“शब्दरूपाणि” पाठ में पुल्लिङ्ग, स्त्रीलिङ्ग और नपुंसकलिङ्ग शब्दों के विभक्ति-रूपों का अभ्यास कराया गया है।
NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 15 में ब्रह्मन्, गुणिन्, पथिन्, विद्वस्, वाच्, सरित्, जगत्, नामन्, कर्मन्, मनस्, तपस्, पयस्, चक्षुष् और सुप् प्रत्ययाः जैसे शब्दरूप व्यवस्थित tables में दिए गए हैं।
संस्कृत वाक्य बनाने और समझने के लिए शब्दरूपों का ज्ञान बहुत जरूरी है। किसी शब्द का रूप केवल उसके लिंग पर नहीं, बल्कि उसकी विभक्ति और वचन पर भी निर्भर करता है। Chapter 15 में सामान्य अकारान्त शब्दों से आगे बढ़कर नकारान्त, सकारान्त, जकारान्त, तकारान्त, शकारान्त और षकारान्त शब्दों के रूप दिए गए हैं। ये NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 15 students को शब्दरूप याद करने, विभक्ति पहचानने, संस्कृत वाक्य समझने और Class 9 Sanskrit Chapter 15 grammar answers revise करने में मदद करते हैं।
Key Takeaways
- पाठ का नाम: शब्दरूपाणि
- मुख्य विषय: पुल्लिङ्ग, स्त्रीलिङ्ग और नपुंसकलिङ्ग शब्दरूप
- मुख्य अभ्यास: विभक्ति, एकवचन, द्विवचन, बहुवचन और सम्बोधन रूप
- मुख्य शब्द: ब्रह्मन्, गुणिन्, पथिन्, विद्वस्, चन्द्रमस्, वाच्, सरित्, जगत्, नामन्, कर्मन्, मनस्, तपस्
- मुख्य grammar focus: सुप् प्रत्ययाः और शब्दरूप-निर्माण
NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 15 Structure 2026
| Section |
Text / Skill Area |
Main Learning Focus |
| पुंलिङ्गशब्दाः |
ब्रह्मन्, गुणिन्, पथिन्, विद्वस् आदि |
Masculine declensions |
| स्त्रीलिङ्गरूपाणि |
वाच्, त्वच्, स्रज्, रुज्, सरित् आदि |
Feminine declensions |
| नपुंसकलिङ्गरूपाणि |
जगत्, नामन्, कर्मन्, मनस्, तपस् आदि |
Neuter declensions |
| सुप् प्रत्ययाः |
सु, औ, जस् आदि |
Case suffixes |
| विभक्ति-अभ्यास |
प्रथमा से सप्तमी और सम्बोधन |
Form recognition |
| Grammar revision |
एकवचन, द्विवचन, बहुवचन |
Exam preparation |
NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 15: शब्दरूपाणि
इस section में शब्दरूपाणि question answer और tables पुस्तक के क्रम के अनुसार दिए गए हैं। यह विद्यार्थियों को Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 15 solutions को textbook-based format में समझने में मदद करता है।
शब्दरूपाणि
(क) शब्दरूपाणि किम्?
उत्तर: विभक्ति-वचन-लिङ्गानुसारं शब्दस्य यानि रूपाणि भवन्ति, तानि शब्दरूपाणि इति कथ्यन्ते।
हिंदी अर्थ: किसी शब्द के लिंग, विभक्ति और वचन के अनुसार बनने वाले रूप शब्दरूप कहलाते हैं।
(ख) विभक्तयः काः सन्ति?
उत्तर: प्रथमा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पञ्चमी, षष्ठी, सप्तमी और सम्बोधनम् — एताः विभक्तयः सन्ति।
(ग) वचनानि कति सन्ति?
उत्तर: वचनानि त्रीणि सन्ति — एकवचनम्, द्विवचनम्, बहुवचनम्।
(घ) Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 15 में किन लिङ्गों के शब्दरूप दिए गए हैं?
उत्तर: Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 15 में पुंलिङ्ग, स्त्रीलिङ्ग और नपुंसकलिङ्ग शब्दों के रूप दिए गए हैं।
पुंलिङ्गशब्दाः
1. ‘न’ कारान्तः पुंलिङ्गः ‘ब्रह्मन्’ शब्दः
यह table ब्रह्मन् शब्दरूप को विभक्ति और वचन के अनुसार समझाता है।
| विभक्तिः |
एकवचनम् |
द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
| प्रथमा |
ब्रह्मा |
ब्रह्माणौ |
ब्रह्माणः |
| द्वितीया |
ब्रह्माणम् |
ब्रह्माणौ |
ब्रह्मणः |
| तृतीया |
ब्रह्मणा |
ब्रह्मभ्याम् |
ब्रह्मभिः |
| चतुर्थी |
ब्रह्मणे |
ब्रह्मभ्याम् |
ब्रह्मभ्यः |
| पञ्चमी |
ब्रह्मणः |
ब्रह्मभ्याम् |
ब्रह्मभ्यः |
| षष्ठी |
ब्रह्मणः |
ब्रह्मणोः |
ब्रह्मणाम् |
| सप्तमी |
ब्रह्मणि |
ब्रह्मणोः |
ब्रह्मसु |
| सम्बोधनम् |
हे ब्रह्मन् |
हे ब्रह्माणौ |
हे ब्रह्माणः |
2. ‘न’ कारान्तः पुंलिङ्गः ‘गुणिन्’ शब्दः
यह table गुणिन् शब्दरूप के लिए उपयोगी है।
| विभक्तिः |
एकवचनम् |
द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
| प्रथमा |
गुणी |
गुणिनौ |
गुणिनः |
| द्वितीया |
गुणिनम् |
गुणिनौ |
गुणिनः |
| तृतीया |
गुणिना |
गुणिभ्याम् |
गुणिभिः |
| चतुर्थी |
गुणिने |
गुणिभ्याम् |
गुणिभ्यः |
| पञ्चमी |
गुणिनः |
गुणिभ्याम् |
गुणिभ्यः |
| षष्ठी |
गुणिनः |
गुणिनोः |
गुणिनाम् |
| सप्तमी |
गुणिनि |
गुणिनोः |
गुणिषु |
| सम्बोधनम् |
हे गुणिन् |
हे गुणिनौ |
हे गुणिनः |
3. ‘न’ कारान्तः पुंलिङ्गः ‘पथिन्’ शब्दः
| विभक्तिः |
एकवचनम् |
द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
| प्रथमा |
पन्थाः |
पन्थानौ |
पन्थानः |
| द्वितीया |
पन्थानम् |
पन्थानौ |
पथः |
| तृतीया |
पथा |
पथिभ्याम् |
पथिभिः |
| चतुर्थी |
पथे |
पथिभ्याम् |
पथिभ्यः |
| पञ्चमी |
पथः |
पथिभ्याम् |
पथिभ्यः |
| षष्ठी |
पथः |
पथोः |
पथाम् |
| सप्तमी |
पथि |
पथोः |
पथिषु |
| सम्बोधनम् |
हे पन्थाः |
हे पन्थानौ |
हे पन्थानः |
4. ‘स’ कारान्तः पुंलिङ्गः ‘विद्वस्’ शब्दः
यह table विद्वस् शब्दरूप और विद्वान् शब्दरूप याद करने में मदद करता है।
| विभक्तिः |
एकवचनम् |
द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
| प्रथमा |
विद्वान् |
विद्वांसौ |
विद्वांसः |
| द्वितीया |
विद्वांसम् |
विद्वांसौ |
विदुषः |
| तृतीया |
विदुषा |
विद्वद्भ्याम् |
विद्वद्भिः |
| चतुर्थी |
विदुषे |
विद्वद्भ्याम् |
विद्वद्भ्यः |
| पञ्चमी |
विदुषः |
विद्वद्भ्याम् |
विद्वद्भ्यः |
| षष्ठी |
विदुषः |
विदुषोः |
विदुषाम् |
| सप्तमी |
विदुषि |
विदुषोः |
विद्वत्सु |
| सम्बोधनम् |
हे विद्वन् |
हे विद्वांसौ |
हे विद्वांसः |
5. ‘स’ कारान्तः पुंलिङ्गः ‘चन्द्रमस्’ शब्दः
| विभक्तिः |
एकवचनम् |
द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
| प्रथमा |
चन्द्रमाः |
चन्द्रमसौ |
चन्द्रमसः |
| द्वितीया |
चन्द्रमसम् |
चन्द्रमसौ |
चन्द्रमसः |
| तृतीया |
चन्द्रमसा |
चन्द्रमोभ्याम् |
चन्द्रमोभिः |
| चतुर्थी |
चन्द्रमसे |
चन्द्रमोभ्याम् |
चन्द्रमोभ्यः |
| पञ्चमी |
चन्द्रमसः |
चन्द्रमोभ्याम् |
चन्द्रमोभ्यः |
| षष्ठी |
चन्द्रमसः |
चन्द्रमसोः |
चन्द्रमसाम् |
| सप्तमी |
चन्द्रमसि |
चन्द्रमसोः |
चन्द्रमस्सु |
| सम्बोधनम् |
हे चन्द्रमः |
हे चन्द्रमसौ |
हे चन्द्रमसः |
6. ‘स’ कारान्तः पुंलिङ्गः ‘पुंस्’ शब्दः
| विभक्तिः |
एकवचनम् |
द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
| प्रथमा |
पुमान् |
पुमांसौ |
पुमांसः |
| द्वितीया |
पुमांसम् |
पुमांसौ |
पुंसः |
| तृतीया |
पुंसा |
पुंभ्याम् / पुम्भ्याम् |
पुंभिः / पुम्भिः |
| चतुर्थी |
पुंसे |
पुंभ्याम् / पुम्भ्याम् |
पुंभ्यः / पुम्भ्यः |
| पञ्चमी |
पुंसः |
पुंभ्याम् / पुम्भ्याम् |
पुंभ्यः / पुम्भ्यः |
| षष्ठी |
पुंसः |
पुंसोः |
पुंसाम् |
| सप्तमी |
पुंसि |
पुंसोः |
पुंसु |
| सम्बोधनम् |
हे पुमन् |
हे पुमांसौ |
हे पुमांसः |
7. ‘स’ कारान्तः पुंलिङ्गः ‘वेधस्’ शब्दः
| विभक्तिः |
एकवचनम् |
द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
| प्रथमा |
वेधाः |
वेधसौ |
वेधसः |
| द्वितीया |
वेधसम् |
वेधसौ |
वेधसः |
| तृतीया |
वेधसा |
वेधोभ्याम् |
वेधोभिः |
| चतुर्थी |
वेधसे |
वेधोभ्याम् |
वेधोभ्यः |
| पञ्चमी |
वेधसः |
वेधोभ्याम् |
वेधोभ्यः |
| षष्ठी |
वेधसः |
वेधसोः |
वेधसाम् |
| सप्तमी |
वेधसि |
वेधसोः |
वेधःसु / वेधस्सु |
| सम्बोधनम् |
हे वेधः |
हे वेधसौ |
हे वेधसः |
8. ‘द्’ कारान्तः पुंलिङ्गः ‘सुहृद्’ शब्दः
| विभक्तिः |
एकवचनम् |
द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
| प्रथमा |
सुहृद् / सुहृत् |
सुहृदौ |
सुहृदः |
| द्वितीया |
सुहृदम् |
सुहृदौ |
सुहृदः |
| तृतीया |
सुहृदा |
सुहृद्भ्याम् |
सुहृद्भिः |
| चतुर्थी |
सुहृदे |
सुहृद्भ्याम् |
सुहृद्भ्यः |
| पञ्चमी |
सुहृदः |
सुहृद्भ्याम् |
सुहृद्भ्यः |
| षष्ठी |
सुहृदः |
सुहृदोः |
सुहृदाम् |
| सप्तमी |
सुहृदि |
सुहृदोः |
सुहृत्सु |
| सम्बोधनम् |
हे सुहृद् / हे सुहृत् |
हे सुहृदौ |
हे सुहृदः |
9. ‘ज’ कारान्तः पुंलिङ्गः ‘वणिज्’ शब्दः
| विभक्तिः |
एकवचनम् |
द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
| प्रथमा |
वणिग् / वणिक् |
वणिजौ |
वणिजः |
| द्वितीया |
वणिजम् |
वणिजौ |
वणिजः |
| तृतीया |
वणिजा |
वणिग्भ्याम् |
वणिग्भिः |
| चतुर्थी |
वणिजे |
वणिग्भ्याम् |
वणिग्भ्यः |
| पञ्चमी |
वणिजः |
वणिग्भ्याम् |
वणिग्भ्यः |
| षष्ठी |
वणिजः |
वणिजोः |
वणिजाम् |
| सप्तमी |
वणिजि |
वणिजोः |
वणिक्षु |
| सम्बोधनम् |
हे वणिग् / हे वणिक् |
हे वणिजौ |
हे वणिजः |
10. ‘ज’ कारान्तः पुंलिङ्गः ‘भिषज्’ शब्दः
| विभक्तिः |
एकवचनम् |
द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
| प्रथमा |
भिषग् / भिषक् |
भिषजौ |
भिषजः |
| द्वितीया |
भिषजम् |
भिषजौ |
भिषजः |
| तृतीया |
भिषजा |
भिषग्भ्याम् |
भिषग्भिः |
| चतुर्थी |
भिषजे |
भिषग्भ्याम् |
भिषग्भ्यः |
| पञ्चमी |
भिषजः |
भिषग्भ्याम् |
भिषग्भ्यः |
| षष्ठी |
भिषजः |
भिषजोः |
भिषजाम् |
| सप्तमी |
भिषजि |
भिषजोः |
भिषक्षु |
| सम्बोधनम् |
हे भिषग् / हे भिषक् |
हे भिषजौ |
हे भिषजः |
स्त्रीलिङ्गरूपाणि
1. ‘च’ कारान्तः स्त्रीलिङ्गः ‘वाच्’ शब्दः
यह table वाच् शब्दरूप के अभ्यास के लिए है।
| विभक्तिः |
एकवचनम् |
द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
| प्रथमा |
वाग् / वाक् |
वाचौ |
वाचः |
| द्वितीया |
वाचम् |
वाचौ |
वाचः |
| तृतीया |
वाचा |
वाग्भ्याम् |
वाग्भिः |
| चतुर्थी |
वाचे |
वाग्भ्याम् |
वाग्भ्यः |
| पञ्चमी |
वाचः |
वाग्भ्याम् |
वाग्भ्यः |
| षष्ठी |
वाचः |
वाचोः |
वाचाम् |
| सप्तमी |
वाचि |
वाचोः |
वाक्षु |
| सम्बोधनम् |
हे वाग् / हे वाक् |
हे वाचौ |
हे वाचः |
2. ‘च’ कारान्तः स्त्रीलिङ्गः ‘त्वच्’ शब्दः
| विभक्तिः |
एकवचनम् |
द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
| प्रथमा |
त्वग् / त्वक् |
त्वचौ |
त्वचः |
| द्वितीया |
त्वचम् |
त्वचौ |
त्वचः |
| तृतीया |
त्वचा |
त्वग्भ्याम् |
त्वग्भिः |
| चतुर्थी |
त्वचे |
त्वग्भ्याम् |
त्वग्भ्यः |
| पञ्चमी |
त्वचः |
त्वग्भ्याम् |
त्वग्भ्यः |
| षष्ठी |
त्वचः |
त्वचोः |
त्वचाम् |
| सप्तमी |
त्वचि |
त्वचोः |
त्वक्षु |
| सम्बोधनम् |
हे त्वग् / हे त्वक् |
हे त्वचौ |
हे त्वचः |
3. ‘ज’ कारान्तः स्त्रीलिङ्गः ‘स्रज्’ शब्दः
| विभक्तिः |
एकवचनम् |
द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
| प्रथमा |
स्रग् / स्रक् |
स्रजौ |
स्रजः |
| द्वितीया |
स्रजम् |
स्रजौ |
स्रजः |
| तृतीया |
स्रजा |
स्रग्भ्याम् |
स्रग्भिः |
| चतुर्थी |
स्रजे |
स्रग्भ्याम् |
स्रग्भ्यः |
| पञ्चमी |
स्रजः |
स्रग्भ्याम् |
स्रग्भ्यः |
| षष्ठी |
स्रजः |
स्रजोः |
स्रजाम् |
| सप्तमी |
स्रजि |
स्रजोः |
स्रक्षु |
| सम्बोधनम् |
हे स्रग् / हे स्रक् |
हे स्रजौ |
हे स्रजः |
4. ‘ज’ कारान्तः स्त्रीलिङ्गः ‘रुज्’ शब्दः
| विभक्तिः |
एकवचनम् |
द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
| प्रथमा |
रुग् / रुक् |
रुजौ |
रुजः |
| द्वितीया |
रुजम् |
रुजौ |
रुजः |
| तृतीया |
रुजा |
रुग्भ्याम् |
रुग्भिः |
| चतुर्थी |
रुजे |
रुग्भ्याम् |
रुग्भ्यः |
| पञ्चमी |
रुजः |
रुग्भ्याम् |
रुग्भ्यः |
| षष्ठी |
रुजः |
रुजोः |
रुजाम् |
| सप्तमी |
रुजि |
रुजोः |
रुक्षु |
| सम्बोधनम् |
हे रुग् / हे रुक् |
हे रुजौ |
हे रुजः |
5. ‘त’ कारान्तः स्त्रीलिङ्गः ‘सरित्’ शब्दः
| विभक्तिः |
एकवचनम् |
द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
| प्रथमा |
सरिद् / सरित् |
सरितौ |
सरितः |
| द्वितीया |
सरितम् |
सरितौ |
सरितः |
| तृतीया |
सरिता |
सरिद्भ्याम् |
सरिद्भिः |
| चतुर्थी |
सरिते |
सरिद्भ्याम् |
सरिद्भ्यः |
| पञ्चमी |
सरितः |
सरिद्भ्याम् |
सरिद्भ्यः |
| षष्ठी |
सरितः |
सरितोः |
सरिताम् |
| सप्तमी |
सरिति |
सरितोः |
सरित्सु |
| सम्बोधनम् |
हे सरिद् / हे सरित् |
हे सरितौ |
हे सरितः |
6. ‘त’ कारान्तः स्त्रीलिङ्गः ‘विद्युत्’ शब्दः
| विभक्तिः |
एकवचनम् |
द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
| प्रथमा |
विद्युद् / विद्युत् |
विद्युतौ |
विद्युतः |
| द्वितीया |
विद्युतम् |
विद्युतौ |
विद्युतः |
| तृतीया |
विद्युतया |
विद्युद्भ्याम् |
विद्युद्भिः |
| चतुर्थी |
विद्युतये |
विद्युद्भ्याम् |
विद्युद्भ्यः |
| पञ्चमी |
विद्युतः |
विद्युद्भ्याम् |
विद्युद्भ्यः |
| षष्ठी |
विद्युतः |
विद्युतोः |
विद्युताम् |
| सप्तमी |
विद्युतयि / विद्यति |
विद्युतोः |
विद्युत्सु |
| सम्बोधनम् |
हे विद्युद् / हे विद्युत् |
हे विद्युतौ |
हे विद्युतः |
7. ‘व’ कारान्तः स्त्रीलिङ्गः ‘दिव्’ शब्दः
| विभक्तिः |
एकवचनम् |
द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
| प्रथमा |
द्यौः |
दिवौ |
दिवः |
| द्वितीया |
दिवम् |
दिवौ |
दिवः |
| तृतीया |
दिवा |
द्युभ्याम् |
द्युभिः |
| चतुर्थी |
दिवे |
द्युभ्याम् |
द्युभ्यः |
| पञ्चमी |
दिवः |
द्युभ्याम् |
द्युभ्यः |
| षष्ठी |
दिवः |
दिवोः |
दिवाम् |
| सप्तमी |
दिवि |
दिवोः |
द्युषु |
| सम्बोधनम् |
हे द्यौः |
हे दिवौ |
हे दिवः |
8. ‘श’ कारान्तः स्त्रीलिङ्गः ‘दिश्’ शब्दः
| विभक्तिः |
एकवचनम् |
द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
| प्रथमा |
दिग् / दिक् |
दिशौ |
दिशः |
| द्वितीया |
दिशम् |
दिशौ |
दिशः |
| तृतीया |
दिशा |
दिग्भ्याम् |
दिग्भिः |
| चतुर्थी |
दिशे |
दिग्भ्याम् |
दिग्भ्यः |
| पञ्चमी |
दिशः |
दिग्भ्याम् |
दिग्भ्यः |
| षष्ठी |
दिशः |
दिशोः |
दिशाम् |
| सप्तमी |
दिशि |
दिशोः |
दिक्षु |
| सम्बोधनम् |
हे दिग् / हे दिक् |
हे दिशौ |
हे दिशः |
नपुंसकलिङ्गरूपाणि
1. ‘त’ कारान्तः नपुंसकलिङ्गः ‘जगत्’ शब्दः
यह table जगत् शब्दरूप को clear format में समझाता है।
| विभक्तिः |
एकवचनम् |
द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
| प्रथमा |
जगद् / जगत् |
जगती |
जगन्ति |
| द्वितीया |
जगद् / जगत् |
जगती |
जगन्ति |
| तृतीया |
जगता |
जगद्भ्याम् |
जगद्भिः |
| चतुर्थी |
जगते |
जगद्भ्याम् |
जगद्भ्यः |
| पञ्चमी |
जगतः |
जगद्भ्याम् |
जगद्भ्यः |
| षष्ठी |
जगतः |
जगतोः |
जगताम् |
| सप्तमी |
जगति |
जगतोः |
जगत्सु |
| सम्बोधनम् |
हे जगद् / हे जगत् |
हे जगती |
हे जगन्ति |
2. ‘न’ कारान्तः नपुंसकलिङ्गः ‘नामन्’ शब्दः
यह table नामन् शब्दरूप के अभ्यास के लिए है।
| विभक्तिः |
एकवचनम् |
द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
| प्रथमा |
नाम |
नाम्नी / नामनी |
नामानि |
| द्वितीया |
नाम |
नाम्नी / नामनी |
नामानि |
| तृतीया |
नाम्ना |
नामभ्याम् |
नामभिः |
| चतुर्थी |
नाम्ने |
नामभ्याम् |
नामभ्यः |
| पञ्चमी |
नाम्नः |
नामभ्याम् |
नामभ्यः |
| षष्ठी |
नाम्नः |
नाम्नोः |
नाम्नाम् |
| सप्तमी |
नाम्नि / नामनि |
नाम्नोः |
नामसु |
| सम्बोधनम् |
हे नामन् / हे नाम |
हे नाम्नी / हे नामनी |
हे नामानि |
3. ‘न’ कारान्तः नपुंसकलिङ्गः ‘कर्मन्’ शब्दः
| विभक्तिः |
एकवचनम् |
द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
| प्रथमा |
कर्म |
कर्मणी |
कर्माणि |
| द्वितीया |
कर्म |
कर्मणी |
कर्माणि |
| तृतीया |
कर्मणा |
कर्मभ्याम् |
कर्मभिः |
| चतुर्थी |
कर्मणे |
कर्मभ्याम् |
कर्मभ्यः |
| पञ्चमी |
कर्मणः |
कर्मभ्याम् |
कर्मभ्यः |
| षष्ठी |
कर्मणः |
कर्मणोः |
कर्मणाम् |
| सप्तमी |
कर्मणि |
कर्मणोः |
कर्मसु |
| सम्बोधनम् |
हे कर्मन् / हे कर्म |
हे कर्मणी |
हे कर्माणि |
4. ‘न’ कारान्तः नपुंसकलिङ्गः ‘चर्मन्’ शब्दः
| विभक्तिः |
एकवचनम् |
द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
| प्रथमा |
चर्म |
चर्मणी |
चर्माणि |
| द्वितीया |
चर्म |
चर्मणी |
चर्माणि |
| तृतीया |
चर्मणा |
चर्मभ्याम् |
चर्मभिः |
| चतुर्थी |
चर्मणे |
चर्मभ्याम् |
चर्मभ्यः |
| पञ्चमी |
चर्मणः |
चर्मभ्याम् |
चर्मभ्यः |
| षष्ठी |
चर्मणः |
चर्मणोः |
चर्मणाम् |
| सप्तमी |
चर्मणि |
चर्मणोः |
चर्मसु |
| सम्बोधनम् |
हे चर्मन् / हे चर्म |
हे चर्मणी |
हे चर्माणि |
5. ‘स’ कारान्तः नपुंसकलिङ्गः ‘मनस्’ शब्दः
यह table मनस् शब्दरूप को याद करने में मदद करता है।
| विभक्तिः |
एकवचनम् |
द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
| प्रथमा |
मनः |
मनसी |
मनांसि |
| द्वितीया |
मनः |
मनसी |
मनांसि |
| तृतीया |
मनसा |
मनोभ्याम् |
मनोभिः |
| चतुर्थी |
मनसे |
मनोभ्याम् |
मनोभ्यः |
| पञ्चमी |
मनसः |
मनोभ्याम् |
मनोभ्यः |
| षष्ठी |
मनसः |
मनसोः |
मनसाम् |
| सप्तमी |
मनसि |
मनसोः |
मनःसु / मनस्सु |
| सम्बोधनम् |
हे मनः |
हे मनसी |
हे मनांसि |
6. ‘स’ कारान्तः नपुंसकलिङ्गः ‘तपस्’ शब्दः
| विभक्तिः |
एकवचनम् |
द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
| प्रथमा |
तपः |
तपसी |
तपांसि |
| द्वितीया |
तपः |
तपसी |
तपांसि |
| तृतीया |
तपसा |
तपोभ्याम् |
तपोभिः |
| चतुर्थी |
तपसे |
तपोभ्याम् |
तपोभ्यः |
| पञ्चमी |
तपसः |
तपोभ्याम् |
तपोभ्यः |
| षष्ठी |
तपसः |
तपसोः |
तपसाम् |
| सप्तमी |
तपसि |
तपसोः |
तपःसु / तपस्सु |
| सम्बोधनम् |
हे तपः |
हे तपसी |
हे तपांसि |
7. ‘स’ कारान्तः नपुंसकलिङ्गः ‘पयस्’ शब्दः
| विभक्तिः |
एकवचनम् |
द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
| प्रथमा |
पयः |
पयसी |
पयांसि |
| द्वितीया |
पयः |
पयसी |
पयांसि |
| तृतीया |
पयसा |
पयोभ्याम् |
पयोभिः |
| चतुर्थी |
पयसे |
पयोभ्याम् |
पयोभ्यः |
| पञ्चमी |
पयसः |
पयोभ्याम् |
पयोभ्यः |
| षष्ठी |
पयसः |
पयसोः |
पयसाम् |
| सप्तमी |
पयसि |
पयसोः |
पयःसु / पयस्सु |
| सम्बोधनम् |
हे पयः |
हे पयसी |
हे पयांसि |
8. ‘स’ कारान्तः नपुंसकलिङ्गः ‘शिरस्’ शब्दः
| विभक्तिः |
एकवचनम् |
द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
| प्रथमा |
शिरः |
शिरसी |
शिरांसि |
| द्वितीया |
शिरः |
शिरसी |
शिरांसि |
| तृतीया |
शिरसा |
शिरोभ्याम् |
शिरोभिः |
| चतुर्थी |
शिरसे |
शिरोभ्याम् |
शिरोभ्यः |
| पञ्चमी |
शिरसः |
शिरोभ्याम् |
शिरोभ्यः |
| षष्ठी |
शिरसः |
शिरसोः |
शिरसाम् |
| सप्तमी |
शिरसि |
शिरसोः |
शिरःसु / शिरस्सु |
| सम्बोधनम् |
हे शिरः |
हे शिरसी |
हे शिरांसि |
9. ‘स’ कारान्तः नपुंसकलिङ्गः ‘छन्दस्’ शब्दः
यह table screenshot वाले broken format की जगह proper table form में use करें.
| विभक्तिः |
एकवचनम् |
द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
| प्रथमा |
छन्दः |
छन्दसी |
छन्दांसि |
| द्वितीया |
छन्दः |
छन्दसी |
छन्दांसि |
| तृतीया |
छन्दसा |
छन्दोभ्याम् |
छन्दोभिः |
| चतुर्थी |
छन्दसे |
छन्दोभ्याम् |
छन्दोभ्यः |
| पञ्चमी |
छन्दसः |
छन्दोभ्याम् |
छन्दोभ्यः |
| षष्ठी |
छन्दसः |
छन्दसोः |
छन्दसाम् |
| सप्तमी |
छन्दसि |
छन्दसोः |
छन्दःसु / छन्दस्सु |
| सम्बोधनम् |
हे छन्दः |
हे छन्दसी |
हे छन्दांसि |
10. ‘ष’ कारान्तः नपुंसकलिङ्गः ‘चक्षुष्’ शब्दः
| विभक्तिः |
एकवचनम् |
द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
| प्रथमा |
चक्षुः |
चक्षुषी |
चक्षूंषि |
| द्वितीया |
चक्षुः |
चक्षुषी |
चक्षूंषि |
| तृतीया |
चक्षुषा |
चक्षुर्भ्याम् |
चक्षुर्भिः |
| चतुर्थी |
चक्षुषे |
चक्षुर्भ्याम् |
चक्षुर्भ्यः |
| पञ्चमी |
चक्षुषः |
चक्षुर्भ्याम् |
चक्षुर्भ्यः |
| षष्ठी |
चक्षुषः |
चक्षुषोः |
चक्षुषाम् |
| सप्तमी |
चक्षुषि |
चक्षुषोः |
चक्षुःषु / चक्षुष्षु |
| सम्बोधनम् |
हे चक्षुः |
हे चक्षुषी |
हे चक्षूंषि |
सुप्-प्रत्ययाः
यह section सुप् प्रत्ययाः को पुंलिङ्ग, स्त्रीलिङ्ग और नपुंसकलिङ्ग — तीनों में लागू होने वाले विभक्ति-प्रत्ययों के रूप में समझाता है।
| विभक्तिः |
एकवचनम् |
द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
| प्रथमा |
सु |
औ |
जस् |
| द्वितीया |
अम् |
औट् |
शस् |
| तृतीया |
टा |
भ्याम् |
भिस् |
| चतुर्थी |
ङे |
भ्याम् |
भ्यस् |
| पञ्चमी |
ङसि |
भ्याम् |
भ्यस् |
| षष्ठी |
ङस् |
ओस् |
आम् |
| सप्तमी |
ङि |
ओस् |
सुप् |
शब्दरूप-अभ्यास के लिए उपयोगी Notes
(क) नपुंसकलिङ्ग में प्रथमा और द्वितीया कैसे याद करें?
उत्तर: नपुंसकलिङ्गशब्देषु प्रथमा-विभक्तिः और द्वितीया-विभक्तिः प्रायः समानरूपेण भवन्ति।
उदाहरण:
| शब्दः |
प्रथमा एकवचनम् |
द्वितीया एकवचनम् |
| जगत् |
जगत् / जगद् |
जगत् / जगद् |
| नामन् |
नाम |
नाम |
| कर्मन् |
कर्म |
कर्म |
| मनस् |
मनः |
मनः |
| तपस् |
तपः |
तपः |
(ख) सम्बोधनम् कैसे पहचानें?
उत्तर: सम्बोधन रूप किसी को पुकारने के लिए प्रयोग होता है। इसके पहले अक्सर हे आता है।
उदाहरण:
| शब्दः |
सम्बोधनम् |
| ब्रह्मन् |
हे ब्रह्मन् |
| गुणिन् |
हे गुणिन् |
| विद्वस् |
हे विद्वन् |
| वाच् |
हे वाक् / हे वाग् |
| जगत् |
हे जगत् / हे जगद् |
| मनस् |
हे मनः |
(ग) बहुवचन रूपों में कौन-से patterns ध्यान रखने चाहिए?
उत्तर:
| शब्दप्रकारः |
उदाहरणम् |
बहुवचन-रूपम् |
| नकारान्त पुंलिङ्ग |
ब्रह्मन् |
ब्रह्माणः |
| इन्-प्रत्ययान्त |
गुणिन् |
गुणिनः |
| सकारान्त पुंलिङ्ग |
विद्वस् |
विद्वांसः |
| नपुंसकलिङ्ग नकारान्त |
नामन् |
नामानि |
| नपुंसकलिङ्ग सकारान्त |
मनस् |
मनांसि |
| नपुंसकलिङ्ग तकारान्त |
जगत् |
जगन्ति |
Chapter-Wise NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada
| Chapter No. |
Chapter Name |
NCERT Solutions |
| Chapter 1 |
सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम् |
NCERT Solutions |
| Chapter 2 |
सुखस्य मूलं धर्मः धर्मस्य मूलम् अर्थः |
NCERT Solutions |
| Chapter 3 |
आत्मवत्सर्वभूतेषु यः पश्यति सः पण्डितः |
NCERT Solutions |
| Chapter 4 |
न खलु वयस्तेजसो हेतुः |
NCERT Solutions |
| Chapter 5 |
एषा सा कृतकबुद्धिः मानवबुद्धेः सहकरी |
NCERT Solutions |
| Chapter 6 |
मनःपूतं समाचरेत् |
NCERT Solutions |
| Chapter 7 |
उपायं चिन्तयेत् प्राज्ञस्तथापायं च चिन्तयेत् |
NCERT Solutions |
| Chapter 8 |
अन्नाद् आनन्दं प्रति |
NCERT Solutions |
| Chapter 9 |
कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः |
NCERT Solutions |
| Chapter 10 |
णमो अरिहन्ताणम् |
NCERT Solutions |
| Chapter 11 |
वर्णोच्चारण-शिक्षा २ |
NCERT Solutions |
| Chapter 12 |
अन्वयः |
NCERT Solutions |
| Chapter 13 |
समासः |
NCERT Solutions |
| Chapter 14 |
वाच्यम् |
NCERT Solutions |
| Chapter 15 |
शब्दरूपाणि |
NCERT Solutions |
| Chapter 16 |
धातुरूपाणि |
NCERT Solutions |
Topics Covered in NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 15
NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 15 cover declension tables and form recognition through “शब्दरूपाणि”.
- विभक्ति, वचन और लिंग के अनुसार शब्दरूपों की समझ
- प्रथमा से सप्तमी तक विभक्ति-रूपों का अभ्यास
- सम्बोधनम् और “हे” के साथ प्रयुक्त रूपों की पहचान
- नकारान्त पुंलिङ्ग शब्द: ब्रह्मन्, गुणिन् और पथिन्
- सकारान्त पुंलिङ्ग शब्द: विद्वस्, चन्द्रमस्, पुंस् और वेधस्
- दकारान्त और जकारान्त पुंलिङ्ग शब्द: सुहृद्, वणिज् और भिषज्
- चकारान्त, जकारान्त, तकारान्त, वकारान्त और शकारान्त स्त्रीलिङ्ग शब्द
- वाच्, त्वच्, स्रज्, रुज्, सरित्, विद्युत्, दिव् और दिश् शब्दरूप
- तकारान्त, नकारान्त, सकारान्त और षकारान्त नपुंसकलिङ्ग शब्द
- जगत्, नामन्, कर्मन्, चर्मन्, मनस्, तपस्, पयस्, शिरस्, छन्दस् और चक्षुष् शब्दरूप
- नपुंसकलिङ्ग में प्रथमा और द्वितीया के समान रूपों की पहचान
- सुप् प्रत्ययों का विभक्ति और वचन के अनुसार क्रम
- शब्दरूपों के आधार पर संस्कृत वाक्य पढ़ने और बनाने का अभ्यास
Important Concepts in NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 15
| Concept |
Explanation |
Exam Use |
| शब्दरूपाणि |
शब्द के विभक्ति-वचन-लिंग अनुसार रूप |
Grammar base |
| विभक्तिः |
प्रथमा, द्वितीया आदि case forms |
रूप-पहचान |
| एकवचनम् |
एक व्यक्ति / वस्तु के लिए रूप |
Table practice |
| द्विवचनम् |
दो व्यक्तियों / वस्तुओं के लिए रूप |
Sanskrit specialty |
| बहुवचनम् |
अनेक व्यक्तियों / वस्तुओं के लिए रूप |
Table practice |
| सम्बोधनम् |
पुकारने का रूप |
हे + शब्द |
| पुंलिङ्गशब्दाः |
ब्रह्मन्, गुणिन्, विद्वस् जैसे शब्द |
Masculine forms |
| स्त्रीलिङ्गशब्दाः |
वाच्, सरित्, दिश् जैसे शब्द |
Feminine forms |
| नपुंसकलिङ्गशब्दाः |
जगत्, नामन्, मनस् जैसे शब्द |
Neuter forms |
| सुप् प्रत्ययाः |
विभक्ति-वचन के मूल प्रत्यय |
Paninian grammar |
| प्रथमा-द्वितीया समानता |
नपुंसकलिङ्ग में अक्सर दोनों रूप समान होते हैं |
Quick recall |
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