NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 14
“वाच्यम्” पाठ में कर्तरि प्रयोग, कर्मणि प्रयोग और भावे प्रयोग के माध्यम से संस्कृत वाक्यों में कर्ता, कर्म और क्रिया के संबंध को समझाया गया है।
NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 14 में कर्तृवाच्यम्, कर्मवाच्यम्, भाववाच्यम्, वाच्यपरिवर्तनम्, क्तवतु प्रत्यय, क्त प्रत्यय, तव्यत्-अनीयर् प्रत्यय और अकर्मकधातु-प्रयोग से जुड़े grammar concepts समझाए गए हैं।
संस्कृत में वाक्य केवल शब्दों का क्रम नहीं, बल्कि कर्ता, कर्म और क्रिया के बीच का स्पष्ट संबंध भी है। वाच्यम् Class 9 में विद्यार्थी समझते हैं कि कब क्रिया कर्ता के अनुसार बदलती है, कब कर्म के अनुसार और कब भाव को प्रधानता दी जाती है। “बालः श्लोकं पठति” से “बालकेन श्लोकः पठ्यते” तक का परिवर्तन केवल भाषा-रूप नहीं, बल्कि वाक्य-दृष्टि का परिवर्तन है। ये NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 14 students को Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 14 Question Answer, वाच्यम् exercise answers, Class 9 Sanskrit Chapter 14 grammar answers और वाच्यपरिवर्तनम् revise करने में मदद करते हैं।
Key Takeaways
- पाठ का नाम: वाच्यम्
- मुख्य विषय: कर्ता, कर्म, क्रिया और वाक्य में प्रधानता
- मुख्य प्रयोग: कर्तरि प्रयोगः, कर्मणि प्रयोगः, भावे प्रयोगः
- मुख्य वाच्य: कर्तृवाच्यम्, कर्मवाच्यम्, भाववाच्यम्
- मुख्य प्रत्यय: यक्, क्तवतु, क्त, तव्यत्, अनीयर्
- मुख्य अभ्यास: वाच्य-नियम, वर्तमानकाल, भूतकाल, विधिलिङ् और वाच्यपरिवर्तनम्
NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 14 Structure 2026
| Section | Text / Skill Area | Main Learning Focus |
| वाच्य-परिचय | कर्तरि, कर्मणि, भावे प्रयोग | वाक्य-प्रधानता |
| कर्तृवाच्यम् | कर्ता प्रधान | क्रिया कर्ता के अनुसार |
| कर्मवाच्यम् | कर्म प्रधान | क्रिया कर्म के अनुसार |
| भाववाच्यम् | भाव प्रधान | अकर्मकधातु-प्रयोग |
| प्रत्यय-प्रयोग | यक्, क्तवतु, क्त, तव्यत्, अनीयर् | रूप-परिवर्तन |
| उदाहरण | लट्, भूतकाल, विधिलिङ् | वाच्यपरिवर्तन |
NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 14: वाच्यम्
इस section में वाच्यम् question answer और grammar explanations पुस्तक के क्रम के अनुसार दिए गए हैं। यह विद्यार्थियों को Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 14 solutions को textbook-based format में समझने में मदद करता है।
वाच्यम्
(क) वाच्यम् किम्?
उत्तर: वाक्ये कर्तुः, कर्मणः, भावस्य वा प्रधानता यत्र दृश्यते, तत् वाच्यम् इति कथ्यते।
हिंदी अर्थ: वाक्य में कर्ता, कर्म या भाव में से किसे प्रधानता दी गई है, इसी आधार पर वाच्य पहचाना जाता है।
(ख) वाच्यम् कतिविधम्?
उत्तर: वाच्यम् त्रिविधम्—कर्तृवाच्यम्, कर्मवाच्यम्, भाववाच्यम् च।
हिंदी अर्थ: वाच्य तीन प्रकार का होता है—कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य और भाववाच्य।
(ग) कर्तृवाच्यम्, कर्मवाच्यम्, भाववाच्यम् अन्यैः नामभिः कथं कथ्यन्ते?
उत्तर: कर्तृवाच्यम् कर्तरि प्रयोगः, कर्मवाच्यम् कर्मणि प्रयोगः, भाववाच्यम् भावे प्रयोगः इति अपि कथ्यन्ते।
हिंदी अर्थ: कर्तृवाच्य को कर्तरि प्रयोग, कर्मवाच्य को कर्मणि प्रयोग और भाववाच्य को भावे प्रयोग भी कहते हैं।
कर्तृवाच्यम् / कर्तरि प्रयोगः
यह भाग कर्तृवाच्यम् में कर्ता की प्रधानता और क्रिया-संबंध को समझाता है।
(क) कर्तरि प्रयोगे कर्तृवाचकं पदं कस्यां विभक्तौ भवति?
उत्तर: कर्तरि प्रयोगे कर्तृवाचकं पदं प्रथमा-विभक्तौ भवति।
हिंदी अर्थ: कर्तरि प्रयोग में कर्ता प्रथमा विभक्ति में होता है।
(ख) कर्तरि प्रयोगे कर्मवाचकं पदं कस्यां विभक्तौ भवति?
उत्तर: कर्तरि प्रयोगे कर्मवाचकं पदं द्वितीया-विभक्तौ भवति।
हिंदी अर्थ: कर्तरि प्रयोग में कर्म द्वितीया विभक्ति में होता है।
(ग) कर्तरि प्रयोगे क्रियापदं कम् अनुसरति?
उत्तर: कर्तरि प्रयोगे क्रियापदं कर्तृपदम् अनुसरति।
हिंदी अर्थ: कर्तरि प्रयोग में क्रिया कर्ता के अनुसार बदलती है।
(घ) कर्तृवाच्यस्य उदाहरणानि लिखत।
उत्तर:
| कर्तृपदम् | कर्मपदम् | क्रियापदम् | वाक्यम् |
| बालः | चित्रम् | पश्यति | बालः चित्रं पश्यति। |
| बालौ | चित्रम् | पश्यतः | बालौ चित्रं पश्यतः। |
| बालाः | चित्रम् | पश्यन्ति | बालाः चित्रं पश्यन्ति। |
| बालः | फलम् | खादति | बालः फलं खादति। |
| बालः | फले | खादति | बालः फले खादति। |
| बालः | फलानि | खादति | बालः फलानि खादति। |
(ङ) कर्तरि प्रयोगे कर्मपदस्य वचनपरिवर्तनेन क्रियापदं बदलता है या नहीं?
उत्तर: कर्तरि प्रयोगे कर्मपदस्य वचनपरिवर्तनेन क्रियापदस्य वचनपरिवर्तनं न भवति। क्रियापदं केवलं कर्तृपदम् अनुसरति।
हिंदी अर्थ: कर्तरि प्रयोग में कर्म के वचन बदलने से क्रिया नहीं बदलती; क्रिया कर्ता के अनुसार रहती है।
कर्तरि प्रयोगे पुरुषव्यवस्था
(क) मध्यमपुरुषे क्रियापदं कथं भवति?
उत्तर: कर्तृपदं यदि त्वम्, युवाम्, यूयम् इत्यादि भवति, तर्हि क्रियापदं मध्यमपुरुषस्य एकवचन-द्विवचन-बहुवचनरूपे भवति।
उदाहरण:
| कर्तृपदम् | वाक्यम् |
| त्वम् | त्वं श्लोकं पठसि। |
| युवाम् | युवां श्लोकं पठथः। |
| यूयम् | यूयं श्लोकं पठथ। |
(ख) उत्तमपुरुषे क्रियापदं कथं भवति?
उत्तर: कर्तृपदं यदि अहम्, आवाम्, वयम् इत्यादि भवति, तर्हि क्रियापदं उत्तमपुरुषस्य एकवचन-द्विवचन-बहुवचनरूपे भवति।
उदाहरण:
| कर्तृपदम् | वाक्यम् |
| अहम् | अहं श्लोकं पठामि। |
| आवाम् | आवां श्लोकं पठावः। |
| वयम् | वयं श्लोकं पठामः। |
(ग) प्रथमपुरुषे क्रियापदं कथं भवति?
उत्तर: कर्तृपदं यदि त्वम्, युवाम्, यूयम्, अहम्, आवाम्, वयम् एतेभ्यः भिन्नं भवति, तर्हि क्रियापदं प्रथमपुरुषस्य रूपे भवति।
उदाहरण:
| कर्तृपदम् | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| पुल्लिङ्गम् | सः पठति | तौ पठतः | ते पठन्ति |
| स्त्रीलिङ्गम् | सा पठति | ते पठतः | ताः पठन्ति |
| यौवन / व्यक्ति | युवकः पठति | युवकौ पठतः | युवकाः पठन्ति |
| बालिका | बालिका पठति | बालिके पठतः | बालिकाः पठन्ति |
कर्मवाच्यम् / कर्मणि प्रयोगः
यह section कर्मवाच्यम् और कर्मणि प्रयोगः में कर्म की प्रधानता को समझाता है।
(क) कर्मणि प्रयोगे कर्तृपदं कस्यां विभक्तौ भवति?
उत्तर: कर्मणि प्रयोगे कर्तृपदं तृतीया-विभक्तौ भवति।
हिंदी अर्थ: कर्मवाच्य में कर्ता तृतीया विभक्ति में होता है।
(ख) कर्मणि प्रयोगे कर्मपदं कस्यां विभक्तौ भवति?
उत्तर: कर्मणि प्रयोगे कर्मपदं प्रथमा-विभक्तौ भवति।
हिंदी अर्थ: कर्मवाच्य में कर्म प्रथमा विभक्ति में आ जाता है।
(ग) कर्मणि प्रयोगे क्रियापदं कम् अनुसरति?
उत्तर: कर्मणि प्रयोगे क्रियापदं कर्मपदम् अनुसरति।
हिंदी अर्थ: कर्मवाच्य में क्रिया कर्म के लिंग और वचन के अनुसार बदलती है।
(घ) कर्मणि प्रयोगे धातुभ्यः कः प्रत्ययः विधीयते?
उत्तर: कर्मणि प्रयोगे धातुभ्यः “यक्” अर्थात् “य” प्रत्ययः विधीयते। ततः आत्मनेपदप्रत्ययः भवति।
उदाहरण:
| धातुः | कर्मणि रूपम् |
| गम् | गम्यते |
| पठ् | पठ्यते |
| लिख् | लिख्यते |
(ङ) कर्मणि प्रयोगे क्रियापदानि कीदृशानि भवन्ति?
उत्तर: कर्मणि प्रयोगे क्रियापदानि आत्मनेपदिरूपाणि भवन्ति। वर्तमानकाले “ति” प्रत्ययस्य स्थाने “ते” प्रत्ययः भवति।
कर्तरि-कर्मणि क्रियारूपाणि
(क) कर्तरि-कर्मणि क्रियापदानि लिखत।
उत्तर:
| कर्तरि | कर्मणि | कर्तरि | कर्मणि |
| पठति | पठ्यते | पिबति | पीयते |
| लिखति | लिख्यते | ददाति | दीयते |
| खादति | खाद्यते | नयति | नीयते |
| गच्छति | गम्यते | करोति | क्रियते |
| त्यजति | त्यज्यते | शृणोति | श्रूयते |
| पृच्छति | पृच्छ्यते | गायति | गीयते |
| जानाति | ज्ञायते | आरोहति | आरुह्यते |
| स्मरति | स्मर्यते | पश्यति | दृश्यते |
| वदति / वक्ति | उद्यते / उच्यते | परीक्षते | परीक्ष्यते |
| क्षिपति | क्षिप्यते | सेवते | सेव्यते |
| प्राप्नोति | प्राप्यते | वन्दते | वन्द्यते |
| प्रणमति | प्रणम्यते | क्रीडति | क्रीड्यते |
| प्रक्षालयति | प्रक्षाल्यते | गणयति | गण्यते |
| चिन्तयति | चिन्त्यते | रचयति | रच्यते |
| पालयति | पाल्यते | ताडयति | ताड्यते |
| सूचयति | सूच्यते | कथयति | कथ्यते |
| पूजयति | पूज्यते | पाठयति | पाठ्यते |
| बोधयति | बोध्यते | — | — |
वर्तमानकाले कर्तरि-कर्मणि प्रयोगाः
(क) वर्तमानकाले कर्तृवाच्य-कर्मवाच्य उदाहरणानि लिखत।
उत्तर:
| कर्तरि प्रयोगः / कर्तृवाच्यम् | कर्मणि प्रयोगः / कर्मवाच्यम् |
| बालकः श्लोकं पठति। | बालकेन श्लोकः पठ्यते। |
| सा कवितां लिखति। | तया कविता लिख्यते। |
| सुनीता फलानि खादति। | सुनीतया फलानि खाद्यन्ते। |
| शिक्षकः ग्रन्थालयं गच्छति। | शिक्षकेण ग्रन्थालयः गम्यते। |
| सः दुर्गुणान् त्यजति। | तेन दुर्गुणाः त्यज्यन्ते। |
| अहम् इक्षुरसं पिबामि। | मया इक्षुरसः पीयते। |
| सञ्जयः लेखनीः ददाति। | सञ्जयेन लेखन्यः दीयन्ते। |
| आरक्षकाः चोरान् नयन्ति। | आरक्षकैः चोराः नीयन्ते। |
| राधा पूजां करोति। | राधया पूजा क्रियते। |
| मित्राणि चलच्चित्रं पश्यन्ति। | मित्रैः चलच्चित्रं दृश्यते। |
भूतकाले क्तवतु-प्रत्ययः और क्त-प्रत्ययः
यह भाग क्तवतु प्रत्यय और क्त प्रत्यय के माध्यम से भूतकालिक वाच्य-रूप समझाता है।
(क) भूतकाले कर्तरि और कर्मणि कौन-से प्रत्यय प्रयोग होते हैं?
उत्तर: भूतकाले कर्तरि प्रयोगे क्तवतु-प्रत्ययस्य, कर्मणि प्रयोगे क्त-प्रत्ययान्तस्य च प्रयोगः भवति।
हिंदी अर्थ: भूतकाल में कर्तृवाच्य में क्तवतु और कर्मवाच्य में क्त-प्रत्यय का प्रयोग होता है।
(ख) कर्मणि क्त-प्रत्यय-प्रयोगे किं ध्यानयोग्यम्?
उत्तर: कर्मणि क्त-प्रत्यय-प्रयोगे कर्मपदस्य लिङ्गं वचनं च स्पष्टं ज्ञातव्यम्, यतः क्रियापदं कर्मपदस्य लिङ्ग-वचनानुसारं भवति।
(ग) भूतकाले कर्तरि-कर्मणि उदाहरणानि लिखत।
उत्तर:
| कर्तरि प्रयोगः / कर्तृवाच्यम् | कर्मणि प्रयोगः / कर्मवाच्यम् |
| बालकः श्लोकं पठितवान्। | बालकेन श्लोकः पठितः। |
| सा कवितां लिखितवती। | तया कविता लिखिता। |
| सुनीता फलानि खादितवती। | सुनीतया फलानि खादितानि। |
| शिक्षकः ग्रन्थालयं गतवान्। | शिक्षकेण ग्रन्थालयः गतः। |
| सः दुर्गुणान् त्यक्तवान्। | तेन दुर्गुणाः त्यक्ताः। |
| अहम् इक्षुरसं पीतवान् / पीतवती। | मया इक्षुरसः पीतः। |
| सञ्जयः लेखनीः दत्तवान्। | सञ्जयेन लेखन्यः दत्ताः। |
| आरक्षकाः चोरान् नीतवन्तः। | आरक्षकैः चोराः नीताः। |
| राधा पूजां कृतवती। | राधया पूजा कृता। |
| मित्राणि चलच्चित्रं दृष्टवन्तः। | मित्रैः चलच्चित्रं दृष्टम्। |
विधिलिङ्, तव्यत् और अनीयर् प्रत्यय
(क) तव्यत्-अनीयर् प्रत्यययोः प्रयोगः कुत्र भवति?
उत्तर: विधिलिङ्-लकारस्य अर्थेषु कृदन्तेषु कर्मणि “तव्यत्” “अनीयर्” इत्येतयोः प्रयोगः भवति।
हिंदी अर्थ: विधिलिङ् के अर्थ में कर्मवाच्य में तव्यत् और अनीयर् प्रत्यय प्रयोग होते हैं।
(ख) तव्यत्-अनीयर् प्रत्ययौ कस्य अनुसारं भवतः?
उत्तर: तव्यत्-अनीयर् प्रत्ययौ कर्मपदस्य लिङ्गं वचनं च अनुसृत्य भवतः।
(ग) तव्यत्-अनीयर् प्रत्यययोः उदाहरणानि लिखत।
उत्तर:
| कर्तरि प्रयोगः / कर्तृवाच्यम् | कर्मणि प्रयोगः / कर्मवाच्यम् |
| महेशः आपणं गच्छेत्। | महेशेन आपणः गन्तव्यः / गमनीयः। |
| ताः मधुरं खादेयुः। | ताभिः मधुरं खादितव्यम् / खादनीयम्। |
| बालिका वृक्षान् पश्येत्। | बालिकया वृक्षाः द्रष्टव्याः / दर्शनीयाः। |
| छात्राः स्वाध्यायं कुर्युः। | छात्रैः स्वाध्यायः कर्तव्यः / करणीयः। |
| सः भगवद्गीतां पठेत्। | तेन भगवद्गीता पठितव्या / पठनीया। |
भाववाच्यम् / भावे प्रयोगः
यह section भाववाच्यम् में अकर्मकधातु और भाव-प्रधानता को समझाता है।
(क) भावे प्रयोगः कः?
उत्तर: भावप्रधानः प्रयोगः भावे प्रयोगः इति कथ्यते।
हिंदी अर्थ: जिस प्रयोग में कर्म नहीं होता और भाव को प्रधानता मिलती है, वह भावे प्रयोग कहलाता है।
(ख) केषां धातूनां कर्तरि प्रयोगः भावे प्रयोगः च भवतः?
उत्तर: ये अकर्मकधातवः सन्ति, तेषां कर्तरि प्रयोगः भावे प्रयोगः च भवतः।
हिंदी अर्थ: अकर्मक धातुओं में कर्तरि और भावे प्रयोग होते हैं।
(ग) अकर्मकधातवः के?
उत्तर: येषां धातूनां प्रयोगे कर्मपदस्य प्रसक्तिः न भवति, ते धातवः अकर्मकधातवः भवन्ति।
हिंदी अर्थ: जिन धातुओं के साथ कर्म की आवश्यकता नहीं होती, वे अकर्मक धातु कहलाती हैं।
(घ) अकर्मकधातूनां कर्मणि प्रयोगः भवति वा?
उत्तर: अकर्मकधातूनां कर्मपदस्य अभावात् कर्मणि प्रयोगः न भवति।
(ङ) भावे प्रयोगे क्रियापदं कथं भवति?
उत्तर: भावे प्रयोगे क्रियापदं सर्वदा प्रथमपुरुषस्य एकवचने एव भवति।
(च) कृदन्तेषु भावे प्रयोगे रूपाणि कथं भवन्ति?
उत्तर: कृदन्तेषु भावे प्रयोगे क्त, तव्यत्, अनीयर् प्रत्ययान्तानि रूपाणि सर्वदा नपुंसकलिङ्गे प्रथमाविभक्तेः एकवचने एव भवन्ति।
लट्-लकारे भावे प्रयोगः
(क) वर्तमानकाले कर्तरि-भावे उदाहरणानि लिखत।
उत्तर:
| कर्तरि प्रयोगः / कर्तृवाच्यम् | भावे प्रयोगः / भाववाच्यम् |
| ते हसन्ति। | तैः हस्यते। |
| बालाः उद्याने क्रीडन्ति। | बालैः उद्याने क्रीड्यते। |
| फलानि भूमौ पतन्ति। | फलैः भूमौ पत्यते। |
| वाहनानि मार्गे तिष्ठन्ति। | वाहनैः मार्गे स्थीयते। |
| सा उत्तिष्ठति। | तया उत्थीयते। |
| वृद्धः आसने उपविशति। | वृद्धेन आसने उपविश्यते। |
| नर्तकाः नृत्यन्ति। | नर्तकैः नृत्यते। |
| बालिकाः प्रयतन्ते। | बालिकाभिः प्रयत्यते। |
| शुनकः धावति। | शुनकेन धाव्यते। |
| वृक्षः वर्धते। | वृक्षेण वर्ध्यते। |
| शिशुः शेते। | शिशुना शय्यते। |
| रुग्णः कासते। | रुग्णेन कास्यते। |
अकर्मकधातवः
(क) अध्ययनाय अकर्मकधातूनां उदाहरणानि लिखत।
उत्तर:
| अकर्मकधातवः / क्रियापदानि |
| क्रीडति |
| भूषति |
| स्फुरति |
| रोदिति |
| भवति |
| शोभते |
| मोदते |
| वर्तते |
| कम्पते |
| स्पर्धते |
| विकसति |
| उपविशति |
| विश्वसिति |
| नश्यति |
| गर्जति |
| लज्जते |
| प्लवते |
| स्पन्दते |
| वर्धते |
| त्वरते |
भूतकाले भावे प्रयोगः
(क) भूतकाले कर्तरि क्तवतु और भावे क्त-प्रत्ययान्त प्रयोग लिखत।
उत्तर:
| कर्तरि प्रयोगः / कर्तृवाच्यम् | भावे प्रयोगः / भाववाच्यम् |
| ते हसितवन्तः। | तैः हसितम्। |
| बालाः उद्याने क्रीडितवन्तः। | बालैः उद्याने क्रीडितम्। |
| फलानि भूमौ पतितवन्ति। | फलैः भूमौ पतितम्। |
| वाहनानि मार्गे स्थितवन्ति। | वाहनैः मार्गे स्थितम्। |
| सा उत्थितवती। | तया उत्थितम्। |
| शिशुः शयितवान्। | शिशुना शयितम्। |
विधिलिङ् अर्थे भावे तव्यत्-अनीयर् प्रयोगः
(क) भावे तव्यत्-अनीयर् प्रत्ययान्त प्रयोग लिखत।
उत्तर:
| कर्तरि प्रयोगः / कर्तृवाच्यम् | भावे प्रयोगः / भाववाच्यम् |
| नर्तकाः नृत्येयुः। | नर्तकैः नर्तितव्यम् / नर्तनीयम्। |
| बालिकाः प्रयतेयुः। | बालिकाभिः प्रयतितव्यम् / प्रयतनीयम्। |
| शुनकः धावेत्। | शुनकेन धावितव्यम् / धावनीयम्। |
| वृक्षः वर्धेत। | वृक्षेण वर्धितव्यम् / वर्धनीयम्। |
| वृद्धः आसने उपविशेत्। | वृद्धेन आसने उपवेष्टव्यम् / उपवेशनीयम्। |
| रुग्णः कासेत। | रुग्णेन कासितव्यम् / कासनीयम्। |
वाच्यपरिवर्तनम्
(क) कर्तृवाच्यात् कर्मवाच्ये परिवर्तनस्य नियमाः लिखत।
उत्तर:
| कर्तृवाच्यम् | कर्मवाच्यम् |
| कर्ता प्रथमा विभक्तौ | कर्ता तृतीया विभक्तौ |
| कर्म द्वितीया विभक्तौ | कर्म प्रथमा विभक्तौ |
| क्रिया कर्ता के अनुसार | क्रिया कर्म के अनुसार |
| परस्मैपदी/आत्मनेपदी रूप हो सकते हैं | सामान्यतः आत्मनेपदी रूप |
| बालः श्लोकं पठति | बालकेन श्लोकः पठ्यते |
(ख) कर्तृवाच्यात् भाववाच्ये परिवर्तनस्य नियमाः लिखत।
उत्तर:
| कर्तृवाच्यम् | भाववाच्यम् |
| अकर्मकधातु का प्रयोग | अकर्मकधातु का भावे प्रयोग |
| कर्ता प्रथमा विभक्तौ | कर्ता तृतीया विभक्तौ |
| कर्म नहीं होता | कर्म नहीं होता |
| क्रिया कर्ता के अनुसार | क्रिया प्रथमपुरुष एकवचन में |
| बालाः क्रीडन्ति | बालैः क्रीड्यते |
शब्द-संपदा
| शब्द | हिन्दी अर्थ | English Meaning |
| वाच्यम् | वाक्य में कर्ता/कर्म/भाव की प्रधानता | Voice |
| प्रयोगः | उपयोग / रूप | Usage |
| कर्तरि प्रयोगः | कर्ता प्रधान प्रयोग | Active voice |
| कर्मणि प्रयोगः | कर्म प्रधान प्रयोग | Passive voice |
| भावे प्रयोगः | भाव प्रधान प्रयोग | Impersonal voice |
| कर्तृवाच्यम् | कर्ता प्रधान वाच्य | Active voice |
| कर्मवाच्यम् | कर्म प्रधान वाच्य | Passive voice |
| भाववाच्यम् | भाव प्रधान वाच्य | Impersonal construction |
| कर्तृपदम् | कर्ता पद | Subject |
| कर्मपदम् | कर्म पद | Object |
| क्रियापदम् | क्रिया पद | Verb |
| प्रथमा विभक्तिः | पहली विभक्ति | Nominative case |
| द्वितीया विभक्तिः | दूसरी विभक्ति | Accusative case |
| तृतीया विभक्तिः | तीसरी विभक्ति | Instrumental case |
| यक् प्रत्ययः | कर्मणि प्रयोग का “य” प्रत्यय | Passive marker |
| आत्मनेपदिरूपम् | आत्मनेपदी रूप | Middle voice form |
| क्तवतु प्रत्ययः | भूतकाल कर्तरि प्रत्यय | Past active participle |
| क्त प्रत्ययः | भूतकाल कर्मणि / भावे प्रत्यय | Past passive participle |
| तव्यत् प्रत्ययः | कर्तव्य अर्थ वाला प्रत्यय | Gerundive suffix |
| अनीयर् प्रत्ययः | करणीय / योग्य अर्थ वाला प्रत्यय | Gerundive suffix |
| अकर्मकधातुः | बिना कर्म वाली धातु | Intransitive verb |
| सकर्मकधातुः | कर्म लेने वाली धातु | Transitive verb |
Chapter-Wise NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada
| Chapter No. | Chapter Name |
| Chapter 1 | सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम् |
| Chapter 2 | सुखस्य मूलं धर्मः धर्मस्य मूलम् अर्थः |
| Chapter 3 | आत्मवत्सर्वभूतेषु यः पश्यति सः पण्डितः |
| Chapter 4 | न खलु वयस्तेजसो हेतुः |
| Chapter 5 | एषा सा कृतकबुद्धिः मानवबुद्धेः सहकरी |
| Chapter 6 | मनःपूतं समाचरेत् |
| Chapter 7 | उपायं चिन्तयेत् प्राज्ञस्तथापायं च चिन्तयेत् |
| Chapter 8 | अन्नाद् आनन्दं प्रति |
| Chapter 9 | कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः |
| Chapter 10 | णमो अरिहंताणम् |
| Chapter 11 | वर्णोच्चारण-शिक्षा २ |
| Chapter 12 | अन्वयः |
| Chapter 13 | समासः |
| Chapter 14 | वाच्यम् |
| Chapter 15 | शब्दरूपाणि |
| Chapter 16 | धातुरूपाणि |
Topics Covered in NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 14
NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 14 cover Sanskrit voice transformation and usage rules through “वाच्यम्”.
- कर्तरि प्रयोग, कर्मणि प्रयोग और भावे प्रयोग की मूल अवधारणा
- कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य और भाववाच्य के नाम और अंतर
- कर्तरि प्रयोग में कर्ता की प्रथमा विभक्ति और कर्म की द्वितीया विभक्ति
- कर्तरि प्रयोग में क्रिया का कर्तृपद के अनुसार परिवर्तन
- मध्यमपुरुष, उत्तमपुरुष और प्रथमपुरुष की क्रिया-व्यवस्था
- कर्मणि प्रयोग में कर्ता की तृतीया विभक्ति और कर्म की प्रथमा विभक्ति
- कर्मवाच्य में क्रिया का कर्मपद के अनुसार परिवर्तन
- धातु में यक् प्रत्यय और आत्मनेपदी क्रियापदों का प्रयोग
- वर्तमानकाल में कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य परिवर्तन
- भूतकाल में क्तवतु और क्त प्रत्यय का प्रयोग
- विधिलिङ् अर्थ में तव्यत् और अनीयर् प्रत्यय
- अकर्मकधातु, भावप्रधानता और भाववाच्य के नियम
- लट्-लकार, भूतकाल और विधिलिङ् में भावे प्रयोग
- वाच्यपरिवर्तनम् के लिए विभक्ति, क्रिया और पद-संबंध की समझ
Important Concepts in NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 14
| Concept | Explanation | Exam Use |
| कर्तृवाच्यम् | कर्ता प्रधान होता है | Active voice |
| कर्मवाच्यम् | कर्म प्रधान होता है | Passive voice |
| भाववाच्यम् | भाव प्रधान होता है, कर्म नहीं होता | Impersonal voice |
| कर्तरि प्रयोगः | कर्ता प्रथमा, कर्म द्वितीया | वाच्य-पहचान |
| कर्मणि प्रयोगः | कर्ता तृतीया, कर्म प्रथमा | वाच्यपरिवर्तनम् |
| भावे प्रयोगः | अकर्मकधातुओं में भाव प्रधान | भाववाच्य |
| यक् प्रत्ययः | कर्मणि प्रयोग में धातु से जुड़ता है | क्रियारूप |
| क्तवतु प्रत्ययः | भूतकाल कर्तरि प्रयोग में | Past active |
| क्त प्रत्ययः | कर्मणि और भावे भूतकाल में | Past passive |
| तव्यत्-अनीयर् | कर्तव्य / योग्य अर्थ में | विधिलिङ् अर्थ |
| आत्मनेपदिरूपम् | कर्मणि और भावे क्रिया-रूप | Grammar |
FAQs (Frequently Asked Questions)
कर्तृवाच्य में कर्ता मुख्य होता है और क्रिया कर्ता के वचन-पुरुष के अनुसार चलती है। जैसे—बालः श्लोकं पठति। यहाँ “बालः” कर्ता है और “पठति” उसी के अनुसार है। कर्मवाच्य में कर्म मुख्य हो जाता है, कर्ता तृतीया विभक्ति में आता है और क्रिया कर्म के अनुसार होती है। जैसे—बालकेन श्लोकः पठ्यते।
“बालः फलं खादति” का कर्मवाच्य होगा—बालकेन फलं खाद्यते। यहाँ “बालः” बदलकर “बालकेन” हो गया और “फलं” प्रथमा विभक्ति में रहकर क्रिया “खाद्यते” से जुड़ गया। कर्मवाच्य बनाते समय क्रिया में सामान्यतः “य” प्रत्यय और आत्मनेपदी रूप आता है।
कर्मवाच्य में वाक्य का केंद्र कर्म होता है, इसलिए क्रिया भी कर्म के लिंग और वचन के अनुसार बदलती है। उदाहरण के लिए सुनीतया फलानि खाद्यन्ते में “फलानि” नपुंसकलिंग बहुवचन है, इसलिए क्रिया “खाद्यन्ते” बहुवचन में आती है।
भाववाच्य तब प्रयोग होता है जब वाक्य में कर्म नहीं होता और केवल क्रिया या भाव को महत्व दिया जाता है। यह अकर्मक धातुओं से बनता है। जैसे—बालाः क्रीडन्ति का भाववाच्य होगा बालैः क्रीड्यते। यहाँ कोई कर्म नहीं है, इसलिए इसे कर्मवाच्य नहीं कहा जाएगा।
कर्तृवाच्य में कर्ता प्रथमा विभक्ति में और कर्म द्वितीया विभक्ति में होता है। कर्मवाच्य में कर्ता तृतीया विभक्ति में चला जाता है और कर्म प्रथमा विभक्ति में आ जाता है। जैसे—रामः पुस्तकं पठति → रामेण पुस्तकं पठ्यते।