NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 16
“धातुरूपाणि” पाठ में परस्मैपदी और आत्मनेपदी धातुओं के रूप पाँच प्रमुख लकारों में समझाए गए हैं।
NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 16 में पठ्, वर्ध्, लभ्, शीङ् और भुज् धातुओं के लट्, लृट्, लङ्, लोट् और विधिलिङ् रूपों के साथ णिच्-प्रत्ययान्त प्रयोग भी दिए गए हैं।
संस्कृत में क्रियापद धातु से बनता है, और वही वाक्य का समय, पुरुष, वचन और प्रयोग स्पष्ट करता है। Chapter 16 में विद्यार्थी धातु-रूपों को केवल याद नहीं करते, बल्कि यह भी समझते हैं कि पठति, पठिष्यति, अपठत्, पठतु और पठेत् जैसे रूप अलग-अलग लकारों में कैसे बदलते हैं। परस्मैपदिधातवः और आत्मनेपदिधातवः के अलग-अलग endings पहचानना इस chapter का मुख्य अभ्यास है। ये NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 16 students को धातुरूप tables, लकार-भेद और Class 9 Sanskrit Chapter 16 grammar answers revise करने में मदद करते हैं।
Key Takeaways
- पाठ का नाम: धातुरूपाणि
- मुख्य विषय: परस्मैपदी और आत्मनेपदी धातु-रूप
- मुख्य धातवः: पठ्, वर्ध्, लभ्, शीङ्, भुज्
- मुख्य लकाराः: लट्, लृट्, लङ्, लोट्, विधिलिङ्
- विशेष अभ्यास: णिच्-प्रत्ययान्त प्रयोग यानी प्रेरणार्थक रूप
- मुख्य grammar focus: पुरुष, वचन, लकार और धातुरूप-निर्माण
NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 16 Structure 2026
| Section | Text / Skill Area | Main Learning Focus |
| णिच्-प्रत्ययान्त प्रयोग | पठ् + णिच् = पाठयति | प्रेरणार्थक रूप |
| परस्मैपदिधातवः | पठ् धातु | पाँच लकारों में रूप |
| आत्मनेपदिधातवः | वर्ध् और लभ् धातु | आत्मनेपदी endings |
| विशिष्टधातवः | शीङ् और भुज् | विशेष आत्मनेपदी रूप |
NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 16: धातुरूपाणि
इस section में धातुरूपाणि question answer और tables पुस्तक के क्रम के अनुसार दिए गए हैं। यह विद्यार्थियों को Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 16 solutions को textbook-based format में समझने में मदद करता है।
धातुरूपाणि
(क) धातुरूपाणि किम्?
उत्तर: पुरुष-वचन-लकारानुसारं धातोः यानि क्रियापदानि भवन्ति, तानि धातुरूपाणि इति कथ्यन्ते।
हिंदी अर्थ: धातु से पुरुष, वचन और लकार के अनुसार जो क्रिया-रूप बनते हैं, उन्हें धातुरूप कहते हैं।
(ख) अस्मिन् chapter मध्ये के लकाराः अभ्यासार्थं दत्ताः?
उत्तर: अस्मिन् chapter मध्ये लट्-लकारः, लृट्-लकारः, लङ्-लकारः, लोट्-लकारः, विधिलिङ्-लकारः च अभ्यासार्थं दत्ताः।
(ग) परस्मैपदिधातवः और आत्मनेपदिधातवः में क्या अंतर है?
उत्तर: परस्मैपदिधातुषु ति, तः, अन्ति इत्यादयः प्रत्ययाः भवन्ति। आत्मनेपदिधातुषु ते, एते, अन्ते इत्यादयः प्रत्ययाः भवन्ति।
हिंदी अर्थ: परस्मैपदी धातुओं में पठति जैसे रूप आते हैं, जबकि आत्मनेपदी धातुओं में वर्धते, लभते जैसे रूप आते हैं।
णिच्-प्रत्ययान्तानां प्रयोगः
यह section णिच् प्रत्यय और प्रेरणार्थक प्रयोग समझाता है।
(क) णिच्-प्रत्ययस्य प्रयोगः किमर्थं भवति?
उत्तर: णिच्-प्रत्ययस्य प्रयोगः प्रेरणार्थे भवति।
हिंदी अर्थ: णिच् प्रत्यय का प्रयोग किसी से काम करवाने या प्रेरित करने के अर्थ में होता है।
(ख) पठ् + णिच् इत्यस्य रूपं किम्?
उत्तर: पठ् + णिच् = पाठि / पाठय इति रूपं भवति। तस्मात् पाठयति इति प्रयोगः भवति।
हिंदी अर्थ: पठ् धातु में णिच् प्रत्यय लगने पर पाठयति रूप बनता है, जिसका अर्थ है “पढ़ाता है”।
‘पठ्’ धातुः — लट्-लकारः
मूल धातु: पठ्
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमपुरुषः | पठति | पठतः | पठन्ति |
| मध्यमपुरुषः | पठसि | पठथः | पठथ |
| उत्तमपुरुषः | पठामि | पठावः | पठामः |
पठ् + णिच् = पाठयति
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमपुरुषः | पाठयति | पाठयतः | पाठयन्ति |
| मध्यमपुरुषः | पाठयसि | पाठयथः | पाठयथ |
| उत्तमपुरुषः | पाठयामि | पाठयावः | पाठयामः |
(क) णिच्-प्रत्ययान्त धातुओं के कुछ उदाहरण लिखिए।
उत्तर: लेखयति, खादयति, हासयति, चालयति, स्मारयति, पाययति, क्रीडयति, नाययति, दर्शयति, गमयति, भोजयति, दापयति, श्रावयति, ज्ञापयति, गणयति इत्यादयः।
परस्मैपदिधातूनां पञ्चसु लकारेषु प्रयोगाः
यह भाग परस्मैपदिधातवः और पठ् धातु रूप को पाँच लकारों में समझाता है।
1. ‘पठ्’ धातुः — लट्-लकारः
लट्-लकार वर्तमानकाल के लिए प्रयोग होता है।
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमपुरुषः | पठति | पठतः | पठन्ति |
| मध्यमपुरुषः | पठसि | पठथः | पठथ |
| उत्तमपुरुषः | पठामि | पठावः | पठामः |
2. ‘पठ्’ धातुः — लृट्-लकारः
लृट्-लकार सामान्य भविष्यत्काल के लिए प्रयोग होता है।
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमपुरुषः | पठिष्यति | पठिष्यतः | पठिष्यन्ति |
| मध्यमपुरुषः | पठिष्यसि | पठिष्यथः | पठिष्यथ |
| उत्तमपुरुषः | पठिष्यामि | पठिष्यावः | पठिष्यामः |
3. ‘पठ्’ धातुः — लङ्-लकारः
लङ्-लकार सामान्य भूतकाल के लिए प्रयोग होता है।
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमपुरुषः | अपठत् | अपठताम् | अपठन् |
| मध्यमपुरुषः | अपठः | अपठतम् | अपठत |
| उत्तमपुरुषः | अपठम् | अपठाव | अपठाम |
4. ‘पठ्’ धातुः — लोट्-लकारः
लोट्-लकार आदेश, आज्ञा, प्रार्थना या आग्रह के अर्थ में प्रयोग होता है।
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमपुरुषः | पठतु / पठतात् | पठताम् | पठन्तु |
| मध्यमपुरुषः | पठ / पठतात् | पठतम् | पठत |
| उत्तमपुरुषः | पठानि | पठाव | पठाम |
5. ‘पठ्’ धातुः — विधिलिङ्-लकारः
विधिलिङ्-लकार संभावना, इच्छा, उपदेश या “चाहिए” अर्थ में आता है।
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमपुरुषः | पठेत् | पठेताम् | पठेयुः |
| मध्यमपुरुषः | पठेः | पठेतम् | पठेत |
| उत्तमपुरुषः | पठेयम् | पठेव | पठेम |
आत्मनेपदीनां धातूनां पञ्चसु लकारेषु प्रयोगाः
इस भाग में आत्मनेपदिधातवः के रूप दिए गए हैं। आत्मनेपदी धातुओं में वर्धते, लभते जैसे रूप मिलते हैं।
1. ‘वर्ध्’ धातुः — लट्-लकारः
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमपुरुषः | वर्धते | वर्धेते | वर्धन्ते |
| मध्यमपुरुषः | वर्धसे | वर्धेथे | वर्धध्वे |
| उत्तमपुरुषः | वर्धे | वर्धावहे | वर्धामहे |
2. ‘लभ्’ धातुः — लट्-लकारः
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमपुरुषः | लभते | लभेते | लभन्ते |
| मध्यमपुरुषः | लभसे | लभेथे | लभध्वे |
| उत्तमपुरुषः | लभे | लभावहे | लभामहे |
‘वर्ध्’ धातोः रूपाणां वाक्येषु प्रयोगः
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमपुरुषः | वृक्षः वर्धते। | वृक्षौ वर्धेते। | वृक्षाः वर्धन्ते। |
| मध्यमपुरुषः | त्वं वर्धसे। | युवां वर्धेथे। | यूयं वर्धध्वे। |
| उत्तमपुरुषः | अहं वर्धे। | आवां वर्धावहे। | वयं वर्धामहे। |
(क) वर्धते के समान रूप चलने वाली धातुएँ कौन-सी हैं?
उत्तर: भाषते, वर्तते, कम्पते, स्पर्धते, लभते, सेवते, स्पन्दते, यतते, रोचते, एधते, मोदते, वन्दते, रमते, शोभते, सहते, ईक्षते, शिक्षते इत्यादयः।
3. ‘वर्ध्’ धातुः — लृट्-लकारः
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमपुरुषः | वर्धिष्यते | वर्धिष्येते | वर्धिष्यन्ते |
| मध्यमपुरुषः | वर्धिष्यसे | वर्धिष्येथे | वर्धिष्यध्वे |
| उत्तमपुरुषः | वर्धिष्ये | वर्धिष्यावहे | वर्धिष्यामहे |
4. ‘लभ्’ धातुः — लृट्-लकारः
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमपुरुषः | लप्स्यते | लप्स्येते | लप्स्यन्ते |
| मध्यमपुरुषः | लप्स्यसे | लप्स्येथे | लप्स्यध्वे |
| उत्तमपुरुषः | लप्स्ये | लप्स्यावहे | लप्स्यामहे |
(क) आत्मनेपदीनां लृट्-लकारे अन्य उदाहरणानि लिखत।
उत्तर: भाषिष्यते, वर्तिष्यते, कम्पिष्यते, स्पर्धिष्यते, सेविष्यते, स्पन्दिष्यते, यतिष्यते, रोचिष्यते, एधिष्यते, मोदिष्यते, वन्दिष्यते, शोभिष्यते, सहिष्यते, ईक्षिष्यते, रंस्यते, शिक्षिष्यते इत्यादयः।
5. ‘वर्ध्’ धातुः — लङ्-लकारः
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमपुरुषः | अवर्धत | अवर्धेताम् | अवर्धन्त |
| मध्यमपुरुषः | अवर्धथाः | अवर्धेथाम् | अवर्धध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | अवर्धे | अवर्धावहि | अवर्धामहि |
6. ‘लभ्’ धातुः — लङ्-लकारः
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमपुरुषः | अलभत | अलभेताम् | अलभन्त |
| मध्यमपुरुषः | अलभथाः | अलभेथाम् | अलभध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | अलभे | अलभावहि | अलभामहि |
(क) आत्मनेपदीनां लङ्-लकारे अन्य उदाहरणानि लिखत।
उत्तर: अभाषत, अवर्तत, अकम्पत, अस्पर्धत, असेवत, अस्पन्दत, अयतत, अरोचत, ऐधत, अमोदत, अवन्दत, अरमत, अशोभत, असहत, ऐक्षत, अशिक्षत इत्यादयः।
7. ‘वर्ध्’ धातुः — लोट्-लकारः
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमपुरुषः | वर्धताम् | वर्धेताम् | वर्धन्ताम् |
| मध्यमपुरुषः | वर्धस्व | वर्धेथाम् | वर्धध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | वर्धै | वर्धावहै | वर्धामहै |
8. ‘लभ्’ धातुः — लोट्-लकारः
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमपुरुषः | लभताम् | लभेताम् | लभन्ताम् |
| मध्यमपुरुषः | लभस्व | लभेथाम् | लभध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | लभै | लभावहै | लभामहै |
(क) आत्मनेपदीनां लोट्-लकारे अन्य उदाहरणानि लिखत।
उत्तर: भाषताम्, वर्तताम्, कम्पताम्, स्पर्धताम्, सेवताम्, स्पन्दताम्, यतताम्, रोचताम्, एधताम्, मोदताम्, वन्दताम्, रमताम्, शोभताम्, सहताम्, ईक्षताम्, शिक्षताम् इत्यादयः।
9. ‘वर्ध्’ धातुः — विधिलिङ्-लकारः
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमपुरुषः | वर्धेत | वर्धेयाताम् | वर्धेरन् |
| मध्यमपुरुषः | वर्धेथाः | वर्धेयाथाम् | वर्धेध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | वर्धेय | वर्धेवहि | वर्धेमहि |
10. ‘लभ्’ धातुः — विधिलिङ्-लकारः
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमपुरुषः | लभेत | लभेयाताम् | लभेरन् |
| मध्यमपुरुषः | लभेथाः | लभेयाथाम् | लभेध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | लभेय | लभेवहि | लभेमहि |
(क) आत्मनेपदीनां विधिलिङ्-लकारे अन्य उदाहरणानि लिखत।
उत्तर: भाषेत, वर्तेत, कम्पेत, स्पर्धेत, सेवेत, स्पन्देत, यतेत, रोचेत, एधेत, मोदेत, वन्देत, रमेत, शोभेत, सहेत, ईक्षेत, शिक्षेत इत्यादयः।
विशिष्टधातवः — आत्मनेपदिनः
इस section में शीङ् धातु रूप और भुज् धातु रूप जैसे विशेष आत्मनेपदी रूप दिए गए हैं।
1. ‘शीङ्’ धातुः — लट्-लकारः
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमपुरुषः | शेते | शयाते | शेरते |
| मध्यमपुरुषः | शेषे | शयाथे | शेध्वे |
| उत्तमपुरुषः | शये | शेवहे | शेमहे |
2. ‘शीङ्’ धातुः — लृट्-लकारः
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमपुरुषः | शयिष्यते | शयिष्येते | शयिष्यन्ते |
| मध्यमपुरुषः | शयिष्यसे | शयिष्येथे | शयिष्यध्वे |
| उत्तमपुरुषः | शयिष्ये | शयिष्यावहे | शयिष्यामहे |
3. ‘शीङ्’ धातुः — लङ्-लकारः
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमपुरुषः | अशेत | अशयाताम् | अशेरत |
| मध्यमपुरुषः | अशेथाः | अशयाथाम् | अशेध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | अशयि | अशेवहि | अशेमहि |
4. ‘शीङ्’ धातुः — लोट्-लकारः
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमपुरुषः | शेताम् | शयाताम् | शेरताम् |
| मध्यमपुरुषः | शेष्व | शयाथाम् | शेध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | शयै | शयावहै | शयामहै |
5. ‘शीङ्’ धातुः — विधिलिङ्-लकारः
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमपुरुषः | शयीत | शयीयाताम् | शयीरन् |
| मध्यमपुरुषः | शयीथाः | शयीयाथाम् | शयीध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | शयीय | शयीवहि | शयीमहि |
6. ‘भुज्’ धातुः — लट्-लकारः
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमपुरुषः | भुङ्क्ते | भुञ्जाते | भुञ्जते |
| मध्यमपुरुषः | भुङ्क्षे | भुञ्जाथे | भुङ्ग्ध्वे |
| उत्तमपुरुषः | भुञ्जे | भुञ्ज्वहे | भुञ्ज्महे |
7. ‘भुज्’ धातुः — लृट्-लकारः
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमपुरुषः | भोक्ष्यते | भोक्ष्येते | भोक्ष्यन्ते |
| मध्यमपुरुषः | भोक्ष्यसे | भोक्ष्येथे | भोक्ष्यध्वे |
| उत्तमपुरुषः | भोक्ष्ये | भोक्ष्यावहे | भोक्ष्यामहे |
8. ‘भुज्’ धातुः — लङ्-लकारः
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमपुरुषः | अभुङ्क्त | अभुञ्जाताम् | अभुञ्जत |
| मध्यमपुरुषः | अभुङ्क्थाः | अभुञ्जाथाम् | अभुङ्ग्ध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | अभुञ्जि | अभुञ्ज्वहि | अभुञ्ज्महि |
9. ‘भुज्’ धातुः — लोट्-लकारः
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमपुरुषः | भुङ्क्ताम् | भुञ्जाताम् | भुञ्जताम् |
| मध्यमपुरुषः | भुङ्क्ष्व | भुञ्जाथाम् | भुङ्ग्ध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | भुञ्जै | भुञ्जावहै | भुञ्जामहै |
10. ‘भुज्’ धातुः — विधिलिङ्-लकारः
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमपुरुषः | भुञ्जीत | भुञ्जीयाताम् | भुञ्जीरन् |
| मध्यमपुरुषः | भुञ्जीथाः | भुञ्जीयाथाम् | भुञ्जीध्वम् |
| उत्तमपुरुषः | भुञ्जीय | भुञ्जीवहि | भुञ्जीमहि |
लकार-अर्थ-सारिणी
| लकारः | सामान्य अर्थ | उदाहरणम् |
| लट् | वर्तमानकाल | पठति — पढ़ता है |
| लृट् | भविष्यत्काल | पठिष्यति — पढ़ेगा |
| लङ् | भूतकाल | अपठत् — पढ़ा |
| लोट् | आदेश / आज्ञा | पठतु — पढ़े |
| विधिलिङ् | चाहिए / संभावना / इच्छा | पठेत् — पढ़ना चाहिए |
धातुरूप-अभ्यास के लिए उपयोगी Notes
(क) परस्मैपदी endings कैसे पहचानें?
उत्तर: परस्मैपदी लट्-लकार में सामान्य endings हैं—
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमपुरुषः | ति | तः | अन्ति |
| मध्यमपुरुषः | सि | थः | थ |
| उत्तमपुरुषः | आमि | आवः | आमः |
(ख) आत्मनेपदी endings कैसे पहचानें?
उत्तर: आत्मनेपदी लट्-लकार में सामान्य endings हैं—
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमपुरुषः | ते | एते | अन्ते |
| मध्यमपुरुषः | से | एथे | ध्वे |
| उत्तमपुरुषः | ए | आवहे | आमहे |
(ग) लङ्-लकार में “अ” क्यों आता है?
उत्तर: लङ्-लकार में भूतकाल बताने के लिए धातु के पहले सामान्यतः अ आगम आता है।
उदाहरण:
| लट्-लकारः | लङ्-लकारः |
| पठति | अपठत् |
| वर्धते | अवर्धत |
| लभते | अलभत |
| शेते | अशेत |
| भुङ्क्ते | अभुङ्क्त |
Chapter-Wise NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada
| Chapter No. | Chapter Name |
| Chapter 1 | सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम् |
| Chapter 2 | सुखस्य मूलं धर्मः धर्मस्य मूलम् अर्थः |
| Chapter 3 | आत्मवत्सर्वभूतेषु यः पश्यति सः पण्डितः |
| Chapter 4 | न खलु वयस्तेजसो हेतुः |
| Chapter 5 | एषा सा कृतकबुद्धिः मानवबुद्धेः सहकरी |
| Chapter 6 | मनःपूतं समाचरेत् |
| Chapter 7 | उपायं चिन्तयेत् प्राज्ञस्तथापायं च चिन्तयेत् |
| Chapter 8 | अन्नाद् आनन्दं प्रति |
| Chapter 9 | कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः |
| Chapter 10 | णमो अरिहंताणम् |
| Chapter 11 | वर्णोच्चारण-शिक्षा २ |
| Chapter 12 | अन्वयः |
| Chapter 13 | समासः |
| Chapter 14 | वाच्यम् |
| Chapter 15 | शब्दरूपाणि |
| Chapter 16 | धातुरूपाणि |
Topics Covered in NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 16
NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 16 cover verb forms, लकार usage and परस्मैपदी-आत्मनेपदी patterns through “धातुरूपाणि”.
- धातु से क्रियापद बनने की मूल प्रक्रिया
- पुरुष, वचन और लकार के अनुसार धातुरूपों का परिवर्तन
- परस्मैपदिधातवः और आत्मनेपदिधातवः का अंतर
- पठ् धातु के पाँच लकारों में रूप
- णिच्-प्रत्ययान्त प्रयोग और प्रेरणार्थक क्रियाएँ
- पाठयति, लेखयति, खादयति, दर्शयति, गमयति, भोजयति जैसे causative forms
- लट्-लकार में वर्तमानकालिक रूप
- लृट्-लकार में भविष्यत्कालिक रूप
- लङ्-लकार में भूतकालिक रूप
- लोट्-लकार में आज्ञा और आग्रह के रूप
- विधिलिङ्-लकार में संभावना, इच्छा और “चाहिए” अर्थ
- वर्ध् और लभ् आत्मनेपदी धातुओं के रूप
- आत्मनेपदी धातुओं के वाक्य-प्रयोग
- शीङ् और भुज् जैसे विशिष्ट आत्मनेपदी धातु-रूप
- लकार-अर्थ और रूप-पहचान का अभ्यास
Important Concepts in NCERT Solutions for Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 16
| Concept | Explanation | Exam Use |
| धातुः | क्रिया का मूल रूप | धातुरूप-निर्माण |
| धातुरूपाणि | पुरुष-वचन-लकार अनुसार क्रियारूप | Grammar table |
| परस्मैपदिधातुः | पठति जैसे रूपों वाली धातु | रूप-पहचान |
| आत्मनेपदिधातुः | वर्धते, लभते जैसे रूपों वाली धातु | रूप-पहचान |
| णिच् प्रत्ययः | प्रेरणार्थे प्रयोग | पाठयति |
| लट् लकारः | वर्तमानकाल | पठति |
| लृट् लकारः | भविष्यत्काल | पठिष्यति |
| लङ् लकारः | भूतकाल | अपठत् |
| लोट् लकारः | आज्ञा / आदेश | पठतु |
| विधिलिङ् लकारः | चाहिए / संभावना | पठेत् |
| शीङ् धातुः | विशेष आत्मनेपदी धातु | शेते |
| भुज् धातुः | विशेष आत्मनेपदी धातु | भुङ्क्ते |
FAQs (Frequently Asked Questions)
धातुरूप याद करने के लिए पहले धातु का पद पहचानें—परस्मैपदी या आत्मनेपदी। फिर एक ही लकार में तीनों पुरुष और तीनों वचन को table form में याद करें। जैसे पठ् धातु में पहले पठति, पठतः, पठन्ति, फिर पठसि, पठथः, पठथ, और अंत में पठामि, पठावः, पठामः याद करें।
लट् वर्तमानकाल बताता है, जैसे पठति। लृट् भविष्यत्काल बताता है, जैसे पठिष्यति। लङ् भूतकाल बताता है, जैसे अपठत्। इसलिए धातुरूप पढ़ते समय पहले लकार का अर्थ समझना जरूरी है।
परस्मैपदी धातुओं में लट्-लकार में ति, तः, अन्ति जैसे endings आते हैं, जैसे पठति। आत्मनेपदी धातुओं में ते, एते, अन्ते जैसे endings आते हैं, जैसे वर्धते और लभते। यही पहचान exam में सबसे काम आती है।
पठति का अर्थ है “वह पढ़ता है”, जबकि पाठयति का अर्थ है “वह पढ़ाता है”। पठ् धातु में णिच् प्रत्यय लगने पर प्रेरणार्थक रूप बनता है—पठ् + णिच् = पाठयति।
वर्धते वर्ध् धातु का लट्-लकार, प्रथमपुरुष, एकवचन, आत्मनेपदी रूप है। इसका अर्थ है “वह बढ़ता है” या “विकसित होता है”।