ते हैं।
समस्तपदम् वह संयुक्त पद है जो समास से बनता है, जैसे “राष्ट्रनायकः”। विग्रहवाक्यम् उस समस्तपद का अर्थ खोलकर बताता है, जैसे “राष्ट्रस्य नायकः”। परीक्षा में दोनों रूपों को पहचानना जरूरी है।
तत्पुरुष में सामान्यतः उत्तरपद प्रधान होता है, द्वन्द्व में दोनों या सभी पद प्रधान होते हैं, बहुव्रीहि में कोई अन्य पद प्रधान होता है और अव्ययीभाव में पूर्वपद प्रधान होता है। प्रधानता देखकर समासभेद पहचानना आसान होता है।
स्वपदविग्रह में समस्तपद के घटक पदों से ही अर्थ बताया जाता है, जैसे “कृष्णस्य सखा = कृष्णसखा”। अस्वपदविग्रह में अर्थ बताने के लिए अन्य पद जोड़े जाते हैं, जैसे “मतिम् अनतिक्रम्य = यथामति”।
समासः exercise answers revise करते समय पहले समस्तपद और विग्रहवाक्य का अंतर समझें। फिर यह देखें कि समास में पूर्वपद, उत्तरपद या अन्य पद में से कौन प्रधान है। इसके बाद तत्पुरुष, द्वन्द्व, बहुव्रीहि और अव्ययीभाव के examples अलग-अलग revise करें।